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02/01/ 2019 मैं एक शासनादेश आया जिसमें 240 यूनिट बिल्कुल फ्री थी ना तो हथकरधा के अधिकारियों ने नाही बिजली विभाग के अधिकारियों ने उपभोक्ता को इस बात की जानकारी नहीं दी दोनों अधिकारियों की मिली भगत से 2023मे नियामक आयोग द्वारा एक शासनादेश 800 रुपए लूंम के हिसाब से लागू किया गया जिससे उपभोक्ता को परेशानी का सामना सेना पड़ा
SHAMIM AHMAD ANSARI
02/01/ 2019 मैं एक शासनादेश आया जिसमें 240 यूनिट बिल्कुल फ्री थी ना तो हथकरधा के अधिकारियों ने नाही बिजली विभाग के अधिकारियों ने उपभोक्ता को इस बात की जानकारी नहीं दी दोनों अधिकारियों की मिली भगत से 2023मे नियामक आयोग द्वारा एक शासनादेश 800 रुपए लूंम के हिसाब से लागू किया गया जिससे उपभोक्ता को परेशानी का सामना सेना पड़ा
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- दोपहर करीब 2:40 के आस पास छावनी पुलिस चौकी (सेन्ट चार्ल्स स्कूल) पर लाल रंग की गाड़ी तेज गति से होकर गुजर रही थी उस गाड़ी में तीव्र गति से साउंड को बजाकर चलाया जा रहा था जब तिराहे पर प्रशासन ने गाड़ी को रुकने का इशारा किया तो गाड़ी चालक और उसके साथी ने भागने की कोशिश की बाद में गाड़ी को रोक लिया गया । छावनी चौकी इंचार्ज आदित्य सिंह ने जब अलबख्श पुत्र अब्दुल कलाम, बिलाल पुत्र मुस्तफा दोनों जो कि कालंद के रहने वाले है इस प्रक्रिया के बारे में पूछताछ की तो पता चला वह गाड़ी किसी ओर मिलने वाले की थी, दोनों ने गल्ती को स्वीकार नही किया बल्कि असभ्य शब्दों से बात की साथ ही चौकी इंचार्ज आदित्य सिंह को उनके मिलने वाले ने कुछ ले देकर मामले को निपटाने की बात कही। चौकी इंचार्ज आदित्य सिंह ने धारा 151 नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत शांति भंग करने में दोनों का चलान कर सरधना थाना रेफर कर दिया ।2
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- मेरठ व्यूरो रिपोर्ट मेरठ नगर निगम के वार्ड 15-38 में लंबे समय से रुके सड़क निर्माण और जलभराव की समस्या को लेकर हुए प्रदर्शन महापौर हरिकांत आहलुवालिया ने बृहस्पतिवार को मौके पर जाकर निरीक्षण किया।1
- मुज़फ्फरनगर न्यूज़ ब्यूरो कबीर भारत-अमेरिका समझौता या किसान विनाश का ब्लूप्रिंट? अन्नदाता को बाजार में कुचलने की साजिश पर राष्ट्रपति को ज्ञापन एंकर मुज़फ्फरनगर। भारत-अमेरिका के प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर किसान संगठनों ने आर-पार का ऐलान कर दिया है। भारतीय किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा ने इस समझौते को सीधे तौर पर “किसान विनाश का ब्लूप्रिंट” बताते हुए महामहिम राष्ट्रपति को तीखा ज्ञापन भेजा है। संगठन ने चेताया है कि अगर कृषि और डेरी क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के हवाले किया गया, तो यह देश के करोड़ों किसानों को आर्थिक मौत की ओर धकेलने जैसा होगा। Vo राष्ट्रीय अध्यक्ष मौ० शाह आलम ने कहा कि अमेरिका में कृषि और डेरी उत्पादों पर अरबों डॉलर की सब्सिडी दी जाती है। ऐसे में वहां का चीज, मिल्क पाउडर, प्रोटीन, मक्का, सोयाबीन, कपास और बादाम भारतीय बाजार में उतरे, तो देसी किसान प्रतिस्पर्धा में टिक ही नहीं पाएगा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार अन्नदाता को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के सामने निहत्था खड़ा करना चाहती है? ज्ञापन में स्पष्ट मांग की गई है कि कृषि और उससे जुड़े सभी उत्पादों को भविष्य के हर अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते से स्थायी रूप से बाहर रखने की संवैधानिक गारंटी दी जाए। साथ ही यह भी कहा गया है कि किसानों की सहमति के बिना कोई भी कृषि समझौता लागू करना संविधान और लोकतंत्र दोनों का अपमान है। मोर्चा ने MSP को कानूनी दर्जा देने की मांग को देश की कृषि सुरक्षा की बुनियाद बताते हुए कहा कि बिना कानूनी MSP के किसान पूरी तरह बाजार के रहमोकरम पर होगा। छोटे और सीमांत किसानों के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था की मांग करते हुए संगठन ने कहा कि वैश्विक कीमतों का उतार-चढ़ाव किसानों को तबाह कर देगा। किसान नेताओं ने दो टूक कहा कि किसान केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि देश की आत्मनिर्भरता, खाद्य सुरक्षा और सामाजिक संतुलन की रीढ़ है। यदि कृषि को कमजोर किया गया, तो इसका असर पूरे देश पर पड़ेगा। उन्होंने राष्ट्रपति से तत्काल संवैधानिक हस्तक्षेप की मांग की है। इस तीखे ज्ञापन के साथ किसान संगठनों ने सरकार को साफ संकेत दे दिया है कि अगर किसानों की अनदेखी हुई, तो देश एक बार फिर बड़े किसान आंदोलन की ओर बढ़ेगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। 👇 बायट,,राष्ट्रीय अध्यक्ष शाह आलम1
- भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में किसान मोर्चा सक्रिय, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन1
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