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सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के माध्यम से बिहार पुलिस के एक कथित 'कारनामे' पर कड़ा कटाक्ष किया गया है। पोस्ट में लोगों से इस घटना को 'जरा देख लेने' का आग्रह किया गया है, जहाँ यह भी बताया गया है कि इस 'कारनामे' में एक महिला भी दिख रही है।
Pawan Mahto Reporter
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के माध्यम से बिहार पुलिस के एक कथित 'कारनामे' पर कड़ा कटाक्ष किया गया है। पोस्ट में लोगों से इस घटना को 'जरा देख लेने' का आग्रह किया गया है, जहाँ यह भी बताया गया है कि इस 'कारनामे' में एक महिला भी दिख रही है।
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- मधुबनी जिले के लदनियाँ प्रखंड अंतर्गत गिधवास पंचायत के वार्ड संख्या 8 में पिछले कई दिनों से एक नाला अधूरा पड़ा है, जिससे यह राहगीरों के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस अधूरे नाले के कारण आए दिन लोग दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। ग्रामीणों की शिकायत है कि इतने समय बीत जाने के बाद भी न तो नाले का निर्माण कार्य पूरा किया गया है और न ही इसकी सुरक्षा के लिए कोई उचित व्यवस्था की गई है, जिसके चलते यह स्थानीय समस्या लगातार बनी हुई है और लोग सड़क सुरक्षा की माँग कर रहे हैं।1
- मधुबनी जिले के बसोपट्टी क्षेत्र में चाचा के घर हुई 50 लाख रुपये की चोरी के मामले का खुलासा सिर्फ 5 दिनों के भीतर कर लिया गया है। इस चोरी का खुलासा स्वयं पीड़ित के भतीजे ने किया, जिसके बाद एक नाबालिग सहित कुल तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने आरोपितों के पास से चोरी की गई नकदी, जेवर, मोबाइल फोन और लेन-देन में इस्तेमाल किया गया एक अन्य फोन भी बरामद किया है।1
- मधुबनी जिला प्रशासन ने 30 जून, 2026 को सुशासन, पारदर्शिता और ई-गवर्नेंस की दिशा में एक ऐतिहासिक और अभिनव पहल की है। जिलाधिकारी आनंद शर्मा की सतत निगरानी और निर्देशन में, 1700 से अधिक कर्मियों, जिनमें कार्यपालक सहायक, आई.टी. सहायक और डाटा एंट्री ऑपरेटर शामिल हैं, का ऑनलाइन रैंडमाइजेशन के माध्यम से स्थानांतरण और पदस्थापन किया गया। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एन.आई.सी.) के ई-एप्लीकेशन द्वारा पूरी तरह से डिजिटल, निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से संपन्न हुई यह प्रक्रिया संभवतः बिहार का पहला ऐसा उदाहरण है, जहाँ इतने बड़े पैमाने पर मानवीय हस्तक्षेप के बिना डिजिटल ऑनलाइन रैंडमाइजेशन प्रणाली का उपयोग किया गया है। पूरी प्रक्रिया का मधुबनी जिला प्रशासन के आधिकारिक फेसबुक पेज पर सीधा प्रसारण किया गया, जिससे संबंधित कर्मियों और आम नागरिकों को वास्तविक समय में इसे देखने का अवसर मिला, जिसने प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जनविश्वास को नई मजबूती दी। जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने स्वयं इस पूरी प्रक्रिया की लगातार निगरानी की और प्रत्येक चरण का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग समय की आवश्यकता है, जिससे प्रशासनिक प्रक्रियाएं अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष, जवाबदेह और प्रभावी बनती हैं, और मानवीय हस्तक्षेप की संभावनाएं समाप्त होती हैं। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जिला प्रशासन का उद्देश्य प्रत्येक प्रशासनिक प्रक्रिया को तकनीक आधारित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना है, और यह पहल सुशासन की भावना को और अधिक सशक्त करेगी। ऑनलाइन रैंडमाइजेशन के माध्यम से सभी कर्मियों के साथ समान और निष्पक्ष व्यवहार सुनिश्चित हुआ है। जिला प्रशासन ने भविष्य में भी विभिन्न प्रशासनिक प्रक्रियाओं में ई-गवर्नेंस और डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग जारी रखने का संकल्प लिया है। इस स्थानांतरण में जिला मुख्यालय एवं सभी प्रखंड कार्यालयों के कुल 20 आई.टी. सहायक, आरटीपीएस के 92 कार्यपालक सहायक, जिला लोक शिकायत निवारण तथा अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण के 24 कार्यपालक सहायक, वीबी-जी राम जी के 18 लेखपाल और 20 कार्यपालक सहायक, लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के 21 कार्यपालक सहायक, 22 आवास पर्यवेक्षक सहित अन्य विभागों जैसे आवास सहायक, जिला आपूर्ति शाखा के कार्यपालक सहायक/कंप्यूटर ऑपरेटर, जिला सहकारिता कार्यालय के कार्यपालक सहायक/कंप्यूटर ऑपरेटर, जिला पशुपालन कार्यालय के कार्यपालक सहायक/कंप्यूटर ऑपरेटर, जिला कृषि कार्यालय के कार्यपालक सहायक/कंप्यूटर ऑपरेटर, सहायक तकनीक प्रबंधक, प्रखंड तकनीकी प्रबंधक, जिला पंचायत के प्रखंड/पंचायत कार्यपालक सहायक/कंप्यूटर ऑपरेटर/आई.टी.सहायक-सह-लेखपाल/तकनीकी सहायक/पंचायत सचिव, स्वास्थ्य विभाग के बी.एम./प्रखंड लेखपाल/बी.सी.एम./बी.एच.एम./एच.एम. तथा जिला स्थापना शाखा एवं आई.सी.डी.एस. के लिपिक/राजस्व कर्मचारी/महिला पर्यवेक्षिका/कार्यपालक सहायक/कंप्यूटर ऑपरेटर सहित अन्य कर्मियों का स्थानांतरण किया गया है। मधुबनी जिला प्रशासन ने 1700 से अधिक कर्मियों का पूर्णतः डिजिटल माध्यम से स्थानांतरण कर प्रशासनिक सुधार और तकनीकी नवाचार का एक नया मानक स्थापित किया है, जिसे पारदर्शी एवं जवाबदेह प्रशासन की दिशा में एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। स्थानांतरण एवं पदस्थापन संबंधी आदेश जिला प्रशासन, मधुबनी की आधिकारिक वेबसाइट तथा जिला प्रशासन के फेसबुक पेज पर उपलब्ध करा दिए गए हैं।3
- बिहार में शराबबंदी की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं, जिसमें सीधे तौर पर पूछा गया है कि क्या राज्य का प्रशासन भी तारी दारू का सेवन करता है। इस पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए यह जानने की कोशिश की गई है कि क्या बिहार में वास्तव में शराबबंदी प्रभावी रूप से लागू है।1
- बिहार राज्य पथ परिवहन निगम ने झंझारपुर और मधुबनी के बीच यात्रा करने वाली महिलाओं के लिए एक विशेष 'महिला पिंक बस सेवा' शुरू की है। बिहार सरकार के मंत्री नीतीश कुमार मिश्रा ने हरी झंडी दिखाकर इस बस सेवा का विधिवत शुभारंभ किया। इस सेवा का मुख्य उद्देश्य महिला यात्रियों की सुरक्षा, सुविधा और सम्मान सुनिश्चित करना है, जिसके तहत केवल महिलाएं ही इन बसों में यात्रा कर सकेंगी। उम्मीद है कि यह पहल छात्राओं, कामकाजी महिलाओं और दैनिक यात्रियों के लिए विशेष रूप से लाभदायक सिद्ध होगी। इस शुभारंभ कार्यक्रम में हजारों लोगों की भारी भीड़ उमड़ी, जहाँ झंझारपुर अनुमंडल के एसडीएम और एसडीपीओ सहित कई वरीय प्रशासनिक पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा पार्टी कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। यह महिला पिंक बस सेवा झंझारपुर से समिया होते हुए मधुबनी तक संचालित की जाएगी।1
- बिहार सरकार से एक व्यक्ति ने अपने गाँव की सड़क के तत्काल निर्माण के लिए निवेदन किया है। इस निवेदन में आग्रह किया गया है कि गाँव की सड़क को 'कुशल' तरीके से जल्द से जल्द बनवाया जाए।1
- लोगों से आग्रह किया गया है कि वे मधुबनी के विधायक माधव आनंद जी द्वारा कही गई बातों को ध्यानपूर्वक सुनें।1
- मधुबनी जिले के भेजा थाना क्षेत्र के खूजरी गांव में 112 पुलिस टीम पर गंभीर आरोप लगे हैं। परिजनों ने दावा किया है कि जांच-पड़ताल के दौरान एक महिला के साथ अभद्र व्यवहार किया गया और बंदूक के बट या नोक से वार करके उसकी आंख घायल कर दी गई। फिलहाल इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस पूरे मामले पर पुलिस का पक्ष सामने आना और एक निष्पक्ष जांच किया जाना अभी बाकी है।1
- मधुबनी के गंगासागर चौक पर समाजसेवी इंद्रशेखर झा के आवास पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में मैथिल परशुराम सेना ने भरत भूषण तिवारी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। संगठन के सदस्यों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत भरत भूषण तिवारी को श्रद्धासुमन चढ़ाए। इस अवसर पर सभा में मौजूद सभी सदस्यों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया और अपनी संवेदनाएँ प्रकट कीं।1