सबलगढ़ नगर पालिका परिषद की विभिन्न जनसमस्याओं के निराकरण की मांग को लेकर पार्षदों द्वारा चलाया जा रहा जनहित सत्याग्रह मंगलवार को 26वें दिन भी जारी रहा। यह आंदोलन नगर में चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें आमजन भी अपनी समस्याओं को लेकर सत्याग्रह स्थल पर पहुँच रहे हैं, जिससे पार्षदों का संघर्ष और तेज हो गया है। पार्षद मोहन रामजी लाल पचौरी ने बताया कि नगर में सफाई व्यवस्था, पेयजल संकट, बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटें, अधूरे निर्माण कार्य और नालों की सफाई जैसी अनेक जनसमस्याएं लंबे समय से अनदेखी का शिकार हैं। उन्होंने जानकारी दी कि इन मामलों पर आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगी गई थी, लेकिन आज तक संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। कई शिकायतों और मांगों के बावजूद समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं होने के कारण ही पार्षदों को जनहित सत्याग्रह का मार्ग अपनाना पड़ा है। पार्षद मोहन रामजी लाल पचौरी, कैलाश चंद भगत और रचना अशरफ खान ने संयुक्त रूप से स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं है, बल्कि नगर की जनता के अधिकारों और मूलभूत सुविधाओं के लिए एक लड़ाई है। उन्होंने यह भी बताया कि 26 दिनों से लगातार जारी इस सत्याग्रह के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा अब तक कोई अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई है, फिर भी सभी पार्षद और नागरिक अपने संकल्प पर अडिग हैं। पार्षदों ने इस बात पर जोर दिया कि नगरवासियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने दृढ़तापूर्वक कहा कि जब तक जनता की समस्याओं के समाधान हेतु ठोस एवं प्रभावी कदम नहीं उठाए जाते, तब तक यह जनहित सत्याग्रह जारी रहेगा। सत्याग्रह स्थल पर पहुँच रहे नागरिक भी इस आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए अपनी समस्याएं रख रहे हैं, जिससे यह जनआवाज निरंतर और अधिक मजबूत होती जा रही है।
सबलगढ़ नगर पालिका परिषद की विभिन्न जनसमस्याओं के निराकरण की मांग को लेकर पार्षदों द्वारा चलाया जा रहा जनहित सत्याग्रह मंगलवार को 26वें दिन भी जारी रहा। यह आंदोलन नगर में चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें आमजन भी अपनी समस्याओं को लेकर सत्याग्रह स्थल पर पहुँच रहे हैं, जिससे पार्षदों का संघर्ष और तेज हो गया है। पार्षद मोहन रामजी लाल पचौरी ने बताया कि नगर में सफाई व्यवस्था, पेयजल संकट, बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटें, अधूरे निर्माण कार्य और नालों की सफाई जैसी अनेक जनसमस्याएं लंबे समय से अनदेखी का शिकार हैं। उन्होंने जानकारी दी कि इन मामलों पर आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगी गई थी, लेकिन आज तक संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। कई शिकायतों और मांगों के बावजूद समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं होने के कारण ही पार्षदों को जनहित सत्याग्रह का मार्ग अपनाना पड़ा है। पार्षद मोहन रामजी लाल पचौरी, कैलाश चंद भगत और रचना अशरफ खान ने संयुक्त रूप से स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं है, बल्कि नगर की जनता के अधिकारों और मूलभूत सुविधाओं के लिए एक लड़ाई है। उन्होंने यह भी बताया कि 26 दिनों से लगातार जारी इस सत्याग्रह के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा अब तक कोई अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई है, फिर भी सभी पार्षद और नागरिक अपने संकल्प पर अडिग हैं। पार्षदों ने इस बात पर जोर दिया कि नगरवासियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने दृढ़तापूर्वक कहा कि जब तक जनता की समस्याओं के समाधान हेतु ठोस एवं प्रभावी कदम नहीं उठाए जाते, तब तक यह जनहित सत्याग्रह जारी रहेगा। सत्याग्रह स्थल पर पहुँच रहे नागरिक भी इस आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए अपनी समस्याएं रख रहे हैं, जिससे यह जनआवाज निरंतर और अधिक मजबूत होती जा रही है।
- श्योपुर में नामांतरण संबंधी अपनी समस्या का समाधान न होने से परेशान एक व्यक्ति जन सुनवाई के दौरान दंडवत यात्रा करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचा। व्यक्ति का कहना है कि वह वर्षों से कार्यालयों के चक्कर लगा रहा है, लेकिन उसकी समस्या का कोई हल नहीं निकला। इसी वजह से, जब उसकी कहीं सुनवाई नहीं हुई, तो उसने मजबूरी में न्याय की गुहार लगाने के लिए यह अनोखा तरीका अपनाया।1
- मध्य प्रदेश के जौरा स्थित सिविल अस्पताल में संविदा स्वास्थ्य कर्मियों ने अपनी विभिन्न मांगों और नियमितीकरण की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इस हड़ताल का सीधा असर अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है, जिससे इलाज और जांच के लिए आ रहे मरीजों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी प्रदेश संगठन के आह्वान पर जौरा के संविदा स्वास्थ्य कर्मियों ने यह सामूहिक हड़ताल प्रारंभ की है। हड़ताली कर्मचारियों का कहना है कि नियमितीकरण सहित उनकी अन्य मांगें लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन शासन स्तर पर अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। संविदा स्वास्थ्य कर्मी गोयल ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा संविदा कर्मियों के हित में निर्देश दिए जाने के बावजूद नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है, और न ही अन्य लंबित मांगों पर कोई सकारात्मक कार्रवाई हुई है। हड़ताल के कारण अस्पताल की कई महत्वपूर्ण सेवाएं प्रभावित हुई हैं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों ने स्वास्थ्य सेवाओं के बाधित होने पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संविदा स्वास्थ्य कर्मियों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर उचित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन और हड़ताल जारी रहेगी। इस बीच, अस्पताल प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्थाओं के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं सुचारु बनाए रखने का प्रयास कर रहा है।1
- बाड़ी नगर पालिका में नाले की सफाई के एक टेंडर को लेकर वित्तीय अनियमितता के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, जिसके कारण यह इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप है कि जिस कार्य को 15 लाख रुपये में पूरा किया जा सकता था, उसके लिए लगभग 70 लाख रुपये का बजट रखा गया है। इसके साथ ही, टेंडर में जानबूझकर ऐसी शर्त जोड़ी गई है — 'पिछले पाँच साल में दो साल का नाले सफाई का अनुभव' — जो प्रतिस्पर्धा को सीमित करती है और बाड़ी नगर पालिका से जुड़े ठेकेदारों में केवल सिंह कंस्ट्रक्शन कंपनी के पास ही यह अनुभव है। गौरतलब है कि सिंह कंस्ट्रक्शन कंपनी ने पिछले साल यही कार्य बी.एस.आर. रेट से 55 प्रतिशत कम दर पर पूरा किया था, जिसे तकनीकी अधिकारियों ने संतोषजनक मानते हुए फर्म का भुगतान भी किया था। मौजूदा टेंडर की शर्तों को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि इस बार दरें कम नहीं होने वाली हैं। यदि पिछली वाली फर्म को ही यह टेंडर मिलता है, तो यह देखना होगा कि वह पिछले साल की तुलना में कितनी कम दरों पर इसे प्राप्त करती है; पिछली दर और इस वर्ष की दर का अंतर, ऑडिट की भाषा में, वित्तीय अनियमितता कहलाएगा। इस मामले में नगरपालिका से जुड़े अधिकारी-कर्मचारियों को इसके दूरगामी परिणामों को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। फिलहाल उन्हें शायद यह बात समझ में न आए, लेकिन जैसे-जैसे निविदा प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, जानबूझकर की गई गलती का अंजाम स्पष्ट होता चला जाएगा।1
- बाड़ी शहर में पूर्व नगर पालिका उपाध्यक्ष राजकुमार भारद्वाज के नेतृत्व में वरिष्ठ कांग्रेसियों ने नगर पालिका में कथित भ्रष्टाचार को लेकर जिला कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन प्रस्तुत किया है। यह ज्ञापन तहसील कार्यालय में टीआरए सौरभ गर्ग को सौंपा गया। ज्ञापन में नगर पालिका द्वारा निकाली गई नाला सफाई कार्य की निविदा में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए उसे तत्काल निरस्त करने की मांग की गई है। पूर्व उपाध्यक्ष राजकुमार भारद्वाज ने बताया कि नाला साफ-सफाई का कार्य हर वर्ष कराया जाता है, जिसका अनुमानित मैनुअल खर्च लगभग 15 लाख रुपये आता है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि पूर्व अधिशासी अधिकारी अमिताभ मीणा कुछ महीने पहले ही बसेड़ी रोड, सरमथुरा रोड, अलीगढ़ रोड, कहार गली और रेलवे स्टेशन स्थित नालों की सफाई करा चुके हैं, जिससे अब सफाई के लिए केवल एक-दो नाले ही शेष बचे हैं, जबकि यह निविदा 81 लाख रुपये की निकाली गई है। कांग्रेसियों ने इस 81 लाख रुपये के टेंडर को लेकर नगर पालिका के ईओ का घेराव किया और उन पर सवाल उठाए।4
- धौलपुर के बाड़ी में नगरपालिका की सफाई व्यवस्था कार्यवाहकों के भरोसे चलने के कारण पूरी तरह बदहाल है, जहाँ करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। शहर के चौराहों, तिराहों और मुख्य रास्तों पर कूड़े-कचरे के बड़े-बड़े ढेर लगे हुए हैं, जिससे स्वच्छता की कमी स्पष्ट दिखाई देती है। स्थिति इतनी खराब है कि सफाईकर्मियों ने रेलवे फाटक के रास्ते को ही कचराघर बना दिया है। इस गंदगी और बदबू के कारण स्थानीय निवासियों का रहना दुश्वार हो गया है। इन कचरे के ढेरों पर गोवंश दिन-रात मुंह मार रहा है, जिससे वे 'काल का ग्रास' बन रहे हैं। नगरपालिका में दिन और रात के लिए सफाई के अलग-अलग ठेके होने के बावजूद, मुख्य मार्गों से कचरे के ढेर नहीं उठाए जाते। आरोप है कि कार्यवाहक सफाई निरीक्षक शहर की सफाई व्यवस्था देखने तक की ज़हमत नहीं उठाते। यह भी कहा गया है कि राजनैतिक और प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त इन कार्यवाहकों को जनता की परेशानियों की कोई चिंता नहीं है।1
- मुंगावली गांव में जल भराव की समस्या उत्पन्न हो रही है। गांव में पानी के निकास की समस्या के कारण यह स्थिति बनी हुई है। इस संबंध में, समस्या के समाधान हेतु एक आवेदन प्रस्तुत किया गया है।1
- सिक्किम का कंचनजंगा नेशनल पार्क एक अद्भुत विरासत है जिसे केवल देखा ही नहीं जाता, बल्कि महसूस भी किया जाता है। यह पार्क अपनी बर्फ से ढकी चोटियों, घने जंगलों और सदियों पुरानी लोककथाओं के माध्यम से प्रकृति और संस्कृति के बीच गहरे व जीवंत संबंध की कहानी कहता है। वर्ष 2016 में, इस गौरवशाली स्थल को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया, जिसके साथ यह भारत का पहला मिश्रित धरोहर स्थल बन गया। यह उपलब्धि देश के लिए एक विशेष सम्मान का प्रतीक है। कंचनजंगा नेशनल पार्क दुनिया के सामने उस भारतीय दृष्टिकोण को प्रस्तुत करता है, जहां विकास, सांस्कृतिक विरासत और प्रकृति संरक्षण को एक-दूसरे का पूरक माना जाता है, न कि विरोधी। यह धरोहर इस बात पर जोर देती है कि तीनों तत्वों का सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व संभव है।1
- जन समस्याओं को लेकर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और किसान सभा ने मध्य प्रदेश के कैलारस तहसील कार्यालय पर विशाल प्रदर्शन किया। इस राज्यव्यापी आंदोलन और अभियान के तहत किसान भवन से रैली निकालकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान हुई आमसभा में वक्ताओं ने सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण किसानों की हालत लगातार बिगड़ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका के साथ प्रस्तावित फ्री ट्रेड डील देश के किसानों और कृषि को पूरी तरह तबाह कर देगी, जिससे डेयरी उद्योग खत्म हो जाएगा और करोड़ों पशुपालक किसान इससे बाहर हो जाएंगे। जसविंदर सिंह ने यह भी कहा कि खेती की बढ़ती लागत और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) न मिलने से किसान घाटे में हैं, भूमिहीनता बढ़ रही है और जमीन का केंद्रीकरण हो रहा है, जो कृषि क्षेत्र और देश के लिए विनाशकारी होगा, जिसका पुरजोर विरोध करना आवश्यक है। किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक तिवारी ने बताया कि शक्कर कारखाना चालू कराने, जल निकासी की व्यवस्था करने, आवारा पशुओं का प्रबंधन करने और नाले-नालियों के निर्माण जैसी मांगों के लिए लगातार संघर्ष जारी है, और यह आगे भी जारी रहेगा। वामपंथी नेता गयाराम सिंह धाकड़ ने भी जन समस्याओं के लिए निरंतर संघर्ष की बात कही और चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का निराकरण नहीं हुआ, तो अनिश्चितकालीन आंदोलन किया जाएगा। इस आंदोलन का नेतृत्व सर्वश्री राजेश गुप्ता, भोंरु लाल, सियाराम सिंह, जगन्नाथ सिंह, बनवारी लाल, डॉ. रामकुमार, ब्रजवीर सिंह सिकरवार, कन्हैयालाल और निरंजन शाक्य सहित अन्य नेताओं ने किया। यह अभियान 10 जून तक लगातार जारी रहेगा, जिसके बाद 11 जून को सुबह 7:00 बजे पुरानी सब्जी मंडी पर एक विशाल आमसभा आयोजित की जाएगी, जिसमें अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव और माकपा नेता बादल सरोज मुख्य वक्ता होंगे। यह अभियान जिले भर में जारी है और आगे भी चलता रहेगा।1