अमरोहा जनपद के कस्बा उझारी में हजरत शेख दाऊद रहमतुल्लाह आलेह की मजार पर हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी एक मेला लगा हुआ है। इस वार्षिक आयोजन के तहत एक ऑल इंडिया मुशायरे का आयोजन किया गया, जिसमें देश के नामचीन शायरों ने अपने कलाम पेश किए और खूब वाहवाही लूटी। मुशायरे में खुर्शीद हैदर ने कहा, “ऐसे तारीख़ मिटाने से अगर मिट सकती, हम तो तारीख़ की तारीख़ मिटा सकते थे, ये तो अच्छा ही हुआ उनका पता भूल गए, वरना कुछ लोग तो अफ़साना बना सकते थे।” नदीम फारुख ने शेर पढ़ा, “हसद की आग में खून दुशमनों का जलता रहा, मैं वो चराग था जो आँधियों में जलता रहा।” हाशिम फिरोजाबादी ने अपनी बात रखी, “वो ख़त तुम्हारा के जिस ख़त को खा गई दीमक, मेरे लिए वही क़ानून का ख़ज़ाना था।” मीसम गोपालपुरी ने कहा, “वही बस मुझको मीसम खल रहे हैं, जमीं पर जो अकड़ कर चल रहे हैं।” अंदाज़ देहलवी ने सुनाया, “ये सोच ले मुझ पर किसी इल्ज़ाम से पहले, आएगा तेरा नाम मेरे नाम से पहले।” ख्याल मुरादाबादी ने अपनी रचना पेश की, “किसी का प्यार जो दिल में बसा लिया मैने, गमों को अपना मुकद्दर बना लिया मैने, ख्याल आया ना उनको मेरी तबाही का, जिनकी चाह में खुद को मिटा लिया मैने।” डॉक्टर नदीम शाद ने कहा, “मुश्किल था पर जादू करना सीख गए, अब हम खुद पर काबू करना सीख गए, आपको तो तहजीब मिली थी विरसे (विरासत) में, आप कब से तू तू करना सीख गए।” आदिल रशीद ने अपनी बात रखी, “ये बात गलत है ये तलवार से फैला, इस्लाम मेरे आका के किरदार से फैला, है कौन जो गले दुश्मन को लगाए, ये चलन मेरे सरकार से फैला।” वारिस वारसी ने कहा, “निगाहों से निगाहे मिल रही है, अजब अंदाज की ये गुफ्तगू है, जरा ठहरो नमाजे इश्क पढ़ लू, मेरा यार मेरे रूबरू है।” अशद अशरफ ने अपनी प्रस्तुति में कहा, “ईरान मुखालिफ से सदा डट के लड़ा है दुनिया में किसी से डरेगा ना डरा है।” निगहत अमरोही ने कहा, “कहूं कैसे मुझको ग़म नहीं है, मगर ये आंख फिर भी नम नहीं है, तेरी राहों में पलकों को बिछाया, ये कुर्बानी भी कोई कम नहीं है।” जमाल हसनपुरी ने अपनी बात रखी, “जज़्बात में वो पहली सी शिद्दत नहीं रही, लगता है तुझ को मुझ से मोहब्बत नहीं रही, वो छोड़ कर चला ही गया मुझ को देखिए, जब पास मेरे दोस्तो दौलत नहीं रही।” इस प्रकार, हजरत शेख दाऊद रहमतुल्लाह आलेह के उर्स में आयोजित इस ऑल इंडिया मुशायरे में शायरों ने अपने बेहतरीन कलाम पेश किए।
अमरोहा जनपद के कस्बा उझारी में हजरत शेख दाऊद रहमतुल्लाह आलेह की मजार पर हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी एक मेला लगा हुआ है। इस वार्षिक आयोजन के तहत एक ऑल इंडिया मुशायरे का आयोजन किया गया, जिसमें देश के नामचीन शायरों ने अपने कलाम पेश किए और खूब वाहवाही लूटी। मुशायरे में खुर्शीद हैदर ने कहा, “ऐसे तारीख़ मिटाने से अगर मिट सकती, हम तो तारीख़ की तारीख़ मिटा सकते थे, ये तो अच्छा ही हुआ उनका पता भूल गए, वरना कुछ लोग तो अफ़साना बना सकते थे।” नदीम फारुख ने शेर पढ़ा, “हसद की आग में खून दुशमनों का जलता रहा, मैं वो चराग था जो आँधियों में जलता रहा।” हाशिम फिरोजाबादी ने अपनी बात रखी, “वो ख़त तुम्हारा के जिस ख़त को खा गई दीमक, मेरे लिए वही क़ानून का ख़ज़ाना था।” मीसम गोपालपुरी ने कहा, “वही बस मुझको मीसम खल रहे हैं, जमीं पर जो अकड़ कर चल रहे हैं।” अंदाज़ देहलवी ने सुनाया, “ये सोच ले मुझ पर किसी इल्ज़ाम से पहले, आएगा तेरा नाम मेरे नाम से पहले।” ख्याल मुरादाबादी ने अपनी रचना पेश की, “किसी का प्यार जो दिल में बसा लिया मैने, गमों को अपना मुकद्दर बना लिया मैने, ख्याल आया ना उनको मेरी तबाही का, जिनकी चाह में खुद को मिटा लिया मैने।” डॉक्टर नदीम शाद ने कहा, “मुश्किल था पर जादू करना सीख गए, अब हम खुद पर काबू करना सीख गए, आपको तो तहजीब मिली थी विरसे (विरासत) में, आप कब से तू तू करना सीख गए।” आदिल रशीद ने अपनी बात रखी, “ये बात गलत है ये तलवार से फैला, इस्लाम मेरे आका के किरदार से फैला, है कौन जो गले दुश्मन को लगाए, ये चलन मेरे सरकार से फैला।” वारिस वारसी ने कहा, “निगाहों से निगाहे मिल रही है, अजब अंदाज की ये गुफ्तगू है, जरा ठहरो नमाजे इश्क पढ़ लू, मेरा यार मेरे रूबरू है।” अशद अशरफ ने अपनी प्रस्तुति में कहा, “ईरान मुखालिफ से सदा डट के लड़ा है दुनिया में किसी से डरेगा ना डरा है।” निगहत अमरोही ने कहा, “कहूं कैसे मुझको ग़म नहीं है, मगर ये आंख फिर भी नम नहीं है, तेरी राहों में पलकों को बिछाया, ये कुर्बानी भी कोई कम नहीं है।” जमाल हसनपुरी ने अपनी बात रखी, “जज़्बात में वो पहली सी शिद्दत नहीं रही, लगता है तुझ को मुझ से मोहब्बत नहीं रही, वो छोड़ कर चला ही गया मुझ को देखिए, जब पास मेरे दोस्तो दौलत नहीं रही।” इस प्रकार, हजरत शेख दाऊद रहमतुल्लाह आलेह के उर्स में आयोजित इस ऑल इंडिया मुशायरे में शायरों ने अपने बेहतरीन कलाम पेश किए।
- अमरोहा जनपद के कस्बा उझारी में हजरत शेख दाऊद रहमतुल्लाह आलेह की मजार पर हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी एक मेला लगा हुआ है। इस वार्षिक आयोजन के तहत एक ऑल इंडिया मुशायरे का आयोजन किया गया, जिसमें देश के नामचीन शायरों ने अपने कलाम पेश किए और खूब वाहवाही लूटी। मुशायरे में खुर्शीद हैदर ने कहा, “ऐसे तारीख़ मिटाने से अगर मिट सकती, हम तो तारीख़ की तारीख़ मिटा सकते थे, ये तो अच्छा ही हुआ उनका पता भूल गए, वरना कुछ लोग तो अफ़साना बना सकते थे।” नदीम फारुख ने शेर पढ़ा, “हसद की आग में खून दुशमनों का जलता रहा, मैं वो चराग था जो आँधियों में जलता रहा।” हाशिम फिरोजाबादी ने अपनी बात रखी, “वो ख़त तुम्हारा के जिस ख़त को खा गई दीमक, मेरे लिए वही क़ानून का ख़ज़ाना था।” मीसम गोपालपुरी ने कहा, “वही बस मुझको मीसम खल रहे हैं, जमीं पर जो अकड़ कर चल रहे हैं।” अंदाज़ देहलवी ने सुनाया, “ये सोच ले मुझ पर किसी इल्ज़ाम से पहले, आएगा तेरा नाम मेरे नाम से पहले।” ख्याल मुरादाबादी ने अपनी रचना पेश की, “किसी का प्यार जो दिल में बसा लिया मैने, गमों को अपना मुकद्दर बना लिया मैने, ख्याल आया ना उनको मेरी तबाही का, जिनकी चाह में खुद को मिटा लिया मैने।” डॉक्टर नदीम शाद ने कहा, “मुश्किल था पर जादू करना सीख गए, अब हम खुद पर काबू करना सीख गए, आपको तो तहजीब मिली थी विरसे (विरासत) में, आप कब से तू तू करना सीख गए।” आदिल रशीद ने अपनी बात रखी, “ये बात गलत है ये तलवार से फैला, इस्लाम मेरे आका के किरदार से फैला, है कौन जो गले दुश्मन को लगाए, ये चलन मेरे सरकार से फैला।” वारिस वारसी ने कहा, “निगाहों से निगाहे मिल रही है, अजब अंदाज की ये गुफ्तगू है, जरा ठहरो नमाजे इश्क पढ़ लू, मेरा यार मेरे रूबरू है।” अशद अशरफ ने अपनी प्रस्तुति में कहा, “ईरान मुखालिफ से सदा डट के लड़ा है दुनिया में किसी से डरेगा ना डरा है।” निगहत अमरोही ने कहा, “कहूं कैसे मुझको ग़म नहीं है, मगर ये आंख फिर भी नम नहीं है, तेरी राहों में पलकों को बिछाया, ये कुर्बानी भी कोई कम नहीं है।” जमाल हसनपुरी ने अपनी बात रखी, “जज़्बात में वो पहली सी शिद्दत नहीं रही, लगता है तुझ को मुझ से मोहब्बत नहीं रही, वो छोड़ कर चला ही गया मुझ को देखिए, जब पास मेरे दोस्तो दौलत नहीं रही।” इस प्रकार, हजरत शेख दाऊद रहमतुल्लाह आलेह के उर्स में आयोजित इस ऑल इंडिया मुशायरे में शायरों ने अपने बेहतरीन कलाम पेश किए।1
- अमरोहा जनपद के हसनपुर कोतवाली क्षेत्र के बाटूपुरा गांव में पुरानी रंजिश के चलते दो पक्षों के बीच जमकर पथराव हो गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। बताया गया कि पुरानी रंजिश के कारण दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों ओर से एक-दूसरे पर पत्थर फेंके जाने लगे। सूचना मिलते ही हसनपुर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया। पुलिस अब वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच कर रही है। गांव में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और पुलिस लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए आगे की कार्रवाई जारी है।2
- अमरोहा के डिडौली थाना क्षेत्र के जोगापुरा गांव में रविवार तड़के चोरों ने एक साथ चार घरों को निशाना बनाकर ग्रामीणों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना से पूरे गांव में दहशत फैल गई है और ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। हालांकि चोरों की बड़ी वारदात गांव निवासी अंजार हुसैन पुत्र जर्रार हुसैन के घर में हुई, लेकिन उन्होंने गांव के चौकीदार समेत कुल चार मकानों में सेंध लगाने का प्रयास कर पूरे गांव में भय का माहौल बना दिया। अंजार हुसैन के घर में उस समय पूरा परिवार गहरी नींद में सो रहा था, जब अज्ञात चोरों ने घुसकर अलमारी और अन्य सामान खंगाला। चोरों ने करीब 50 हजार रुपये की नकदी और लाखों रुपये मूल्य के सोने-चांदी के जेवरात चुरा लिए, जिनमें सोने का हार, झुमके, बूंदी, वाली, चांदी की दो जोड़ी पायल और चांदी का हार सहित अन्य आभूषण शामिल बताए गए हैं। पीड़ित अंजार हुसैन ने बताया कि यह नकदी उन्होंने ईद के मौके पर अपना कटरा और बकरा बेचकर बच्चों की पढ़ाई, स्कूल में दाखिले और किताबों की खरीद के लिए जुटाई थी। सुबह जब परिवार जागा तो घर का सामान बिखरा पड़ा था और अलमारी खाली मिली, जिससे उनके होश उड़ गए। ग्रामीणों के अनुसार, चोरों ने चौकीदार ओमप्रकाश, रामचन्द्र और तहसीन के घरों को भी निशाना बनाया और चौकीदार के मकान पर भी कुमल लगाकर चोरी का प्रयास किया, हालांकि इन घरों से कोई सामान चोरी नहीं हो सका। एक ही रात में चार घरों पर चोरों की दस्तक से जोगापुरा गांव में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा हो गया है। घटना की सूचना मिलने पर मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। पीड़ित अंजार हुसैन ने पुलिस को तहरीर देकर जल्द से जल्द कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीण लगातार क्षेत्र में बढ़ रही चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए रात की गश्त बढ़ाने और चोरों को गिरफ्तार करने की मांग कर रहे हैं।4
- उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में पुलिस ने अपराध के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इन दोनों आरोपियों को चोरी की एक बाइक के साथ पकड़ा है।1
- अमरोहा जनपद के गजरौला में भाजपा नेता चौधरी वेदपाल सिंह ने एक प्रेस वार्ता आयोजित कर अधिवक्ता रविंद्र शुक्ला द्वारा उन पर लगाए गए आरोपों को पूरी तरह निराधार और तथ्यों से परे बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये सभी आरोप उनके और अधिवक्ता के बीच चल रहे संपत्ति विवाद का नतीजा हैं। अधिवक्ता रविंद्र शुक्ला ने भाजपा नेता पर ₹10 लाख की फिरौती देकर अपनी हत्या की साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया था, जिसके बाद चौधरी वेदपाल सिंह ने मीडिया के सामने आकर अपना पक्ष रखा। प्रेस वार्ता के दौरान, चौधरी वेदपाल सिंह ने दावा किया कि अधिवक्ता रविंद्र शुक्ला के खिलाफ विभिन्न मामलों में कुल 16 मुकदमे दर्ज हैं। इन मुकदमों में हिरण तस्करी, गोकशी और रंगदारी जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। भाजपा नेता ने यह भी आरोप लगाया कि अधिवक्ता की सगी ताई ने भी उन पर मारपीट और अभद्र व्यवहार के आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन सभी मामलों की पुष्टि संबंधित अभिलेखों और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। फिलहाल, गजरौला के मोहल्ला शुक्लपुरी निवासी अधिवक्ता रविंद्र शुक्ला और गजरौला कोतवाली क्षेत्र के गांव यकबगड़ी निवासी भाजपा नेता चौधरी वेदपाल सिंह के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोप चर्चा का विषय बने हुए हैं। इन आरोपों की सत्यता की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।2
- हापुड़ जनपद के थाना बहादुरगढ़ क्षेत्र में सड़क किनारे एक साधु का शव मिलने से हड़कंप मच गया है। राहगीरों ने साधु का शव देखकर तुरंत पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुँची और मामले की जाँच शुरू कर दी। पुलिस फिलहाल मौत के कारणों की पुष्टि नहीं कर पाई है और इस संबंध में आगे की जाँच पड़ताल जारी है।1
- ब्रजघाट स्थित संकट मोचन धाम में महंत अंकुर भारद्वाज महाराज 21 दिवसीय विशेष तपस्या कर रहे हैं, जिसका आज 12वां दिन है। यह विशेष धार्मिक अनुष्ठान जनकल्याण और लोकमंगल की भावना से किया जा रहा है, जिसके चलते संकट मोचन धाम श्रद्धालुओं की आस्था का एक प्रमुख केंद्र बन गया है। अपनी इस तपस्या के दौरान, महाराज भीषण गर्मी में प्रतिदिन 21 धूनों (अग्नि कुंडों) के बीच दो घंटे अग्नि तपस्या कर रहे हैं। इसके साथ ही, वे हर दिन गंगा जल में दो घंटे तक समाधि लगाकर जल तपस्या भी कर रहे हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस 21 दिवसीय परिक्रमा से सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। दूर-दराज से बड़ी संख्या में भक्त ब्रजघाट के पड़वाड़ा रोड स्थित इस धाम में पहुंच रहे हैं। उल्लेखनीय है कि महंत अंकुर भारद्वाज महाराज पिछले सात वर्षों से लगातार खड़ी तपस्या करते आ रहे हैं।3
- अमरोहा के हसनपुर कोतवाली क्षेत्र के बाटूपुरा गांव में रविवार को पुरानी रंजिश ने अचानक उग्र रूप ले लिया। मामूली कहासुनी से शुरू हुआ यह विवाद देखते ही देखते दो पक्षों के बीच खुलेआम पथराव में बदल गया, जिससे गांव की गलियों में जमकर पत्थर चले और पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। इस घटना का किसी ग्रामीण ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया, जो तुरंत वायरल हो गया। वायरल वीडियो में दर्जनों लोग आमने-सामने खड़े होकर एक-दूसरे पर पत्थर फेंकते साफ दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद हसनपुर कोतवाली पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची, जिन्होंने हालात को काबू में किया और दोनों पक्षों को शांत कराया। स्थानीय लोगों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच काफी समय से विवाद चला आ रहा था, और इसी पुरानी रंजिश ने रविवार को फिर तूल पकड़कर हिंसक झड़प का रूप ले लिया। घटना के दौरान ग्रामीणों में दहशत का माहौल रहा और कई लोग अपने घरों में दुबकने को मजबूर हो गए। पुलिस ने गांव में अतिरिक्त निगरानी बढ़ा दी है। पुलिस अधिकारियों ने बताया है कि वायरल वीडियो को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है। वीडियो में दिख रहे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी, साथ ही दोनों पक्षों से पूछताछ कर विवाद की वास्तविक वजह भी पता लगाई जा रही है। फिलहाल गांव में स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन एहतियात के तौर पर पुलिस की निगरानी जारी है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। इस घटना की चर्चा पूरे क्षेत्र में बनी हुई है।1