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श्री सांवलिया सेठ के दरबार में 40.81 करोड़ रुपये की दानराशि प्राप्त हुई है। इसी बीच, अग्निवीर सुनील डांगी के सम्मान में एक विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। इसके अतिरिक्त, ब्रह्माकुमारीज का आध्यात्मिक महोत्सव 25 तारीख से शुरू होगा, जबकि जैन महिला मंडल सम्मान समारोह और नामदेव छीपा समाज के चुनाव की तैयारियां भी तेजी से चल रही हैं।
Hello Chittorgarh News
श्री सांवलिया सेठ के दरबार में 40.81 करोड़ रुपये की दानराशि प्राप्त हुई है। इसी बीच, अग्निवीर सुनील डांगी के सम्मान में एक विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। इसके अतिरिक्त, ब्रह्माकुमारीज का आध्यात्मिक महोत्सव 25 तारीख से शुरू होगा, जबकि जैन महिला मंडल सम्मान समारोह और नामदेव छीपा समाज के चुनाव की तैयारियां भी तेजी से चल रही हैं।
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- भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग की शुरुआत करने वाले भारत के एक 'भरत' के चले जाने के बाद, अब यह देखना बाकी है कि देश में ऐसे और कितने 'भरत' जन्म लेते हैं। हालाँकि, एक कड़वा सच यह भी है कि नए 'भरत' तभी सामने आएंगे जब समाज पुराने 'भरतों' को उनके संघर्ष के समय अकेला नहीं छोड़ेगा। यह स्पष्ट किया गया है कि जिस व्यक्ति के साथ लोग उसके अकेले संघर्ष के दौरान खड़े नहीं हो सके, उसके निधन के बाद लाखों की भीड़ भी उस कमी को पूरा नहीं कर सकती। किसी भी योद्धा की सबसे बड़ी जीत उसकी अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ नहीं मानी जाती, बल्कि उसके संघर्ष के दिनों में उसके साथ खड़े हुए लोग ही उसकी वास्तविक जीत होते हैं।1
- श्री सांवलिया सेठ के दरबार में 40.81 करोड़ रुपये की दानराशि प्राप्त हुई है। इसी बीच, अग्निवीर सुनील डांगी के सम्मान में एक विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। इसके अतिरिक्त, ब्रह्माकुमारीज का आध्यात्मिक महोत्सव 25 तारीख से शुरू होगा, जबकि जैन महिला मंडल सम्मान समारोह और नामदेव छीपा समाज के चुनाव की तैयारियां भी तेजी से चल रही हैं।1
- राजस्थान के चित्तौड़गढ़ स्थित एक थाई स्पा पर पुलिस ने छापा मारा है। इस कार्रवाई के दौरान स्पा से चार विदेशी महिलाओं को पाया गया है। इसके साथ ही, इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया है।1
- एक स्पोर्ट्स अपडेट में इंग्लैंड की टीम के प्रदर्शन पर चिंता व्यक्त की गई है, जिसमें पूछा गया है कि आखिर उनके साथ क्या हो गया है। दर्शकों से इस संबंध में अपनी राय कमेंट्स में बताने का आग्रह किया गया है, साथ ही प्रतिदिन स्पोर्ट्स न्यूज़ पाने के लिए जुड़ने और दोस्तों के साथ शेयर करने को भी कहा गया है।1
- आयुष हॉस्पिटल अपनी आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के माध्यम से बेहतरीन परिणाम दे रहा है। इन शानदार परिणामों की कहानी मरीजों की जुबानी सुनने को मिल रही है, जो उनके अनुभवों पर आधारित है।1
- चित्तौड़गढ़ के बड़ी सादड़ी क्षेत्र में हिंदुस्तान जिंक द्वारा डंप किए गए औद्योगिक अपशिष्ट पदार्थ जेरोफिक्स को हटाने की मांग को लेकर 'जहर मुक्त बड़ी सादड़ी संघर्ष समिति' का आंदोलन सोमवार को 28वें दिन भी जारी रहा। इस दौरान धरना स्थल पर पहुंचे कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव धीरज गुर्जर ने आंदोलनकारियों को समर्थन देते हुए सरकार और प्रशासन से मामले पर त्वरित कार्रवाई की मांग की। धीरज गुर्जर ने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता ही सर्वोपरि होती है, और जनभावनाओं से खिलवाड़ करने वालों को जनता समय आने पर जवाब देती है। उन्होंने प्रशासन और रेलवे अधिकारियों से जेरोफिक्स मामले का जल्द समाधान निकालने का आग्रह करते हुए चेतावनी दी कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को आगे बढ़ाने और अनशन जैसे कदम उठाने के लिए वे मजबूर होंगे। गुर्जर ने यह भी कहा कि जेरोफिक्स के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उन पर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि बड़ी सादड़ी की जनता की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है, और मंत्री गौतम दक मीडिया के सवालों से बचते नजर आ रहे हैं। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि जेरोफिक्स को लेकर स्थानीय स्तर पर गहरी चिंता है, लेकिन जिले के कई पक्ष और विपक्ष के नेता इस मुद्दे पर खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं। उनका आरोप है कि कुछ नेता केवल धरना स्थल पर आकर ठेकेदारों को निशाना बनाते हैं, जबकि मुख्य जिम्मेदारी हिंदुस्तान जिंक की भूमिका पर चर्चा नहीं करते। पूर्व में कांग्रेस से विधायक प्रत्याशी रहे बद्रीलाल जाट ने इस अपशिष्ट पदार्थ के लंबे समय तक क्षेत्र में रहने से आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर की आशंका जताई थी। आंदोलनकारियों का कहना है कि जेरोफिक्स अभी तक पूरी तरह नहीं हटाया गया है और क्षेत्र में स्वास्थ्य, जल स्रोतों तथा पर्यावरण को लेकर खतरे की आशंका बनी हुई है। धीरज गुर्जर के स्थानीय नेताओं पर निशाना साधने और राजनीतिक नुकसान के डर से जनता के पक्ष में आवाज न उठाने के आरोप के बाद चित्तौड़गढ़ जिले के राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है, और स्थानीय नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में जेरोफिक्स को क्षेत्र से पूरी तरह हटाना, पर्यावरणीय प्रभावों की जांच कराना और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करना शामिल है। अब सभी की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।1
- चित्तौड़गढ़ की मंगलवाड़ थाना पुलिस ने दो अलग-अलग कार्रवाइयों में बड़ी सफलता हासिल की है। एक कार्रवाई में पुलिस ने 19 ग्राम अवैध MDMA पाउडर के साथ दो तस्करों को गिरफ्तार कर एक मोटरसाइकिल जब्त की, वहीं दूसरी कार्रवाई में वाहनों की संरचना में अवैध परिवर्तन और अनाधिकृत लेखन पाए जाने पर 9 मोटरसाइकिलों को जब्त किया गया। यह जानकारी जिला पुलिस अधीक्षक चित्तौड़गढ़ धर्मेंद्र सिंह ने दी, जिन्होंने बताया कि यह कार्रवाई एएसपी मुकुल शर्मा आरपीएस के निर्देशन और डीएसपी बड़ीसादड़ी के सुपरविजन में की गई। पहली कार्रवाई 22 जून को हुई, जब मंगलवाड़ पुलिस ने चित्तौड़गढ़-उदयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर छापरी गांव की ओर जाने वाले मार्ग पर नाकाबंदी की। नाकाबंदी के दौरान एक संदिग्ध हीरो स्प्लेंडर प्लस मोटरसाइकिल आती दिखी, जिसके चालक ने पुलिस को देखकर भागने का प्रयास किया। पुलिस ने उसे रोककर नियमानुसार तलाशी ली, जिसमें आरोपी रामचंद्र पिता नारायणलाल गाडरी निवासी भगीमों का खेड़ा, थाना भीण्डर, जिला उदयपुर, और शंभूलाल पिता गंगाराम गुर्जर निवासी नेगड़िया, थाना मंगलवाड़, जिला चित्तौड़गढ़ के कब्जे से 19 ग्राम अवैध मिथाइलीनडाइऑक्सी मेथाम्फेटामाइन (MDMA) बरामद हुई। अवैध मादक पदार्थ के परिवहन में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल भी जब्त कर दोनों आरोपियों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। दूसरी कार्रवाई में, यातायात एवं सड़क सुरक्षा अभियान के तहत वाहनों की जांच की गई। इस दौरान जिन वाहनों की संरचना में अवैध परिवर्तन, अनाधिकृत शब्द, चिन्ह या लेखन पाए गए, ऐसी 09 मोटरसाइकिलों को धारा 38 पुलिस एक्ट के तहत जब्त कर लिया गया।1
- आजकल जब भी पुरुषों के हितों की बात उठाई जाती है या पुरुष आयोग की मांग की जाती है, तो सोशल मीडिया पर हजारों लोग समर्थन में दिखाई देते हैं। हालांकि, यह विडंबना है कि जब इस मांग को लेकर कोई भूख हड़ताल पर बैठता है या रैली निकालता है, तब मुश्किल से सौ पुरुष भी मौके पर नहीं पहुंच पाते। इस स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि समर्थन को केवल पोस्ट, लाइक और कमेंट तक सीमित नहीं रखना चाहिए। यह समझना आवश्यक है कि कोई भी अकेला व्यक्ति इस व्यवस्था से नहीं लड़ सकता। यदि वास्तव में पुरुष आयोग की स्थापना चाहते हैं और पुरुषों की समस्याओं को गंभीरता से सुने जाने की इच्छा है, तो सभी पुरुषों को संगठित होकर अपनी आवाज बुलंद करनी होगी। यह कहा गया है कि केवल सोशल मीडिया पर समर्थन जताते रहने से अपेक्षित परिणाम नहीं मिलेंगे। अब समय आ गया है कि एकजुटता, जागरूकता और लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी मांगों को प्रभावी ढंग से रखा जाए। पुरुषों को अपने अधिकारों और न्याय की मांग के लिए एक विशाल रैली और जनआंदोलन के माध्यम से अपनी बात मजबूती से रखनी चाहिए।1