ढाई साल से अटकी नियुक्ति की राह: सुप्रीम कोर्ट ने 1,362 एएनएम अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने का दिया निर्देश, योग्यता जांच के लिए एक महीने में बनेगी दो-सदस्यीय समिति, अभ्यर्थी 7 से 12 सितंबर के बीच होंगे पेश — अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को, लेखक : विजय कुमार वरिष्ठ पत्रकार पटना : बिहार में सहायक नर्स (एएनएम/ANM) पद की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर वर्षों से चली आ रही न्यायिक लड़ाई में सुप्रीम कोर्ट ने अहम राहत का रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति पामिदिघंटम श्री नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की खंडपीठ ने 25 अगस्त 2026 को सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि अदालत के समक्ष उपस्थित हस्तक्षेपकर्ताओं सहित 1,362 अभ्यर्थियों की नियुक्ति एएनएम पद पर की जानी चाहिए। यह आदेश पटना उच्च न्यायालय के 29 अप्रैल 2024 के एलपीए नंबर 322/2024 के फैसले के विरुद्ध दाखिल एसएलपी (सिविल) संख्या 12696/2024 — अंजलि कुमारी बनाम अर्चना कुमारी एवं अन्य — में पारित हुआ। मामले की पृष्ठभूमि : यह प्रकरण बिहार तकनीकी सेवा आयोग द्वारा एएनएम पद के लिए जारी भर्ती विज्ञापन से जुड़ी नियुक्ति प्रक्रिया में देरी और विवाद से उपजा है। एक ही आदेश में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एसएलपी संख्या 12696/2024 के साथ-साथ एसएलपी संख्या 13220/2024, 12430/2024, 19326/2024, 19327/2024, 19328/2024 तथा 2024-26 के बीच दाखिल कई डायरी नंबर और छह रिट याचिकाएं भी संयुक्त रूप से सूचीबद्ध हैं। इनमें दर्जनों आवेदन कंडोनेशन ऑफ डिले, अंतरिम राहत, और हस्तक्षेप/इंप्लीडमेंट से जुड़े हैं — जो यह दर्शाता है कि इस भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों के अलग-अलग समूह वर्षों से समानांतर कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। रिकॉर्ड ऑफ प्रोसीडिंग्स के अनुसार, 3 फरवरी 2026 के पूर्व आदेश के अनुपालन में बिहार सरकार के स्थायी अधिवक्ता श्री मनीष कुमार ने राज्य सरकार से निर्देश प्राप्त किए, जिसके बाद अदालत ने उपरोक्त निर्णय सुनाया। “1,362 अभ्यर्थियों को एएनएम पद पर नियुक्ति दी जानी चाहिए, किंतु राज्य सरकार पहले उनकी अर्हता की पुष्टि करे” — सुप्रीम कोर्ट आदेश में क्या निर्देश दिए गए : अदालत के समक्ष उपस्थित हस्तक्षेपकर्ताओं सहित कुल 1,362 अभ्यर्थियों की नियुक्ति एएनएम पद पर की जानी चाहिए — यह कोर्ट की स्पष्ट राय है। नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने से पहले राज्य सरकार यह जांच करेगी कि अभ्यर्थी आवश्यक योग्यता रखते हैं या नहीं। इस सत्यापन एवं परीक्षण के लिए राज्य सरकार एक दो-सदस्यीय समिति गठित कर सकती है। पूरी प्रक्रिया आज (25 अगस्त 2026) से एक महीने के भीतर पूर्ण करनी होगी। अभ्यर्थियों के अधिवक्ताओं की सहमति से तय हुआ कि अभ्यर्थी 7 सितंबर से 12 सितंबर 2026 के बीच समिति के समक्ष उपस्थित होंगे, जिसकी सूचना उन्हें पहले से दी जाएगी। राज्य के स्थायी अधिवक्ता मनीष कुमार अगली सुनवाई तक प्रक्रिया की पूर्णता पर निर्देश लेकर रिपोर्ट करेंगे। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को होगी। ज़मीनी सवाल : यह आदेश राहत भरा जरूर है, पर कई सवाल बरकरार हैं। पहला — जिन 1,362 अभ्यर्थियों के नाम अदालत के समक्ष हैं, वर्षों की मुकदमेबाजी के बाद भी उनकी नियुक्ति ‘अर्हता जांच’ की एक और शर्त के अधीन क्यों रखी गई है? दूसरा — दर्जनों हस्तक्षेप/इंप्लीडमेंट आवेदन यह बताते हैं कि इस भर्ती में कितने और अभ्यर्थी समूह खुद को हकदार मानकर अदालत का दरवाजा खटखटा चुके हैं — क्या राज्य सरकार की मूल चयन-सूची प्रक्रिया में शुरू से ही पारदर्शिता की कमी थी? तीसरा — दो-सदस्यीय समिति की जांच प्रक्रिया कितनी निष्पक्ष और समयबद्ध होगी, यह तभी स्पष्ट होगा जब 13 अक्टूबर को राज्य सरकार अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। चौथा — बिहार के स्वास्थ्य विभाग में एएनएम जैसे अहम पदों की नियुक्ति में इतनी लंबी देरी का सीधा असर राज्य की ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं, खासकर मातृ-शिशु स्वास्थ्य ढांचे पर पड़ता है — इसकी जवाबदेही किसकी होगी? मांग : राज्य सरकार अर्हता-सत्यापन समिति का गठन तुरंत करे और यह प्रक्रिया पूर्णतः पारदर्शी, समयबद्ध व सार्वजनिक रूप से सत्यापन-योग्य हो। 7 से 12 सितंबर के बीच होने वाली उपस्थिति और दस्तावेज़ सत्यापन की सूचना सभी 1,362 अभ्यर्थियों तक स्पष्ट रूप से और समय रहते पहुँचाई जाए। स्वास्थ्य विभाग यह सुनिश्चित करे कि निर्धारित एक माह की समयसीमा किसी प्रशासनिक बहाने से आगे न खिसके, जैसा इस भर्ती के मामले में पूर्व में होता रहा है। 13 अक्टूबर की अगली सुनवाई से पहले राज्य सरकार की अनुपालन रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि अभ्यर्थियों व जनता के बीच भरोसा बने। निष्कर्ष : बिहार में एएनएम भर्ती का यह मामला सिर्फ 1,362 अभ्यर्थियों के भविष्य का सवाल नहीं, बल्कि राज्य की भर्ती-प्रणाली की साख का भी प्रश्न है। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश उम्मीद की किरण है, लेकिन असली परीक्षा अब राज्य सरकार और उसकी प्रस्तावित समिति की होगी — क्या वह एक महीने के भीतर, बिना किसी नई अड़चन के, इन अभ्यर्थियों को उनका हक दिला पाएगी?
ढाई साल से अटकी नियुक्ति की राह: सुप्रीम कोर्ट ने 1,362 एएनएम अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने का दिया निर्देश, योग्यता जांच के लिए एक महीने में बनेगी दो-सदस्यीय समिति, अभ्यर्थी 7 से 12 सितंबर के बीच होंगे पेश — अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को, लेखक : विजय कुमार वरिष्ठ पत्रकार पटना : बिहार में सहायक नर्स (एएनएम/ANM) पद की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर वर्षों से चली आ रही न्यायिक लड़ाई में सुप्रीम कोर्ट ने अहम राहत का रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति पामिदिघंटम श्री नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की खंडपीठ ने 25 अगस्त 2026 को सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि अदालत के समक्ष उपस्थित हस्तक्षेपकर्ताओं सहित 1,362 अभ्यर्थियों की नियुक्ति एएनएम पद पर की जानी चाहिए। यह आदेश पटना उच्च न्यायालय के 29 अप्रैल 2024 के एलपीए नंबर 322/2024 के फैसले के विरुद्ध दाखिल एसएलपी (सिविल) संख्या 12696/2024 — अंजलि कुमारी बनाम अर्चना कुमारी एवं अन्य — में पारित हुआ। मामले की पृष्ठभूमि : यह प्रकरण बिहार तकनीकी सेवा आयोग द्वारा एएनएम पद के लिए जारी भर्ती विज्ञापन से जुड़ी नियुक्ति प्रक्रिया में देरी और विवाद से उपजा है। एक ही आदेश में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एसएलपी संख्या 12696/2024 के साथ-साथ एसएलपी संख्या 13220/2024, 12430/2024, 19326/2024, 19327/2024, 19328/2024 तथा 2024-26 के बीच दाखिल कई डायरी नंबर और छह रिट याचिकाएं भी संयुक्त रूप से सूचीबद्ध हैं। इनमें दर्जनों आवेदन कंडोनेशन ऑफ डिले, अंतरिम राहत, और हस्तक्षेप/इंप्लीडमेंट से जुड़े हैं — जो यह दर्शाता है कि इस भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों के अलग-अलग समूह वर्षों से समानांतर कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। रिकॉर्ड ऑफ प्रोसीडिंग्स के अनुसार, 3 फरवरी 2026 के पूर्व आदेश के अनुपालन में बिहार सरकार के स्थायी अधिवक्ता श्री मनीष कुमार ने राज्य सरकार से निर्देश प्राप्त किए, जिसके बाद अदालत ने उपरोक्त निर्णय सुनाया। “1,362 अभ्यर्थियों को एएनएम पद पर नियुक्ति दी जानी चाहिए, किंतु राज्य सरकार पहले उनकी अर्हता की पुष्टि करे” — सुप्रीम कोर्ट आदेश में क्या निर्देश दिए गए : अदालत के समक्ष उपस्थित हस्तक्षेपकर्ताओं सहित कुल 1,362 अभ्यर्थियों की नियुक्ति एएनएम पद पर की जानी चाहिए — यह कोर्ट की स्पष्ट राय है। नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने से पहले राज्य सरकार यह जांच करेगी कि अभ्यर्थी आवश्यक योग्यता रखते हैं या नहीं। इस सत्यापन एवं परीक्षण के लिए राज्य सरकार एक दो-सदस्यीय समिति गठित कर सकती है। पूरी प्रक्रिया आज (25 अगस्त 2026) से एक महीने के भीतर पूर्ण करनी होगी। अभ्यर्थियों के अधिवक्ताओं की सहमति से तय हुआ कि अभ्यर्थी 7 सितंबर से 12 सितंबर 2026 के बीच समिति के समक्ष उपस्थित होंगे, जिसकी सूचना उन्हें पहले से दी जाएगी। राज्य के स्थायी अधिवक्ता मनीष कुमार अगली सुनवाई तक प्रक्रिया की पूर्णता पर निर्देश लेकर रिपोर्ट करेंगे। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को होगी। ज़मीनी सवाल : यह आदेश राहत भरा जरूर है, पर कई सवाल बरकरार हैं। पहला — जिन 1,362 अभ्यर्थियों के नाम अदालत के समक्ष हैं, वर्षों की मुकदमेबाजी के बाद भी उनकी नियुक्ति ‘अर्हता जांच’ की एक और शर्त के अधीन क्यों रखी गई है? दूसरा — दर्जनों हस्तक्षेप/इंप्लीडमेंट आवेदन यह बताते हैं कि इस भर्ती में कितने और अभ्यर्थी समूह खुद को हकदार मानकर अदालत का दरवाजा खटखटा चुके हैं — क्या राज्य सरकार की मूल चयन-सूची प्रक्रिया में शुरू से ही पारदर्शिता की कमी थी? तीसरा — दो-सदस्यीय समिति की जांच प्रक्रिया कितनी निष्पक्ष और समयबद्ध होगी, यह तभी स्पष्ट होगा जब 13 अक्टूबर को राज्य सरकार अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। चौथा — बिहार के स्वास्थ्य विभाग में एएनएम जैसे अहम पदों की नियुक्ति में इतनी लंबी देरी का सीधा असर राज्य की ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं, खासकर मातृ-शिशु स्वास्थ्य ढांचे पर पड़ता है — इसकी जवाबदेही किसकी होगी? मांग : राज्य सरकार अर्हता-सत्यापन समिति का गठन तुरंत करे और यह प्रक्रिया पूर्णतः पारदर्शी, समयबद्ध व सार्वजनिक रूप से सत्यापन-योग्य हो। 7 से 12 सितंबर के बीच होने वाली उपस्थिति और दस्तावेज़ सत्यापन की सूचना सभी 1,362 अभ्यर्थियों तक स्पष्ट रूप से और समय रहते पहुँचाई जाए। स्वास्थ्य विभाग यह सुनिश्चित करे कि निर्धारित एक माह की समयसीमा किसी प्रशासनिक बहाने से आगे न खिसके, जैसा इस भर्ती के मामले में पूर्व में होता रहा है। 13 अक्टूबर की अगली सुनवाई से पहले राज्य सरकार की अनुपालन रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि अभ्यर्थियों व जनता के बीच भरोसा बने। निष्कर्ष : बिहार में एएनएम भर्ती का यह मामला सिर्फ 1,362 अभ्यर्थियों के भविष्य का सवाल नहीं, बल्कि राज्य की भर्ती-प्रणाली की साख का भी प्रश्न है। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश उम्मीद की किरण है, लेकिन असली परीक्षा अब राज्य सरकार और उसकी प्रस्तावित समिति की होगी — क्या वह एक महीने के भीतर, बिना किसी नई अड़चन के, इन अभ्यर्थियों को उनका हक दिला पाएगी?
- *हंटरगंज थाना पुलिस ने पेश की मानवता की मिसाल,* *घायल युवक को समय पर पहुंचाया अस्पताल,गया रेफर* *विकास कुमार यादव* हंटरगंज (चतरा): हंटरगंज थाना पुलिस ने गुरुवार को सड़क हादसे में घायल युवक को समय पर अस्पताल पहुंचाकर मानवता और तत्परता की मिसाल पेश की।एंबुलेंस के पहुंचने में देरी होती देख गश्ती दल ने बिना समय गंवाए अपने वाहन से घायल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हंटरगंज पहुंचाया। पुलिस की इस तत्परता से घायल को तत्काल इलाज मिल सका।जानकारी के अनुसार, हंटरगंज थाना क्षेत्र के डुमरी स्थित पीएनबी बैंक के समीप एक बाइक अनियंत्रित होकर चतरा- डोभी मुख्य पथ पर गिर गई। हादसे में बाइक सवार युवक गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर पड़ा था। सूचना मिलते ही हंटरगंज थाना की गश्ती टीम मौके पर पहुंची और घायल युवक को तत्काल अपने वाहन से अस्पताल पहुंचाया।घायल युवक की पहचान बिहार के गया जिले के गुरारू थाना क्षेत्र के जलालपुर निवासी रामप्रवेश सिंह के 33 वर्षीय पुत्र बब्लू सिंह के रूप में हुई है। वहीं उसके साथ मौजूद युवक की पहचान मथुरापुर गांव निवासी अनुज विश्वकर्मा के 30 वर्षीय पुत्र राजेश विश्वकर्मा के रूप में हुई है।दोनों घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हंटरगंज में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों ने तत्काल उपचार शुरू किया। बब्लू सिंह के बाएं हाथ में फ्रैक्चर तथा सिर में गंभीर चोट को देखते हुए चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल, गया रेफर कर दिया। *सड़क सुरक्षा को लेकर पुलिस की अपील* हंटरगंज थाना के एसआई वीरबहादुर सिंह ने लोगों से वाहन चलाते समय सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि वाहन की गति नियंत्रित रखें और दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट का अनिवार्य रूप से इस्तेमाल करें। थोड़ी सी सावधानी सड़क हादसों को काफी हद तक रोक सकती है।पुलिस की इस मानवीय पहल की स्थानीय लोगों ने सराहना की है।1
- ब्लॉक रोड़ में गो ग्रीन स्मार्ट इलेक्ट्रिक स्कूटी एंड सोलर लाइफ प्रतिष्ठान का भव्य उद्घाटन। रफीगंज शहर के ब्लॉक रोड ओवरब्रिज के समीप इलेक्ट्रिक वाहन और सोलर उपकरणों की सुविधा को बढ़ावा देने की दिशा में एक नई पहल के तहत गो ग्रीन स्मार्ट इलेक्ट्रिक स्कूटी एंड सोलर लाइफ प्रतिष्ठान का गुरुवार दोपहर क़रीब एक बजे भव्य उद्घाटन किया गया। गुरुवार को मो जमशेद आलम, डॉ अब्दुल रशीद, तबरेज़ आलम,परवेज आलम, सदाम आलम ,विधायक प्रतिनिधि भोला चौधरी, जदयू प्रखंड अध्यक्ष मधुकर लाल कुशवाहा , मो सुहैल ने संयुक्त रूप से फीता काटकर प्रतिष्ठान का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग एवं ग्राहक मौजूद रहे। प्रतिष्ठान के संचालक एम. एस. हुसैन एवं शम्स परवेज ने बताया कि यहां ग्राहकों को इलेक्ट्रिक स्कूटी के साथ-साथ स्कूटी एक्सेसरीज एवं सर्विस सेंटर की सुविधा उपलब्ध होगी। इसके अलावा सोलर सिस्टम, इन्वर्टर, बैटरी, सोलर स्ट्रक्चर, सोलर इंस्टॉलेशन, मेंटेनेंस और अन्य सोलर उपकरण भी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराए जाएंगे। ग्राहकों के लिए आसान ईएमआई सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। संचालकों ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इलेक्ट्रिक स्कूटी एवं सौर ऊर्जा से जुड़े उत्पादों को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इसमे इरफान आलम, पूर्व मुखिया आलमगीर आलम सहित अन्य शामिल हुए ।1
- गया में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, हजारों लीटर महुआ शराब बरामद। गया जी। मुफस्सिल थाना क्षेत्र के खरहरी गांव के पहाड़ी इलाके में पुलिस ने अवैध महुआ शराब के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए हजारों लीटर महुआ शराब बरामद की है। थाना अध्यक्ष को मिली गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस टीम का गठन किया गया। टीम में एएसआई कमल किशोर, एएसआई अमित कुमार, एएसआई धर्मेंद्र कुमार सहित पांच पुलिस जवान शामिल थे। पुलिस टीम जैसे ही मौके पर पहुंची, पुलिस को देखकर शराब के धंधे में शामिल लोग पहाड़ की ओर भागने लगे। उन्हें पकड़ने के लिए पुलिस जवानों को भी काफी मशक्कत करनी पड़ी। बताया जा रहा है कि जवानों ने जूते खोलकर पानी और कीचड़ में उतरकर भाग रहे लोगों का पीछा किया। कार्रवाई के दौरान अभियुक्त उमेश मांझी को गिरफ्तार किया गया। मौके से हजारों लीटर महुआ शराब, एक ग्लैमर बाइक, 10 बड़े डेकचा, 10 बोरा कोयला और 5 गैलन शराब बरामद की गई। पुलिस गिरफ्तार अभियुक्त से पूछताछ कर रही है और शराब के इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। रिपोर्ट: Ashutosh Kumar | गयाजी1
- मा मंत्री सूक्ष्म लघु मध्यम भारत सरकार जीतन राम मांझी द्वारा अपने विभाग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार एवं वर्कशॉप आनंद पैलेस टिकारी में आगमन के समय का दृश्य l1
- रफीगंज में प्रतिबंधित पशु के वध का आरोप, थाने में प्राथमिकी के लिए दिया आवेदन , दो बछडा़ को भेजा गया देवकुण्ड गौशाला रफीगंज थाना क्षेत्र राजा बिगहा के स्थित डॉ उदय कुमार के क्लीनिक से 100 मीटर दुर प्रतिबंधित पशु के कथित वध का मामला सामने आया है। घटना की जानकारी मिलते ही घटनास्थल पर हिंदु संगठन एवं भाजपा के नेता पहुंचे तथा पुलिस को जानकारी मिलने पर रफीगंज थाना अध्यक्ष शंभू कुमार, एस आई मिथलेश कुमार, ए एस आई बबनजीत कुमार, ए एस आई सुनिल सिंह, ए एस आई मृत्युंजय कुमार, ए एस आई संतोष कुमार सहित अन्य पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों के बीच उत्पन विवाद को शांत कराया। इस संबंध में रफीगंज शहर के गौ रक्षा दल के एक सदस्य ने रफीगंज थाना में आवेदन देकर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। आवेदन के अनुसार, 27 अगस्त 2026 की सुबह करीब 9 बजे आवेदक को सूचना मिली कि कुछ लोगों प्रतिबंधित पशु का वध किया जा रहा है। सूचना मिलने पर जब वहां पहुंचकर देखा गया तो पशु के अवशेष तथा खून के निशान दिखाई दिए तथा दो बछड़ा पाया गया। आवेदक ने मामले की जांच कर संबंधित लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई एवं प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। मौके पर एसडीएम गौरव कुमार सिंह, एस डीपीओ सदर 2 आदित्य कुमार पहुंचे तथा लोगों से बातचीत की। सदर एसडीपीओ 2 आदित्य कुमार ने बताया कि मामला शांतिपूर्वक है, प्राप्त आवेदन के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस द्वारा अग्रिम कार्रवाई की जा रही है। दोनों बछड़ा को देवकुंड गौशाला में सुरक्षित भेजा गया है।1
- भीषण त्रासदी में अपनी जान गंवाने वाले लोगों की स्मृति में कैंडल जलाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने दो मिनट का मौन धारण कर दिवंगत आत्माओं को श्रद्धा-सुमन अर्पित किए- डा मनीष पंकज मिश्रा तिब्बत सीमा से लगे नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र में बुधवार को आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। अचानक आई बाढ़ और तेज जलप्रवाह के कारण बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। इस प्राकृतिक आपदा में कई भारतीय नागरिकों के भी लापता होने की सूचना है। बताया जा रहा है कि लापता भारतीयों में कुछ श्रद्धालु कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे थे, जो अचानक आई भीषण बाढ़ की चपेट में आ गए और उनके संबंध में कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है। इस हृदयविदारक घटना ने देशभर के लोगों को गहरे शोक और चिंता में डाल दिया है।इस भीषण प्राकृतिक आपदा में लोगों के लापता होने और कई लोगों के जान गंवाने की सूचना से हर कोई दुखी है। संकट की इस घड़ी में भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. मनीष पंकज मिश्रा ने लापता भारतीय नागरिकों तथा उनके परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना एवं सहानुभूति व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अपनों के लापता होने का दर्द अत्यंत पीड़ादायक और असहनीय है। इस कठिन समय में हम सभी प्रभावित परिवारों के साथ खड़े हैं और ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि लापता सभी भारतीय श्रद्धालुओं की शीघ्र सकुशल वापसी हो। डॉ. मनीष पंकज मिश्रा ने इस भीषण त्रासदी में अपनी जान गंवाने वाले लोगों की स्मृति में कैंडल जलाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने दो मिनट का मौन धारण कर दिवंगत आत्माओं को श्रद्धा-सुमन अर्पित किए और उनके परिवारों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा में अपनों को खोने वाले परिवारों का दुःख शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। ऐसी विपरीत परिस्थितियों में मानवता और संवेदनशीलता के साथ पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा होना हम सभी का कर्तव्य है। उन्होंने भगवान विष्णु से प्रार्थना करते हुए कहा कि प्रभु इस कठिन घड़ी में शोकाकुल परिवारों को यह अपार दुःख और कष्ट सहन करने की शक्ति प्रदान करें।1
- रफीगंज में प्रतिबंधित पशु के वध का आरोप, थाने में प्राथमिकी के लिए दिया आवेदन , दो बछडा़ को भेजा गया देवकुण्ड गौशाला रफीगंज थाना क्षेत्र राजा बिगहा के स्थित डॉ उदय कुमार के क्लीनिक से 100 मीटर दुर प्रतिबंधित पशु के कथित वध का मामला सामने आया है। घटना की जानकारी मिलते ही घटनास्थल पर हिंदु संगठन एवं भाजपा के नेता पहुंचे तथा पुलिस को जानकारी मिलने पर रफीगंज थाना अध्यक्ष शंभू कुमार, एस आई मिथलेश कुमार, ए एस आई बबनजीत कुमार, ए एस आई सुनिल सिंह, ए एस आई मृत्युंजय कुमार, ए एस आई संतोष कुमार सहित अन्य पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों के बीच उत्पन विवाद को शांत कराया। इस संबंध में रफीगंज शहर के गौ रक्षा दल के एक सदस्य ने रफीगंज थाना में आवेदन देकर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। आवेदन के अनुसार, 27 अगस्त 2026 की सुबह करीब 9 बजे आवेदक को सूचना मिली कि कुछ लोगों प्रतिबंधित पशु का वध किया जा रहा है। सूचना मिलने पर जब वहां पहुंचकर देखा गया तो पशु के अवशेष तथा खून के निशान दिखाई दिए तथा दो बछड़ा पाया गया। आवेदक ने मामले की जांच कर संबंधित लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई एवं प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। मौके पर एसडीएम गौरव कुमार सिंह, एस डीपीओ सदर 2 आदित्य कुमार पहुंचे तथा लोगों से बातचीत की। सदर एसडीपीओ 2 आदित्य कुमार ने बताया कि मामला शांतिपूर्वक है, प्राप्त आवेदन के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस द्वारा अग्रिम कार्रवाई की जा रही है। दोनों बछड़ा को देवकुंड गौशाला में सुरक्षित भेजा गया है।1
- नेपाल और तिब्बत में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के मुताबिक, आपदा में अब तक 175 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 1,500 लोग अभी भी लापता हैं। इनमें लगभग 300 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। नेपाल और तिब्बत में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के मुताबिक, आपदा में अब तक 175 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 1,500 लोग अभी भी लापता हैं। इनमें लगभग 300 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि सरकार अभी आपदा से हुए नुकसान का पूरा आकलन करने में जुटी है। लापता लोगों में करीब 800 विदेशी नागरिक बताए जा रहे हैं। हजारों परिवारों के घर तबाह हो गए हैं और कई लोग अब तक लापता1