भीलवाड़ा नगर निगम का अग्निशमन केंद्र होटल, रेस्टोरेंट और कोचिंग सेंटरों में फायर सेफ्टी को लेकर अलर्ट मोड पर आ गया है। शहर में फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए नगर निगम ने चार संस्थानों को सील कर दिया है। यह कार्रवाई बार-बार नोटिस दिए जाने के बावजूद अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन न करने पर की गई है। अग्निशमन केंद्र प्रभारी छोटूराम ने बताया कि नगर निगम द्वारा राजस्थान कोचिंग, सांवरिया होटल और महाराजा होटल के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इन संस्थानों को कई बार नोटिस जारी कर फायर सेफ्टी मानकों की पालना करने के निर्देश दिए गए थे, जिसमें एक अंतिम नोटिस भी शामिल था। इसके बावजूद, संबंधित संचालकों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया; उन्होंने न तो समय पर अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त किया और न ही आवश्यक फायर सेफ्टी उपकरण लगाए। लगातार चेतावनी और नोटिस के बावजूद नियमों की अवहेलना जारी रहने पर नगर निगम को इन प्रतिष्ठानों को सीज करना पड़ा। फिलहाल तीन संस्थानों पर यह कार्रवाई की जा चुकी है और अब चौथे प्रतिष्ठान के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी चल रही है, जिसकी जानकारी जल्द ही सार्वजनिक की जाएगी। नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि शहर में फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी, और लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन न करने वाले सभी प्रतिष्ठानों के खिलाफ यह अभियान लगातार जारी रहेगा।
भीलवाड़ा नगर निगम का अग्निशमन केंद्र होटल, रेस्टोरेंट और कोचिंग सेंटरों में फायर सेफ्टी को लेकर अलर्ट मोड पर आ गया है। शहर में फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए नगर निगम ने चार संस्थानों को सील कर दिया है। यह कार्रवाई बार-बार नोटिस दिए जाने के बावजूद अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन न करने पर की गई है। अग्निशमन केंद्र प्रभारी छोटूराम ने बताया कि नगर निगम द्वारा राजस्थान कोचिंग, सांवरिया होटल और महाराजा होटल के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इन संस्थानों को कई बार नोटिस जारी कर फायर सेफ्टी मानकों की पालना करने के निर्देश दिए गए थे, जिसमें एक अंतिम नोटिस भी शामिल था। इसके बावजूद, संबंधित संचालकों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया; उन्होंने न तो समय पर अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त किया और न ही आवश्यक फायर सेफ्टी उपकरण लगाए। लगातार चेतावनी और नोटिस के बावजूद नियमों की अवहेलना जारी रहने पर नगर निगम को इन प्रतिष्ठानों को सीज करना पड़ा। फिलहाल तीन संस्थानों पर यह कार्रवाई की जा चुकी है और अब चौथे प्रतिष्ठान के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी चल रही है, जिसकी जानकारी जल्द ही सार्वजनिक की जाएगी। नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि शहर में फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी, और लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन न करने वाले सभी प्रतिष्ठानों के खिलाफ यह अभियान लगातार जारी रहेगा।
- केंद्र सरकार जहां स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं मांडल स्थित उप जिला चिकित्सालय की बदहाल हालत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। मरीज जहां स्वस्थ होने की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुँचते हैं, वहीं परिसर की गंदगी देखकर लोगों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। मंगलवार सुबह 9 बजे मीडिया टीम के दौरे में अस्पताल का चौंकाने वाला नजारा सामने आया। अस्पताल के बाहर लगी शुद्ध मीठे पानी की प्याऊ गंदगी से अटी पड़ी मिली, जिसके आसपास जमा कीचड़ और गंदा पानी मच्छरों के पनपने का बड़ा कारण बन रहा है। स्थानीय लोगों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस वजह से डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी गंभीर बीमारियों के फैलने का खतरा लगातार बढ़ रहा है। इतना ही नहीं, पूरे अस्पताल परिसर में जगह-जगह कंटीली झाड़ियाँ उगी हुई हैं, कचरा फैला है और आवारा पशु घूमते नजर आते हैं, जो व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। मरीजों और उनके परिजनों को इलाज के साथ-साथ इस गंदगी और बदबू का भी सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। वे सवाल उठाते हैं कि जब स्वास्थ्य सेवाओं के सबसे महत्वपूर्ण केंद्र की यह स्थिति है, तो आम स्थानों की हालत का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। अब बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या अस्पताल प्रशासन किसी बड़े हादसे या महामारी का इंतजार कर रहा है, और आखिर मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाली इन व्यवस्थाओं पर कब तक पर्दा डाला जाएगा? क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से तत्काल सफाई अभियान चलाने, अस्पताल परिसर से झाड़ियों को हटाने तथा प्याऊ के आसपास फैली गंदगी को साफ कराने की पुरजोर मांग की है, ताकि मरीजों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिल सके।1
- जयपुर में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) ने अवैध जल कनेक्शनों के खिलाफ एक बड़ा 'प्रहार' करते हुए कड़ी कार्रवाई की है। इस अभियान के तहत 2500 से अधिक अवैध कनेक्शन काटे गए हैं। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि अवैध कनेक्शनों के संबंध में अब प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) भी दर्ज की जाएगी।1
- केंद्र सरकार एक ओर जहाँ स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं भीलवाड़ा के मांडल स्थित उप जिला चिकित्सालय की हालत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। मरीज यहाँ स्वस्थ होने की उम्मीद लेकर पहुँचते हैं, लेकिन अस्पताल परिसर की गंदगी देखकर लोगों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। अस्पताल के बाहर लगी शुद्ध मीठे पानी की प्याऊ गंदगी से अटी पड़ी है, और इसके आसपास जमा कीचड़ तथा गंदा पानी मच्छरों के पनपने का मुख्य कारण बन रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस स्थिति के चलते डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी गंभीर बीमारियों के फैलने का खतरा लगातार बढ़ रहा है। परिसर में जगह-जगह उगी कंटीली झाड़ियाँ, फैला कचरा और घूमते आवारा पशु भी अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को इलाज के साथ-साथ गंदगी और बदबू का भी सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि यदि स्वास्थ्य सेवाओं के सबसे महत्वपूर्ण केंद्र की ऐसी स्थिति है, तो आम स्थानों की हालत का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। अब क्षेत्रवासी यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या अस्पताल प्रशासन किसी बड़े हादसे या महामारी का इंतजार कर रहा है, और मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाली इन व्यवस्थाओं पर आखिर कब तक पर्दा डाला जाएगा। क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से तत्काल सफाई अभियान चलाने, अस्पताल परिसर से झाड़ियों को हटाने और प्याऊ के आसपास फैली गंदगी को साफ कराने की मांग की है, ताकि मरीजों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिल सके।4
- पूर्व डीजीपी और वर्तमान गोविंदाचार्य जैसे वरिष्ठ व्यक्तियों द्वारा एक घटना पर गंभीर सवाल उठाए जाने के बाद, उसकी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता और भी बढ़ गई है। यह स्वाभाविक प्रश्न है कि यदि संबंधित व्यक्ति मानसिक रूप से अस्वस्थ और उस समय निहत्था था, तो उस पर गोली चलाने का निर्णय किन परिस्थितियों में और किसके आदेश पर लिया गया। जनता जानना चाहती है कि क्या इस घटना में सभी वैकल्पिक उपाय अपनाए गए थे और क्या बल प्रयोग ही अंतिम विकल्प बचा था। इन महत्वपूर्ण सवालों के जवाब केवल एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के माध्यम से ही मिल सकते हैं, क्योंकि न्याय का अर्थ केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि हर कार्रवाई का उचित और कानूनी औचित्य भी जनता के सामने प्रस्तुत करना है।1
- श्री सांवलिया सेठ के दरबार में 40.81 करोड़ रुपये की दानराशि प्राप्त हुई है। इसी बीच, अग्निवीर सुनील डांगी के सम्मान में एक विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। इसके अतिरिक्त, ब्रह्माकुमारीज का आध्यात्मिक महोत्सव 25 तारीख से शुरू होगा, जबकि जैन महिला मंडल सम्मान समारोह और नामदेव छीपा समाज के चुनाव की तैयारियां भी तेजी से चल रही हैं।1
- राजस्थान के चित्तौड़गढ़ स्थित एक थाई स्पा पर पुलिस ने छापा मारा है। इस कार्रवाई के दौरान स्पा से चार विदेशी महिलाओं को पाया गया है। इसके साथ ही, इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया है।1
- भीलवाड़ा के शाहपुरा नगर में 23 जून 2026 मंगलवार को प्रातः 9:15 बजे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नगर मंडल ने महेश नवमी के अवसर पर निकाली गई शोभायात्रा का भव्य स्वागत किया। इस दौरान भाजपा के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं द्वारा शोभायात्रा पर पुष्प वर्षा की गई। शाहपुरा माहेश्वरी समाज द्वारा आयोजित इस शोभायात्रा पर, भाजपा मंडल अध्यक्ष पंकज सुगंधी के नेतृत्व में पार्टी के सदस्यों ने फूल बरसाकर उनका अभिनंदन किया। इस कार्यक्रम में जिला महामंत्री अविनाश जीनगर, विधानसभा संयोजक बजरंग सिंह राणावत, नगर महामंत्री जितेंद्र पाराशर और राजाराम पोरवाल सहित पूर्व मंडल अध्यक्ष रमेश मारू मौजूद रहे। इनके अतिरिक्त, कार्यक्रम सहसंयोजक नवल सोनी, मोहन गुर्जर, गोपाल घूसर, शांतिलाल मामोडिया, देवेंद्र सिंह गहलोत, मंत्री मुकेश माली, राजेंद्र बोहरा, लादूराम खटीक, प्रेमचंद मीणा, गजराज खटीक, शारदा सोनी, मिथिलेश राणावत और राधा बोहरा जैसे कई सदस्य भी उपस्थित रहे।2
- भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग की शुरुआत करने वाले भारत के एक 'भरत' के चले जाने के बाद, अब यह देखना बाकी है कि देश में ऐसे और कितने 'भरत' जन्म लेते हैं। हालाँकि, एक कड़वा सच यह भी है कि नए 'भरत' तभी सामने आएंगे जब समाज पुराने 'भरतों' को उनके संघर्ष के समय अकेला नहीं छोड़ेगा। यह स्पष्ट किया गया है कि जिस व्यक्ति के साथ लोग उसके अकेले संघर्ष के दौरान खड़े नहीं हो सके, उसके निधन के बाद लाखों की भीड़ भी उस कमी को पूरा नहीं कर सकती। किसी भी योद्धा की सबसे बड़ी जीत उसकी अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ नहीं मानी जाती, बल्कि उसके संघर्ष के दिनों में उसके साथ खड़े हुए लोग ही उसकी वास्तविक जीत होते हैं।1
- एक स्पोर्ट्स अपडेट में इंग्लैंड की टीम के प्रदर्शन पर चिंता व्यक्त की गई है, जिसमें पूछा गया है कि आखिर उनके साथ क्या हो गया है। दर्शकों से इस संबंध में अपनी राय कमेंट्स में बताने का आग्रह किया गया है, साथ ही प्रतिदिन स्पोर्ट्स न्यूज़ पाने के लिए जुड़ने और दोस्तों के साथ शेयर करने को भी कहा गया है।1