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हिमाचल प्रदेश के रहने वाले बहुत बड़े कंपनी के मालिक नोएडा नागेंद्र शर्मा जी कि बिटिया के बयाह मे पूर्व DGP अनिल प्रथम जी के निजी सचिव विनय बिहारी पहुंचे परिवार संग..
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हिमाचल प्रदेश के रहने वाले बहुत बड़े कंपनी के मालिक नोएडा नागेंद्र शर्मा जी कि बिटिया के बयाह मे पूर्व DGP अनिल प्रथम जी के निजी सचिव विनय बिहारी पहुंचे परिवार संग..
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- हिमाचल प्रदेश के रहने वाले बहुत बड़े कंपनी के मालिक नोएडा नागेंद्र शर्मा जी कि बिटिया के बयाह मे पूर्व DGP अनिल प्रथम जी के निजी सचिव विनय बिहारी पहुंचे परिवार संग..1
- सुपौल प्रखंड के चकडुमरिया स्थित शिव मंदिर परिसर से रविवार को भव्य कलश यात्रा निकाली गई। इस धार्मिक आयोजन में करीब 450 श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कलश यात्रा मंदिर प्रांगण से शुरू होकर कोसी नदी तट तक पहुंची, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं ने जल भरा। इसके बाद सभी श्रद्धालु सिर पर कलश रखकर पुनः शिव मंदिर चकडुमरिया लौटे। पूरे मार्ग में “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। कलश यात्रा में महिलाओं, युवतियों और पुरुष श्रद्धालुओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। पारंपरिक वेशभूषा में सजे श्रद्धालु अनुशासन और श्रद्धा के साथ यात्रा में शामिल हुए। गांव और आसपास के क्षेत्रों के लोग भी इस धार्मिक अनुष्ठान को देखने के लिए मार्ग के किनारे खड़े रहे। आयोजन समिति की ओर से यात्रा को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। संस्था के अध्यक्ष नंदकिशोर ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि 15 फरवरी 2026 को मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती की प्राण प्रतिष्ठा का भव्य आयोजन किया जाएगा। इसी के तहत यह कलश यात्रा निकाली गई है। उन्होंने कहा कि प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर क्षेत्र में काफी उत्साह है और हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। मंदिर परिसर में पूजा-पाठ और यज्ञ की तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। कार्यक्रम को सफल बनाने में सचिव रामचंद्र यादव, कोषाध्यक्ष नागेश्वर महाराज, पूर्व जिला परिषद उम्मीदवार पवन कुमार, रामचंद्र कमात सहित कई गणमान्य लोग सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं। सभी ने श्रद्धालुओं का स्वागत किया और आयोजन को सुव्यवस्थित रूप से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह के धार्मिक आयोजन से समाज में एकता और भाईचारे की भावना मजबूत होती है। कलश यात्रा के सफल आयोजन से पूरे चकडुमरिया गांव में उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है। अब सभी श्रद्धालु 15 फरवरी को होने वाले शिव-पार्वती प्राण प्रतिष्ठा समारोह का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।1
- परदा डिजाइन डिस्प्ले ❣️1
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- ✍️ जन-संवाददाता प्रतिनिधि📍बिहार सरकार ने ‘सात निश्चय–3’ के तहत “सबका सम्मान–जीवन आसान” का वादा किया। स्पष्ट निर्देश दिए गए— हर सोमवार और शुक्रवार पदाधिकारी कार्यालय में बैठकर शिकायत सुनेंगे; अनुपस्थिति में सक्षम अधिकारी अधिकृत होंगे; तथा शिकायत पंजी में प्रविष्टि अनिवार्य होगी। लेकिन सहरसा अनुमंडल के सौर बाजार प्रखंड स्थित महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) कार्यालय की घटनाएँ इन दावों पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती हैं । जनसुनवाई या जन-निराशा ? निर्धारित जनसुनवाई दिवस 02 फरवरी (सोमवार) और 13 फरवरी (शुक्रवार) पर सुबह 11 बजे से जन-संवाददाता टीम अपने-अपने वार्ड की समस्याएँ लेकर कार्यालय पहुँची। आरोप है कि निर्धारित समय पर कोई औपचारिक जनसुनवाई नहीं हुई। दोनों तिथि को जेएसडी निर्धारित समय दिन के 1 बजे एडवोकेट ऑफ जेएसडी काउंसिल के निदेशक सह प्रवक्ता डॉ. सुमंत राव कार्यालय पहुँचे। 02 फरवरी को कार्यक्रम पदाधिकारी के समक्ष मौखिक रूप से शिकायतें रखी गईं, परंतु न तो शिकायत पंजी में प्रविष्टि की गई और न ही कोई औपचारिक संज्ञान लिया गया। तत्पश्चात अधिकारी फील्ड भ्रमण पर चले गए अनुपस्थिति में किसी अधिकृत अधिकारी की व्यवस्था भी उपलब्ध नहीं थी। 13 फरवरी 26 को कार्यक्रम पदाधिकारी का कार्यालय बंद था। न ही कोई अधिकृत अधिकारी थे, न ही शिकायत पंजी उपलब्ध था। परिणाम— शिकायतकर्ता दोनों तिथि को बिना सुनवाई लौटने को मजबूर हुए। सरकारी आदेश कहता है— अनुपस्थिति में अधिकारी अधिकृत होगा। जमीनी स्थिति कहती है— शिकायत दर्ज करने की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं थी। क्या यही है “Ease of Living”? 02 फरवरी को शिकायत करने पर दो दिन बाद— कांड संख्या 39/26 दिनांक 04 फरवरी दर्ज होने की जानकारी सामने आई। इसे शिकायतकर्ताओं द्वारा प्रतिशोधात्मक कार्रवाई बताया जा रहा है। 13 फरवरी के जियो टैग वीडियो साक्ष्य पर करवाई का इंतजार रहेगा ? सवाल उठता है—क्या भ्रष्टाचार की शिकायत का परिणाम मुकदमा होना चाहिए ? क्या जनसुनवाई दिवस पर अनुपस्थिति प्रशासनिक आदेशों का उल्लंघन नहीं ? शिकायत पंजी में प्रविष्टि क्यों नहीं की गई ? “सबका सम्मान” का लाभ शिकायतकर्ता को क्यों नहीं मिला ? ⚖️ अब निगाहें प्रशासन पर यदि “सबका सम्मान–जीवन आसान” केवल कागज़ी आदेश नहीं है, तो इस प्रकरण में जनसुनवाई प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच तथा प्राथमिकी की स्वतंत्र पड़ताल आवश्यक प्रतीत होती है। यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की विश्वसनीयता का है, जो सम्मान और पारदर्शिता का दावा करती है।1
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