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स्थानीय मार्गों पर आने-जाने में लोगों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
Ram Vishal
स्थानीय मार्गों पर आने-जाने में लोगों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
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- स्थानीय मार्गों पर आने-जाने में लोगों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।1
- बबेरू क्षेत्र के कमासिन में तैनात लेखपाल दिनेश यादव पर स्थानीय समस्याओं का निवारण न करने और अतिक्रमण को बढ़ावा देने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के अनुसार, लेखपाल यादव न केवल जनसमस्याओं के समाधान में उदासीनता बरतते हैं, बल्कि सक्रिय रूप से अतिक्रमण को प्रोत्साहन देते हैं।3
- जसपुरा ब्लॉक की ग्राम पंचायत सिंधन कला में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है, जहां 'स्वच्छ भारत, स्वच्छ गांव, सुंदर गांव' के नारे के बावजूद स्वच्छता मिशन के धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। आरोप है कि पंचायत सचिव और प्रधान मिलकर सफाई के नाम पर फर्जी बिल लगाकर एक ही दिन में तीन भुगतान करा लिए। करीब ₹50,000 ग्राम पंचायत के खाते से निकाले गए हैं, जबकि धरातल पर गांव में कहीं भी साफ-सफाई का काम दिखाई नहीं देता और कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। हालांकि, कागजों में गांव को पूरी तरह से चमका हुआ दिखाया गया है। अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या जिलाधिकारी इस कथित भ्रष्ट सचिव और प्रधान पर कोई कार्रवाई करेंगे या स्वच्छता मिशन का पैसा इसी तरह लुटता रहेगा।1
- बांदा शहर के पीली कोठी स्थित तुलसीलाज क्षेत्र में बुधवार सुबह करीब 6:30 बजे तेज रफ्तार बोलेरो के बेलगाम कहर ने सड़कों पर बढ़ते यातायात अनुशासनहीनता और कानून के डर की कमी को उजागर किया। यह घटना सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि एक भयावह तस्वीर है, जहाँ एक तेज रफ्तार बोलेरो ने पहले स्कूल जा रही एक महिला शिक्षक के रिक्शे को जोरदार टक्कर मारी। इस टक्कर से शिक्षिका गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़ीं। इसके बाद भी बेकाबू बोलेरो रुकी नहीं और आगे बढ़ते हुए एक दुकान का शटर तोड़कर भीतर जा घुसी, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई। घटनास्थल से बोलेरो के भीतर से शराब की बोतल मिलने की बात सामने आई है। यदि जांच में यह पुष्टि होती है कि चालक नशे की हालत में था, तो इसे केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सड़क पर खुलेआम मौत बांटने जैसा एक गंभीर आपराधिक कृत्य माना जाना चाहिए। नशे की हालत में गाड़ी चलाने वाला व्यक्ति निर्दोष राहगीरों की जान के लिए खतरा बन जाता है। पुलिस ने मामले में चालक को हिरासत में लेकर अपनी जांच शुरू कर दी है। हालांकि, इस घटना ने प्रशासन और कानून प्रवर्तन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या वे हर हादसे के बाद ही जागेंगे और क्या उनकी सख्ती सिर्फ चालान काटने तक ही सीमित रहेगी? या फिर ऐसे लापरवाह चालकों पर कोई ऐसी मिसाल कायम करने वाली कार्रवाई होगी, जिससे दूसरों को भी सबक मिले। यह समय केवल जांच करने का नहीं, बल्कि ऐसे लापरवाह लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने का है, क्योंकि सड़कें रफ्तार दिखाने का मैदान नहीं हैं और यदि कानून का भय समाप्त हो जाएगा, तो सड़कों पर वाहन नहीं, बल्कि मौत खुलेआम दौड़ेगी।1
- चित्रकूट जनपद में पत्रकार ओंकार सिंह चंदेल के खिलाफ थाना सरधुवा में दर्ज रंगदारी के मुकद्दमे को लेकर पत्रकार संगठनों में भारी आक्रोश है। भारतीय मीडिया महासंघ के बैनर तले पत्रकारों ने बांदा स्थित पुलिस उपमहानिरीक्षक, चित्रकूटधाम परिक्षेत्र को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। ज्ञापन में बताया गया कि यह रंगदारी का मुकद्दमा 13 जून 26 को पंजीकृत किया गया है। महासंघ ने डीआईजी को दिए ज्ञापन में गहरी आशंका जताई है कि यह मुकद्दमा ओंकार सिंह चंदेल द्वारा पत्रकारिता के अपने दायित्वों का निर्वहन करने के कारण द्वेषपूर्ण भावना से दर्ज कराया गया है। उनका कहना है कि ओंकार सिंह चंदेल पिछले कई वर्षों से एक नेशनल टीवी चैनल के माध्यम से चित्रकूट जनपद में अवैध खनन, शासकीय योजनाओं में अनियमितता एवं भ्रष्टाचार जैसे जनहित के मुद्दों को लगातार प्रमुखता से उठाते रहे हैं। महासंघ के अनुसार, इस मुकद्दमे का उद्देश्य स्वतंत्र एवं निष्पक्ष पत्रकारिता को दबाना तथा राष्ट्रीय चैनल से जुड़े पत्रकार को मानसिक व सामाजिक रूप से प्रताड़ित करना प्रतीत होता है, क्योंकि एफआईआर में वर्णित घटनाक्रम तथ्यहीन एवं विरोधाभासी है। पत्रकार संगठनों ने मांग की है कि मुकद्दमे की विवेचना थाना सरधुवा से हटाकर किसी राजपत्रित अधिकारी या क्षेत्राधिकारी स्तर के अधिकारी से कराई जाए। इसके साथ ही, विवेचना पूर्ण होने तक ओंकार सिंह चंदेल के विरुद्ध कोई दंडात्मक कार्रवाई या गिरफ्तारी न की जाए। उन्होंने पूरे प्रकरण की समयबद्ध, निष्पक्ष एवं वैज्ञानिक तरीके से जांच कराकर वास्तविक सत्यता सामने लाने की अपील की है, और कहा है कि यदि विवेचना में मुकद्दमा असत्य या द्वेषपूर्ण पाया जाता है, तो झूठा मुकद्दमा दर्ज कराने वाले वादी के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जाए। ज्ञापन सौंपने वालों में भारतीय मीडिया महासंघ के बांदा जिलाध्यक्ष अल्तमश हुसैन, आनंद तिवारी, शिवम तिवारी, अनवर रजा, शुभम सिंह, पवन यादव, राजेंद्र कुमार मिश्रा, पुरन राय, मो. हसन, गुल मोहम्मद, अयाज जमा, इमरान खान, संदीप, मनीष निगम, कुलदीप, मनोज, रिजवान खान, राहुल वर्मा, व अन्य पत्रकार मौजूद रहे। महासंघ ने डीआईजी से अनुरोध किया है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की स्वतंत्रता, निष्पक्षता एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु इस प्रकरण में तत्काल हस्तक्षेप कर न्यायोचित कार्रवाई की जाए।2
- sha ba ka bhai ha chae bole ne wala ake iman dar adami1