पीलीभीत मंडी परिसर में गरजा किसानों का आक्रोश, एसडीएम की बेरुखी पर भड़के भाकियू कार्यकर्ता पीलीभीत। भ्रष्टाचार अवैध खनन और सरकारी तंत्र की वादाखिलाफी के खिलाफ हुंकार भर रहे भारतीय किसान यूनियन भानु के कार्यकर्ताओं का धैर्य शुक्रवार को जवाब दे गया। किसान मंडी परिसर में आयोजित मासिक पंचायत के दौरान उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब ज्ञापन लेने पहुंची एसडीएम के अड़ियल रवैये ने जलती आग में घी डालने का काम किया। किसानों का आरोप है कि जनसमस्याएं सुनने के बजाय अधिकारी ने तानाशाही दिखाई, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। अपनी 6 सूत्रीय मांगों को लेकर बड़ी संख्या में किसान मंडी में एकत्र हुए थे। मौके पर वार्ता के लिए पहुंची एसडीएम की कार्यशैली से किसान उस समय आगबबूला हो गए, जब बीच बातचीत में अधिकारी अचानक कुर्सी छोड़कर उठ खड़ी हुईं।किसानों के अनुसार, एसडीएम ने दो टूक शब्दों में कहा, ज्ञापन देना है तो दो, वरना मुझे कहीं और जाना है। प्रशासनिक अधिकारी के इस गैर-जिम्मेदाराना बयान ने किसानों के आत्मसम्मान को गहरी चोट पहुंचाई। देखते ही देखते पूरा मंडी परिसर नारेबाजी से गूंज उठा। किसान और अधिकारी के बीच तीखी नोकझोंक के कारण स्थिति अनियंत्रित होने लगी, जिसे देख एलआईयू और भारी पुलिस बल ने मोर्चा संभाला। काफी मान मनौव्वल और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ और एसडीएम ने किसानों का ज्ञापन स्वीकार किया। जिला अध्यक्ष भजन लाल क्रोधी के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में प्रशासन को आइना दिखाया गया। संगठन ने आरोप लगाया कि अमरिया के मुडलिया में लाइसेंस खत्म होने के बाद भी स्टोन क्रेशर बेखौफ चल रहे हैं। पूरनपुर और सुनगढ़ी की नदियों में दिन-रात अवैध खनन हो रहा है, जिसे विभागीय संरक्षण प्राप्त है। जनपद में खाद और गैस की भारी किल्लत है। पात्र गरीबों के राशन कार्ड पोर्टल पर बंद पड़े हैं, जिससे सरकारी लाभ उन तक नहीं पहुंच रहा। स्मार्ट मीटरों के नाम पर हो रही अवैध वसूली पर रोक लगाकर पुराने पोस्टपेड मीटर वापस लगाने की मांग की गई है। भाकियू भानु ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2025 और 2026 में दिए गए तमाम ज्ञापनों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिसको लेकर आगामी 1 जून को जिले में भारी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी। वरिष्ठ मंडल उपाध्यक्ष संचित दीक्षित ने कहा कि यदि प्रशासन ने अपनी कार्यशैली नहीं बदली और एसडीएम जैसे अधिकारियों ने किसानों से बात करने की मर्यादा नहीं सीखी, तो संगठन कलेक्ट्रेट का घेराव कर अनिश्चितकालीन आंदोलन छेड़ेगा। इस मौके पर बाबूराम वर्मा, ओमप्रकाश राजपूत, मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र गुप्ता और तहसील अध्यक्ष राम गोपाल प्रजापति सहित सैकड़ों किसान मौजूद रहे।
पीलीभीत मंडी परिसर में गरजा किसानों का आक्रोश, एसडीएम की बेरुखी पर भड़के भाकियू कार्यकर्ता पीलीभीत। भ्रष्टाचार अवैध खनन और सरकारी तंत्र की वादाखिलाफी के खिलाफ हुंकार भर रहे भारतीय किसान यूनियन भानु के कार्यकर्ताओं का धैर्य शुक्रवार को जवाब दे गया। किसान मंडी परिसर में आयोजित मासिक पंचायत के दौरान उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब ज्ञापन लेने पहुंची एसडीएम के अड़ियल रवैये ने जलती आग में घी डालने का काम किया। किसानों का आरोप है कि जनसमस्याएं सुनने के बजाय अधिकारी ने तानाशाही दिखाई, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। अपनी 6 सूत्रीय मांगों को लेकर बड़ी संख्या में किसान मंडी में एकत्र हुए थे। मौके पर वार्ता के लिए पहुंची एसडीएम की कार्यशैली से किसान उस समय आगबबूला हो गए, जब बीच बातचीत में अधिकारी अचानक कुर्सी छोड़कर उठ खड़ी हुईं।किसानों के अनुसार, एसडीएम ने दो टूक शब्दों में कहा, ज्ञापन देना है तो दो, वरना मुझे कहीं और जाना है। प्रशासनिक अधिकारी के इस गैर-जिम्मेदाराना बयान ने किसानों के आत्मसम्मान को गहरी चोट पहुंचाई। देखते ही देखते पूरा मंडी परिसर नारेबाजी से गूंज उठा। किसान और अधिकारी के बीच तीखी नोकझोंक के कारण स्थिति अनियंत्रित होने लगी, जिसे देख एलआईयू और भारी पुलिस बल ने मोर्चा संभाला। काफी मान मनौव्वल और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ और एसडीएम ने किसानों का ज्ञापन स्वीकार किया। जिला अध्यक्ष भजन लाल क्रोधी के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में प्रशासन को आइना दिखाया गया। संगठन ने आरोप लगाया कि अमरिया के मुडलिया में लाइसेंस खत्म होने के बाद भी स्टोन क्रेशर बेखौफ चल रहे हैं। पूरनपुर और सुनगढ़ी की नदियों में दिन-रात अवैध खनन हो रहा है, जिसे विभागीय संरक्षण प्राप्त है। जनपद में खाद और गैस की भारी किल्लत है। पात्र गरीबों के राशन कार्ड पोर्टल पर बंद पड़े हैं, जिससे सरकारी लाभ उन तक नहीं पहुंच रहा। स्मार्ट मीटरों के नाम पर हो रही अवैध वसूली पर रोक लगाकर पुराने पोस्टपेड मीटर वापस लगाने की मांग की गई है। भाकियू भानु ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2025 और 2026 में दिए गए तमाम ज्ञापनों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिसको लेकर आगामी 1 जून को जिले में भारी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी। वरिष्ठ मंडल उपाध्यक्ष संचित दीक्षित ने कहा कि यदि प्रशासन ने अपनी कार्यशैली नहीं बदली और एसडीएम जैसे अधिकारियों ने किसानों से बात करने की मर्यादा नहीं सीखी, तो संगठन कलेक्ट्रेट का घेराव कर अनिश्चितकालीन आंदोलन छेड़ेगा। इस मौके पर बाबूराम वर्मा, ओमप्रकाश राजपूत, मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र गुप्ता और तहसील अध्यक्ष राम गोपाल प्रजापति सहित सैकड़ों किसान मौजूद रहे।
- निगोही पुलिस का हासिल हुई बड़ी सफलता चोरी की घटना की आरोपियों को गिरफ्तार कर भेजा जेल।।1
- Post by Sumit Awasthi पत्रकार1
- Post by रामवीर राष्ट्रीय महासचिव गौ रक1
- पीलीभीत। भ्रष्टाचार अवैध खनन और सरकारी तंत्र की वादाखिलाफी के खिलाफ हुंकार भर रहे भारतीय किसान यूनियन भानु के कार्यकर्ताओं का धैर्य शुक्रवार को जवाब दे गया। किसान मंडी परिसर में आयोजित मासिक पंचायत के दौरान उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब ज्ञापन लेने पहुंची एसडीएम के अड़ियल रवैये ने जलती आग में घी डालने का काम किया। किसानों का आरोप है कि जनसमस्याएं सुनने के बजाय अधिकारी ने तानाशाही दिखाई, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। अपनी 6 सूत्रीय मांगों को लेकर बड़ी संख्या में किसान मंडी में एकत्र हुए थे। मौके पर वार्ता के लिए पहुंची एसडीएम की कार्यशैली से किसान उस समय आगबबूला हो गए, जब बीच बातचीत में अधिकारी अचानक कुर्सी छोड़कर उठ खड़ी हुईं।किसानों के अनुसार, एसडीएम ने दो टूक शब्दों में कहा, ज्ञापन देना है तो दो, वरना मुझे कहीं और जाना है। प्रशासनिक अधिकारी के इस गैर-जिम्मेदाराना बयान ने किसानों के आत्मसम्मान को गहरी चोट पहुंचाई। देखते ही देखते पूरा मंडी परिसर नारेबाजी से गूंज उठा। किसान और अधिकारी के बीच तीखी नोकझोंक के कारण स्थिति अनियंत्रित होने लगी, जिसे देख एलआईयू और भारी पुलिस बल ने मोर्चा संभाला। काफी मान मनौव्वल और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ और एसडीएम ने किसानों का ज्ञापन स्वीकार किया। जिला अध्यक्ष भजन लाल क्रोधी के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में प्रशासन को आइना दिखाया गया। संगठन ने आरोप लगाया कि अमरिया के मुडलिया में लाइसेंस खत्म होने के बाद भी स्टोन क्रेशर बेखौफ चल रहे हैं। पूरनपुर और सुनगढ़ी की नदियों में दिन-रात अवैध खनन हो रहा है, जिसे विभागीय संरक्षण प्राप्त है। जनपद में खाद और गैस की भारी किल्लत है। पात्र गरीबों के राशन कार्ड पोर्टल पर बंद पड़े हैं, जिससे सरकारी लाभ उन तक नहीं पहुंच रहा। स्मार्ट मीटरों के नाम पर हो रही अवैध वसूली पर रोक लगाकर पुराने पोस्टपेड मीटर वापस लगाने की मांग की गई है। भाकियू भानु ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2025 और 2026 में दिए गए तमाम ज्ञापनों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिसको लेकर आगामी 1 जून को जिले में भारी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी। वरिष्ठ मंडल उपाध्यक्ष संचित दीक्षित ने कहा कि यदि प्रशासन ने अपनी कार्यशैली नहीं बदली और एसडीएम जैसे अधिकारियों ने किसानों से बात करने की मर्यादा नहीं सीखी, तो संगठन कलेक्ट्रेट का घेराव कर अनिश्चितकालीन आंदोलन छेड़ेगा। इस मौके पर बाबूराम वर्मा, ओमप्रकाश राजपूत, मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र गुप्ता और तहसील अध्यक्ष राम गोपाल प्रजापति सहित सैकड़ों किसान मौजूद रहे।1
- बरेली। ट्रेन में मौलाना तौसीफ रज़ा मजाहरी की मौत का मामला तूल पकड़ गया है। All India Majlis-e-Ittehad-ul-Muslimeen (AIMIM) ने रेल मंत्री को ज्ञापन भेजकर पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। प्रदेश महासचिव नदीम कुरैशी ने बताया कि 26 अप्रैल को बरेली जंक्शन से सीवान जा रहे मौलाना के साथ ट्रेन में कथित मारपीट हुई थी। बाद में उनका शव स्टेशन के पास संदिग्ध हालात में मिला। पार्टी ने मांग की है कि मामले की समयबद्ध जांच हो, ट्रेनों में सुरक्षा बढ़ाई जाए और पीड़ित परिवार को मुआवजा दिया जाए।2
- Post by Prashant mishra1
- #बरेली में मौलाना की संदिग्ध थे मौत से मचा हड़कंप! परिजनों ने जताई हत्या की आशंका, उच्च स्तरीय जांच की मांग#1
- Post by Sumit Awasthi पत्रकार1