गर्मी से राहत के लिए बुढ़ीतोला नेपाल आने का न्योता, पलिया में प्रेस वार्ता कर दी गई महोत्सव की जानकारी 'गर्मी से बेहाल चलो, बुढ़ीतोला नेपाल'=अयोजक मंडल पलिया-खीरी।भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप से बेहाल लोगों को राहत देने के लिए पड़ोसी देश नेपाल के कैलाली जिले में स्थित बुढ़ीतोला में भव्य 'बुढ़ीतोला पर्यटन महोत्सव 2083' का आयोजन होने जा रहा है। इस महोत्सव के प्रचार-प्रसार और भारतीय पर्यटकों को आमंत्रित करने के उद्देश्य से रविवार को पलिया-भीरा मार्ग स्थित मां राज रानी होटल में एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। प्रेस वार्ता में नेपाल से आए आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने महोत्सव की विशेषताओं और वहां की प्राकृतिक सुंदरता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। प्रेस वार्ता के दौरान कार्यक्रम के संयोजक हरिदत्त भट्टराई ने बताया कि बुढ़ीतोला क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शीतल जलवायु के लिए जाना जाता है। जब तराई क्षेत्रों में तापमान 40 डिग्री के पार होता है, तब भी बुढ़ीतोला में तापमान 30-32 डिग्री के आसपास रहता है। उन्होंने बताया कि यह महोत्सव 30 अप्रैल से शुरू होकर 6 मई तक चलेगा। पर्यटकों के लिए पलिया से बुढ़ीतोला का सफर बेहद आसान और सुहाना है। यह क्षेत्र गोदावरी गंगा से लगभग 17 किलोमीटर और अतरिया बाजार से मात्र 24 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पहाड़ी रास्तों का आनंद लेते हुए कम समय और कम खर्च में पर्यटक यहाँ पहुँचकर घरेलू वातावरण के साथ ठहरने और मनोरंजन का लुत्फ उठा सकते हैं। वरिष्ठ पत्रकार विश्व कांत त्रिपाठी के संचालन में आयोजित इस वार्ता में नेपाल से आए संयोजक मंडल ने 'गर्मी से बेहाल चलो, बुढ़ीतोला नेपाल' का नारा दिया। इस दौरान नेपाल से आए पदाधिकारियों में हरी दत्त भट्टराई (संयोजक), रेवंत ढोला (प्रचार-प्रसार), पुष्पराज जोशी (प्रचार-प्रसार), भरत विक्रम शाह (आवास व्यवस्था) और माधव भट्ट (पर्यटन व्यवस्था)ने भी महोत्सव की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अपनी बात रखी। महोत्सव में पर्यटकों के लिए व्यू टावर, सेल्फी पॉइंट, ऐतिहासिक पत्थरों पर उकेरी गई कलाकृतियों और स्थानीय होम-स्टे की विशेष सुविधा दी जा रही है।इस मौके पर स्थानीय पत्रकारों में मुख्य रूप से फारूख हुसैन, शिशिर शुक्ला, प्रशांत मिश्रा, सोनू साहनी, जितेंद्र, संजय सिंह, गुड्डू सिद्दीकी और हरीश श्रीवास्तव सहित भारी संख्या में पत्रकार मौजूद रहे। प्रेस वार्ता के दौरान सभी ने इस आयोजन को दोनों देशों के पर्यटन को बढ़ावा देने वाला एक बड़ा कदम बताया। आयोजकों ने भरोसा दिलाया कि भारतीय पर्यटकों की सुरक्षा और सुविधा के लिए नेपाल प्रशासन और आयोजन समिति की ओर से पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
गर्मी से राहत के लिए बुढ़ीतोला नेपाल आने का न्योता, पलिया में प्रेस वार्ता कर दी गई महोत्सव की जानकारी 'गर्मी से बेहाल चलो, बुढ़ीतोला नेपाल'=अयोजक मंडल पलिया-खीरी।भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप से बेहाल लोगों को राहत देने के लिए पड़ोसी देश नेपाल के कैलाली जिले में स्थित बुढ़ीतोला में भव्य 'बुढ़ीतोला पर्यटन महोत्सव 2083' का आयोजन होने जा रहा है। इस महोत्सव के प्रचार-प्रसार और भारतीय पर्यटकों को आमंत्रित करने के उद्देश्य से रविवार को पलिया-भीरा मार्ग स्थित मां राज रानी होटल में एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। प्रेस वार्ता में नेपाल से आए आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने महोत्सव की विशेषताओं और वहां की प्राकृतिक सुंदरता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। प्रेस वार्ता के दौरान कार्यक्रम के संयोजक हरिदत्त भट्टराई ने बताया कि बुढ़ीतोला क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शीतल जलवायु के
लिए जाना जाता है। जब तराई क्षेत्रों में तापमान 40 डिग्री के पार होता है, तब भी बुढ़ीतोला में तापमान 30-32 डिग्री के आसपास रहता है। उन्होंने बताया कि यह महोत्सव 30 अप्रैल से शुरू होकर 6 मई तक चलेगा। पर्यटकों के लिए पलिया से बुढ़ीतोला का सफर बेहद आसान और सुहाना है। यह क्षेत्र गोदावरी गंगा से लगभग 17 किलोमीटर और अतरिया बाजार से मात्र 24 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पहाड़ी रास्तों का आनंद लेते हुए कम समय और कम खर्च में पर्यटक यहाँ पहुँचकर घरेलू वातावरण के साथ ठहरने और मनोरंजन का लुत्फ उठा सकते हैं। वरिष्ठ पत्रकार विश्व कांत त्रिपाठी के संचालन में आयोजित इस वार्ता में नेपाल से आए संयोजक मंडल ने 'गर्मी से बेहाल चलो, बुढ़ीतोला नेपाल' का नारा दिया। इस दौरान नेपाल से आए पदाधिकारियों में हरी दत्त
भट्टराई (संयोजक), रेवंत ढोला (प्रचार-प्रसार), पुष्पराज जोशी (प्रचार-प्रसार), भरत विक्रम शाह (आवास व्यवस्था) और माधव भट्ट (पर्यटन व्यवस्था)ने भी महोत्सव की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अपनी बात रखी। महोत्सव में पर्यटकों के लिए व्यू टावर, सेल्फी पॉइंट, ऐतिहासिक पत्थरों पर उकेरी गई कलाकृतियों और स्थानीय होम-स्टे की विशेष सुविधा दी जा रही है।इस मौके पर स्थानीय पत्रकारों में मुख्य रूप से फारूख हुसैन, शिशिर शुक्ला, प्रशांत मिश्रा, सोनू साहनी, जितेंद्र, संजय सिंह, गुड्डू सिद्दीकी और हरीश श्रीवास्तव सहित भारी संख्या में पत्रकार मौजूद रहे। प्रेस वार्ता के दौरान सभी ने इस आयोजन को दोनों देशों के पर्यटन को बढ़ावा देने वाला एक बड़ा कदम बताया। आयोजकों ने भरोसा दिलाया कि भारतीय पर्यटकों की सुरक्षा और सुविधा के लिए नेपाल प्रशासन और आयोजन समिति की ओर से पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
- *निघासन क्षेत्र के सहिजना गांव में दर्दनाक हादसा चारपाई पर बैठी महिला पर तेंदुए का हमला* *आदमखोर तेंदुए का खौफ इस घटना से दहशत में ग्रामीण* *घर के अंदर घात लगाए बैठा तेंदुआ महिला को बना डाला शिकार* *लखीमपुर खीरी में फिर मौत का तांडव तेंदुए के हमले से महिला की गई जान* *महिला को घर से घसीट ले गया तेंदुआ खेत में मिला क्षत विक्षत शव* *लगातार हमलों से सहमा इलाका वन विभाग पर उठे सवाल* *जबकि की दिन रात रेंजर भूपेंद्र चौधरी एसडीओ मनोज तिवारी की सक्रिय टीमो के बावजूद भी नहीं रुक रहे हमले ग्रामीणों में आक्रोश* *सहिजना गांव में तेंदुए का खौफ गांव में पसरा सन्नाटा लोग घरों में कैद* *रेंजर और SDO की टीम मौके पर लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि कब थमेगा तेंदुए का आतंक*1
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- Post by साइना2
- गौरीफंटा-खीरी। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित बाजारों की रौनक अब पूरी तरह गायब हो चुकी है और व्यापारियों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। नेपाल सरकार द्वारा हाल ही में लागू किए गए सख्त सीमा शुल्क नियमों का असर जिले के इंडो-नेपाल बॉर्डर से सटे बाजारों पर साफ दिखाई देने लगा है। विशेष रूप से कोतवाली गौरीफंटा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बनगंवा बाजार में इन दिनों सन्नाटा पसरा हुआ है। जिस बाजार में पहले सुबह से शाम तक नेपाली ग्राहकों की भारी भीड़ रहती थी और पैर रखने की जगह नहीं मिलती थी, वहां अब सड़कें और दुकानें सूनी नजर आ रही हैं।इस बदलाव की मुख्य वजह नेपाल सरकार का वह नया फैसला है,जिसके तहत अब भारतीय बाजार से महज 100 रुपये से अधिक का सामान नेपाल ले जाने पर सीमा शुल्क यानी भंसार देना अनिवार्य कर दिया गया है। इस नियम के लागू होने के बाद से नेपाली ग्राहकों ने भारतीय बाजारों में आना लगभग बंद कर दिया है, क्योंकि छोटे-मोटे घरेलू सामान की खरीदारी पर भी उन्हें अब भारी टैक्स चुकाना पड़ रहा है और घंटों की जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है। बनगंवा बाजार की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है, क्योंकि यहां के व्यापार का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह से नेपाल से आने वाले ग्राहकों पर ही निर्भर था। बाजार के दुकानदारों का कहना है कि अब हालात ऐसे हो गए हैं कि वे पूरे दिन हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हैं और बोहनी तक के लाले पड़ रहे हैं।व्यापारियों ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए बताया कि बिक्री ठप होने के कारण अब दुकान का किराया, बिजली का बिल और दैनिक खर्च निकालना भी नामुमकिन होता जा रहा है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि पहले उनकी दुकानों पर दिन भर ग्राहकों का तांता लगा रहता था, जिससे न केवल उनका घर चलता था बल्कि बाजार में अच्छी-खासी चहल-पहल रहती थी। व्यापारियों ने चिंता जताते हुए कहा कि अगर नेपाल सरकार ने अपना यह फैसला वापस नहीं लिया या इसमें ढील नहीं दी, तो उन्हें मजबूर होकर व्यापार बंद करना पड़ेगा और पलायन करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। बनगंवा के साथ-साथ सीमा से सटे अन्य छोटे-बड़े बाजारों में भी इसी तरह की स्थिति बनी हुई है। स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने अब दोनों देशों की सरकारों से इस गंभीर समस्या का समाधान निकालने की मांग की है, ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियां फिर से पटरी पर लौट सकें और लोगों की रोजी-रोटी सुरक्षित रह सके।3
- आज दिनांक 26 अप्रैल 2026 दिन रविवार को अंतर्राष्ट्रीय हिंदू परिषद राष्ट्रीय बजरंग दल के संस्थापक एवं अध्यक्ष माननीय डॉ प्रवीण तोगड़िया भाई साहब का भव्य स्वागत अमौसी हवाई अड्डे पर कानपुर प्रवास पर जाने के दौरान अवध प्रांत के सभी सम्मानित पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं ने अंतर्राष्ट्रीय हिंदू परिषद के प्रांत महामंत्री आदरणीय गौरव द्विवेदी भाई साहब की अध्यक्षता में किया.... देव जुनेजा प्रान्त उपाध्यक्ष अवध प्रान्त 63079111211
- संवाददाता: आकाश सिंह (AIMA), लखीमपुर खीरी। जहां एक ओर सरकार बच्चों को बेहतर शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य देने के लिए लगातार अभियान चला रही है, वहीं जनपद खीरी के मैलानी क्षेत्र में कई मासूम बच्चों का बचपन ईंट-भट्टों की भट्ठियों में झुलसता नजर आ रहा है। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें और कलम होनी चाहिए, उस उम्र में वे मजदूरी करने को मजबूर हैं। क्षेत्र के कई ईंट-भट्टों और मजदूरी स्थलों पर छोटे-छोटे बच्चे काम करते दिखाई दे रहे हैं। कोई ईंट ढो रहा है, तो कोई मिट्टी तैयार करने में लगा है। इन मासूमों के चेहरों पर बचपन की मुस्कान नहीं, बल्कि गरीबी और मजबूरी की थकान साफ झलकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आर्थिक तंगी और जागरूकता की कमी के चलते कई परिवार अपने बच्चों को स्कूल भेजने के बजाय काम पर लगा देते हैं। इससे न सिर्फ बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है, बल्कि उनके मौलिक अधिकारों का भी खुला उल्लंघन हो रहा है। बाल श्रम कानून के तहत बच्चों से मजदूरी कराना अपराध है, इसके बावजूद यह सिलसिला लगातार जारी है। सवाल यह उठता है कि आखिर प्रशासन और जिम्मेदार विभाग इस गंभीर समस्या पर कब कार्रवाई करेंगे? समाजसेवियों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो हजारों बच्चों का भविष्य अंधेरे में चला जाएगा। जरूरत है कि प्रशासन ईंट-भट्टों और अन्य कार्यस्थलों पर अभियान चलाकर बाल श्रम पर रोक लगाए और बच्चों को दोबारा स्कूलों तक पहुंचाने के लिए ठोस कदम उठाए। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर मुद्दे पर कब जागते हैं और मासूम बच्चों के हाथों से मजदूरी का बोझ हटाकर उन्हें शिक्षा का अधिकार दिला पाते हैं या नहीं।1
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- Post by Mandeep Singh1
- पालिया-खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व में पड़ रही भीषण गर्मी से इन दिनों वन्य जीव भी काफी परेशान दिखाई दे रहे हैं। प्यास बुझाने और शरीर को ठंडा रखने के लिए जंगल के जानवर जलाशयों और वाटर होल की तलाश में भटक रहे हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर दुधवा का एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है, जिसमें जंगल के दो सबसे ताकतवर जीवों का आमना-सामना होते हुए देखा जा सकता है। यह वीडियो करीब तीन से चार दिन पुराना बताया जा रहा है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि हाथियों का एक झुंड गर्मी से राहत पाने के लिए जंगल में बने एक वाटर होल में नहा रहा था। इसी दौरान एक टाइगर भी घूमता हुआ वहां पहुंच गया, लेकिन हाथियों ने उसे वहां टिकने नहीं दिया और खदेड़ दिया। दरअसल, गाइड राजू अपने ड्राइवर साथी के साथ पर्यटकों को लेकर जंगल सफारी पर निकले थे। सफारी के दौरान जब वे वाटर होल के पास पहुंचे, तो पर्यटकों को यह अद्भुत नजारा देखने को मिला। हाथियों का झुंड पानी में अठखेलियां कर रहा था, तभी वहां अचानक टाइगर के आ जाने से माहौल रोमांचक हो गया। जैसे ही टाइगर हाथियों के करीब आने लगा, एक हाथी ने उसे वहां से खदेड़ दिया ।हाथियों का कड़ा रुख देखकर टाइगर वहां से चुपचाप पीछे हट गया। पर्यटकों के लिए यह दृश्य किसी रोमांच से कम नहीं था, जिसे उन्होंने अपने कैमरों में कैद कर लिया। गर्मी के इस मौसम में वन्य जीवों की ऐसी गतिविधियों ने पर्यटकों को काफी रोमांचित किया है।1