“सबका सम्मान” या “आवाज़ उठाओ तो मनरेगा में मुकदमा पाओ”? ✍️ जन-संवाददाता प्रतिनिधि📍बिहार सरकार ने ‘सात निश्चय–3’ के तहत “सबका सम्मान–जीवन आसान” का वादा किया। स्पष्ट निर्देश दिए गए— हर सोमवार और शुक्रवार पदाधिकारी कार्यालय में बैठकर शिकायत सुनेंगे; अनुपस्थिति में सक्षम अधिकारी अधिकृत होंगे; तथा शिकायत पंजी में प्रविष्टि अनिवार्य होगी। लेकिन सहरसा अनुमंडल के सौर बाजार प्रखंड स्थित महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) कार्यालय की घटनाएँ इन दावों पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती हैं । जनसुनवाई या जन-निराशा ? निर्धारित जनसुनवाई दिवस 02 फरवरी (सोमवार) और 13 फरवरी (शुक्रवार) पर सुबह 11 बजे से जन-संवाददाता टीम अपने-अपने वार्ड की समस्याएँ लेकर कार्यालय पहुँची। आरोप है कि निर्धारित समय पर कोई औपचारिक जनसुनवाई नहीं हुई। दोनों तिथि को जेएसडी निर्धारित समय दिन के 1 बजे एडवोकेट ऑफ जेएसडी काउंसिल के निदेशक सह प्रवक्ता डॉ. सुमंत राव कार्यालय पहुँचे। 02 फरवरी को कार्यक्रम पदाधिकारी के समक्ष मौखिक रूप से शिकायतें रखी गईं, परंतु न तो शिकायत पंजी में प्रविष्टि की गई और न ही कोई औपचारिक संज्ञान लिया गया। तत्पश्चात अधिकारी फील्ड भ्रमण पर चले गए अनुपस्थिति में किसी अधिकृत अधिकारी की व्यवस्था भी उपलब्ध नहीं थी। 13 फरवरी 26 को कार्यक्रम पदाधिकारी का कार्यालय बंद था। न ही कोई अधिकृत अधिकारी थे, न ही शिकायत पंजी उपलब्ध था। परिणाम— शिकायतकर्ता दोनों तिथि को बिना सुनवाई लौटने को मजबूर हुए। सरकारी आदेश कहता है— अनुपस्थिति में अधिकारी अधिकृत होगा। जमीनी स्थिति कहती है— शिकायत दर्ज करने की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं थी। क्या यही है “Ease of Living”? 02 फरवरी को शिकायत करने पर दो दिन बाद— कांड संख्या 39/26 दिनांक 04 फरवरी दर्ज होने की जानकारी सामने आई। इसे शिकायतकर्ताओं द्वारा प्रतिशोधात्मक कार्रवाई बताया जा रहा है। 13 फरवरी के जियो टैग वीडियो साक्ष्य पर करवाई का इंतजार रहेगा ? सवाल उठता है—क्या भ्रष्टाचार की शिकायत का परिणाम मुकदमा होना चाहिए ? क्या जनसुनवाई दिवस पर अनुपस्थिति प्रशासनिक आदेशों का उल्लंघन नहीं ? शिकायत पंजी में प्रविष्टि क्यों नहीं की गई ? “सबका सम्मान” का लाभ शिकायतकर्ता को क्यों नहीं मिला ? ⚖️ अब निगाहें प्रशासन पर यदि “सबका सम्मान–जीवन आसान” केवल कागज़ी आदेश नहीं है, तो इस प्रकरण में जनसुनवाई प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच तथा प्राथमिकी की स्वतंत्र पड़ताल आवश्यक प्रतीत होती है। यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की विश्वसनीयता का है, जो सम्मान और पारदर्शिता का दावा करती है।
“सबका सम्मान” या “आवाज़ उठाओ तो मनरेगा में मुकदमा पाओ”? ✍️ जन-संवाददाता प्रतिनिधि📍बिहार सरकार ने ‘सात निश्चय–3’ के तहत “सबका सम्मान–जीवन आसान” का वादा किया। स्पष्ट निर्देश दिए गए— हर सोमवार और शुक्रवार पदाधिकारी कार्यालय में बैठकर शिकायत सुनेंगे; अनुपस्थिति में सक्षम अधिकारी अधिकृत होंगे; तथा शिकायत पंजी में प्रविष्टि अनिवार्य होगी। लेकिन सहरसा अनुमंडल के सौर बाजार प्रखंड स्थित महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) कार्यालय की घटनाएँ इन दावों पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती हैं । जनसुनवाई या जन-निराशा ? निर्धारित जनसुनवाई दिवस 02 फरवरी (सोमवार) और 13 फरवरी (शुक्रवार) पर सुबह 11 बजे से जन-संवाददाता टीम अपने-अपने वार्ड की समस्याएँ लेकर कार्यालय पहुँची। आरोप है कि निर्धारित समय पर कोई औपचारिक जनसुनवाई नहीं हुई। दोनों तिथि को जेएसडी निर्धारित समय दिन के 1 बजे एडवोकेट ऑफ जेएसडी काउंसिल के निदेशक सह प्रवक्ता डॉ. सुमंत राव कार्यालय पहुँचे। 02 फरवरी को कार्यक्रम पदाधिकारी के समक्ष मौखिक रूप से शिकायतें रखी गईं, परंतु न तो शिकायत पंजी में प्रविष्टि की गई और न ही कोई औपचारिक संज्ञान लिया गया। तत्पश्चात अधिकारी फील्ड भ्रमण पर चले गए अनुपस्थिति में किसी अधिकृत अधिकारी की व्यवस्था भी उपलब्ध नहीं थी। 13 फरवरी 26 को कार्यक्रम पदाधिकारी का कार्यालय बंद था। न ही कोई अधिकृत अधिकारी थे, न ही शिकायत पंजी उपलब्ध था। परिणाम— शिकायतकर्ता दोनों तिथि को बिना सुनवाई लौटने को मजबूर हुए। सरकारी आदेश कहता है— अनुपस्थिति में अधिकारी अधिकृत होगा। जमीनी स्थिति कहती है— शिकायत दर्ज करने की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं थी। क्या यही है “Ease of Living”? 02 फरवरी को शिकायत करने पर दो दिन बाद— कांड संख्या 39/26 दिनांक 04 फरवरी दर्ज होने की जानकारी सामने आई। इसे शिकायतकर्ताओं द्वारा प्रतिशोधात्मक कार्रवाई बताया जा रहा है। 13 फरवरी के जियो टैग वीडियो साक्ष्य पर करवाई का इंतजार रहेगा ? सवाल उठता है—क्या भ्रष्टाचार की शिकायत का परिणाम मुकदमा होना चाहिए ? क्या जनसुनवाई दिवस पर अनुपस्थिति प्रशासनिक आदेशों का उल्लंघन नहीं ? शिकायत पंजी में प्रविष्टि क्यों नहीं की गई ? “सबका सम्मान” का लाभ शिकायतकर्ता को क्यों नहीं मिला ? ⚖️ अब निगाहें प्रशासन पर यदि “सबका सम्मान–जीवन आसान” केवल कागज़ी आदेश नहीं है, तो इस प्रकरण में जनसुनवाई प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच तथा प्राथमिकी की स्वतंत्र पड़ताल आवश्यक प्रतीत होती है। यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की विश्वसनीयता का है, जो सम्मान और पारदर्शिता का दावा करती है।
- मधेपुरा से दिल दहला देने बाली घटना ग्रामीण मे सन सनी फेला दिए ऐक बाबा ने नाबालिक बचे को लेकर1
- मधेपुरा जिला मुख्यालय स्थित रजिस्ट्री कार्यालय में शनिवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एक युवक को पॉकेटमारी करते हुए लोगों ने रंगे हाथ पकड़ लिया। पकड़ा गया आरोपी रेसना बाजार निवासी संजय दास बताया जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रजिस्ट्री ऑफिस में रोजाना की तरह जमीन रजिस्ट्री और अन्य कार्यों को लेकर काफी भीड़ थी। इसी दौरान संजय दास भीड़ का फायदा उठाकर एक व्यक्ति की जेब से पैसे निकालने की कोशिश कर रहा था। संदेह होने पर आसपास मौजूद लोगों ने उसे पकड़ लिया। तलाशी लेने पर उसके पास से संदिग्ध रूप से निकाली गई राशि भी बरामद होने की बात कही जा रही है। घटना की सूचना तुरंत सदर थाना मधेपुरा को दी गई। सूचना मिलते ही सदर थाना के पुलिस पदाधिकारी दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे और लोगों के कब्जे से आरोपी को अपने हिरासत में लेकर थाने ले गए।4
- हिमाचल प्रदेश के रहने वाले बहुत बड़े कंपनी के मालिक नोएडा नागेंद्र शर्मा जी कि बिटिया के बयाह मे पूर्व DGP अनिल प्रथम जी के निजी सचिव विनय बिहारी पहुंचे परिवार संग..1
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- पूरे बिहार घूम के देखिए क्या-क्या है देखने लायक आप लोग आए हैं तो एक बार बिहार जरूर घूम लीजिए मुख्यमंत्री मंच से ऐलान किया बिहार पूरे देश का है सिर्फ बिहारी का नहीं1
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- सौर बाजार प्रखंड क्षेत्र के सुहथ पंचायत अंतर्गत वार्ड नंबर 13 निवासी रंजू देवी पति जगरनाथ मालाकार के घर में बीते दिनों देर रात अचानक घर में आग लग गई जिससे घर में रखा सारा सामान जलकर राख हो गया।1
- बिहार के मधेपुरा जिले के मुरलीगंज में दिनदहाड़े चोरी की कोशिश का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों की सतर्कता से एक युवक को रंगे हाथ पकड़ लिया गया। हालांकि पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और आरोपों की पुष्टि अभी बाकी है। मामला मधेपुरा जिले के मुरलीगंज नगर पंचायत के वार्ड नंबर–7 स्थित श्री अनुकूल चंद्र आश्रम गली का है। शनिवार को दिन के समय एक युवक को संदिग्ध हालात में लोहे का फ्रेम लेकर भागते हुए देखा गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, युवक एक घर के पास से लोहे का फ्रेम उठाकर तेजी से निकलने की कोशिश कर रहा था। युवक की गतिविधि संदिग्ध लगने पर आसपास के लोगों ने उसका पीछा किया और कुछ ही दूरी पर उसे पकड़ लिया। पकड़े जाने के बाद मौके पर भीड़ जुट गई और आक्रोशित लोगों ने उसकी पिटाई कर दी। युवक ने अपनी पहचान रहिका टोला निवासी राजकुमार के रूप में बताई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह युवक पहले भी मोहल्ले में संदिग्ध रूप से घूमता देखा गया था। कुछ लोगों का कहना है कि उसने एक जनरेटर के डायनमो को खोलने और एक घर का ताला तोड़ने की कोशिश भी की थी। हालांकि इन आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। घटना की सूचना मिलते ही मुरलीगंज थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने युवक को भीड़ के चंगुल से छुड़ाकर हिरासत में लिया और थाना ले गई। फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है और मामले की जांच जारी है। स्थानीय लोगों की सतर्कता से एक संभावित चोरी की वारदात टल गई, लेकिन कानून हाथ में लेने की घटना भी सामने आई। अब पुलिस जांच के बाद ही साफ होगा कि मामला सिर्फ चोरी की कोशिश का है या इसके पीछे कोई और सच्चाई है।4
- मधेपुरा अन्तर गत बीते दिन सरख हादसे ने चोंका दिया पुरेनी चोसा NH 58 पर हायवा जा कर मकान मे टक्कर मार दिए1