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Today liveAarti Darshan जय मां भद्रकाली किले वाली माता मंदिर जम्मूकश्मीर प्रवेश द्वार लखनपुर जयमातादी
Shivinder singh Bhadwal
Today liveAarti Darshan जय मां भद्रकाली किले वाली माता मंदिर जम्मूकश्मीर प्रवेश द्वार लखनपुर जयमातादी
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- दुर्गम पांगी घाटी में प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग और स्थानीय आजीविका को मजबूत करने के उद्देश्य से पशुपालन विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयास अब रंग लाने लगे हैं। वर्षों से चल रही मत्स्य विकास पहल के सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। पांगी जैसे दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्र में एक समय ऐसा था जब यहां मछली उत्पादन की कोई परंपरा या व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में पशुपालन विभाग ने एक नई पहल करते हुए क्षेत्र में ट्राउट मछली उत्पादन को बढ़ावा देने का निर्णय लिया। इसके तहत कई वर्षों से सैचू नाला, महालू नाला, धरवास नाला और पूर्ती नाला जैसे ठंडे जल स्रोतों में ट्राउट मछली के बीज छोड़े जा रहे हैं, ताकि यहां प्राकृतिक रूप से मछलियों की संख्या बढ़ सके। अब इन प्रयासों का सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। विभाग के अनुसार महालू नाला के हुड़ान और सैचू क्षेत्र में ट्राउट मछलियों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ने लगी है। इससे यह उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में पांगी घाटी मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में भी नई पहचान बना सकती है। पशुपालन विभाग के सहायक निदेशक सुरेंद्र ठाकुर ने बताया कि विभाग कई वर्षों से लगातार प्रयास कर रहा है और अब इसके अच्छे परिणाम सामने आने लगे हैं। उन्होंने कहा कि पांगी के ठंडे और स्वच्छ जल स्रोत ट्राउट मछली के लिए अनुकूल हैं, इसलिए भविष्य में यहां मत्स्य उत्पादन की व्यापक संभावनाएं हैं। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि पिछले दो वर्षों से इस परियोजना के लिए सरकार की ओर से पर्याप्त बजट का प्रावधान नहीं हो पा रहा है, जिससे कार्यों के विस्तार में कुछ कठिनाइयां आ रही हैं। इसके बावजूद विभाग सीमित संसाधनों में प्रयास जारी रखे हुए है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि कुछ स्थानीय लोग नालों में मछलियों को पकड़ना या मारना शुरू कर देते हैं, जिससे इनकी संख्या बढ़ाने के प्रयासों को नुकसान पहुंचता है। इस समस्या के समाधान के लिए पंचायत प्रतिनिधियों के साथ भी चर्चा की गई थी, लेकिन इस दिशा में अभी तक कोई ठोस अमल नहीं हो पाया है। पशुपालन विभाग का मानना है कि यदि स्थानीय लोगों का सहयोग मिले और परियोजना को पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, तो आने वाले समय में पांगी घाटी में ट्राउट मछली उत्पादन को बड़े स्तर पर विकसित किया जा सकता है। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी पैदा होंगे।1
- Post by Surender Thakur1
- अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा के समीप ड्यूटी के दौरान शहीद हुए जिला ऊना के वीर सपूत नायब सूबेदार कुलवंत सिंह बुधवार को पूरे सैन्य सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन किए गए। उनके पैतृक गांव घालुवाल में आयोजित अंतिम संस्कार के दौरान पूरे क्षेत्र में गमगीन माहौल देखने को मिला। बता दें कि बीती 7 मार्च को भारतीय सेना का एक वाहन अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले में भारत-चीन सीमा के पास गेलमो से टैक्सिंग की ओर जाते समय गहरी खाई में गिर गया। यह वाहन ऑपरेशन स्नो लेपर्ड के तहत तैनात था। इस हादसे में 908 फील्ड रेजिमेंट 56 आर्टिलरी ब्रिगेड में तैनात नायब सूबेदार कुलवंत सिंह शहीद हो गए। हादसे में 18 सिख रेजिमेंट के नाइक प्रदीप कुमार शर्मा जिला रायबरेली उत्तर प्रदेश भी शहीद हुए, जबकि वाहन चालक अमरजीत गुज्जर को हल्की चोटें आई हैं और उन्हें फील्ड अस्पताल में भर्ती किया गया है। शहीद कुलवंत सिंह का पार्थिव शरीर बुधवार को उनके पैतृक गांव घलुवाल पहुंचा, जहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार के दौरान सेना के जवानों ने सलामी दी और राष्ट्र के लिए दिए गए उनके सर्वोच्च बलिदान को नमन किया। इस अवसर पर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और परिजनों से मिलकर उन्हें सांत्वना दी। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश वीरों की भूमि है और यहां के रणबांकुरों ने देश की रक्षा के लिए हमेशा सर्वोच्च बलिदान दिया है। सरकार शहीद के परिवार के साथ खड़ी है और हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी। शहीद अपने पीछे पत्नी पूजा देवी, दो पुत्र रोहिन चौधरी और सूर्यांश चौधरी, माता मोहिंदर कौर तथा भाई सतवंत सिंह सहित पूरा परिवार छोड़ गए हैं। गांव में शहीद की अंतिम विदाई के दौरान हर आंख नम दिखाई दी और लोगों ने उनके बलिदान को सदैव याद रखने का संकल्प लिया।2
- कृष्ण चंद राणा जिला लाहौल-स्पीति के राहुली जंगल क्षेत्र में हाल ही में जंगली जीव वेक्स (हिमालयन आईबैक्स) का झुंड दिखाई देने से स्थानीय लोगों में उत्सुकता का माहौल बन गया। पहाड़ी ढलानों और चट्टानी क्षेत्र में घूमते इस झुंड को कई लोगों ने दूर से देखा और इसकी तस्वीरें भी अपने कैमरों में कैद कीं। स्थानीय लोगों के अनुसार वेक्स हिमालयी क्षेत्र में पाया जाने वाला दुर्लभ जंगली जीव है, जिसे जंगली बकरा भी कहा जाता है। इसकी सबसे बड़ी पहचान इसके लंबे और पीछे की ओर मुड़े हुए सींग होते हैं। यह प्रजाति सामान्यतः ऊँचे पहाड़ों और बर्फीले इलाकों में रहती है तथा घास और छोटे पौधों को अपना भोजन बनाती है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार सर्दियों या मौसम में बदलाव के दौरान ये जीव भोजन की तलाश में कभी-कभी निचले जंगलों और ढलानों की ओर भी आ जाते हैं, जिसके कारण लोगों को इनका झुंड एक साथ दिखाई देता है। राहुली जंगल में वेक्स के झुंड का दिखना क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता का संकेत माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे दुर्लभ वन्यजीवों की मौजूदगी हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की सेहत को दर्शाती है और इनके संरक्षण के लिए जागरूकता जरूरी है।1
- हैरानी की बात है कि जहाँ मरीजों की सेवा प्राथमिकता होनी चाहिए, वहाँ पूरा स्टाफ विधायक जी की अगवानी में व्यस्त है। दर्जनों मरीज और उनके तीमारदार लाइन में हैं, लेकिन पूरा अस्पताल एक डॉक्टर के भरोसे छोड़ दिया गया है। X Ray वाले बोल रहे स्वागत के बाद होगा x Ray क्या नेताओं का स्वागत मरीजों की जान से ज्यादा कीमती है? मामला हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना के सिविल अस्पताल बंगाणा का है। #HealthSystem #Governance #PatientSafety #HospitalChaos #PublicService #Ethics #कुटलैहड़ #बंगाणा_अस्पताल1
- जोगिंदर नगर में चलती बस के पीछे लटका मासूम, वीडियो देखकर अटक गई लोगों की सांसें... एक इंस्टाग्राम यूजर ने शेयर किया है वीडियो।1
- सुजानपुर सुजानपुर के ऐतिहासिक मैदान में 26 मार्च 2026 को और शो का आयोजन किया जा रहा है सैनिक स्कूल प्रशासन ने इस शो को लेकर तिथि की घोषणा की है पहले यह शो 10 मार्च को होना था लेकिन किन्हीं कर्म के चलते इसे स्थगित किया गया अब इसकी तिथि 26 मार्च पुणे घोषित की गई है सैनिक स्कूल प्राचार्य ग्रुप कैप्टन रचना जोशी ने संबंधित विषय पर जानकारी देते हुए बताया कि सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम के आगमन की पुष्टि हो गई हैं, जिसे "भारतीय वायु सेना के राजदूत" के रूप में जाना जाता है, जो अपनी प्रेसिजन, कौशल और टीमवर्क के लिए प्रसिद्ध है। यह एलीट टीम, लाल और सफेद हॉक Mk-132 जेट उड़ाते हुए, कई आश्चर्यजनक मैन्युवर्स का प्रदर्शन करेगी। सुर्यकिरण एरोबेटिक टीम की इस प्रस्तुति में ग्रेसफुल लूप, थ्रिलिंग बैरल रोल, गुरुत्वाकर्षण को धता बताने वाली इनवर्टेड फ्लाइंग और भीड़ के चहेते डीएनए मैन्युवर्स शामिल होंगे, हर प्रदर्शन पायलटों की बेजोड़ विशेषज्ञता और समन्वय का प्रमाण है।-26 मार्च को सुजानपुर टीरा के ऐतिहासिक चौगान और लैंडमार्क सैनिक स्कूल सुजानपुर टीरा के ऊपर 9 विमानों का एरियल डिस्प्ले करेगी। SKAT की स्थापना 1996 में हुई थी। यह टीम एशिया की एकमात्र नौ-विमान एरोबेटिक टीम होने का खिताब रखती है, और दुनिया की कुछ एलीट एरोबेटिक टीमों में से एक है। इस असामान्य टीम ने भारत में 800 से अधिक प्रदर्शन किए हैं, साथ ही चीन, श्रीलंका, म्यांमार, थाइलैंड, सिंगापुर और यूएई जैसे देशों में अंतरराष्ट्रीय एयर शो में IAF की पेशेवरता का प्रतिनिधित्व किया है। सूर्यकिरण टीम में 9 हॉक Mk-132 विमान शामिल हैं, जो HAL द्वारा भारत में लाइसेंस के तहत निर्मित हैं, जो 5 मीटर से कम की दूरी पर अत्यधिक निकटता में उड़ते हैं। टीम में 14 पायलट हैं प्राचार्य ने कहा कि कार्यक्रम के आयोजन से पहले तमाम तैयारियां पूरी की जाएगी प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखु कार्यक्रम में विशेष रूप से आने का निमंत्रण दिया जा रहा है जल्द ही उनसे मुलाकात करके उन्हें कार्यक्रम में आने के लिए कहा जाएगा।2
- story ideaहमीरपुर के बडू के साथ लगते क्षेत्र में फैला पीलिया, दो दर्जन से ज्यादा लोग हुए क्षतिग्रस्त पिछले एक सप्ताह से फैले पीलिया की रोकथाम के लिए समय पर नही कदम न उठाने से लोगो में रोष जमली पेयजल स्कीम के साथ दूषित पानी के जमा होने से फैला पीलिया, हमीरपुर शहर के साथ लगते बडू क्षेत्र में पीलिया फैलने से लोगों में दहशत बनी हुइ्र है। प्राप्त जानकारी के अनुसार पीलिया पिछले सात दिनों से फैला हुआ है और करीब दो दर्जन लोगों को पीलिया ने अपनी चपेट में ले लिया है। वहीं इसमें बारह से पन्द्रह स्वाहल स्कूल के बच्चे भी पीलिया ग्रस्त हो गए है जिससे स्थिति नाजुक बनी हुई है। बता दे कि स्वाहल, भाटी, मझोट इत्यादि गांवों के लिए जमली पेयजल स्कीम से पानी की सप्लाई होती है और पेयजल स्कीम के पास दूषित जल जमा होने की वजह से पीलिया फैल रहा है। वहीं पेयजल स्कीम के आसपास इंडस्ट्री एरिया का गंदला पानी का रिसाब होने से भी पीलिया फैलने की वजह माना जा रहा है जिसकी अब आईपीएच और स्वास्थ्य विभाग के द्वारा जांच पडताल की जा रही है। स्थानीय निवासी विवेक काका ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से बडू , स्वाहल के क्षेत्र में पीलिया के मरीजों की संख्या बढ रही है और इसमें स्वाहल स्कूल के भी काफी बच्चे पीलिया से ग्रस्त पाए गए है। उन्हांेने बताया कि स्थानीय लोगों को पीलिया की बीमारी ने जकड लिया है और पेयजल स्कीम के दूषित पानी की वजह से पीलिया फैल रहा है। उन्होंन बताया कि इंडस्टी एरिया में फैक्टिरियों के गंदे पानी से पीलिया फैलने की वजह बन रहा है। राजकीय उच्च विद्यालय स्वाहल के हेडमास्टर संदीप डढवाल ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से पीलिया फैला हुआ है और 13 बच्चे स्कूल के पीलिया से ग्रस्त हो गए है। उन्हांेने बताया कि यह सभी बच्चे मेडिकल कालेज में उपचार करवा रहे है और पीलिया फैलने के बारे में आईपीएच विभाग को भी सूचना दी गई जिस पर पानी के सैंपल लिए गए है। जल शक्ति विभाग हमीरपुर के एक्सीईन राजेश गर्ग ने बताया कि आज ही विभाग को स्वाहल व इसके आसपास पीलिया फैलने की जानकारी मिली है जिस पर विभाग ने जाकर पानी के सैंपल लिए गए है। उन्हांेने कहा कि पीलिया फैलने की वजह की पडताल की जा रही है और लोगों से एहतियात बरतने की अपील की जा रही है।1
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