*विकास की भेंट चढ़ती उम्मीदें - गाजीपुर के करईल क्षेत्र में 'मंगई' का पानी बना किसानों के लिए 'अभिशाप* *रिपोर्ट कृष्ण कुमार मिश्रा* *गाजीपुर* गाजीपुर और बलिया की सीमा पर बसा 'करईल' क्षेत्र, जो कभी अपनी उपजाऊ मिट्टी और लहलहाती फसलों के लिए मशहूर था, आज किसानों की बेबसी और सरकारी तंत्र की अनदेखी का गवाह बन रहा है। मुहम्मदाबाद क्षेत्र के राजापुर सहित दर्जनों गाँवों में मंगई नदी का जलस्तर किसानों के लिए वरदान नहीं, बल्कि काल साबित हो रहा है। सूनी फसलें, खाली पड़े खेत और कर्ज के बोझ तले दबे किसानों की टूटती उम्मीदें आज एक बड़े पलायन का संकेत दे रही हैं। इस तबाही की पटकथा तब लिखी गई जब शारदा सहायक नहर का अतिरिक्त पानी बिना किसी ठोस योजना के मंगई नदी में छोड़ दिया गया। किसानों का आरोप है कि जलभराव के कारण जो बुवाई अक्टूबर के अंत तक पूरी हो जानी चाहिए थी, वह जनवरी तक खिंच गई। "फसल चक्र पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। जिस पौधे को पकने के लिए 130 दिन चाहिए थे, उसे बमुश्किल 70-80 दिन मिले। ऊपर से समय से पहले बढ़ते तापमान ने रही-सही कसर पूरी कर दी।" मृत्युंजय राय उर्फ बुल्लू राय, किसान (राजापुर) वर्तमान स्थिति यह है कि खेतों में गेहूं और अन्य फसलें खड़ी तो हैं, लेकिन उनमें दाने नहीं हैं। गर्म हवाओं (लू) ने फूल आने के समय ही पौधों को झुलसा दिया। आलम यह है कि उत्पादन में भारी गिरावट जहाँ प्रति बीघा औसत पैदावार 10-12 कुंतल होती थी, वहां अब मात्र 2 से 3 कुंतल गेहूं निकल रहा है। फसल इतनी छीदी और खराब है कि मजदूर कटाई के लिए तैयार नहीं हैं, क्योंकि फसल की कुल कीमत से अधिक उसकी कटाई की मजदूरी बैठ रही है। हजारों हेक्टेयर भूमि जलभराव के कारण बोई ही नहीं जा सकी, जो आज भी बंजर और सूनी दिखाई दे रही है। राजापुर के किसान "सतीश चंद्र राय, विमल कुमार राय और कृपा शंकर राय का कहना है कि यह समस्या साढ़े तीन दशकों से चली आ रही है, लेकिन हाल के वर्षों में 'विकास' ने इसे और विकराल बना दिया है। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे और ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के निर्माण के बाद मंगई नदी के प्राकृतिक जल निकासी का रास्ता संकुचित हो गया है। नदी में गाद (सिल्ट) जमा होने और झाड़ियों के कारण गहराई कम हो गई है, जिससे अतिरिक्त पानी तुरंत खेतों में फैल जाता है। हाटा, सोनवानी, राजापुर, दौलतपुर, टुटुवारी और बघौना जैसे गाँवों की हजारों हेक्टेयर भूमि अब खेती के अयोग्य होती जा रही किसानों की मुख्य मांगेंः "समाधान नहीं तो खेती नहीं" राजापुर के किसानों- कैलाश राय, कृष्ण गोपाल राय, रणजीत राय, प्रेमनाथ राय, रामजतन राय और सरोज राय ने शासन-प्रशासन से आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उनकी मांगें स्पष्ट हैंः मंगई नदी की गहराई बढ़ाई जाए और उसका चौड़ीकरण सुनिश्चित हो। जल निकासी के लिए इंजीनियरों और कृषि विशेषज्ञों की एक संयुक्त टीम बनाई जाए। प्रभावित किसानों के लिए विशेष मुआवजा पैकेज और कृषि ऋण (KCC) की पूर्ण माफी। नहर से पानी छोड़ने का समय और मात्रा निर्धारित हो ताकि बुवाई प्रभावित न हो। मंगई के किनारे बसे इन गाँवों में केवल खेत ही खाली नहीं हैं, बल्कि किसानों की आंखों के सपने भी सूख चुके हैं। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो करईल की यह स्वर्णिम भूमि केवल इतिहास के पन्नों में दर्ज रह जाएगी और यहाँ का युवा खेती छोड़कर शहरों में मजदूरी करने को मजबूर होगा। प्रशासन की चुप्पी और किसानों की चित्कार के बीच, अब सवाल यह है कि 'विकास' की इस दौड़ में अन्नदाता आखिर कब तक अपनी बलि देता रहेगा
*विकास की भेंट चढ़ती उम्मीदें - गाजीपुर के करईल क्षेत्र में 'मंगई' का पानी बना किसानों के लिए 'अभिशाप* *रिपोर्ट कृष्ण कुमार मिश्रा* *गाजीपुर* गाजीपुर और बलिया की सीमा पर बसा 'करईल' क्षेत्र, जो कभी अपनी उपजाऊ मिट्टी और लहलहाती फसलों के लिए मशहूर था, आज किसानों की बेबसी और सरकारी तंत्र की अनदेखी का गवाह बन रहा है। मुहम्मदाबाद क्षेत्र के राजापुर सहित दर्जनों गाँवों में मंगई नदी का जलस्तर किसानों के लिए वरदान नहीं, बल्कि काल साबित हो रहा है। सूनी फसलें, खाली पड़े खेत और कर्ज के बोझ तले दबे किसानों की टूटती उम्मीदें आज एक बड़े पलायन का संकेत दे रही हैं। इस तबाही की पटकथा तब लिखी गई जब शारदा सहायक नहर का अतिरिक्त पानी बिना किसी ठोस योजना के मंगई नदी में छोड़ दिया गया। किसानों का आरोप है कि जलभराव के कारण जो बुवाई अक्टूबर के अंत तक पूरी हो जानी चाहिए थी,
वह जनवरी तक खिंच गई। "फसल चक्र पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। जिस पौधे को पकने के लिए 130 दिन चाहिए थे, उसे बमुश्किल 70-80 दिन मिले। ऊपर से समय से पहले बढ़ते तापमान ने रही-सही कसर पूरी कर दी।" मृत्युंजय राय उर्फ बुल्लू राय, किसान (राजापुर) वर्तमान स्थिति यह है कि खेतों में गेहूं और अन्य फसलें खड़ी तो हैं, लेकिन उनमें दाने नहीं हैं। गर्म हवाओं (लू) ने फूल आने के समय ही पौधों को झुलसा दिया। आलम यह है कि उत्पादन में भारी गिरावट जहाँ प्रति बीघा औसत पैदावार 10-12 कुंतल होती थी, वहां अब मात्र 2 से 3 कुंतल गेहूं निकल रहा है। फसल इतनी छीदी और खराब है कि मजदूर कटाई के लिए तैयार नहीं हैं, क्योंकि फसल की कुल कीमत से अधिक उसकी कटाई की मजदूरी बैठ रही है। हजारों हेक्टेयर भूमि जलभराव के कारण बोई ही नहीं जा सकी, जो आज
भी बंजर और सूनी दिखाई दे रही है। राजापुर के किसान "सतीश चंद्र राय, विमल कुमार राय और कृपा शंकर राय का कहना है कि यह समस्या साढ़े तीन दशकों से चली आ रही है, लेकिन हाल के वर्षों में 'विकास' ने इसे और विकराल बना दिया है। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे और ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के निर्माण के बाद मंगई नदी के प्राकृतिक जल निकासी का रास्ता संकुचित हो गया है। नदी में गाद (सिल्ट) जमा होने और झाड़ियों के कारण गहराई कम हो गई है, जिससे अतिरिक्त पानी तुरंत खेतों में फैल जाता है। हाटा, सोनवानी, राजापुर, दौलतपुर, टुटुवारी और बघौना जैसे गाँवों की हजारों हेक्टेयर भूमि अब खेती के अयोग्य होती जा रही किसानों की मुख्य मांगेंः "समाधान नहीं तो खेती नहीं" राजापुर के किसानों- कैलाश राय, कृष्ण गोपाल राय, रणजीत राय, प्रेमनाथ राय, रामजतन राय और सरोज राय ने शासन-प्रशासन से आर-पार की लड़ाई का मन बना
लिया है। उनकी मांगें स्पष्ट हैंः मंगई नदी की गहराई बढ़ाई जाए और उसका चौड़ीकरण सुनिश्चित हो। जल निकासी के लिए इंजीनियरों और कृषि विशेषज्ञों की एक संयुक्त टीम बनाई जाए। प्रभावित किसानों के लिए विशेष मुआवजा पैकेज और कृषि ऋण (KCC) की पूर्ण माफी। नहर से पानी छोड़ने का समय और मात्रा निर्धारित हो ताकि बुवाई प्रभावित न हो। मंगई के किनारे बसे इन गाँवों में केवल खेत ही खाली नहीं हैं, बल्कि किसानों की आंखों के सपने भी सूख चुके हैं। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो करईल की यह स्वर्णिम भूमि केवल इतिहास के पन्नों में दर्ज रह जाएगी और यहाँ का युवा खेती छोड़कर शहरों में मजदूरी करने को मजबूर होगा। प्रशासन की चुप्पी और किसानों की चित्कार के बीच, अब सवाल यह है कि 'विकास' की इस दौड़ में अन्नदाता आखिर कब तक अपनी बलि देता रहेगा
- 🚨 मोहम्मदाबाद में दर्दनाक सड़क हादसा 🚨 गाजीपुर जनपद के मोहम्मदाबाद नगर क्षेत्र स्थित वकील बाड़ी रोड पर भीषण सड़क दुर्घटना में एक बाइक सवार युवक की मौके पर ही मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सामने से आ रही दूसरी बाइक ने जोरदार टक्कर मार दी, जिससे युवक सड़क पर गिर पड़ा और उसकी जान चली गई। मृतक की पहचान यूसुफपुर निवासी के रूप में हुई है। हादसे के बाद टक्कर मारने वाला बाइक सवार मौके से फरार हो गया। पुलिस मौके पर पहुंचकर मामले की जांच में जुटी है।1
- बलिया:राजनीति के बदलते समीकरणों के बीच बलिया में एक तस्वीर चर्चा का विषय बनी हुई है। कभी समाजवादी पार्टी (सपा) के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री रहे, जो अब भाजपा का दामन थाम चुके हैं, परशुराम जयंती के एक कार्यक्रम में 'अकेलेपन' का शिकार होते दिखे। भृगु मंदिर में आयोजित परशुराम जयंती के कार्यक्रम में मंच पर भाजपा के दिग्गज नेताओं का जमावड़ा था। सपा छोड़कर भाजपा में आए इन पूर्व मंत्री को मंच पर वह मान-सम्मान या जगह नहीं मिली, जिसके वे आदी थे। उन्हें मुख्य धारा से दूर किनारे बैठे देखा गया, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चा छिड़ गई है कि क्या भाजपा में आने वाले बड़े नेताओं की भूमिका सिर्फ भीड़ जुटाने तक सीमित है? सोशल मीडिया पर यह तस्वीर वायरल होने के बाद लोग दबी जुबान में कह रहे हैं, *"सपा में जो 'शेर' थे, आज अपनी ही नई पार्टी में बेगाने नजर आ रहे हैं।"* यह घटना दलबदल करने वाले नेताओं के भविष्य और पार्टी के भीतर उनके कद पर गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या दलबदल का असली इनाम 'हाशिए पर जाना' है? या यह महज एक प्रोटोकॉल की चूक थी? यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन इस तस्वीर ने बलिया की राजनीति में नया उबाल जरूर ला दिया है। #Ballia #UPPolitics #BJP #SamajwadiParty #PoliticsNews #ParshuramJayanti #PoliticalDrama #UttarPradesh1
- बलिया में अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर भगवान परशुराम जी का जन्मोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। सुरेमनपुर पिपरपाती निवासी वरिष्ठ भाजपा नेता अनिल कुमार चौबे ने ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं के साथ अत्यंत भव्य एवं अनुशासित आयोजन कर क्षेत्र में एक सकारात्मक संदेश दिया। इस अवसर पर वे भृगु आश्रम में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए, जहाँ उन्होंने रवि किशन तथा सहकारिता राज्य मंत्री वाल्मीकि तिवारी से भेंट कर जयंती की शुभकामनाएँ दीं। अपने संबोधन में चौबे ने भगवान परशुराम के आदर्शों को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए उनके मार्ग पर चलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज में समरसता, स्वच्छता और नैतिकता को बढ़ावा देना ही सच्ची श्रद्धांजलि है। इस दौरान उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेता रमेश चंद्र तिवारी व दातादत्त तिवारी को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया, जो उनके नेतृत्व और सामाजिक सरोकारों के प्रति समर्पण को दर्शाता है।1
- हालांकि “संशोधन पारित न होने” जैसी स्थिति पर उनका सीधा बयान कम सामने आया है, लेकिन उनके हालिया भाषणों और प्रतिक्रियाओं से यह साफ होता है कि उन्होंने इस मुद्दे पर चिंता और नाराजगी जताई है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग महिलाओं के अधिकारों का विरोध करते हैं, वे महिला शक्ति का सम्मान नहीं कर सकते यह बात भगवान श्री परशुराम के जन्मोत्सव के अवसर पर भव्य कार्यक्रम में कही।1
- बिल्थरारोड क्षेत्र के हल्दीरामपुर (छपिया) टोले में शनिवार को भीषण आग लगने से करीब 30 घर जलकर राख हो गए। आग इतनी तेज थी कि लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला और अफरा-तफरी मच गई। सूचना पर पहुंची पुलिस व फायर ब्रिगेड ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। हादसे में कई परिवार बेघर हो गए। मौके पर पहुंचे पूर्व विधायक गोरख पासवान ने पीड़ितों से मिलकर महिलाओं को साड़ी वितरण किया और मदद का भरोसा दिया।1
- Post by RISHI RAI1
- मनियर में 15 हजार लीटर अवैध लहन नष्ट बलिया जनपद के मनियर थाना क्षेत्र में अवैध शराब के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस और आबकारी विभाग को बड़ी सफलता मिली है। रविवार 19 अप्रैल 2026 को घाघरा नदी किनारे बॉर्डर क्षेत्र में संयुक्त टीम ने छापेमारी कर लगभग 15,000 लीटर अवैध कच्ची शराब बनाने की लहन और कई भट्ठियों को नष्ट कर दिया। कार्रवाई के दौरान मौके पर कोई भी शराब बनाने वाला व्यक्ति नहीं मिला, लेकिन भारी मात्रा में अवैध सामग्री मिलने से क्षेत्र में अवैध शराब के बड़े नेटवर्क की आशंका जताई जा रही है। इस अभियान में मनियर पुलिस और आबकारी विभाग की टीम ने मिलकर कार्रवाई की। पुलिस का कहना है कि क्षेत्र में अवैध शराब के निर्माण और बिक्री पर रोक लगाने के लिए अभियान लगातार जारी रहेगा। इस कार्रवाई को अवैध शराब के खिलाफ प्रभावी कदम माना जा रहा है।1
- बलिया जनपद के बेरूआरबारी क्षेत्र में रविवार शाम करीब 8 बजे सुखपुरा मार्ग पर रोशनी कार बाजार के सामने स्कॉर्पियो और ई-रिक्शा की जोरदार टक्कर हो गई। इस हादसे में पांच लोग घायल हो गए। घटना ब्लॉक मुख्यालय से लगभग आधा किलोमीटर दूर की बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने सामने से आ रहे ई-रिक्शा को टक्कर मार दी, जिससे चालक गंभीर रूप से घायल हो गया और वाहन में रखा सामान सड़क पर बिखर गया। हादसे के दौरान पीछे आ रहा एक अन्य ई-रिक्शा भी इसकी चपेट में आ गया, जिससे कुल घायलों की संख्या बढ़ गई। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए पुलिस की मदद से सभी घायलों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बेरूआरबारी पहुंचाया। वहां चिकित्सकों ने रामसागर यादव (50) की हालत गंभीर देखते हुए उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया, जबकि अन्य घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। सोमवार सुबह करीब 7 बजे पुलिस ने जानकारी दी कि मामले की जांच जारी है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है।1