गढ़वा में झारखंड राज्य पंचायत सचिव संघ की जिला शाखा ने अपनी विभिन्न सेवा संबंधी समस्याओं और मांगों के समाधान के लिए उपायुक्त को एक ज्ञापन सौंपा है। संघ के प्रतिनिधियों ने पंचायत सचिवों की लंबित समस्याओं से प्रशासन को अवगत कराते हुए उनके शीघ्र निराकरण की मांग की है। सौंपे गए ज्ञापन में, संघ ने विशेष रूप से उन नव नियुक्त पंचायत सचिवों की सेवा संपुष्टि (कन्फर्मेशन) की मांग की है जो लंबे समय से कार्यरत हैं। संघ का कहना है कि कई पंचायत सचिव वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उनकी सेवा संपुष्टि न होने के कारण उनमें असंतोष की स्थिति बनी हुई है। इसके अतिरिक्त, पंचायत सचिवों को नियमित रूप से प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है, ताकि वे नई योजनाओं और विभागीय कार्यों की बढ़ती जिम्मेदारियों के लिए अद्यतन जानकारी और तकनीकी दक्षता प्राप्त कर अपने दायित्वों का बेहतर निर्वहन कर सकें। संघ ने यह भी उल्लेख किया कि जिले के कई प्रखंडों में पंचायत सचिवों की संख्या अपर्याप्त है, जिसके परिणामस्वरूप एक-एक पंचायत सचिव को कई पंचायतों का अतिरिक्त प्रभार संभालना पड़ रहा है, जिससे कार्यों के निष्पादन में कठिनाइयाँ आती हैं। संघ ने प्रशासन से रिक्त पदों पर जनसेवकों की नियुक्ति कर पंचायत सचिवों का कार्यभार कम करने की अपील की है। संघ के पदाधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि पंचायत सचिव ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनका मानना है कि यदि इन समस्याओं का समाधान किया जाता है, तो पंचायत स्तर पर प्रशासनिक कार्यों का संचालन अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा और आम जनता को भी बेहतर सेवाएं मिलेंगी। संघ का कहना है कि उनकी मांगें न केवल कर्मचारियों के हित में हैं, बल्कि पंचायत व्यवस्था को मजबूत बनाने और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने के लिए भी आवश्यक हैं। पंचायत सचिव संघ ने उपायुक्त से इन मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई करने का आग्रह किया है। ज्ञापन सौंपने के दौरान संघ के कई पदाधिकारी और पंचायत सचिव उपस्थित रहे, जिन्होंने उम्मीद जताई कि जिला प्रशासन उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगा और आवश्यक कदम उठाएगा।
गढ़वा में झारखंड राज्य पंचायत सचिव संघ की जिला शाखा ने अपनी विभिन्न सेवा संबंधी समस्याओं और मांगों के समाधान के लिए उपायुक्त को एक ज्ञापन सौंपा है। संघ के प्रतिनिधियों ने पंचायत सचिवों की लंबित समस्याओं से प्रशासन को अवगत कराते हुए उनके शीघ्र निराकरण की मांग की है। सौंपे गए ज्ञापन में, संघ ने विशेष रूप से उन नव नियुक्त पंचायत सचिवों की सेवा संपुष्टि (कन्फर्मेशन) की मांग की है जो लंबे समय से कार्यरत हैं। संघ का कहना है कि कई पंचायत सचिव वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उनकी सेवा संपुष्टि न होने के कारण उनमें असंतोष की स्थिति बनी हुई है। इसके अतिरिक्त, पंचायत सचिवों को नियमित रूप से प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है, ताकि वे नई योजनाओं और विभागीय कार्यों की बढ़ती जिम्मेदारियों के लिए अद्यतन जानकारी और तकनीकी दक्षता प्राप्त कर अपने दायित्वों का बेहतर निर्वहन कर सकें। संघ ने यह भी उल्लेख किया कि जिले के कई प्रखंडों में पंचायत सचिवों की संख्या अपर्याप्त है, जिसके परिणामस्वरूप एक-एक पंचायत सचिव को कई पंचायतों का अतिरिक्त प्रभार संभालना पड़ रहा है, जिससे कार्यों के निष्पादन में कठिनाइयाँ आती हैं। संघ ने प्रशासन से रिक्त पदों पर जनसेवकों की नियुक्ति कर पंचायत सचिवों का कार्यभार कम करने की अपील की है। संघ के पदाधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि पंचायत सचिव ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनका मानना है कि यदि इन समस्याओं का समाधान किया जाता है, तो पंचायत स्तर पर प्रशासनिक कार्यों का संचालन अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा और आम जनता को भी बेहतर सेवाएं मिलेंगी। संघ का कहना है कि उनकी मांगें न केवल कर्मचारियों के हित में हैं, बल्कि पंचायत व्यवस्था को मजबूत बनाने और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने के लिए भी आवश्यक हैं। पंचायत सचिव संघ ने उपायुक्त से इन मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई करने का आग्रह किया है। ज्ञापन सौंपने के दौरान संघ के कई पदाधिकारी और पंचायत सचिव उपस्थित रहे, जिन्होंने उम्मीद जताई कि जिला प्रशासन उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगा और आवश्यक कदम उठाएगा।
- झारखंड के गढ़वा जिले के लिए यह गौरव और खुशी की बात है कि स्थानीय फिल्म "लॉकडाउन के गोद में" को प्रतिष्ठित चित्रपट झारखंड फिल्म फेस्टिवल में स्क्रीनिंग के लिए चुना गया है। इस उपलब्धि से जिले के फिल्म प्रेमियों, कलाकारों और युवाओं में उत्साह का माहौल है। यह फिल्म लॉकडाउन काल की संवेदनशील परिस्थितियों और आम लोगों के संघर्ष की कहानी को बेहद मार्मिक तरीके से प्रस्तुत करती है। इसकी सबसे खास बात यह है कि इसे महज 20 वर्षीय युवा फिल्मकार विजय हिंद ने अपने सीमित संसाधनों के बावजूद मोबाइल फोन से शूट किया। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी (डीओपी) में नीरज कुमार, रवि रंजन और रमेश बाबू का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जबकि अजय बाबू समेत पूरी टीम ने निर्माण कार्य में अहम भूमिका निभाई। इस फिल्म का निर्माण गढ़वा के वरिष्ठ फिल्म निर्माता दयाशंकर गुप्ता द्वारा किया गया है। निर्माता दयाशंकर गुप्ता ने इस चयन पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि पूरे झारखंड से आई सैकड़ों फिल्मों के बीच गढ़वा की फिल्म का चुना जाना जिले के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने जोर देकर कहा कि गढ़वा में फिल्म निर्माण के लिए आधुनिक संसाधनों और सुविधाओं की कमी के बावजूद, यहां के युवा कलाकार अपनी प्रतिभा, मेहनत और जुनून से लगातार नई पहचान बना रहे हैं, जिसका उदाहरण विजय हिंद जैसे युवा फिल्मकार हैं जो दर्शाते हैं कि लगन और समर्पण से सीमित संसाधन भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनते। "लॉकडाउन के गोद में" ने अपने प्रदर्शन के दौरान दर्शकों के बीच काफी लोकप्रियता हासिल की थी और लॉकडाउन के दौरान आम लोगों की पीड़ा, संघर्ष व भावनात्मक पहलुओं को दर्शाने वाली इस फिल्म को एक प्रमुख न्यूज चैनल पर लगभग 20 लाख दर्शकों ने देखा था, जिसकी कहानी और प्रस्तुति को खूब सराहा गया। जानकारी के अनुसार, यह फिल्म 26 जून से 28 जून तक रांची स्थित सरला बिरला यूनिवर्सिटी में आयोजित चित्रपट झारखंड फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित की जाएगी। इस आयोजन में बॉलीवुड के कई प्रसिद्ध कलाकार, लेखक, निर्देशक और निर्माता शामिल होंगे, और ऐसे मंच पर गढ़वा की फिल्म का प्रदर्शन जिले के लिए सम्मान की बात मानी जा रही है। फिल्म के चयन की खबर मिलते ही गढ़वा जिले में खुशी का माहौल है, जहां कला एवं संस्कृति से जुड़े लोगों ने इसे स्थानीय प्रतिभाओं की बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि जिले के अन्य युवा कलाकारों को भी प्रेरणा देगी और क्षेत्रीय सिनेमा को नई पहचान प्राप्त होगी। वहीं, युवा फिल्मकार विजय हिंद की हालिया फिल्म "हॉस्पिटल" भी दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है, जो दर्द, संघर्ष और रोमांच से भरपूर है। इसमें विजय हिंद मुख्य भूमिका में हैं, जबकि अभिनेत्री रौनक तिवारी ने अपने प्रभावशाली अभिनय से कहानी को मजबूत बनाया है। निर्माता दयाशंकर गुप्ता ने "हॉस्पिटल" के अंतिम क्लाइमैक्स की विशेष प्रशंसा की है, जिसे वे दर्शकों के मन पर गहरी छाप छोड़ने वाला मानते हैं। विजय हिंद ने दर्शकों के प्यार, स्नेह और आशीर्वाद को बेहतर फिल्में बनाने की प्रेरणा बताया है, यह कहते हुए कि उनका सपना है कि गढ़वा की फिल्मों को राज्य ही नहीं, बल्कि पूरे देश में पहचान मिले। गढ़वा की इस उपलब्धि को क्षेत्रीय सिनेमा के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। फिल्म प्रेमियों का मानना है कि स्थानीय कलाकारों की प्रतिभा और समर्पण आने वाले समय में गढ़वा को झारखंड के महत्वपूर्ण फिल्म केंद्रों में शामिल कर सकता है, और "लॉकडाउन के गोद में" का चित्रपट झारखंड फिल्म फेस्टिवल में चयन जिले की सांस्कृतिक पहचान और स्थानीय प्रतिभाओं के उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक बन गया है।1
- खेलारी के उपाधीक्षक आर. एन. चौधरी को रांची ग्रामीण पुलिस के अधिकारियों द्वारा सम्मानित किया गया है। पुलिस प्रशासन ने उन्हें उग्रवाद विरोधी अभियान में उनके उल्लेखनीय योगदान और उत्कृष्ट कार्य निष्पादन के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान किया।1
- मंगलवार को चिनिया थाना क्षेत्र के सुदूरवर्ती गांव परशुखाड़ में थाना प्रभारी बीकू कुमार रजक के नेतृत्व में पुलिस द्वारा एक व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया गया। इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीणों को विभिन्न सामाजिक बुराइयों और अपराधों के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को सड़क सुरक्षा नियमों, नशा मुक्ति, डायल-112 की उपयोगिता, डायन-भूत जैसी अंधविश्वासी कुरीतियों से बचाव, महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों की रोकथाम तथा बाल विवाह निषेध कानून की विस्तार से जानकारी दी गई। थाना प्रभारी बीकू कुमार रजक ने ग्रामीणों से अपील करते हुए कहा कि समाज में फैली कुरीतियों और अपराधों के खिलाफ जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। उन्होंने लोगों से किसी भी आपात स्थिति या अपराध की सूचना तत्काल डायल-112 पर देने का आग्रह किया। साथ ही, नशे से दूर रहने और बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों को जड़ से समाप्त करने में प्रशासन का सहयोग करने का आह्वान किया। इस जन-जागरूकता अभियान में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला-पुरुष और थाना के सशस्त्र बल के जवान उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने पुलिस की इस पहल की सराहना करते हुए मांग की कि ऐसे कार्यक्रमों को गांव-गांव तक पहुंचाया जाए।1
- सोनभद्र जनपद के विकास खंड दुद्धी अंतर्गत ग्राम पंचायत सलेयाडीह से जनहित से जुड़ी एक सकारात्मक खबर सामने आई है। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि अभिषेक सिंह उर्फ किंशू सिंह की पहल और प्रयासों से ग्राम पंचायत सलेयाडीह को हाईमास्ट लाइट की सौगात मिली है, जिससे स्थानीय लोगों को जल्द ही बेहतर रोशनी और सुरक्षा की सुविधा मिलने वाली है। विधान मंडल क्षेत्र विकास निधि योजना के तहत ग्राम सलेयाडीह के कोन मोड़ मार्ग से सटे विंढमगंज उप स्वास्थ्य केंद्र के बाउंड्री परिसर के अंदर 12.50 मीटर ऊंची यह हाईमास्ट लाइट स्थापित की जा रही है, जो पूरे क्षेत्र में बेहतर रोशनी सुनिश्चित करेगी और आमजन को काफी सुविधा प्रदान करेगी। बताया गया है कि इस महत्वपूर्ण विकास कार्य को धरातल पर लाने में ग्राम प्रधान प्रतिनिधि अभिषेक सिंह उर्फ किंशू सिंह की सक्रिय भूमिका रही है, और उनके जनहित के प्रति समर्पण के कारण ही यह सुविधा ग्राम पंचायत को प्राप्त हुई है। इस योजना को मा. सदस्य विधान परिषद मिर्जापुर-सोनभद्र श्यामनारायण सिंह उर्फ विनीत सिंह के सहयोग एवं प्रयासों से स्वीकृति मिली है, जबकि जिला पंचायत सोनभद्र कार्यदायी संस्था के रूप में इस कार्य का संचालन कर रही है। स्थानीय ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा है कि हाईमास्ट लाइट लगने से रात के समय स्वास्थ्य केंद्र आने वाले मरीजों, राहगीरों, विद्यार्थियों और आसपास के निवासियों को काफी लाभ मिलेगा। यह कदम क्षेत्र में अंधेरे की समस्या को दूर करेगा और सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत बनाएगा। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान प्रतिनिधि अभिषेक सिंह उर्फ किंशू सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया और उम्मीद जताई कि यह कार्य गांव के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्हें भरोसा है कि भविष्य में भी इसी प्रकार की विकास योजनाएं गांव तक पहुंचती रहेंगी और सलेयाडीह विकास की नई ऊंचाइयों को छू सकेगा। फिलहाल, सलेयाडीह में विकास की यह नई रोशनी ग्रामीणों के चेहरों पर खुशी और उम्मीद की चमक लेकर आई है।3
- उत्तर प्रदेश के दुद्धी में हुए एक सड़क हादसे में एक संविदा कर्मी की मौत हो गई। इस घटना के बाद मृतक के परिजनों ने निजी अस्पताल और कुछ दलालों पर संविदा कर्मी की हत्या का गंभीर आरोप लगाया है। परिजन इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं।1
- उपायुक्त श्री संदीप कुमार ने जिले के निवासियों की जन समस्याओं को सुना। इन शिकायतों और मुद्दों के समाधान के लिए, उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं।1
- गढ़वा में झारखंड राज्य पंचायत सचिव संघ की जिला शाखा ने अपनी विभिन्न सेवा संबंधी समस्याओं और मांगों के समाधान के लिए उपायुक्त को एक ज्ञापन सौंपा है। संघ के प्रतिनिधियों ने पंचायत सचिवों की लंबित समस्याओं से प्रशासन को अवगत कराते हुए उनके शीघ्र निराकरण की मांग की है। सौंपे गए ज्ञापन में, संघ ने विशेष रूप से उन नव नियुक्त पंचायत सचिवों की सेवा संपुष्टि (कन्फर्मेशन) की मांग की है जो लंबे समय से कार्यरत हैं। संघ का कहना है कि कई पंचायत सचिव वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उनकी सेवा संपुष्टि न होने के कारण उनमें असंतोष की स्थिति बनी हुई है। इसके अतिरिक्त, पंचायत सचिवों को नियमित रूप से प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है, ताकि वे नई योजनाओं और विभागीय कार्यों की बढ़ती जिम्मेदारियों के लिए अद्यतन जानकारी और तकनीकी दक्षता प्राप्त कर अपने दायित्वों का बेहतर निर्वहन कर सकें। संघ ने यह भी उल्लेख किया कि जिले के कई प्रखंडों में पंचायत सचिवों की संख्या अपर्याप्त है, जिसके परिणामस्वरूप एक-एक पंचायत सचिव को कई पंचायतों का अतिरिक्त प्रभार संभालना पड़ रहा है, जिससे कार्यों के निष्पादन में कठिनाइयाँ आती हैं। संघ ने प्रशासन से रिक्त पदों पर जनसेवकों की नियुक्ति कर पंचायत सचिवों का कार्यभार कम करने की अपील की है। संघ के पदाधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि पंचायत सचिव ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनका मानना है कि यदि इन समस्याओं का समाधान किया जाता है, तो पंचायत स्तर पर प्रशासनिक कार्यों का संचालन अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा और आम जनता को भी बेहतर सेवाएं मिलेंगी। संघ का कहना है कि उनकी मांगें न केवल कर्मचारियों के हित में हैं, बल्कि पंचायत व्यवस्था को मजबूत बनाने और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने के लिए भी आवश्यक हैं। पंचायत सचिव संघ ने उपायुक्त से इन मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई करने का आग्रह किया है। ज्ञापन सौंपने के दौरान संघ के कई पदाधिकारी और पंचायत सचिव उपस्थित रहे, जिन्होंने उम्मीद जताई कि जिला प्रशासन उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगा और आवश्यक कदम उठाएगा।1
- राजस्थान की राजधानी जयपुर के शहीद स्मारक पर युवाओं से जुड़े मुद्दों जैसे NEET पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और बेरोजगारी को लेकर आयोजित एक प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को एक अज्ञात युवक ने कथित तौर पर थप्पड़ मार दिया। इस घटना के बाद प्रदर्शन स्थल पर भारी हंगामा मच गया और कुछ समय के लिए स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अभिजीत दीपके के करीब पहुंचकर युवक द्वारा कथित तौर पर थप्पड़ मारे जाने के तुरंत बाद, वहां मौजूद प्रदर्शनकारी और समर्थक आक्रोशित हो उठे। उन्होंने कथित तौर पर थप्पड़ मारने वाले युवक को पकड़ लिया और उसकी पिटाई कर दी। इस पूरे घटनाक्रम के चलते शहीद स्मारक परिसर में अफरा-तफरी और तनाव का माहौल बना रहा। मौके पर मौजूद लोगों ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। वहीं, घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस भी सक्रिय हुई और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल, थप्पड़ मारने वाले युवक की पहचान और घटना के पीछे के वास्तविक कारणों के संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। इस घटना को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है, और पुलिस पूरे मामले की पड़ताल कर रही है।1