कानपुर नगर में यातायात विभाग के नियमों का खुला उल्लंघन हो रहा है, जहाँ ये नियम केवल आम जनता पर लागू होते दिख रहे हैं, जबकि शासन-प्रशासन से जुड़े व्यक्तियों को अक्सर छूट मिलती है। वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़ और समृद्ध भारत समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार, सड़कों पर दुर्घटनाओं का खतरा सभी के लिए समान है, फिर भी नियमों का पालन केवल निजी और कमजोर वर्ग के व्यक्तियों से कराया जाता है, जबकि शासन-प्रशासन के ऊपर ये नियम लागू नहीं होते। रिपोर्ट में कहा गया है कि केवल चालान करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसी संदर्भ में, कानपुर नगर के हैलेट हॉस्पिटल के पास यातायात प्रशासन की सघन चेकिंग के दौरान एक चौंकाने वाली घटना सामने आई। गीता नगर क्रॉसिंग के पास एक 'जनरक्षक महोदय' को बिना हेलमेट के यात्रा करते देखा गया, जबकि उनके साथ चल रहे व्यक्ति ने हेलमेट पहना हुआ था। रिपोर्ट में आरोप है कि शासन-प्रशासन से जुड़े व्यक्तियों के चालान न तो त्रिनेत्र कैमरे में दर्ज होते हैं और न ही यातायात विभाग के कर्मचारी उनका चालान करते हैं। इसके विपरीत, आम लोगों को हेलमेट न होने पर तत्काल चालान भेजा जाता है, जो न भरने पर कोर्ट भेज दिया जाता है। वरदान फाउंडेशन, वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़ और समृद्ध भारत समाचार पत्र परिवार की ओर से उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक और उत्तर प्रदेश ट्रैफिक अधिकारी से अनुरोध किया गया है कि यातायात नियमों का पालन सड़क पर चलने वाले सभी व्यक्तियों के लिए अनिवार्य किया जाए। कानपुर से संवाददाता दिनकर जी की रिपोर्ट में जनता यह जानना चाहती है कि आखिर ऐसा दोहरा मापदंड क्यों अपनाया जा रहा है। आम जनता से भी हाथ जोड़कर निवेदन किया गया है कि वे यातायात नियमों का पालन करें और शासन-प्रशासन का सहयोग करें, ताकि उन्हें देखकर दूसरे लोग भी नियमों का पालन करें।
कानपुर नगर में यातायात विभाग के नियमों का खुला उल्लंघन हो रहा है, जहाँ ये नियम केवल आम जनता पर लागू होते दिख रहे हैं, जबकि शासन-प्रशासन से जुड़े व्यक्तियों को अक्सर छूट मिलती है। वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़ और समृद्ध भारत समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार, सड़कों पर दुर्घटनाओं का खतरा सभी के लिए समान है, फिर भी नियमों का पालन केवल निजी और कमजोर वर्ग के व्यक्तियों से कराया जाता है, जबकि शासन-प्रशासन के ऊपर ये नियम लागू नहीं होते। रिपोर्ट में कहा गया है कि केवल चालान करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसी संदर्भ में, कानपुर नगर के हैलेट हॉस्पिटल के पास यातायात प्रशासन की सघन चेकिंग के दौरान एक चौंकाने वाली घटना सामने आई। गीता नगर क्रॉसिंग के पास एक 'जनरक्षक महोदय' को बिना हेलमेट के यात्रा करते देखा गया, जबकि उनके साथ चल रहे व्यक्ति ने हेलमेट पहना हुआ था। रिपोर्ट में आरोप है कि शासन-प्रशासन से जुड़े व्यक्तियों के चालान न तो त्रिनेत्र कैमरे में दर्ज होते हैं और न ही यातायात विभाग के कर्मचारी उनका चालान करते हैं। इसके विपरीत, आम लोगों को हेलमेट न होने पर तत्काल चालान भेजा जाता है, जो न भरने पर कोर्ट भेज दिया जाता है। वरदान फाउंडेशन, वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़ और समृद्ध भारत समाचार पत्र परिवार की ओर से उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक और उत्तर प्रदेश ट्रैफिक अधिकारी से अनुरोध किया गया है कि यातायात नियमों का पालन सड़क पर चलने वाले सभी व्यक्तियों के लिए अनिवार्य किया जाए। कानपुर से संवाददाता दिनकर जी की रिपोर्ट में जनता यह जानना चाहती है कि आखिर ऐसा दोहरा मापदंड क्यों अपनाया जा रहा है। आम जनता से भी हाथ जोड़कर निवेदन किया गया है कि वे यातायात नियमों का पालन करें और शासन-प्रशासन का सहयोग करें, ताकि उन्हें देखकर दूसरे लोग भी नियमों का पालन करें।
- कानपुर नगर से भारत सूत्र लाइव टीवी डिजिटल मीडिया प्रेस की एक रिपोर्ट में यातायात नियमों के प्रवर्तन में भेदभावपूर्ण रवैये पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जहां एक ओर विभिन्न संगठनों और शासन-प्रशासन द्वारा यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है, वहीं यह सख्ती केवल निजी और कमजोर व्यक्तियों पर ही लागू होती दिख रही है, जबकि 'शासन प्रशासन के व्यक्तियों' पर ये नियम लागू नहीं होते। रिपोर्ट बताती है कि चालान करने से ही समस्या का समाधान नहीं हो सकता, क्योंकि सड़क पर चलने वाले हर व्यक्ति को दुर्घटना का सामना करना पड़ सकता है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट पहनना और गाड़ी के सभी कागजात (डिजिटल या भौतिक) पूरे रखना अनिवार्य है। इसके बावजूद, कानपुर नगर के हैलेट हॉस्पिटल के पास गहन यातायात जाँच के दौरान, गीता नगर क्रॉसिंग की ओर जाते हुए एक 'जनरक्षक महोदय' को बिना हेलमेट के देखा गया, जबकि उनके साथ चल रहे व्यक्ति ने हेलमेट पहना हुआ था। आरोप है कि 'शासन प्रशासन के व्यक्तियों' का त्रिनेत्र कैमरे में कभी चालान नहीं देखा जाता और न ही यातायात विभाग के कर्मचारी उनका चालान करते हैं, जबकि आम जनता को हेलमेट न लगाने पर तत्काल चालान भेज दिया जाता है, जिसे न भरने पर मामला कोर्ट भेज दिया जाता है। भारत सूत्र लाइव टीवी के संवाददाता ओमवीर जी ने उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक महोदय और उत्तर प्रदेश ट्रैफिक अधिकारी महोदय से यह जानने की मांग की है कि क्या यातायात नियमों का पालन केवल आम जनता के लिए ही है। चैनल ने कानपुर से सभी से हाथ जोड़कर निवेदन किया है कि वे यातायात के नियमों का पालन करें और शासन-प्रशासन का पूरा सहयोग करें, क्योंकि उन्हें देखकर अन्य लोग भी नियमों का पालन करेंगे। यह रिपोर्ट कानपुर नगर के गीता नगर क्रॉसिंग के पास यातायात विभाग द्वारा हो रही चेकिंग के संदर्भ में सवाल करती है कि जब सब-इंस्पेक्टर द्वारा यातायात नियमों का पालन कराया जा रहा है, तब भी 'जनरक्षक' का चालान क्यों नहीं होता है।1
- कानपुर नगर में यातायात विभाग के नियमों का खुला उल्लंघन हो रहा है, जहाँ ये नियम केवल आम जनता पर लागू होते दिख रहे हैं, जबकि शासन-प्रशासन से जुड़े व्यक्तियों को अक्सर छूट मिलती है। वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़ और समृद्ध भारत समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार, सड़कों पर दुर्घटनाओं का खतरा सभी के लिए समान है, फिर भी नियमों का पालन केवल निजी और कमजोर वर्ग के व्यक्तियों से कराया जाता है, जबकि शासन-प्रशासन के ऊपर ये नियम लागू नहीं होते। रिपोर्ट में कहा गया है कि केवल चालान करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसी संदर्भ में, कानपुर नगर के हैलेट हॉस्पिटल के पास यातायात प्रशासन की सघन चेकिंग के दौरान एक चौंकाने वाली घटना सामने आई। गीता नगर क्रॉसिंग के पास एक 'जनरक्षक महोदय' को बिना हेलमेट के यात्रा करते देखा गया, जबकि उनके साथ चल रहे व्यक्ति ने हेलमेट पहना हुआ था। रिपोर्ट में आरोप है कि शासन-प्रशासन से जुड़े व्यक्तियों के चालान न तो त्रिनेत्र कैमरे में दर्ज होते हैं और न ही यातायात विभाग के कर्मचारी उनका चालान करते हैं। इसके विपरीत, आम लोगों को हेलमेट न होने पर तत्काल चालान भेजा जाता है, जो न भरने पर कोर्ट भेज दिया जाता है। वरदान फाउंडेशन, वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़ और समृद्ध भारत समाचार पत्र परिवार की ओर से उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक और उत्तर प्रदेश ट्रैफिक अधिकारी से अनुरोध किया गया है कि यातायात नियमों का पालन सड़क पर चलने वाले सभी व्यक्तियों के लिए अनिवार्य किया जाए। कानपुर से संवाददाता दिनकर जी की रिपोर्ट में जनता यह जानना चाहती है कि आखिर ऐसा दोहरा मापदंड क्यों अपनाया जा रहा है। आम जनता से भी हाथ जोड़कर निवेदन किया गया है कि वे यातायात नियमों का पालन करें और शासन-प्रशासन का सहयोग करें, ताकि उन्हें देखकर दूसरे लोग भी नियमों का पालन करें।1
- एक अधिकारी को 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया है। इस कार्रवाई के बाद उसकी करोड़ों रुपये की काली कमाई का भी खुलासा हुआ है।1
- मध्य प्रदेश के भोपाल में स्थित महान क्रांतिकारी मौलाना बरकतुल्ला भोपाली के नाम पर बनी यूनिवर्सिटी का नाम बदलने की तैयारी चल रही है। विश्वविद्यालय का नाम बदलकर 'वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय' किए जाने की योजना है। मौलाना बरकतुल्ला भोपाली का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थान है, क्योंकि वे सन 1915 में काबुल में गठित भारत की पहली निर्वासित सरकार के प्रधानमंत्री थे। उन्हें आठ भाषाओं का जानकार, एक निर्भीक पत्रकार, प्रभावशाली वक्ता और एक प्रखर राष्ट्रवादी व क्रांतिकारी के रूप में जाना जाता है।1
- पेपर लीक और परीक्षा में हुई धांधली के विरोध में देशभर से आए छात्रों का हुजूम दिल्ली के जंतर-मंतर पर सड़कों पर डटा हुआ है। ढोल-नगाड़ों की थाप और गूंजते नारों के बीच छात्र लगातार अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं। आंदोलनकारियों का यह उग्र रूप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे प्रदर्शन की तीव्रता और भी बढ़ गई है।1
- उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले में सास-दामाद की शादी का एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जहाँ एक दामाद अपनी सास की खूबसूरती पर फिदा होकर अपनी पत्नी को छोड़कर अपनी ही सास के साथ शादी के बंधन में बंध गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस युवक ने कानपुर नगर कोर्ट पहुँचकर अपनी सास से कानूनी रूप से शादी रचाई। शादी के बाद इस नवविवाहित जोड़े ने अपने रिश्ते का ऐलान सोशल मीडिया पर कर दिया, जिसके वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला गरमा गया। यह पूरा वाकया कानपुर देहात के अकबरपुर थाना क्षेत्र का है। सोशल मीडिया पर दोनों की शादी के ऐलान का वीडियो वायरल होते ही विवाद गहरा गया और लोग इस मामले की चर्चा करने लगे। दामाद अपनी सास को घर से लेकर गया था, जिसके बाद दोनों के कोर्ट में शादी की खबर आई। जानकारी के अनुसार, दामाद और सास के बीच लंबे समय से प्रेम संबंध चल रहा था, जिसके बाद दोनों ने परिवार और समाज की परवाह किए बिना साथ रहने का फैसला किया। वायरल वीडियो में दोनों ने अपनी मर्जी से शादी करने और एक-दूसरे के साथ जीवन बिताने की बात कहते हुए आशीर्वाद की अपील की थी। हालाँकि, यह मामला गरमाने के बाद नवविवाहित जोड़ा फरार हो गया।2
- कानपुर के हनुमंत विहार क्षेत्र में हुए एक विवाद के बाद पीड़ित पक्ष ने पुलिस पर एकपक्षीय कार्रवाई का गंभीर आरोप लगाया है। आईरा प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान परिवार ने बताया कि झड़प में दोनों पक्षों के लोग घायल हुए थे, लेकिन पुलिस ने केवल उनके पक्ष के लोगों के खिलाफ ही कार्रवाई की है, जबकि उनकी शिकायत पर समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की गई। पीड़ित परिवार का दावा है कि पुलिस ने बिना निष्पक्ष जांच किए ही मुकदमे दर्ज कर दिए हैं। उन्होंने कुछ पुलिसकर्मियों पर दूसरे पक्ष से मिलीभगत का आरोप भी लगाया है, जिससे कार्रवाई में पक्षपात होने की बात कही जा रही है। पासी समाज ने वरिष्ठ अधिकारियों से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला, तो पासी समाज के लोग मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी शिकायत दर्ज कराएंगे। मामले में फिलहाल पुलिस का पक्ष सामने नहीं आया है।1
- उत्तराखंड के हरिद्वार में एक हिंदूवादी नेता ने 'बिरयानी' शब्द को लेकर एक नई मुहिम शुरू की है, जिसमें उन्होंने इसे 'पुलाव' में बदलने की मांग की है। नेता ने तर्क दिया है कि 'बिरयानी' शब्द मूलतः हैदराबाद से आया है और यह चावल में मांस मिलाकर बनने वाला भोजन है, जिसे वे मुसलमानों का भोजन मानते हैं। अपनी बात पर ज़ोर देते हुए नेता ने खुद को हिंदू-सनातनी बताया और कहा कि श्रद्धालुओं पर 'वेज बिरयानी' शब्द का अलग प्रभाव पड़ता है। इसी कारण, उनकी यह मुहिम है कि 'बिरयानी' के ठेलों पर 'वेज पुलाव' के पोस्टर लगाए जाएं और इस व्यंजन को 'पुलाव' के नाम से ही जाना जाए।1