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गांव आबसर से बॉलीवुड तक पहुंचा गिरधर स्वामी 18 साल से बॉलीवुड में सक्रिय, 75 से अधिक फीचर फिल्मों और कई शॉर्ट फिल्मों में निभा चुके हैं कास्टिंग डायरेक्टर की भूमिका छापर। कस्बे के निकटवर्ती छोटे से गांव आबसर की मिट्टी से निकलकर मुंबई की मायानगरी में अपनी अलग पहचान बनाने वाले गिरधर स्वामी का सफर संघर्ष, मेहनत और लक्ष्य के प्रति समर्पण की कहानी है। महज 19 वर्ष की उम्र में घर से निकलकर मुंबई पहुंचे स्वामी ने फिल्म इंडस्ट्री की बारीकियों को समझते हुए कास्टिंग के क्षेत्र में कदम रखा और निरंतर मेहनत के दम पर बतौर कास्टिंग डायरेक्टर अपनी पहचान कायम की। फिल्म इंडस्ट्री में करीब 18 वर्षों से सक्रिय गिरधर स्वामी अब तक 75 से अधिक फीचर फिल्मों, 10 से अधिक शॉर्ट फिल्मों और 15 से अधिक म्यूजिक वीडियो की कास्टिंग में योगदान दे चुके हैं। उनके अनुभव की फेहरिस्त में ‘अंधाधुन’, ‘राउड़ी राठौर’, ‘वजीर’, ‘सनम तेरी कसम’, ‘बाबूमोशाय बंदूकबाज’, ‘कुली नंबर 1’, ‘यारियां 2’, ‘वेलकम टू द जंगल’ और ‘वेलकम 3’ जैसी फिल्मों के नाम शामिल हैं। 19 साल की उम्र में छोड़ा गांव, मुंबई को बनाया कर्मभूमि आबसर से मुंबई तक का सफर गिरधर स्वामी के लिए आसान नहीं था। 19 वर्ष की उम्र में घर से निकलकर उन्होंने मायानगरी का रुख किया। शुरुआत में फिल्म इंडस्ट्री की कार्यप्रणाली को समझना और सही लोगों से जुड़ना उनके सामने बड़ी चुनौती थी। करीब तीन-चार वर्ष तक लगातार काम करने और सीखने के बाद उन्होंने इंडस्ट्री की कार्यशैली को करीब से समझा। स्वामी बताते हैं कि शुरुआत के चार साल बड़ी कठिनाई के साथ बीते लेकिन लक्ष्य स्पष्ट था,मंजिल तक पहुंचने के लिए धैर्य के साथ लगातार सीखना और मेहनत करना जरूरी था। कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया। उनका मानना है कि फिल्म इंडस्ट्री में आगे बढ़ने के लिए निरंतर सीखने की प्रवृत्ति और धैर्य बेहद जरूरी है।समय के साथ आज मुझे इंडस्ट्री में अच्छी पहचान मिली है। ‘3 इडियट्स’ से मिली बड़ी शुरुआत गिरधर स्वामी के फिल्मी सफर का महत्वपूर्ण पड़ाव राजकुमार हिरानी की चर्चित फिल्म ‘3 इडियट्स’ रहा। स्वामी इसे अपने करियर की बड़ी शुरुआत मानते हैं। उस समय वे इंडस्ट्री में नए थे और उन्हें अंदाजा नहीं था कि यह फिल्म इतनी बड़ी सफलता हासिल करेगी। ‘3 इडियट्स’ के अनुभव ने उन्हें फिल्म जगत को करीब से समझने और आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिया। इसके बाद उनके काम का दायरा लगातार बढ़ता गया और वे फिल्मों में कलाकारों की तलाश तथा उनके चयन से जुड़े कार्यों में सक्रिय होते गए। चेहरे से ज्यादा किरदार की जरूरत को समझना जरूरी गिरधर स्वामी के अनुसार कास्टिंग डायरेक्टर का काम केवल किसी कलाकार का चेहरा देखकर चयन करना नहीं है। इसके लिए यह समझना जरूरी होता है कि कोई कलाकार किसी विशेष किरदार के लिए कितना उपयुक्त है। कलाकार की अभिनय क्षमता, संवाद अदायगी और किरदार की जरूरत को समझकर सही चयन करना कास्टिंग डायरेक्टर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। अब ‘तेरा साईं’ की कास्टिंग की जिम्मेदारी इन दिनों गिरधर स्वामी बॉलीवुड अभिनेता संजय मिश्रा की फिल्म ‘तेरा साईं’ की कास्टिंग से जुड़े हुए हैं। फिल्म प्रेम, करुणा और सेवा के संदेश पर आधारित बताई जा रही है। फिल्म के लिए कलाकारों के चयन की जिम्मेदारी भी स्वामी निभा रहे हैं। युवाओं के लिए प्रेरणा बना आबसर से मुंबई तक का सफर गांव आबसर से निकलकर बॉलीवुड तक पहुंचे गिरधर स्वामी की कहानी ग्रामीण और छोटे शहरों के युवाओं के लिए प्रेरणा है। उनका सफर बताता है कि बड़े शहरों और बड़ी इंडस्ट्री तक पहुंचने के लिए केवल बड़े शहर से होना जरूरी नहीं, बल्कि लक्ष्य के प्रति स्पष्टता, लगातार मेहनत और सीखने का जज्बा भी उतना ही महत्वपूर्ण है। आबसर की गलियों से शुरू हुआ गिरधर स्वामी का सफर आज मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री तक पहुंच चुका है। करीब दो दशक के अनुभव के बाद भी वे लगातार नए प्रोजेक्ट्स और नए कलाकारों के साथ काम कर रहे हैं। यही निरंतरता उनके सफर को खास बनाती है।

9 hrs ago
user_Bhagirath Suthar
Bhagirath Suthar
सुजानगढ़, चूरू, राजस्थान•
9 hrs ago

गांव आबसर से बॉलीवुड तक पहुंचा गिरधर स्वामी 18 साल से बॉलीवुड में सक्रिय, 75 से अधिक फीचर फिल्मों और कई शॉर्ट फिल्मों में निभा चुके हैं कास्टिंग डायरेक्टर की भूमिका छापर। कस्बे के निकटवर्ती छोटे से गांव आबसर की मिट्टी से निकलकर मुंबई की मायानगरी में अपनी अलग पहचान बनाने वाले गिरधर स्वामी का सफर संघर्ष, मेहनत और लक्ष्य के प्रति समर्पण की कहानी है। महज 19 वर्ष की उम्र में घर से निकलकर मुंबई पहुंचे स्वामी ने फिल्म इंडस्ट्री की बारीकियों को समझते हुए कास्टिंग के क्षेत्र में कदम रखा और निरंतर मेहनत के दम पर बतौर कास्टिंग डायरेक्टर अपनी पहचान कायम की। फिल्म इंडस्ट्री में करीब 18 वर्षों से सक्रिय गिरधर स्वामी अब तक 75 से अधिक फीचर फिल्मों, 10 से अधिक शॉर्ट फिल्मों और 15 से अधिक म्यूजिक वीडियो की कास्टिंग में योगदान दे चुके हैं। उनके अनुभव की फेहरिस्त में ‘अंधाधुन’, ‘राउड़ी राठौर’, ‘वजीर’, ‘सनम तेरी कसम’, ‘बाबूमोशाय बंदूकबाज’, ‘कुली नंबर 1’, ‘यारियां 2’, ‘वेलकम टू द जंगल’ और ‘वेलकम 3’ जैसी फिल्मों के नाम शामिल हैं। 19 साल की उम्र में छोड़ा गांव, मुंबई को बनाया कर्मभूमि आबसर से मुंबई तक का सफर गिरधर स्वामी के लिए आसान नहीं था। 19 वर्ष की उम्र में घर से निकलकर उन्होंने मायानगरी का रुख किया। शुरुआत में फिल्म इंडस्ट्री की कार्यप्रणाली

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को समझना और सही लोगों से जुड़ना उनके सामने बड़ी चुनौती थी। करीब तीन-चार वर्ष तक लगातार काम करने और सीखने के बाद उन्होंने इंडस्ट्री की कार्यशैली को करीब से समझा। स्वामी बताते हैं कि शुरुआत के चार साल बड़ी कठिनाई के साथ बीते लेकिन लक्ष्य स्पष्ट था,मंजिल तक पहुंचने के लिए धैर्य के साथ लगातार सीखना और मेहनत करना जरूरी था। कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया। उनका मानना है कि फिल्म इंडस्ट्री में आगे बढ़ने के लिए निरंतर सीखने की प्रवृत्ति और धैर्य बेहद जरूरी है।समय के साथ आज मुझे इंडस्ट्री में अच्छी पहचान मिली है। ‘3 इडियट्स’ से मिली बड़ी शुरुआत गिरधर स्वामी के फिल्मी सफर का महत्वपूर्ण पड़ाव राजकुमार हिरानी की चर्चित फिल्म ‘3 इडियट्स’ रहा। स्वामी इसे अपने करियर की बड़ी शुरुआत मानते हैं। उस समय वे इंडस्ट्री में नए थे और उन्हें अंदाजा नहीं था कि यह फिल्म इतनी बड़ी सफलता हासिल करेगी। ‘3 इडियट्स’ के अनुभव ने उन्हें फिल्म जगत को करीब से समझने और आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिया। इसके बाद उनके काम का दायरा लगातार बढ़ता गया और वे फिल्मों में कलाकारों की तलाश तथा उनके चयन से जुड़े कार्यों में सक्रिय होते गए। चेहरे से ज्यादा किरदार की जरूरत को समझना जरूरी गिरधर स्वामी के अनुसार कास्टिंग डायरेक्टर का काम केवल किसी कलाकार

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का चेहरा देखकर चयन करना नहीं है। इसके लिए यह समझना जरूरी होता है कि कोई कलाकार किसी विशेष किरदार के लिए कितना उपयुक्त है। कलाकार की अभिनय क्षमता, संवाद अदायगी और किरदार की जरूरत को समझकर सही चयन करना कास्टिंग डायरेक्टर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। अब ‘तेरा साईं’ की कास्टिंग की जिम्मेदारी इन दिनों गिरधर स्वामी बॉलीवुड अभिनेता संजय मिश्रा की फिल्म ‘तेरा साईं’ की कास्टिंग से जुड़े हुए हैं। फिल्म प्रेम, करुणा और सेवा के संदेश पर आधारित बताई जा रही है। फिल्म के लिए कलाकारों के चयन की जिम्मेदारी भी स्वामी निभा रहे हैं। युवाओं के लिए प्रेरणा बना आबसर से मुंबई तक का सफर गांव आबसर से निकलकर बॉलीवुड तक पहुंचे गिरधर स्वामी की कहानी ग्रामीण और छोटे शहरों के युवाओं के लिए प्रेरणा है। उनका सफर बताता है कि बड़े शहरों और बड़ी इंडस्ट्री तक पहुंचने के लिए केवल बड़े शहर से होना जरूरी नहीं, बल्कि लक्ष्य के प्रति स्पष्टता, लगातार मेहनत और सीखने का जज्बा भी उतना ही महत्वपूर्ण है। आबसर की गलियों से शुरू हुआ गिरधर स्वामी का सफर आज मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री तक पहुंच चुका है। करीब दो दशक के अनुभव के बाद भी वे लगातार नए प्रोजेक्ट्स और नए कलाकारों के साथ काम कर रहे हैं। यही निरंतरता उनके सफर को खास बनाती है।

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    गांव आबसर से बॉलीवुड तक पहुंचा गिरधर स्वामी 

18 साल से बॉलीवुड में सक्रिय, 75 से अधिक फीचर फिल्मों और कई शॉर्ट फिल्मों में निभा चुके हैं कास्टिंग डायरेक्टर की भूमिका
छापर। कस्बे के निकटवर्ती छोटे से गांव आबसर की मिट्टी से निकलकर मुंबई की मायानगरी में अपनी अलग पहचान बनाने वाले गिरधर स्वामी का सफर संघर्ष, मेहनत और लक्ष्य के प्रति समर्पण की कहानी है। महज 19 वर्ष की उम्र में घर से निकलकर मुंबई पहुंचे स्वामी ने फिल्म इंडस्ट्री की बारीकियों को समझते हुए कास्टिंग के क्षेत्र में कदम रखा और निरंतर मेहनत के दम पर बतौर कास्टिंग डायरेक्टर अपनी पहचान कायम की।
फिल्म इंडस्ट्री में करीब 18 वर्षों से सक्रिय गिरधर स्वामी अब तक 75 से अधिक फीचर फिल्मों, 10 से अधिक शॉर्ट फिल्मों और 15 से अधिक म्यूजिक वीडियो की कास्टिंग में योगदान दे चुके हैं। उनके अनुभव की फेहरिस्त में ‘अंधाधुन’, ‘राउड़ी राठौर’, ‘वजीर’, ‘सनम तेरी कसम’, ‘बाबूमोशाय बंदूकबाज’, ‘कुली नंबर 1’, ‘यारियां 2’, ‘वेलकम टू द जंगल’ और ‘वेलकम 3’ जैसी फिल्मों के नाम शामिल हैं।
19 साल की उम्र में छोड़ा गांव, मुंबई को बनाया कर्मभूमि
आबसर से मुंबई तक का सफर गिरधर स्वामी के लिए आसान नहीं था। 19 वर्ष की उम्र में घर से निकलकर उन्होंने मायानगरी का रुख किया। शुरुआत में फिल्म इंडस्ट्री की कार्यप्रणाली को समझना और सही लोगों से जुड़ना उनके सामने बड़ी चुनौती थी। करीब तीन-चार वर्ष तक लगातार काम करने और सीखने के बाद उन्होंने इंडस्ट्री की कार्यशैली को करीब से समझा।
स्वामी बताते हैं कि शुरुआत के चार साल बड़ी कठिनाई के साथ बीते लेकिन लक्ष्य स्पष्ट था,मंजिल तक पहुंचने के लिए धैर्य के साथ लगातार सीखना और मेहनत करना जरूरी था। कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया। उनका मानना है कि फिल्म इंडस्ट्री में आगे बढ़ने के लिए निरंतर सीखने की प्रवृत्ति और धैर्य बेहद जरूरी है।समय के साथ आज मुझे इंडस्ट्री में अच्छी पहचान मिली है।
‘3 इडियट्स’ से मिली बड़ी शुरुआत
गिरधर स्वामी के फिल्मी सफर का महत्वपूर्ण पड़ाव राजकुमार हिरानी की चर्चित फिल्म ‘3 इडियट्स’ रहा। स्वामी इसे अपने करियर की बड़ी शुरुआत मानते हैं। उस समय वे इंडस्ट्री में नए थे और उन्हें अंदाजा नहीं था कि यह फिल्म इतनी बड़ी सफलता हासिल करेगी।
‘3 इडियट्स’ के अनुभव ने उन्हें फिल्म जगत को करीब से समझने और आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिया। इसके बाद उनके काम का दायरा लगातार बढ़ता गया और वे फिल्मों में कलाकारों की तलाश तथा उनके चयन से जुड़े कार्यों में सक्रिय होते गए।
चेहरे से ज्यादा किरदार की जरूरत को समझना जरूरी
गिरधर स्वामी के अनुसार कास्टिंग डायरेक्टर का काम केवल किसी कलाकार का चेहरा देखकर चयन करना नहीं है। इसके लिए यह समझना जरूरी होता है कि कोई कलाकार किसी विशेष किरदार के लिए कितना उपयुक्त है। कलाकार की अभिनय क्षमता, संवाद अदायगी और किरदार की जरूरत को समझकर सही चयन करना कास्टिंग डायरेक्टर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।
अब ‘तेरा साईं’ की कास्टिंग की जिम्मेदारी
इन दिनों गिरधर स्वामी बॉलीवुड अभिनेता संजय मिश्रा की फिल्म ‘तेरा साईं’ की कास्टिंग से जुड़े हुए हैं। फिल्म प्रेम, करुणा और सेवा के संदेश पर आधारित बताई जा रही है। फिल्म के लिए कलाकारों के चयन की जिम्मेदारी भी स्वामी निभा रहे हैं।
युवाओं के लिए प्रेरणा बना आबसर से मुंबई तक का सफर
गांव आबसर से निकलकर बॉलीवुड तक पहुंचे गिरधर स्वामी की कहानी ग्रामीण और छोटे शहरों के युवाओं के लिए प्रेरणा है। उनका सफर बताता है कि बड़े शहरों और बड़ी इंडस्ट्री तक पहुंचने के लिए केवल बड़े शहर से होना जरूरी नहीं, बल्कि लक्ष्य के प्रति स्पष्टता, लगातार मेहनत और सीखने का जज्बा भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
आबसर की गलियों से शुरू हुआ गिरधर स्वामी का सफर आज मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री तक पहुंच चुका है। करीब दो दशक के अनुभव के बाद भी वे लगातार नए प्रोजेक्ट्स और नए कलाकारों के साथ काम कर रहे हैं। यही निरंतरता उनके सफर को खास बनाती है।
    user_Bhagirath Suthar
    Bhagirath Suthar
    सुजानगढ़, चूरू, राजस्थान•
    9 hrs ago
  • लोसल निकाय चुनाव: सियासी रण तैयार ब्रेकिंग न्यूज: लोसल में निकाय चुनाव का बिगुल बजते ही सियासी पारा चढ़ा। 35 वार्डों में कांग्रेस ने फिर बोर्ड बनाने का दावा ठोका, वहीं भाजपा भी चुनावी मैदान में पूरी ताकत से उतरने की तैयारी में। अब देखना होगा कि इस बार लोसल की जनता किसके सिर सजाती है शहरी सरकार का ताज।
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    लोसल निकाय चुनाव: सियासी रण तैयार
ब्रेकिंग न्यूज: लोसल में निकाय चुनाव का बिगुल बजते ही सियासी पारा चढ़ा। 35 वार्डों में कांग्रेस ने फिर बोर्ड बनाने का दावा ठोका, वहीं भाजपा भी चुनावी मैदान में पूरी ताकत से उतरने की तैयारी में। अब देखना होगा कि इस बार लोसल की जनता किसके सिर सजाती है शहरी सरकार का ताज।
    user_RAJESH PATRKAR SIKAR सीकर
    RAJESH PATRKAR SIKAR सीकर
    Sikar, Rajasthan•
    3 hrs ago
  • churu लापता होने के बाद परिजनों ने समझ लिया था मृत, आश्रम ने मिलवाया 10 साल पहले लापता हुए मुन्नू को विमला देवी सेवा आश्रम की पहल से परिवार से मिलाया गया। परिजनों ने उसे मृत मान लिया था, लेकिन आश्रम और पुलिस की मदद से उसकी पहचान हुई और वह अपने परिवार के पास पहुंचा। चूरू: 10 साल बाद जिंदा लौटा ‘मन्नू’, लापता होने के बाद परिजनों ने समझ लिया था मृत, आश्रम ने मिलवाया 10 साल पहले लापता हुए मुन्नू को विमला देवी सेवा आश्रम की पहल से परिवार से मिलाया गया। परिजनों ने उसे मृत मान लिया था, लेकिन आश्रम और पुलिस की मदद से उसकी पहचान हुई और वह अपने परिवार के पास पहुंचा। Missing Youth Found After 10 year: दस साल पहले परिवार से बिछड़ा मुन्नू जब अचानक अपनों के बीच पहुंचा तो वर्षों का इंतजार आंसुओं और खुशियों में बदल गया। परिजनों ने लंबे समय तक तलाश के बाद उसे मृत मान लिया था लेकिन चूरू के सादुलपुर विमला देवी सेवा आश्रम के संचालक समाजसेवी मनीष शर्मा की पहल से परिवार को उसका जीवित होने का पता चला। परिवार के लिए यह पल किसी चमत्कार से कम नहीं था। जिस व्यक्ति के लौटने की उम्मीद परिजनों ने वर्षों पहले छोड़ दी थी, उसके अचानक सामने आने से घर में खुशी का माहौल बन गया। आश्रम में मिला, पुलिस ने परिवार तक पहुंचाया मनीष शर्मा ने बताया कि करीब दो-तीन महीने पहले मुन्नू शहर में घूमता मिला था। सूचना पर उसे आश्रम लाया गया। पहचान संबंधी जानकारी मिलने के बाद देवरिया पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी गई। इसके बाद रुद्रपुर थाना पुलिस ने मुन्नू के गांव हल्लादपुर मड़कड़ी के सरपंच से संपर्क कर परिजनों तक खबर पहुंचाई। शेखावाटी समाचार: खोया हुआ 5 साल का बेटा मिला, एक महीने बाद कलेजे के टुकड़े को देखते ही रो पड़े माता-पिता आश्रम संचालक के अनुसार मुन्नू के बारे में जानकारी जुटाने के दौरान उसके गांव और परिवार से जुड़े लोगों की पहचान करने का प्रयास किया गया। पुलिस और स्थानीय स्तर पर जानकारी शेयर करने के बाद उसके परिजनों तक पहुंचने का रास्ता साफ हुआ। इसके बाद परिवार को बताया गया कि मुन्नू जीवित है और आश्रम में सुरक्षित है। चाचा को देखते ही गले लग गए भतीजे गुरुवार शाम आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आश्रम संचालक ने मुन्नू को परिजनों के सुपुर्द किया। उसे लेने पहुंचे भतीजे आकाश और अंकित यादव ने जैसे ही अपने चाचा को देखा, भावुक होकर गले लगा लिया। यह दृश्य देख वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। भतीजों ने बताया कि इतने वर्षों बाद उनके सामने आने की कल्पना नहीं की थी। मुलाकात के दौरान परिवार के सदस्यों ने मुन्नू से बातचीत की और उसे घर ले जाने की तैयारी की। लंबे समय बाद परिवार के बीच लौटने पर मुन्नू भी भावुक नजर आया। 10 साल की तलाश का हुआ सुखद अंत परिजनों ने बताया कि मुन्नू के लापता होने के बाद उन्होंने रिश्तेदारों, परिचितों और संभावित स्थानों पर उसकी काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। समय बीतने के साथ उम्मीद टूटती गई और परिवार ने उसे मृत मान लिया। दस साल बाद उसके सकुशल लौटने की खबर ने परिवार की बुझ चुकी उम्मीदों को फिर जगा दिया। परिजनों ने आश्रम संचालक और पुलिस का आभार जताया।
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    churu लापता होने के बाद परिजनों ने समझ लिया था मृत, आश्रम ने मिलवाया
10 साल पहले लापता हुए मुन्नू को विमला देवी सेवा आश्रम की पहल से परिवार से मिलाया गया। परिजनों ने उसे मृत मान लिया था, लेकिन आश्रम और पुलिस की मदद से उसकी पहचान हुई और वह अपने परिवार के पास पहुंचा।
चूरू: 10 साल बाद जिंदा लौटा ‘मन्नू’, लापता होने के बाद परिजनों ने समझ लिया था मृत, आश्रम ने मिलवाया
10 साल पहले लापता हुए मुन्नू को विमला देवी सेवा आश्रम की पहल से परिवार से मिलाया गया। परिजनों ने उसे मृत मान लिया था, लेकिन आश्रम और पुलिस की मदद से उसकी पहचान हुई और वह अपने परिवार के पास पहुंचा।
Missing Youth Found After 10 year: दस साल पहले परिवार से बिछड़ा मुन्नू जब अचानक अपनों के बीच पहुंचा तो वर्षों का इंतजार आंसुओं और खुशियों में बदल गया। परिजनों ने लंबे समय तक तलाश के बाद उसे मृत मान लिया था लेकिन चूरू के सादुलपुर विमला देवी सेवा आश्रम के संचालक समाजसेवी मनीष शर्मा की पहल से परिवार को उसका जीवित होने का पता चला।
परिवार के लिए यह पल किसी चमत्कार से कम नहीं था। जिस व्यक्ति के लौटने की उम्मीद परिजनों ने वर्षों पहले छोड़ दी थी, उसके अचानक सामने आने से घर में खुशी का माहौल बन गया।
आश्रम में मिला, पुलिस ने परिवार तक पहुंचाया
मनीष शर्मा ने बताया कि करीब दो-तीन महीने पहले मुन्नू शहर में घूमता मिला था। सूचना पर उसे आश्रम लाया गया। पहचान संबंधी जानकारी मिलने के बाद देवरिया पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी गई। इसके बाद रुद्रपुर थाना पुलिस ने मुन्नू के गांव हल्लादपुर मड़कड़ी के सरपंच से संपर्क कर परिजनों तक खबर पहुंचाई।
शेखावाटी समाचार: खोया हुआ 5 साल का बेटा मिला, एक महीने बाद कलेजे के टुकड़े को देखते ही रो पड़े माता-पिता
आश्रम संचालक के अनुसार मुन्नू के बारे में जानकारी जुटाने के दौरान उसके गांव और परिवार से जुड़े लोगों की पहचान करने का प्रयास किया गया। पुलिस और स्थानीय स्तर पर जानकारी शेयर करने के बाद उसके परिजनों तक पहुंचने का रास्ता साफ हुआ। इसके बाद परिवार को बताया गया कि मुन्नू जीवित है और आश्रम में सुरक्षित है।
चाचा को देखते ही गले लग गए भतीजे
गुरुवार शाम आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आश्रम संचालक ने मुन्नू को परिजनों के सुपुर्द किया। उसे लेने पहुंचे भतीजे आकाश और अंकित यादव ने जैसे ही अपने चाचा को देखा, भावुक होकर गले लगा लिया। यह दृश्य देख वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
भतीजों ने बताया कि इतने वर्षों बाद उनके सामने आने की कल्पना नहीं की थी। मुलाकात के दौरान परिवार के सदस्यों ने मुन्नू से बातचीत की और उसे घर ले जाने की तैयारी की। लंबे समय बाद परिवार के बीच लौटने पर मुन्नू भी भावुक नजर आया।
10 साल की तलाश का हुआ सुखद अंत
परिजनों ने बताया कि मुन्नू के लापता होने के बाद उन्होंने रिश्तेदारों, परिचितों और संभावित स्थानों पर उसकी काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। समय बीतने के साथ उम्मीद टूटती गई और परिवार ने उसे मृत मान लिया। दस साल बाद उसके सकुशल लौटने की खबर ने परिवार की बुझ चुकी उम्मीदों को फिर जगा दिया। परिजनों ने आश्रम संचालक और पुलिस का आभार जताया।
    user_कुमार राजेश चौधरी
    कुमार राजेश चौधरी
    Voice of people चूरू, चूरू, राजस्थान•
    6 hrs ago
  • Post by Hanuman Prasad(मिठू शर्मा )
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    Post by Hanuman Prasad(मिठू शर्मा )
    user_Hanuman Prasad(मिठू शर्मा )
    Hanuman Prasad(मिठू शर्मा )
    Voice of people चूरू, चूरू, राजस्थान•
    10 hrs ago
  • लगभग 1.20 लाख रूपये कीमतन 241.28 ग्राम अवैध मादक पदार्थ अफीम बरामद परिवहन हेतु प्रयुक्त वाहन महिन्द्रा थार जब्त एक आरोपी को पुलिस ने किया गिरफ्तार। दिनांक 19 अगस्त 2026 को डीएसटी टीम की सूचना पर 101 रेल्वे फाटक, मेड़तारोड़ के पास से एक आरोपी को गिरफ्तार कर अवैध मादक पदार्थ अफीम एवं परिवहन हेतु प्रयुक्त एक थार गाड़ी जब्त की गई । थाना मेड़तारोड़ पुलिस एवं डीएसटी टीम की रही संयुक्त कार्यवाही । नागौर/ मेड़ता रोड,,आशा राम चौधरी जिला पुलिस अधीक्षक जिला नागौर के द्वारा ऑपरेशन नशा मुक्त नागौर के तहत अवैध मादक पदार्थों की रोकथाम हेतु दिये गये निर्देशों की पालना में रामकरणसिंह मलिण्डा वृत्ताधिकारी, वृत्त मेडता के निकटतम सुपरविजन में सुमन चौधरी नि.पु. थानाधिकारी गोटन कैम्प पुलिस थाना मेडतारोड मय टीम द्वारा डीएसटी टीम प्रभावी कार्यवाही करते हुए एक आरोपी हीरालाल सोनी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से अवैध मादक पदार्थ 241.28 ग्राम अफीम एवं प्रयुक्त वाहन महिन्द्रा थार जब्त कर आरोपी हीरालाल को गिरफ्तार किया गया । घटना :- सुमन चौधरी निपु थानाधिकारी गोटन कैम्प पुलिस थाना मेड़तारोड़ मय टीम टेलीफोन सूचना दी कि “ 101 रेल्वे फाटक मेड़तारोड़ पर मुखबीर की सूचना अनुसार वाहन महिन्द्रा थार नंबर जीजे 06 पीएल 5839 को मय चालक हीरालाल सोनी पुत्र राणुलाल उर्फ राणुराम जाति सोनी उम्र 43 वर्ष निवासी भटीण्डा पुलिस थाना लूणी जिला जोधपुर के वाहन महिन्द्रा थार नंबर जीजे 06 पीएल 5839 में मादक पदार्थ होने की पूर्ण संभावना है। वगैरा इतला पर रवाना होकर 101 रेल्वे फाटक के पास जाजडावास रोड कस्बा मेडतारोड पहुंचकर हीरालाल सोनी पुत्र राणुलाल उर्फ राणुराम जाति सोनी उम्र 43 वर्ष निवासी भटीण्डा पुलिस थाना लूणी जिला जोधपुर के वाहन महिन्द्रा थार नंबर जीजे 06 पीएल 5839 को डिटेन कर, उसके वाहन की तलाशी ली गयी तो 241.28 ग्राम अफीम जब्त कर अभियुक्त हीरालाल को गिरफ्तार किया जाकर, पुलिस थाना मेड़तारोड़ पर प्रकरण संख्या 105/2026 दिनांक 19 अगस्त 2026 जुर्म धारा 8 / 18 एनडीपीएस एक्ट में प्रकरण पंजीबद्ध किया गया, जिसका अनुसंधान भारमल उ.नि. थानाधिकारी जसनगर के जिम्मे किया गया ।
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    लगभग 1.20 लाख रूपये कीमतन 241.28 ग्राम अवैध मादक पदार्थ अफीम बरामद 

परिवहन हेतु प्रयुक्त वाहन महिन्द्रा थार जब्त 

एक आरोपी को पुलिस ने किया गिरफ्तार।
दिनांक 19 अगस्त 2026 को डीएसटी टीम की सूचना पर 101 रेल्वे फाटक,
मेड़तारोड़ के पास से एक आरोपी को गिरफ्तार कर अवैध मादक
पदार्थ अफीम एवं परिवहन हेतु प्रयुक्त एक थार गाड़ी जब्त की गई ।
थाना मेड़तारोड़ पुलिस एवं डीएसटी टीम की रही संयुक्त कार्यवाही ।
नागौर/ मेड़ता रोड,,आशा राम चौधरी जिला पुलिस अधीक्षक जिला नागौर के द्वारा ऑपरेशन नशा मुक्त नागौर के तहत अवैध मादक पदार्थों की रोकथाम हेतु दिये गये निर्देशों की पालना में रामकरणसिंह मलिण्डा वृत्ताधिकारी, वृत्त मेडता के निकटतम सुपरविजन में  सुमन चौधरी नि.पु. थानाधिकारी गोटन कैम्प पुलिस थाना मेडतारोड मय टीम द्वारा डीएसटी टीम प्रभावी कार्यवाही करते हुए एक आरोपी हीरालाल सोनी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से अवैध मादक पदार्थ 241.28 ग्राम अफीम एवं प्रयुक्त वाहन महिन्द्रा थार जब्त कर आरोपी हीरालाल को गिरफ्तार किया गया ।
घटना :- 
सुमन चौधरी निपु थानाधिकारी गोटन कैम्प पुलिस थाना मेड़तारोड़ मय टीम टेलीफोन सूचना दी कि “ 101 रेल्वे फाटक मेड़तारोड़ पर मुखबीर की सूचना अनुसार वाहन महिन्द्रा थार नंबर जीजे 06 पीएल 5839 को मय चालक हीरालाल सोनी पुत्र राणुलाल उर्फ राणुराम जाति
सोनी उम्र 43 वर्ष निवासी भटीण्डा पुलिस थाना लूणी जिला जोधपुर के वाहन महिन्द्रा थार नंबर जीजे 06 पीएल 5839 में मादक पदार्थ होने की पूर्ण संभावना है। वगैरा इतला पर रवाना होकर 101 रेल्वे फाटक के पास जाजडावास रोड कस्बा मेडतारोड पहुंचकर हीरालाल सोनी पुत्र राणुलाल उर्फ राणुराम जाति सोनी उम्र 43 वर्ष निवासी भटीण्डा पुलिस थाना लूणी जिला जोधपुर के वाहन महिन्द्रा
थार नंबर जीजे 06 पीएल 5839 को डिटेन कर, उसके वाहन की तलाशी ली गयी तो 241.28 ग्राम अफीम जब्त कर अभियुक्त हीरालाल को गिरफ्तार किया जाकर, पुलिस थाना मेड़तारोड़ पर प्रकरण संख्या 105/2026 दिनांक 19 अगस्त 2026 जुर्म धारा 8 / 18 एनडीपीएस एक्ट में प्रकरण पंजीबद्ध किया गया, जिसका अनुसंधान भारमल उ.नि. थानाधिकारी जसनगर के जिम्मे किया गया ।
    user_प्रदीप कुमार डागा
    प्रदीप कुमार डागा
    Local News Reporter नागौर, नागौर, राजस्थान•
    8 hrs ago
  • नोखा नगर निकाय चुनाव में सक्रिय दिखे कन्यालाल जी झवर नोखा में एक बार फिर विकास मंच की भारी जीत होने की संभावना
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    नोखा नगर निकाय चुनाव में सक्रिय दिखे कन्यालाल जी झवर नोखा में एक बार फिर विकास मंच की भारी जीत होने की संभावना
    user_दा टकराव मीडिया नोखा
    दा टकराव मीडिया नोखा
    Aerial photographer नोखा, बीकानेर, राजस्थान•
    14 hrs ago
  • अजमेर पूर्व महापौर धर्मेंद्र गहलोत ने दिया भाजपा से इस्तीफा.. नागौर,,भारतीय जनता पार्टी ने धर्मेंद्र गहलोत को सौंपी थी नागौर नगर परिषद की चुनावी जिम्मेदारी इन्होंने दे दिया भाजपा से इस्तीफा
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    अजमेर पूर्व महापौर धर्मेंद्र गहलोत ने दिया भाजपा से इस्तीफा..
नागौर,,भारतीय जनता पार्टी ने धर्मेंद्र गहलोत को सौंपी थी नागौर नगर परिषद की चुनावी जिम्मेदारी इन्होंने दे दिया भाजपा से इस्तीफा
    user_प्रदीप कुमार डागा
    प्रदीप कुमार डागा
    Local News Reporter नागौर, नागौर, राजस्थान•
    9 hrs ago
  • रूपनगढ़। प्रेम प्रसंग में भाई का रिश्ता हुआ शर्मनाक, हत्या कर सड़क हादसे का रचा खौफनाक खेल रूपनगढ़ (अजमेर) । थाना क्षेत्र में 12 अगस्त को हुई युवक महेश कुमार की मौत के मामले में रूपनगढ़ पुलिस ने बड़ा खुलासा करते हुए हत्या की वारदात को सड़क हादसे का रूप देने की साजिश का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में किस्तूरमल निवासी बकरवालिया को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा बताया जा रहा है। मृतक महेश कुमार के मामा के बेटे पर प्रेम प्रसंग को लेकर हत्या करने का आरोप है। आरोपी ने महेश को भदूण मेले में बुलाया और इसके बाद हत्या की साजिश को अंजाम दिया। आरोप है कि आरोपी ने भामोलाव तालाब के पास डंडे से वार कर महेश की हत्या कर दी। हत्या के बाद वारदात को दुर्घटना का रूप देने के लिए मोटरसाइकिल को सड़क पर गिरा दिया गया, ताकि मामला सड़क हादसा नजर आए। हालांकि, घटनास्थल पर मोटरसाइकिल की स्थिति और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने पुलिस के शक को गहरा कर दिया। पुलिस ने एफएसएल जांच, सीडीआर और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ते हुए हत्या का राज खोला। मामले में अजमेर पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला के निर्देशन तथा थाना प्रभारी रामस्वरूप चौधरी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी किस्तूरमल को गिरफ्तार किया। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर वारदात से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।
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    रूपनगढ़। प्रेम प्रसंग में भाई का रिश्ता हुआ शर्मनाक, हत्या कर सड़क हादसे का रचा खौफनाक खेल
रूपनगढ़ (अजमेर) । थाना क्षेत्र में 12 अगस्त को हुई युवक महेश कुमार की मौत के मामले में रूपनगढ़ पुलिस ने बड़ा खुलासा करते हुए हत्या की वारदात को सड़क हादसे का रूप देने की साजिश का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में किस्तूरमल निवासी बकरवालिया को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा बताया जा रहा है। मृतक महेश कुमार के मामा के बेटे पर प्रेम प्रसंग को लेकर हत्या करने का आरोप है। आरोपी ने महेश को भदूण मेले में बुलाया और इसके बाद हत्या की साजिश को अंजाम दिया।
आरोप है कि आरोपी ने भामोलाव तालाब के पास डंडे से वार कर महेश की हत्या कर दी। हत्या के बाद वारदात को दुर्घटना का रूप देने के लिए मोटरसाइकिल को सड़क पर गिरा दिया गया, ताकि मामला सड़क हादसा नजर आए।
हालांकि, घटनास्थल पर मोटरसाइकिल की स्थिति और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने पुलिस के शक को गहरा कर दिया। पुलिस ने एफएसएल जांच, सीडीआर और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ते हुए हत्या का राज खोला।
मामले में अजमेर पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला के निर्देशन तथा थाना प्रभारी रामस्वरूप चौधरी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी किस्तूरमल को गिरफ्तार किया। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर वारदात से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।
    user_सुजीत सिंह चौहान
    सुजीत सिंह चौहान
    Local News Reporter रूपनगढ़, अजमेर, राजस्थान•
    5 hrs ago
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