"पांच महाभूतों का रोकें क्षरण, तभी होगा प्रकृति संरक्षण" विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस के अवसर पर सामाजिक संस्था सुप्रयास द्वारा न्यू ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल, भिण्ड में "प्रकृति संरक्षण : हमारी संस्कृति, हमारी जिम्मेदारी" विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षत क्षमा शर्मा ने की। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रोफेसर इकबाल अली रहे। इस अवसर पर सुप्रयास के सचिव डॉ. मनोज जैन, प्रतिभा भदौरिया एवं अमन राजावत ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए प्रकृति संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया। मुख्य वक्ता प्रोफेसर इकबाल अली ने अपने संबोधन में भारतीय संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के गहरे संबंध को रेखांकित करते हुए कहा कि गोस्वामी तुलसीदास की चौपाई "छिति जल पावक गगन समीरा, पंच तत्व मिलि बना शरीरा" केवल आध्यात्मिक संदेश नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण का शाश्वत वैज्ञानिक सिद्धांत है। उन्होंने कहा कि पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—ये पंचमहाभूत केवल मानव शरीर के ही नहीं, बल्कि अमीबा जैसे सूक्ष्म जीव से लेकर विशाल ब्लू व्हेल तक सम्पूर्ण जीव-जगत के अस्तित्व का आधार हैं। यदि इन पंचमहाभूतों का संतुलन बिगड़ा, तो मानव सभ्यता का भविष्य भी संकट में पड़ जाएगा। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति को सदैव पूजनीय माना गया है। भवन निर्माण से पहले भूमि पूजन कर पृथ्वी का सम्मान किया जाता है। धार्मिक आयोजनों में कलश के माध्यम से जल का पूजन होता है। श्राद्ध और तर्पण में जल का विशेष महत्व है। हवन के माध्यम से अग्नि की आराधना की जाती है। भागवत कथा एवं अन्य धार्मिक आयोजनों में नवग्रह पूजन के माध्यम से आकाश का स्मरण किया जाता है तथा कलियुग में वायुपुत्र भगवान हनुमान की आराधना वायु तत्व के महत्व का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हमारे धार्मिक संस्कार हमें प्रकृति का सम्मान करना सिखाते हैं, इसलिए प्रकृति का संरक्षण हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी भी है। प्रोफेसर अली ने कहा कि पृथ्वी का अंधाधुंध दोहन, अवैध रेत खनन, नदियों का प्रदूषण तथा प्राकृतिक संसाधनों का अनियंत्रित दोहन भविष्य में गंभीर पर्यावरणीय संकट पैदा करेगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि पृथ्वी का अनावश्यक छेदन एवं भेदन रोका जाए तथा वर्षा जल संचयन को जन-आंदोलन बनाया जाए, ताकि प्रकृति से प्राप्त जल पुनः प्रकृति को लौटाया जा सके। उन्होंने कहा कि वन हमारी प्राणवायु के स्रोत हैं। वनों का संरक्षण, वन्यजीवों की रक्षा, प्लास्टिक के उपयोग में कमी और ऊर्जा संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि अनावश्यक बिजली के उपकरण बंद रखें, सौर ऊर्जा एवं सोलर कुकर जैसे स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को अपनाएँ तथा भोजन बनाने से पहले दाल और चावल को भिगोकर ऊर्जा की बचत करें। उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने जीवन में जितनी ऑक्सीजन का उपयोग करता है, उसका सबसे बड़ा स्रोत वृक्ष हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनका संरक्षण करने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने शिक्षक दिवस, मातृ दिवस, पितृ दिवस, जन्मदिन तथा अन्य शुभ अवसरों पर पौधे उपहार में देने की परंपरा विकसित करने का सुझाव दिया। सुप्रयास के सचिव डॉ. मनोज जैन ने कहा कि विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का अवसर है। प्रकृति हमारी माता है, जो हमें शुद्ध वायु, स्वच्छ जल, अन्न और जीवन प्रदान करती है। महात्मा गांधी का यह कथन आज भी उतना ही प्रासंगिक है कि "प्रकृति मनुष्य की हर आवश्यकता पूरी कर सकती है, लेकिन उसके लालच को नहीं।" उन्होंने कहा कि आज ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन, घटते वन, प्रदूषित नदियाँ और प्लास्टिक प्रदूषण पूरी मानवता के सामने गंभीर चुनौती बन चुके हैं। यदि हमने अभी से प्रकृति की रक्षा नहीं की, तो आने वाली पीढ़ियों को इसका भारी मूल्य चुकाना पड़ेगा। डॉ. जैन ने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में छोटे-छोटे लेकिन प्रभावी कदम उठाएँ—हर वर्ष कम से कम एक पौधा लगाएँ और उसकी देखभाल करें, जल की प्रत्येक बूंद बचाएँ, वर्षा जल संचयन अपनाएँ, सिंगल-यूज़ प्लास्टिक का बहिष्कार करें, आवश्यकता न होने पर बिजली के उपकरण बंद रखें, सौर ऊर्जा का उपयोग बढ़ाएँ तथा Reduce, Reuse और Recycle के सिद्धांत को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएँ। इस अवसर पर प्रतिभा भादौरिया एवं अमन राजावत ने भी प्रकृति संरक्षण के विभिन्न आयामों पर अपने विचार व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण को अपने जीवन का संस्कार बनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम के अंत में सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं नागरिकों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि वे पंचमहाभूतों की रक्षा करेंगे, जल बचाएँगे, अधिक से अधिक वृक्ष लगाएंगे, ऊर्जा की बचत करेंगे, प्लास्टिक के उपयोग को कम करेंगे तथा प्रकृति के साथ संतुलित और जिम्मेदार जीवन जीने का प्रयास करेंगे। कार्यक्रम का समापन सुप्रयास के इस संदेश के साथ हुआ—
"पांच महाभूतों का रोकें क्षरण, तभी होगा प्रकृति संरक्षण" विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस के अवसर पर सामाजिक संस्था सुप्रयास द्वारा न्यू ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल, भिण्ड में "प्रकृति संरक्षण : हमारी संस्कृति, हमारी जिम्मेदारी" विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षत क्षमा शर्मा ने की। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रोफेसर इकबाल अली रहे। इस अवसर पर सुप्रयास के सचिव डॉ. मनोज जैन, प्रतिभा भदौरिया एवं अमन राजावत ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए प्रकृति संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया। मुख्य वक्ता प्रोफेसर इकबाल अली ने अपने संबोधन में भारतीय संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के गहरे संबंध को रेखांकित करते हुए कहा कि गोस्वामी तुलसीदास की चौपाई "छिति जल पावक गगन समीरा, पंच तत्व मिलि बना शरीरा" केवल आध्यात्मिक संदेश नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण का शाश्वत वैज्ञानिक सिद्धांत है। उन्होंने कहा कि पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—ये पंचमहाभूत केवल मानव शरीर के ही नहीं, बल्कि अमीबा जैसे सूक्ष्म जीव से लेकर विशाल ब्लू व्हेल तक सम्पूर्ण जीव-जगत के अस्तित्व का आधार हैं। यदि इन पंचमहाभूतों का संतुलन बिगड़ा, तो मानव सभ्यता का भविष्य भी संकट में पड़ जाएगा। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति को सदैव पूजनीय माना गया है। भवन निर्माण से पहले भूमि पूजन कर पृथ्वी का सम्मान किया जाता है। धार्मिक आयोजनों में कलश के माध्यम से जल का पूजन होता है। श्राद्ध और तर्पण में जल का विशेष महत्व है। हवन के माध्यम से अग्नि की आराधना की जाती है। भागवत कथा एवं अन्य धार्मिक
आयोजनों में नवग्रह पूजन के माध्यम से आकाश का स्मरण किया जाता है तथा कलियुग में वायुपुत्र भगवान हनुमान की आराधना वायु तत्व के महत्व का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हमारे धार्मिक संस्कार हमें प्रकृति का सम्मान करना सिखाते हैं, इसलिए प्रकृति का संरक्षण हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी भी है। प्रोफेसर अली ने कहा कि पृथ्वी का अंधाधुंध दोहन, अवैध रेत खनन, नदियों का प्रदूषण तथा प्राकृतिक संसाधनों का अनियंत्रित दोहन भविष्य में गंभीर पर्यावरणीय संकट पैदा करेगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि पृथ्वी का अनावश्यक छेदन एवं भेदन रोका जाए तथा वर्षा जल संचयन को जन-आंदोलन बनाया जाए, ताकि प्रकृति से प्राप्त जल पुनः प्रकृति को लौटाया जा सके। उन्होंने कहा कि वन हमारी प्राणवायु के स्रोत हैं। वनों का संरक्षण, वन्यजीवों की रक्षा, प्लास्टिक के उपयोग में कमी और ऊर्जा संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि अनावश्यक बिजली के उपकरण बंद रखें, सौर ऊर्जा एवं सोलर कुकर जैसे स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को अपनाएँ तथा भोजन बनाने से पहले दाल और चावल को भिगोकर ऊर्जा की बचत करें। उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने जीवन में जितनी ऑक्सीजन का उपयोग करता है, उसका सबसे बड़ा स्रोत वृक्ष हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनका संरक्षण करने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने शिक्षक दिवस, मातृ दिवस, पितृ दिवस, जन्मदिन तथा अन्य शुभ अवसरों पर पौधे उपहार में देने की परंपरा विकसित करने का सुझाव दिया। सुप्रयास के सचिव डॉ. मनोज जैन ने कहा कि विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन
नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का अवसर है। प्रकृति हमारी माता है, जो हमें शुद्ध वायु, स्वच्छ जल, अन्न और जीवन प्रदान करती है। महात्मा गांधी का यह कथन आज भी उतना ही प्रासंगिक है कि "प्रकृति मनुष्य की हर आवश्यकता पूरी कर सकती है, लेकिन उसके लालच को नहीं।" उन्होंने कहा कि आज ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन, घटते वन, प्रदूषित नदियाँ और प्लास्टिक प्रदूषण पूरी मानवता के सामने गंभीर चुनौती बन चुके हैं। यदि हमने अभी से प्रकृति की रक्षा नहीं की, तो आने वाली पीढ़ियों को इसका भारी मूल्य चुकाना पड़ेगा। डॉ. जैन ने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में छोटे-छोटे लेकिन प्रभावी कदम उठाएँ—हर वर्ष कम से कम एक पौधा लगाएँ और उसकी देखभाल करें, जल की प्रत्येक बूंद बचाएँ, वर्षा जल संचयन अपनाएँ, सिंगल-यूज़ प्लास्टिक का बहिष्कार करें, आवश्यकता न होने पर बिजली के उपकरण बंद रखें, सौर ऊर्जा का उपयोग बढ़ाएँ तथा Reduce, Reuse और Recycle के सिद्धांत को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएँ। इस अवसर पर प्रतिभा भादौरिया एवं अमन राजावत ने भी प्रकृति संरक्षण के विभिन्न आयामों पर अपने विचार व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण को अपने जीवन का संस्कार बनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम के अंत में सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं नागरिकों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि वे पंचमहाभूतों की रक्षा करेंगे, जल बचाएँगे, अधिक से अधिक वृक्ष लगाएंगे, ऊर्जा की बचत करेंगे, प्लास्टिक के उपयोग को कम करेंगे तथा प्रकृति के साथ संतुलित और जिम्मेदार जीवन जीने का प्रयास करेंगे। कार्यक्रम का समापन सुप्रयास के इस संदेश के साथ हुआ—
- माननीय उच्च न्यायालय, खण्डपीठ ग्वालियर के निर्देशानुसार माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, भिण्ड डॉ. मनोज गोयल के नेतृत्व में थाना देहात भिण्ड के सामने विशेष वाहन चेकिंग अभियान चलाकर मोबाइल कोर्ट का आयोजन किया गया माननीय उच्च न्यायालय, खण्डपीठ ग्वालियर के निर्देशानुसार माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, भिण्ड डॉ. मनोज गोयल के नेतृत्व में थाना देहात भिण्ड के सामने विशेष वाहन चेकिंग अभियान चलाकर मोबाइल कोर्ट का आयोजन किया गया । अभियान के दौरान चार पहिया वाहनों में लगी काली फिल्म, अनधिकृत हूटर, सीट बेल्ट के उपयोग, दोपहिया वाहन चालकों द्वारा हेलमेट धारण करने तथा स्कूल बसों की सुरक्षा संबंधी मानकों की सघन जांच की गई । चेकिंग के दौरान लगभग 700 वाहनों का निरीक्षण किया गया । यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध चालानी कार्यवाही करते हुए समन शुल्क वसूल किया गया । उक्त अभियान के दौरान थाना प्रभारी निरीक्षक शिवप्रताप सिंह राजावत, उप निरीक्षक अजय यादव, उप निरीक्षक विजय शिवहरे, उप निरीक्षक रत्ना जैन, थाना देहात का पुलिस स्टाफ तथा न्यायालय का स्टाफ उपस्थित रहा ।4
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद..!!* पहली बार संसद भवन पहुंचे धर्मेंद्र प्रधान का एनडीए सांसदों ने *🔸केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद..!!* पहली बार संसद भवन पहुंचे धर्मेंद्र प्रधान का एनडीए सांसदों ने... मकरद्वार पर जोरदार स्वागत किया।1
- जसवंतनगर ब्लॉक में लगा निःशुल्क होम्योपैथिक चिकित्सा शिविर जसवंतनगर ब्लॉक में लगा निःशुल्क होम्योपैथिक चिकित्सा शिविर, 50 मरीजों का हुआ उपचार जसवंतनगर। उत्तर प्रदेश राज्य आयुष सोसाइटी के अंतर्गत संचालित "आयुष आपके द्वार" योजना के तहत मंगलवार को जसवंतनगर ब्लॉक परिसर में राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय, हनुमन्त खेड़ा की ओर से निःशुल्क होम्योपैथिक चिकित्सा शिविर आयोजित किया गया। शिविर में 50 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें निःशुल्क होम्योपैथिक दवाएं वितरित की गईं। शिविर में चिकित्सकों ने मरीजों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं सुनीं और रोग के लक्षणों के अनुसार आवश्यक परामर्श एवं दवाएं उपलब्ध कराईं। शिविर का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को उनके घर के निकट बेहतर एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना तथा आयुष चिकित्सा पद्धति के प्रति लोगों को जागरूक करना रहा। शिविर में मौजूद चिकित्साधिकारी डॉ. सीपिका गुप्ता ने बताया कि वर्तमान मौसम में सर्दी-जुकाम, वायरल बुखार, गले में खराश, खांसी, पेट संबंधी संक्रमण, दस्त, उल्टी, त्वचा रोग तथा एलर्जी जैसी मौसमी बीमारियों के मामले बढ़ जाते हैं। उन्होंने लोगों से साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने, उबला या स्वच्छ पानी पीने, ताजा एवं संतुलित भोजन करने, बारिश के पानी में भीगने से बचने तथा बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय परामर्श लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि होम्योपैथिक चिकित्सा में प्रत्येक मरीज के लक्षणों और प्रकृति के अनुसार उपचार किया जाता है, जिससे रोग की जड़ तक पहुंचकर उपचार करने का प्रयास किया जाता है। शिविर के दौरान फार्मासिस्ट अवधेश कुमार एवं नर्सिंग स्टाफ महेश बाबू ने मरीजों का पंजीकरण, स्वास्थ्य परीक्षण और दवा वितरण में सहयोग किया। आयोजकों ने बताया कि यह शिविर राष्ट्रीय आयुष मिशन एवं जिला होम्योपैथिक चिकित्सा अधिकारी, इटावा के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय, हनुमन्त खेड़ा की देखरेख में आयोजित किया गया। शिविर में पहुंचे लोगों ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे शिविरों से ग्रामीणों को बिना किसी शुल्क के उपचार और स्वास्थ्य संबंधी परामर्श मिल रहा है।1
- इटावा के तिकोनिया पर पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा बनाए जा रहे पुलिस निर्माण कार्य पर सवाल उठने लगे हैं ___________ _____ब्रेकिंग न्यूज़__ ⏩ पुल का निर्माण अभी पूरा भी नहीं हुआ है। ⏩और पुल को यातायात के लिए खोला भी नहीं गया है। ⏩लेकिन निर्माणाधीन हिस्से में दरारें दिखाई देने लगी हैं। ⏩ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है। ⏩कि यदि निर्माण के दौरान ही यह स्थिति है। ⏩तो पुल शुरू होने के बाद इसकी गुणवत्ता और मजबूती कितनी टिकाऊ रहेगी। ⏩हालांकि इस मामले में निर्माण एजेंसी और पीडब्ल्यूडी विभाग का पक्ष सामने आना अभी बाकी है। ⏩यदि दरारें वास्तव में निर्माण संबंधी खामी हैं। ⏩तो संबंधित अधिकारियों द्वारा जांच कर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। ⏩अब सभी की नजर इस बात पर है कि पीडब्ल्यूडी विभाग इन दरारों को किस तरह देखता है और क्या गुणवत्ता की जांच कर आवश्यक सुधार किए जाएंगे।1
- आम रास्ता भूखंड क्रमांक 90,127 पर कब्जा कर रोक आम रास्ता *शासकीय जमीन पर अवैध कब्जा आने-जाने बालों के लिए रास्ता हुआ अवरुद्ध* *गोरमी तहसील के अंतर्गत आने वाले बालूपुरा ग्राम पंचायत का मामला* *आम रास्ता भूखंड क्रमांक 90,127 पर कब्जा कर रोक आम रास्ता* *कई बार हुआ सीमांकन पर फिर भी नहीं कब्जा धारीयों ने छोड़ा कब्जा* *दैनिक उदय समाचार /गोरमी* गोरमी : तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत बालूपुरा में आम रास्ता न होने से स्थानी जनों को काफी परेशानी हो रही है हम आपको बता दें कि मिली जानकारी के अनुसार स्थानीय जैन बताते हैं कि बालूपुरा से बंबा की ओर जाने वाला आम रास्ता क्रमांक 90,127 पर स्थानीय लोगों ने अपने स्वयं के वैसे सरपंच की सहमति से मिट्टी डलवाकर रोड का निर्माण कराया था जिसको लेकर गवर्नमेंट तहसीलदार मनीष दुबे के नेतृत्व में सीमांकन की कार्रवाई भी की गई थी, सीमांकन होने के उपरांत ही इस पर मिट्टी डालकर कच्ची रोड का निर्माण कराया गया लेकिन स्थानी कुछ दबंगों द्वारा अपने प्राचीन बने हुए मिट्टी के टीले इत्यादि को बढ़ाकर फिर से इस रोड को तोड़ने का काम किया जा रहा है, इस संबंध में लगातार गोरमी तहसीलदार जनपद पंचायत एवं जिला पंचायत तक शिकायत की जा रही है पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है स्थानीय जन बताते हैं कि इस घटना को लेकर के लगातार गोरमी थाना प्रभारी को भी जानकारी दी जा रही है एवं तहसीलदार बा एसडीओपी महोदय मेहगांव व एसपी महोदय भिंड को भी इस संबंध में अवगत कराया जा चुका है, पर इस और कोई भी ध्यान देने को तैयार नहीं है, स्थानी जनों का कहना है कि यदि ऐसी ही स्थिति बनी रही तो किसी दिन यहां बड़ी दुर्घटना भी घटित हो सकती है जिसके लिए जिम्मेदार समस्त प्रशासनिक अधिकारी होंगे1
- उमरा यात्रा से लौटे जायरीनों का भव्य स्वागत, फूल-मालाओं से किया सम्मान जसवंतनगर। पवित्र उमरा यात्रा पूरी कर मक्का-मदीना शरीफ से सकुशल लौटे नगर के जायरीनों का शनिवार को मोहल्ला लुधपुरा स्थित सांसद प्रतिनिधि हाजी मोहम्मद समीर खान के आवास पर गर्मजोशी के साथ स्वागत एवं सम्मान किया गया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने फूल-मालाएं पहनाकर उनका अभिनंदन किया तथा उनके स्वस्थ एवं मंगलमय जीवन की कामना की। उमरा यात्रा से लौटे मौलाना कमालउद्दीन, अजहर मुल्ला जी एवं मोहम्मद हासिम खान का स्वागत करने के लिए बड़ी संख्या में शुभचिंतक और समाज के लोग एकत्र हुए। सभी ने उन्हें मुबारकबाद देते हुए देश, प्रदेश और क्षेत्र में अमन, भाईचारे तथा खुशहाली के लिए की गई दुआओं की सराहना की। इस अवसर पर सांसद प्रतिनिधि हाजी मोहम्मद समीर खान ने कहा कि उमरा की यात्रा प्रत्येक मुसलमान के लिए अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक महत्व रखती है। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक अवसर समाज में भाईचारे, सद्भाव और इंसानियत का संदेश देते हैं। उन्होंने उमरा से लौटे जायरीनों का सम्मान करते हुए उनके उज्ज्वल एवं स्वस्थ जीवन की कामना की। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने जायरीनों से यात्रा के अनुभव भी साझा किए। जायरीनों ने मक्का और मदीना शरीफ में इबादत के दौरान देश की तरक्की, समाज में शांति, आपसी सौहार्द और सभी की खुशहाली के लिए विशेष दुआ करने की बात कही। स्वागत समारोह में समाजवादी पार्टी के नगर महासचिव राशिद सिद्दीकी, हाजी मोहम्मद सलीम खान, मोहम्मद इकलाख फारूकी, मुजीबउद्दीन फारूकी, मोहम्मद असलम खान सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।1
- ब्रेकिंग न्यूज़ | गोंडा जनहित के मुद्दों पर सपाइयों का हल्ला बोल, मनकापुर में विरोध प्रदर्शन गोंडा। समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर मनकापुर तहसील में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। समाजवादी पार्टी के नेता हाफिज मलिक (गौरा विधानसभा-301) के नेतृत्व में सैकड़ों समर्थक मनकापुर तहसील परिसर पहुंचे और उपजिलाधिकारी (एसडीएम) मनकापुर को चार सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। सपा नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों से आम जनता महंगाई, बेरोजगारी और किसानों की समस्याओं से जूझ रही है। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने जनहित के मुद्दों पर सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। ज्ञापन की प्रमुख मांगें: रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों को ध्वस्त करने के आदेश को तत्काल वापस लिया जाए। किसानों की खाद से जुड़ी समस्याओं का समाधान किया जाए तथा खाद की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी पर प्रभावी कदम उठाकर आम जनता को राहत दी जाए। देश में लागू की जा रही एथेनॉल (E-20) नीति पर पुनर्विचार किया जाए। प्रदर्शन के बाद सपा नेताओं ने कहा कि यदि जनहित की इन मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो पार्टी आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखेगी। वहीं, एसडीएम मनकापुर ने ज्ञापन प्राप्त कर उसे शासन तक भेजने का दिया आश्वासन रिपोर्ट आवेश अंसारी की1
- थाना गोहद चौराहा पुलिस द्वारा हत्या के प्रयास मामले में 15 माह से फरार 5000/- रुपये के इनामी आरोपी को किया गिरफ्तार गोहद चोराहा थाना क्षेत्र अंतर्गत पिपाहडी हेड फतेहपुर के पास दिनांक 05 अप्रेल 2025 को रास्ते में पुरानी रंजिश को लेकर पांच आरोपीगणों ने एक राय होकर जयवीर गुर्जर की मारपीट की एंव जान से मारने की नियत से पीठ में गोली मार दी।उक्त अपराध में चार आरोपियों को पूर्व में गिरफ्तार किया जा चुका था एंव एक आरोपी फरार चल रहा था उक्त आरोपी के विरुध्द भिंड पुलिस अधीक्षक द्वारा 5000/- रुपये का इनाम घोषित किया गया। उक्त फरार आरोपी को आज मंगलवार लगभग 5 बजे मुखविर सूचना पर कनीपुरा मोड से गिरफ्तार किया गया एंव एक 315 बोर का कट्टा व एक खाली खोखा जप्त किया गया।1