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Parmeshvar redash
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- आई माता के 611वें अवतरण दिवस पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब (ब्यूरो चीफ अनिल जटिया) आई माता के 611वें अवतरण दिवस पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब (ब्यूरो चीफ अनिल जटिया) प्रतापगढ़, 13 सितंबर भादवा बीज के अवसर पर धोबी समाज की आराध्या महामाया आई माता (गादी माता) के 611वें अवतरण दिवस पर प्रतापगढ़ में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजों और सजीव झांकी के साथ निकली शोभायात्रा में राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश सहित आसपास के क्षेत्रों से हजारों समाजबंधुओं ने भाग लिया। शोभायात्रा धोबी चौक स्थित गादी माता मंदिर से शुरू होकर कुम्हारवाड़ा, पंडित जी की बावड़ी, सूरजपोल होते हुए रामकुंड मंदिर पहुंची। यहां पवित्र जल से वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गादी माता की पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद शोभायात्रा गांधी चौराहा, पीपली गली, धानमंडी, सदर बाजार, केशवराय मंदिर, मानक चौक, झंडा गली, सालमपुरा, भाटपुरा और कुम्हारवाड़ा होते हुए वापस मंदिर पहुंची। यहां महाआरती और महाप्रसादी का आयोजन हुआ। 51 ढोल और सजीव झांकी आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहे। पहली बार प्रतापगढ़ पहुंचे राष्ट्रीय संत अशोक जी महाराज शोभायात्रा में पीठाधीश्वर अशोक जी महाराज, श्री ज्वालामाता मंदिर लखनऊ, पहली बार प्रतापगढ़ पहुंचे और समाजबंधुओं को आशीर्वाद प्रदान किया। उनके साथ सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई प्रमुख पदाधिकारी एवं समाजसेवी भी मौजूद रहे। जगह-जगह पुष्पवर्षा से हुआ स्वागत गांधी चौराहे सहित शहर के विभिन्न स्थानों पर वसीटा धोबी समाज युवा टीम, श्री आई माता वसीटा धोबी समाज सेवा समिति, मंदसौर रजक कल्याण समिति, पद्मावती ग्रुप, वसीटा धोबी समाज नवयुवक मंडल निंबाहेड़ा सहित विभिन्न संगठनों ने पुष्पवर्षा और माल्यार्पण कर शोभायात्रा का स्वागत किया। 36 प्रतिभाओं का सम्मान भादवा बीज पर्व के अवसर पर श्री आई माता वसीटा धोबी समाज सेवा समिति की ओर से कक्षा 1 से 12वीं तक प्रत्येक कक्षा में प्रथम तीन स्थान प्राप्त करने वाली 36 प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। साथ ही पिछले एक वर्ष में सरकारी सेवा में चयनित समाज की प्रतिभाओं को भी पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। सम्मान पाकर प्रतिभाओं के चेहरे खिल उठे और उन्हें आगे बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहन मिला।4
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- खेत पर काम कर रहे युवक पर गिरी आकाशीय बिजली, गंभीर घायल1
- सालमगढ़: मेवाड़ा कुमावत समाज द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का हवन-यज्ञ और भव्य शोभायात्रा के साथ हुआ समापन सालमगढ़: मेवाड़ा कुमावत समाज द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का हवन-यज्ञ और भव्य शोभायात्रा के साथ हुआ समापन सालमगढ़। स्थानीय श्री चारभुजा नाथ मंदिर प्रांगण में मेवाड़ा कुमावत समाज, सालमगढ़ के तत्वावधान में आयोजित सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का रविवार को पूर्णाहुति व महाप्रसादी वितरण के साथ धर्ममय वातावरण में समापन हुआ। कथा के अंतिम दिन कथा वाचक पंडित अर्जुन शर्मा (भदवासा) ने श्रीमद्भागवत कथा के विभिन्न प्रसंगों का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, कर्म और भक्ति के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। कथा के उपरांत पंडित जी के आचार्यत्व में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन-यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें यजमानों व श्रद्धालुओं ने आहुतियां देकर क्षेत्र में खुशहाली और समृद्धि की कामना की। नगर में निकाली भव्य शोभायात्रा पूर्णाहुति के पश्चात कथा व्यास पं. अर्जुन शर्मा एवं श्रीमद्भागवत पोथी जी को सुसज्जित रथ में विराजमान कर नगर में भव्य जुलूस (शोभायात्रा) निकाला गया। जुलूस मंदिर प्रांगण से शुरू होकर नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरा। शोभायात्रा के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा भागवत जी की पोथी पर पुष्पवर्षा की गई तथा जगह-जगह कथा वाचक का स्वागत-सत्कार किया गया। पूरे नगर में जयकारों और धार्मिक भजनों से माहौल धर्ममय बना रहा। महाप्रसादी का हुआ वितरण नगर भ्रमण के पश्चात शोभायात्रा पुनः श्री चारभुजा नाथ मंदिर प्रांगण पहुंची, जहां आरती के बाद महाप्रसादी का आयोजन किया गया। इसमें मेवाड़ा कुमावत समाज के प्रबुद्धजनों, ग्रामीणों एवं आसपास के क्षेत्रों से आए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण कर धर्म लाभ उठाया।1
- सेवा संकल्प अभियान की मॉनिटरिंग को 47 अधिकारियों की जिम्मेदारी नीमच में 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले सेवा संकल्प अभियान की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए जिला प्रशासन ने 47 अधिकारियों को ग्राम पंचायतों के क्लस्टरवार भ्रमण की जिम्मेदारी सौंपी है। कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के निर्देश पर अधिकारी आवंटित क्लस्टर मुख्यालय और ग्राम पंचायतों में पहुंचकर जनसेवा एवं जनकल्याणकारी गतिविधियों का निरीक्षण करेंगे। विकासखंडवार जावद में 14, मनासा में 20 और नीमच में 13 अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। अधिकारी अभियान की प्रगति की समीक्षा कर आवश्यक सुधार के निर्देश देंगे और भ्रमण का प्रतिवेदन प्रस्तुत करेंगे। कलेक्टर ने प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।1
- धर्म ध्वजा लेकर भक्ति में झूमे श्रद्धालु, बाबा रामदेव जी के जन्मोत्सव पर रामपुरा में निकली भव्य शोभायात्रा। रामपुरा। लोक देवता बाबा रामदेव जी के जन्मोत्सव के अवसर पर रामपुरा क्षेत्र में आस्था और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी दुधलाई गांव से भंडारों का भव्य चल समारोह निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और ग्रामीणजनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। दुधलाई स्थित बालाजी मंदिर से प्रारंभ हुआ यह चल समारोह नीमच-झालावाड़ रोड होते हुए रामपुरा के समीप लाला तलाई मैदान पहुंचा। शोभायात्रा में दुधलाई, हरिपुरा, खेतपालिया सहित विभिन्न भंडारों के श्रद्धालु धर्म ध्वजा लेकर शामिल हुए। डीजे की धुन पर बाबा रामदेव जी के भजनों के साथ भक्तजन नाचते-गाते और जयकारे लगाते हुए आगे बढ़े। ट्रैक्टरों पर बाबा रामदेव जी की आकर्षक झांकियां सजाई गई थीं, जिन्हें फूलों से मनमोहक रूप से सजाया गया था। पूरे मार्ग में भक्ति और उत्साह का माहौल बना रहा। चल समारोह में शामिल श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह स्वागत और जलपान की व्यवस्था की गई। प्रियंका भोजनालय पर भक्तों के लिए खीर की महाप्रसादी का आयोजन किया गया, वहीं विभिन्न भंडारों पर नुक्ती की महाप्रसादी वितरित की गई। भक्तों ने श्रद्धा भाव से प्रसादी ग्रहण कर बाबा रामदेव जी का आशीर्वाद लिया। गौरतलब है कि क्षेत्र में संचालित विभिन्न भंडारों का शुभारंभ हरियाली अमावस्या से होता है और भाद्रपद शुक्ल द्वितीया, जिसे स्थानीय रूप से बड़ी बीज कहा जाता है, के अवसर पर इनका समापन किया जाता है। लगभग एक माह तक इन भंडारों के माध्यम से सावलिया जी रामदेवरा, चारभुजानाथ और खाटू श्याम सहित धार्मिक स्थलों की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए भोजन, जलपान और ठहरने जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इसी सेवा कार्य के समापन अवसर पर यह भव्य चल समारोह आयोजित किया गया। लाला तलाई मैदान पहुंचने पर बाबा रामदेव जी की विधिवत आरती उतारी गई और श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया। बाबा रामदेव जी के जन्मोत्सव पर आयोजित इस भव्य शोभायात्रा ने पूरे रामपुरा क्षेत्र को भक्ति, आस्था और उल्लास से भर दिया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति, आकर्षक झांकियों और गूंजते जयकारों ने इस धार्मिक आयोजन को यादगार बना दिया।1
- प्रतापगढ़ में भादवा बीज पर निकली शोभायात्राः जल से कलश भरकर निकाली यात्रा, झांकियां सजाईं प्रतापगढ़ में भादवा बीज पर निकली शोभायात्राः जल से कलश भरकर निकाली यात्रा, झांकियां सजाईं (रिपोर्टर अनिल जटिया) गादी माता के नाम से जानी जाने वाली वसीठा धोबी समाज की आराध्या देवी महामाया गादी माता की भव्य शोभायात्रा रविवार को धोबी चौक स्थित गादी माता मंदिर परिसर से ढ़ोल नगाड़ों की थाप एवं बैंड बाजो की मधुर स्वर लहरियों के बीच बड़े उल्लास के साथ निकाली गई। जानकारी देते हुए वसीठा धोबी समाज के जिला प्रवक्ता दिलीप मदनलाल टांक एवं आई माता वसीटा धोबी समाज के जिला अध्यक्ष मदन लाल बरोलिया ने बताया कि हर साल की तरह इस साल भी भादवी बीज के अवसर पर महामाया गादी माता की भव्य शोभायात्रा रविवार को निकाली गई। शोभायात्रा गादी माता मंदिर परिसर से प्रारंभ होकर कुम्हार वाडा, बावड़ी मोहल्ला, सूरजपोल, गांधी चौराहा होते हुए रामकुंड मंदिर परिसर पहुंची। मंदिर के पुजारी एवं समाज के वरिष्ठजनों की ओर से गादी माता के समक्ष विराजमान कलश की रामकुंड के जल से विधि विधान पूर्वक पूजा अर्चना कर नए जल से कलश भर कर आरती की गई। शोभयात्रा पुनः प्रारम्भ होकर गांधी चौराहा, सदर बाजार, पिपली चौक, होते हुए पुनः अपने गंतव्य स्थल पर पहुंची। जहां महाआरती के बाद प्रसादी का आयोजन किया गया। शोभायात्रा के प्रारंभ में दो घुड़सवार शोभायात्रा के आगे ध्वज पताका हाथ में लिए धर्म का आगाज कर रहे थे। शोभायात्रा के बीच मे खुली जीप के अंदर झांकी में जगत जननी महामाया गादी माता की आशीर्वाद देती हुई प्रतिमा विराजमान थी जो भक्तों को आशीर्वाद देते हुए बरबस ही अपनी ओर आकर्षित कर रही थी। शोभायात्रा वसीठा धोबी समाज की आराध्या देवी आई माता गादी माता की भादवी बीज के पर्व पर जोधपुर से 12 किलोमीटर पहले बिलाड़ा गांव में प्रदेश स्तरीय पहली शोभायात्रा निकाली जाती है। उसके बाद एकमात्र प्रतापगढ़ में गादीमाता की शोभायात्रा निकाली जाती है। इस प्रकार प्रतापगढ़ की शोभायात्रा दूसरे नंबर पर रहती है।4
- MP - मन्दसौर जिला चिकित्सालय की, जहां अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। तस्वीरों में साफ नजर आ रहा है कि मरीजों के उपचार के लिए डॉक्टर तो मौजूद हैं, लेकिन मरीजों को संभालने और उनकी देखभाल में सहयोग करने वाले कर्मचारियों की कमी दिखाई दे रही है। ऐसे में मरीजों के साथ अस्पताल पहुंचने वाले परिजनों को खुद ही मरीज की देखभाल करनी पड़ रही है। इलाज के दौरान मरीज को संभालने से लेकर अन्य जरूरी व्यवस्थाओं तक की जिम्मेदारी कई बार परिजनों पर आ जाती है, जिससे उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सवाल यह है कि जिला चिकित्सालय में जब बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं, तो उनकी देखभाल और आवश्यक सहयोग के लिए पर्याप्त कर्मचारी क्यों मौजूद नहीं रहते? मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? क्या जिम्मेदार अधिकारी अस्पताल की व्यवस्थाओं पर नियमित निगरानी नहीं रखते? तस्वीरें खुद अस्पताल की व्यवस्था की हकीकत बयां कर रही हैं। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और व्यवस्थाओं में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।2