tet के खिलाफ शिक्षकों ने खोला मोर्चा, TET से मुक्ति और प्रथम नियुक्ति से मिले सेवा लाभ की मांग, रैली निकाल कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन मृगेन्द्र सिंह अनूपपुर जिले में बुधवार की शाम अध्यापक/शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने शिक्षकों की ज्वलंत समस्याओं को लेकर हुंकार भर दी है। दोपहर को सामतपुर तालाब पर मोर्चा के पदाधिकारी सदस्य एकत्रित हुए जहां आम बैठक पर चर्चाएं हुई। इसके बाद शाम 4 बजे संयुक्त मोर्चा सदस्यों ने सामतपुर तिराहा से कलेक्ट्रेट कार्यालय तक पदयात्रा रैली निकाली। संयुक्त मोर्चा के जिला पदाधिकारियों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर दो टूक शब्दों में कहा कि प्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा TET की अनिवार्यता से मुक्त किया जाए। साथ ही शिक्षकों की सेवा अवधि की गणना उनके प्रथम नियुक्ति दिनांक से की जाए ताकि उन्हें पेंशन और ग्रेच्युटी जैसे लाभ मिल सकें। संयुक्त मोर्चा के जिलाध्यक्ष संतोष कुमार मिश्रा, शासकीय शिक्षक संगठन के जिलाध्यक्ष निवास तिवारी और मप्र शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष संजय निगम ने बताया कि लोक शिक्षण संचालनालय और जनजातीय कार्य विभाग द्वारा नॉन-TET शिक्षकों पर परीक्षा उत्तीर्ण करने का दबाव बनाया जा रहा है। 2001 के पहले और बाद में नियुक्त संविदा शिक्षकों के साथ-साथ 2011-14 के बीच गुरुजी से संविदा शिक्षक बने कर्मियों को TET से छूट प्राप्त है। सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने फैसलों में इस छूट का समर्थन किया है। इसके बावजूद विभाग द्वारा जारी नए आदेश 2 मार्च और 26 मार्च 2026 नियमों के विरुद्ध हैं। लोक शिक्षण और जनजातीय विभाग द्वारा मार्च 2026 में जारी किए गए TET संबंधी आदेशों को तत्काल रद्द किया जाए। शासन हाई कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर डेढ़ लाख शिक्षकों को इस मानसिक तनाव से राहत दिलाए। नवीन शैक्षणिक संवर्ग के शिक्षकों की सेवा अवधि की गणना प्रथम नियुक्ति दिनांक से की जाए, ताकि उन्हें पेंशन, ग्रेच्युटी और अवकाश नगदीकरण का वैधानिक लाभ मिल सके। विभागीय आयुक्तों द्वारा शिक्षकों को TET के लिए बाध्य करना कोर्ट के निर्णय की अवहेलना है। संयुक्त मोर्चा पदाधिकारियों का कहना है कि हम चाहते हैं कि पदोन्नति और क्रमोन्नति की तरह ही अन्य लाभों के लिए भी हमारी पुरानी सेवाओं को आधार माना जाए।
tet के खिलाफ शिक्षकों ने खोला मोर्चा, TET से मुक्ति और प्रथम नियुक्ति से मिले सेवा लाभ की मांग, रैली निकाल कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन मृगेन्द्र सिंह अनूपपुर जिले में बुधवार की शाम अध्यापक/शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने शिक्षकों की ज्वलंत समस्याओं को लेकर हुंकार भर दी है। दोपहर को सामतपुर तालाब पर मोर्चा के पदाधिकारी सदस्य एकत्रित हुए जहां आम बैठक पर चर्चाएं हुई। इसके बाद शाम 4 बजे संयुक्त मोर्चा सदस्यों ने सामतपुर तिराहा से कलेक्ट्रेट कार्यालय तक पदयात्रा रैली निकाली। संयुक्त मोर्चा के जिला पदाधिकारियों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर दो टूक शब्दों में कहा कि प्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा TET की अनिवार्यता से मुक्त किया जाए। साथ ही शिक्षकों की सेवा अवधि की गणना उनके प्रथम नियुक्ति दिनांक से की जाए ताकि उन्हें पेंशन और ग्रेच्युटी जैसे लाभ मिल सकें। संयुक्त मोर्चा के जिलाध्यक्ष संतोष कुमार मिश्रा, शासकीय शिक्षक संगठन के जिलाध्यक्ष निवास तिवारी और मप्र शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष संजय निगम ने बताया कि लोक शिक्षण संचालनालय और जनजातीय कार्य विभाग द्वारा नॉन-TET शिक्षकों पर परीक्षा
उत्तीर्ण करने का दबाव बनाया जा रहा है। 2001 के पहले और बाद में नियुक्त संविदा शिक्षकों के साथ-साथ 2011-14 के बीच गुरुजी से संविदा शिक्षक बने कर्मियों को TET से छूट प्राप्त है। सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने फैसलों में इस छूट का समर्थन किया है। इसके बावजूद विभाग द्वारा जारी नए आदेश 2 मार्च और 26 मार्च 2026 नियमों के विरुद्ध हैं। लोक शिक्षण और जनजातीय विभाग द्वारा मार्च 2026 में जारी किए गए TET संबंधी आदेशों को तत्काल रद्द किया जाए। शासन हाई कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर डेढ़ लाख शिक्षकों को इस मानसिक तनाव से राहत दिलाए। नवीन शैक्षणिक संवर्ग के शिक्षकों की सेवा अवधि की गणना प्रथम नियुक्ति दिनांक से की जाए, ताकि उन्हें पेंशन, ग्रेच्युटी और अवकाश नगदीकरण का वैधानिक लाभ मिल सके। विभागीय आयुक्तों द्वारा शिक्षकों को TET के लिए बाध्य करना कोर्ट के निर्णय की अवहेलना है। संयुक्त मोर्चा पदाधिकारियों का कहना है कि हम चाहते हैं कि पदोन्नति और क्रमोन्नति की तरह ही अन्य लाभों के लिए भी हमारी पुरानी सेवाओं को आधार माना जाए।
- मृगेन्द्र सिंह अनूपपुर जिले में बुधवार की शाम अध्यापक/शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने शिक्षकों की ज्वलंत समस्याओं को लेकर हुंकार भर दी है। दोपहर को सामतपुर तालाब पर मोर्चा के पदाधिकारी सदस्य एकत्रित हुए जहां आम बैठक पर चर्चाएं हुई। इसके बाद शाम 4 बजे संयुक्त मोर्चा सदस्यों ने सामतपुर तिराहा से कलेक्ट्रेट कार्यालय तक पदयात्रा रैली निकाली। संयुक्त मोर्चा के जिला पदाधिकारियों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर दो टूक शब्दों में कहा कि प्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा TET की अनिवार्यता से मुक्त किया जाए। साथ ही शिक्षकों की सेवा अवधि की गणना उनके प्रथम नियुक्ति दिनांक से की जाए ताकि उन्हें पेंशन और ग्रेच्युटी जैसे लाभ मिल सकें। संयुक्त मोर्चा के जिलाध्यक्ष संतोष कुमार मिश्रा, शासकीय शिक्षक संगठन के जिलाध्यक्ष निवास तिवारी और मप्र शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष संजय निगम ने बताया कि लोक शिक्षण संचालनालय और जनजातीय कार्य विभाग द्वारा नॉन-TET शिक्षकों पर परीक्षा उत्तीर्ण करने का दबाव बनाया जा रहा है। 2001 के पहले और बाद में नियुक्त संविदा शिक्षकों के साथ-साथ 2011-14 के बीच गुरुजी से संविदा शिक्षक बने कर्मियों को TET से छूट प्राप्त है। सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने फैसलों में इस छूट का समर्थन किया है। इसके बावजूद विभाग द्वारा जारी नए आदेश 2 मार्च और 26 मार्च 2026 नियमों के विरुद्ध हैं। लोक शिक्षण और जनजातीय विभाग द्वारा मार्च 2026 में जारी किए गए TET संबंधी आदेशों को तत्काल रद्द किया जाए। शासन हाई कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर डेढ़ लाख शिक्षकों को इस मानसिक तनाव से राहत दिलाए। नवीन शैक्षणिक संवर्ग के शिक्षकों की सेवा अवधि की गणना प्रथम नियुक्ति दिनांक से की जाए, ताकि उन्हें पेंशन, ग्रेच्युटी और अवकाश नगदीकरण का वैधानिक लाभ मिल सके। विभागीय आयुक्तों द्वारा शिक्षकों को TET के लिए बाध्य करना कोर्ट के निर्णय की अवहेलना है। संयुक्त मोर्चा पदाधिकारियों का कहना है कि हम चाहते हैं कि पदोन्नति और क्रमोन्नति की तरह ही अन्य लाभों के लिए भी हमारी पुरानी सेवाओं को आधार माना जाए।2
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