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यह भक्तिपूर्ण संदेश इस आस्था को व्यक्त करता है कि बजरंगबली के चरणों में बैठने और उनकी शरण लेने से जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं।
Rajesh Kumar
यह भक्तिपूर्ण संदेश इस आस्था को व्यक्त करता है कि बजरंगबली के चरणों में बैठने और उनकी शरण लेने से जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं।
- RajdevpaswanNoorsarai, Nalanda😂34 min ago
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- बिहार में कोसी नदी के किनारे बसे इलाकों की स्थिति आज भी अत्यंत दयनीय बनी हुई है, जहाँ हर वर्ष बाढ़, कटाव और विस्थापन के कारण लोगों का जीवन बुरी तरह प्रभावित होता है। कोसी नदी को 'बिहार का शोक' कहा जाता है, क्योंकि इसके कारण सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, अररिया, पूर्णिया और कटिहार जैसे जिलों में हर साल पानी का स्तर बढ़ने से गाँव डूब जाते हैं और खेत व घर कटाव में बह जाते हैं, जिससे लोगों को बार-बार पलायन करना पड़ता है। तटबंधों या पटवन वाले क्षेत्रों के पास रहने वाले कई परिवार अस्थायी झोपड़ियों में गुजारा करते हैं, जहाँ सड़क, बिजली, स्कूल और अस्पताल जैसी मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है। खेती योग्य जमीन लगातार कम हो रही है, और लोग मजदूरी व पशुपालन के सहारे किसी तरह जीवन यापन कर रहे हैं। बाढ़ से खेती बर्बाद होने के कारण युवाओं को रोजगार की तलाश में पंजाब, दिल्ली और हरियाणा जैसे अन्य राज्यों में पलायन करना पड़ता है, जिससे महिलाओं और बच्चों की स्थिति और भी विकट हो जाती है। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ भी बुरी तरह प्रभावित हैं; बरसात के मौसम में स्कूल बंद हो जाते हैं और नाव ही एकमात्र सहारा बचती है, जबकि स्वास्थ्य सेवाएँ समय पर उपलब्ध नहीं हो पातीं। सरकार द्वारा तटबंध निर्माण और मरम्मत, राहत शिविर, प्रधानमंत्री आवास योजना, बाढ़ सहायता राशि, तथा सड़क व पुल निर्माण जैसे कार्य किए जा रहे हैं। हालांकि, कई क्षेत्रों में अभी भी ये सुविधाएँ पूरी तरह से नहीं पहुँच पाई हैं। इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद स्थानीय लोग खेती, मछली पालन, पशुपालन और दिहाड़ी मजदूरी करके जीवन चला रहे हैं। वे लगातार स्थायी पुनर्वास, बेहतर शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाएँ और कटाव को रोकने के लिए मजबूत उपायों की मांग कर रहे हैं।1
- नालंदा डाक विभाग द्वारा टाउन हॉल बिहार शरीफ में एक समीक्षा बैठक और सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।1
- बिहार के कोशी नदी के किनारे बसे इलाकों की स्थिति आज भी बेहद दयनीय बनी हुई है, जहाँ हर साल बाढ़, कटाव और विस्थापन के कारण लोगों का जीवन प्रभावित होता है। विशेष रूप से सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, अररिया, पूर्णिया और कटिहार जैसे जिलों में कोशी का प्रभाव सबसे अधिक देखा जाता है। नदी को 'बिहार का शोक' कहा जाता है, क्योंकि इसके बढ़ते जलस्तर से हर वर्ष गाँव डूब जाते हैं, खेत और घर कटाव में बह जाते हैं, जिसके कारण लोगों को बार-बार पलायन करना पड़ता है। इन क्षेत्रों में, खासकर तटबंधों और पटवन परियोजनाओं के पास, कई परिवार अस्थायी झोपड़ियों में जीवन बिताने को मजबूर हैं, जहाँ सड़क, बिजली, स्कूल और अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। खेती योग्य भूमि लगातार कम हो रही है, जिससे रोजगार की समस्या गहरा गई है। बाढ़ के कारण फसलें बर्बाद हो जाती हैं और युवा बेहतर अवसर की तलाश में पंजाब, दिल्ली व हरियाणा जैसे राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं। महिलाओं और बच्चों के लिए परिस्थितियाँ और भी कठिन हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ भी बुरी तरह प्रभावित हैं; बरसात के मौसम में स्कूल बंद हो जाते हैं और नाव ही एकमात्र आवागमन का साधन बचती है, जिससे समय पर स्वास्थ्य सुविधाएँ भी नहीं मिल पातीं। सरकार द्वारा तटबंधों के निर्माण व मरम्मत, राहत शिविरों की स्थापना, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सहायता, बाढ़ सहायता राशि और सड़क व पुल निर्माण जैसे कार्य किए जा रहे हैं। हालाँकि, कई क्षेत्रों में ये सुविधाएँ अभी भी पूरी तरह से नहीं पहुँच पाई हैं। इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद, स्थानीय लोग खेती, मछली पालन, पशुपालन और दिहाड़ी मजदूरी करके किसी तरह अपना जीवन यापन कर रहे हैं। उनकी प्रमुख माँगें हैं कि उन्हें स्थायी पुनर्वास मिले, बेहतर शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाएँ मिलें और कटाव को रोकने के लिए मजबूत व प्रभावी उपाय किए जाएँ।1
- नालंदा डाक मंडल द्वारा बिहारशरीफ के टाउन हॉल में एक समीक्षा बैठक सह सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान, उत्कृष्ट कार्य करने वाले डाककर्मियों, एजेंटों और अधिकारियों को सम्मानित किया गया। डाक अधीक्षक कुंदन कुमार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की योजनाओं की समीक्षा की। समीक्षा बैठक में कुंदन कुमार ने बचत योजनाओं, डाक जीवन बीमा, ग्रामीण डाक जीवन बीमा और डिजिटल बैंकिंग सेवाओं को आम लोगों तक पहुँचाने पर विशेष जोर दिया। इस अवसर पर, विभिन्न श्रेणियों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले कर्मियों को प्रशस्ति पत्र और पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह समारोह नालंदा डाक मंडल की उपलब्धियों का जश्न था, जिसमें कर्मियों के उत्कृष्ट योगदान को सराहा गया।1
- नालन्दा जिले में एक लूट कांड को अंजाम देने वाले अपराधी को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस गिरफ्तारी से क्षेत्र में हुए लूट की घटना के संबंध में कार्रवाई हुई है।2
- पटना जिले के बख्तियारपुर स्थित प्रसिद्ध सीढ़ी घाट पर 25 मई की सुबह करीब 10:30 बजे बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार पहुंचे। गंगा दशहरा के पावन अवसर पर उन्होंने भव्य गंगा महाआरती से पहले विधि-विधान से मां गंगा की पूजा-अर्चना की और आमजन की सुख-समृद्धि एवं कुशलक्षेम की कामना की। इस दौरान बख्तियारपुर के अच्युतानंद याजी भी उनके साथ मौजूद रहे। पूर्व मुख्यमंत्री और अच्युतानंद याजी ने सीढ़ी घाट परिसर के साथ-साथ चल रही विकास योजनाओं का भी निरीक्षण किया। उन्होंने घाट को और अधिक आकर्षक तथा सुंदर बनाने के तरीकों पर चर्चा की। सीढ़ी घाट परियोजना को नीतीश कुमार का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता है, जिसे बिहार सरकार ने लगभग 63.54 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया है। इस परियोजना में 330 मीटर लंबा भव्य घाट, मरीन ड्राइव जैसी आधुनिक सुविधाएं और गंगा की पुरानी धारा को पुनर्जीवित करने का कार्य शामिल है। यह घाट अब बनारस की तर्ज पर प्रत्येक बुधवार को आयोजित होने वाली भव्य गंगा महाआरती के लिए जाना जाता है, जिससे धार्मिक पर्यटन को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिल रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री ने पर्यटन विभाग और जल संसाधन विभाग के कार्यों की सराहना की और शेष बचे कार्यों को जल्द से जल्द पूरा करने का निर्देश दिया। इस अवसर पर घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और एक भक्तिमय माहौल देखने को मिला।1
- यह भक्तिपूर्ण संदेश इस आस्था को व्यक्त करता है कि बजरंगबली के चरणों में बैठने और उनकी शरण लेने से जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं।1
- परवलपुर थाने में दर्ज कांड संख्या 57/26 से संबंधित एक अभियुक्त की मृत्यु हो गई है।1
- नालंदा जिले के परवलपुर थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद उस व्यक्ति की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया। बाद में उसे रेफर किया गया, और उसकी मौत हो गई।1