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गंगा नदी में कुछ दिन पहले हजारों लीटर दूध बहाए जाने की घटना के बाद, अब एक और वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें सैकड़ों लीटर घी नदी में बहाया जा रहा है। इस घटना ने देश में व्याप्त बेरोजगारी और भुखमरी की चरम स्थिति के बीच ऐसी 'आस्था' पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह पोस्ट इस बात पर कड़ा एतराज़ जताती है कि जिस देश में कई जगहों पर लोगों को पीने का पानी तक नहीं मिल रहा है, वहाँ आस्था के नाम पर दूध और घी जैसी बहुमूल्य खाद्य सामग्री को नदियों में बहाना कहाँ तक सही है।
MD AZAD ABBAS
गंगा नदी में कुछ दिन पहले हजारों लीटर दूध बहाए जाने की घटना के बाद, अब एक और वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें सैकड़ों लीटर घी नदी में बहाया जा रहा है। इस घटना ने देश में व्याप्त बेरोजगारी और भुखमरी की चरम स्थिति के बीच ऐसी 'आस्था' पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह पोस्ट इस बात पर कड़ा एतराज़ जताती है कि जिस देश में कई जगहों पर लोगों को पीने का पानी तक नहीं मिल रहा है, वहाँ आस्था के नाम पर दूध और घी जैसी बहुमूल्य खाद्य सामग्री को नदियों में बहाना कहाँ तक सही है।
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- देश में व्याप्त गरीबी और भुखमरी के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाए, इस पर सवाल उठाते हुए, एक सोशल मीडिया पोस्ट में धर्म के नाम पर की जा रही भोजन की भारी बर्बादी पर गहरा गुस्सा व्यक्त किया गया है। पोस्ट में विशेष रूप से बताया गया है कि धार्मिक आयोजनों में 101 किलोग्राम आम रस और 30 क्विंटल गन्ने के रस का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिस पर कड़ी आपत्ति जताई गई है। पोस्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि यदि यह विशाल मात्रा में आम रस और गन्ने का रस किसी गरीब परिवार या किसी भी आम आदमी के पेट में जाता, तो उससे अपार दुआएं और आशीर्वाद मिलते। सवाल उठाया गया है कि आखिर ऐसा कौन सा धर्म-कर्म है जो इस तरह की बर्बादी को बढ़ावा देता है, और इस प्रथा को देश की गरीबी तथा भुखमरी का जिम्मेदार बताया गया है।1
- बढ़ती महंगाई को लेकर देश की जनता ने नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है, सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि वे एक दिन लोगों के हाथ में कटोरा थमा देंगे। जनता का कहना है कि नरेंद्र मोदी को देश और महंगाई से कोई मतलब नहीं है। उनकी यह बेपरवाही 'मस्तराम मस्ती में आग लगे बस्ती में' जैसी है, जिसके चलते पूरे देश की जनता में महंगाई बढ़ने को लेकर आक्रोश भड़का हुआ है।1
- गुजरात में आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रवेश से राजनीतिक हलचल बढ़ गई है, जिसके चलते आदिवासी समाज ने राज्य में सियासी ‘गेम’ को बदल दिया है।1
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- भागलपुर के सनोखर में, भीषण धूप से परेशान और बेहाल लोगों को आखिरकार राहत मिली है। इस स्थिति से निपटने के लिए पुलिस कर्मियों और समाजसेवियों ने मिलकर कमान संभाली, जिसके बाद लोगों को जरूरी मदद और सुकून मिल पाया।1
- बिहार के भागलपुर जिले के कहलगांव प्रखंड की धनोरा पंचायत में स्थित केजीएन क्रिकेट क्लब धनोरा में 24 मई 2026 को आयोजित सर्किल मैच के दौरान मारपीट का मामला सामने आया है। इस प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार ₹7000 और दूसरा पुरस्कार ₹5000 तय किया गया था। आरोप है कि दूसरे स्थान पर आने वाले खिलाड़ियों को ₹5000 के बजाय केवल ₹2500 दिए गए, जिस पर विवाद बढ़ गया। इसके बाद, कमेटी के सदस्यों द्वारा खिलाड़ियों के साथ मारपीट की गई। इस घटना के बाद, पीड़ित परिवार ने रसलपुर थाने में एक आवेदन दिया है।1
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