तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने महिला आरक्षण बिल को लेकर केंद्र सरकार को घेरा तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने महिला आरक्षण बिल को लेकर केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने लेक व्यू कैफे बिलासपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा है कि केंद्र सरकार की ओर से इस महिला आरक्षण बिल को लेकर चुनाव में हथियार बनाया गया है और केंद्र सरकार की ओर से आम जनता को गुमराह करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा ही महिला आरक्षण बिल के पक्ष में रही है। लेकिन केंद्र की भाजपा सरकार ने जानबूझकर चुनाव के समय इस महिला आरक्षण बिल को लाया गया।उन्होंने कहा कि पूर्व में कांग्रेस के प्रयासों से ही महिलाओं को पंचायती राज और शहरी निकाय में आरक्षण मिला है। वहीं कांग्रेस ने हमेशा ही महिलाओं के उत्थान की बात की है। उन्होंने कहा कि भाजपा पहले ही अन्य विपक्षी दलों के साथ मिलकर इससे पहले महिला आरक्षण बिल का विरोध कर चुकी है। लेकिन इस बार उन्होंने इस तरह का षडयंत्र रचा है। चुनावों को लेकर उन्होंने कहा है कि प्रयास किय जाएंगे कि एक सीट पर एक ही प्रत्याशी उतारा जाए। कांग्रेस की ओर से कमेटियां बना दी गई हैं।
तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने महिला आरक्षण बिल को लेकर केंद्र सरकार को घेरा तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने महिला आरक्षण बिल को लेकर केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने लेक व्यू कैफे बिलासपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा है कि केंद्र सरकार की ओर से इस महिला आरक्षण बिल को लेकर चुनाव में हथियार बनाया गया है और केंद्र सरकार की ओर से आम जनता को गुमराह करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा ही महिला आरक्षण बिल के पक्ष में रही है। लेकिन केंद्र की भाजपा सरकार ने जानबूझकर चुनाव के समय इस महिला आरक्षण बिल को लाया गया।उन्होंने कहा कि पूर्व में कांग्रेस के प्रयासों से ही महिलाओं को पंचायती राज और शहरी निकाय में आरक्षण मिला है। वहीं कांग्रेस ने हमेशा ही महिलाओं के उत्थान की बात की है। उन्होंने कहा कि भाजपा पहले ही अन्य विपक्षी दलों के साथ मिलकर इससे पहले महिला आरक्षण बिल का विरोध कर चुकी है। लेकिन इस बार उन्होंने इस तरह का षडयंत्र रचा है। चुनावों को लेकर उन्होंने कहा है कि प्रयास किय जाएंगे कि एक सीट पर एक ही प्रत्याशी उतारा जाए। कांग्रेस की ओर से कमेटियां बना दी गई हैं।
- हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारी भर्ती एवं सेवा शर्तें अधिनियम-2024 को लेकर भाजपा की बात सच साबित हुई है। दिसंबर 2024 में पारित और फरवरी 2025 से प्रभावी इस अधिनियम के माध्यम से दिसंबर 2003 या उसके बाद के अनुबंध कर्मचारियों के लिए लाभों को पूर्वव्यापी रूप में सीमित कर दिया गया था। झंडूता के विधायक जीतराम कटवाल ने कर्मचारियों से जुडे़ इस संवेदनशील विषय को विधानसभा में प्रभावी ढंग से उठाते हुए सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करने की सलाह दी थी। प्रदेश सरकार ने भले ही भाजपा की इस सलाह को अनसुना किया हो, लेकिन अब हाईकोर्ट ने इस अधिनियम को खारिज कर दिया है। इसे सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। कांग्रेस सरकार द्वारा लाए गए सरकारी कर्मचारी भर्ती एवं सेवा शर्तें अधिनियम का विभिन्न स्तरों पर विरोध हो रहा था। इस अधिनियम को अनुबंध कर्मचारियों के हितों पर कुठाराघात माना जा रहा था। इसके तहत अनुबंध कर्मचारियों को वरिष्ठता का लाभ उनकी नियुक्ति के बजाए नियमितीकरण की तिथि से देने का प्रावधान किया गया था। इससे वरिष्ठता के साथ ही उनके वेतनमान और पदोन्नति आदि पर भी असर पड़ रहा था। कर्मचारियों के विरोध के बावजूद प्रदेश सरकार ने इसे मनमाने ढंग से लागू कर दिया था, लेकिन अब हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट का यह फैसला अनुबंध कर्मियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। गौरतलब है कि झंडूता के विधायक जीतराम कटवाल ने भी विधानसभा में इस अधिनियम को लेकर सरकार को आगाह किया था। उन्होंने कहा था कि प्रदेश के विकास में कर्मचारियों का हमेशा अहम योगदान रहता है। उनके जीवन का एक बड़ा और स्वर्णिम हिस्सा प्रदेश की सेवा करते हुए बीतता है। लिहाजा उन्हें उनके हकों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग का हवाला देते हुए कहा था कि किसी भी जूनियर कर्मचारी को उसके सीनियर से अधिक वेतन व अन्य लाभ नहीं दिए जा सकते। इतना ही नहीं, उन्होंने महाराष्ट्र में ऐसे ही एक मामले में अदालत के फैसले का हवाला देते हुए यह भी कहा था कि हिमाचल में आज भी उस फैसले का अनुसरण किया जाता है। उन्होंने सरकार को इस बारे भी आगाह किया था कि मनमाने ढंग से लागू किए गए इस अधिनियम की वजह से कर्मचारियों को अदालत का दरवाजा खटखटाने पर मजबूर होना पड़ेगा। अदालती मामले बढ़ने से सरकार का कामकाज भी प्रभावित होगा। हाईकोर्ट द्वारा इस एक्ट को खारिज करने से साबित हो गया है कि इस मामले में सरकार गलत थी।1
- घुमारवी,25 अप्रैल (राकेश): घुमारवी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गाँव लेठवी में नवनिर्मित माँ बगलामुखी मंदिर का निर्माण कार्य पूर्ण होने के उपरांत शुक्रवार को माँ बागलामुखी जयंती के उपलक्ष्य पर विधि-विधान के साथ मूर्ति स्थापना एवं प्राण प्रतिष्ठा का भव्य आयोजन किया गया। इस धार्मिक अनुष्ठान को बम्म से पधारे महाराज करमचंद और करीब बीस पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच सम्पन्न करवाया। मंदिर का निर्माण लेठवी के प्रसिद्ध कथावाचक पंडित गोपाल शर्मा एवं उनके बड़े भाई पंडित प्रवेश शर्मा द्वारा करवाया गया है। स्थानीय श्रद्धालुओं के सहयोग से तैयार हुआ यह मंदिर क्षेत्र में आस्था का प्रमुख केंद्र बनेगा। उल्लेखनीय है कि मंदिर परिसर में काल भैरव मंदिर का भी निर्माण किया गया है, जिससे श्रद्धालुओं को एक ही स्थान पर दोनों देवस्थलों के दर्शन का अवसर प्राप्त होगा। माँ बगलामुखी की मूर्ति औहर भजवाणी निवासी संदीप ठाकुर सुपुत्र चांद ठाकुर द्वारा भेंट की गई है। कार्यक्रम के दौरान दिनभर भजन-कीर्तन का आयोजन रहा। गायक राज कुमार व सिंटू ने माता की भेंटों से वातावरण को भक्तिमय बनाए रखा, जिससे श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। इस अवसर पर क्षेत्र के गणमान्य लोग व बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और सभी ने माँ का आशीर्वाद प्राप्त किया।3
- Post by न्यूज रिपोर्टर1
- सोलन में बड़ा हादसा: चंबाघाट फ्लाईओवर पर अनियंत्रित होकर पलटी बारातियों से भरी गाड़ी हिमाचल आज तक के लिए सोलन से पवन सिंघ की रिपोर्ट हिमाचल प्रदेश के सोलन जिला में चंबाघाट फ्लाईओवर पर एक भीषण सड़क हादसा पेश आया है, जहाँ बारातियों से भरी एक गाड़ी अचानक अनियंत्रित होकर सड़क के बीचों-बीच पलट गई। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और फ्लाईओवर के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुँची। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए फौरन क्रेन मंगवाई गई और कड़ी मशक्कत के बाद दुर्घटनाग्रस्त गाड़ी को सीधा कर सड़क से हटाया गया। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए यातायात को सुचारू करवाया और जाम में फँसे लोगों को राहत दिलाई। पुलिस ने इस संदर्भ में आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है। हादसा किस वजह से हुआ—तेज रफ्तार या कोई तकनीकी खराबी—इसकी गहनता से जांच की जा रही है। गनीमत यह रही कि इस बड़े हादसे में समय रहते बचाव कार्य शुरू कर दिया गया। पुलिस प्रशासन ने वाहन चालकों से अपील की है कि फ्लाईओवर और पहाड़ी रास्तों पर सावधानी से वाहन चलाएं ताकि ऐसे हादसों से बचा जा सके।1
- शिक्षा उपनिदेशक किशोर भारती ने जिला के सभी निजी स्कूलों को शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के प्रावधानों का सख्ती से पालन करने के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि अधिनियम के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग एवं वंचित समूहों के बच्चों के लिए प्रवेश स्तर की कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करना अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूल इस आरक्षण को सुनिश्चित करें और पात्र बच्चों को प्राथमिकता के आधार पर प्रवेश दें। इसके साथ ही स्कूलों को अपने नोटिस बोर्ड और अन्य सूचना माध्यमों में इस प्रावधान का स्पष्ट उल्लेख करना होगा, ताकि अधिक से अधिक अभिभावकों को इसकी जानकारी मिल सके। शिक्षा उपनिदेशक ने यह भी निर्देश दिए कि स्कूल आरटीई के तहत प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों की सूची शिक्षा विभाग को समय-समय पर उपलब्ध करवाएं, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य सभी वर्गों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के समान अवसर प्रदान करना है और इस दिशा में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी स्कूल प्रबंधन से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि वे इन निर्देशों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करें, ताकि समाज में शैक्षिक समानता को बढ़ावा मिल सके।1
- जिला स्तरीय शिवबाड़ी मेला 2026 // गगरेट जिला ऊना हिमाचल प्रदेश NINJA1
- शिमला। इनर व्हील क्लब ऑफ शिमला डिस्ट्रिक्ट 308 की ओर से डिस्ट्रिक्ट चेयरमैन पूजा गोयल के आधिकारिक दौरे के अवसर पर व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता क्लब अध्यक्षा निरुपमा चौधरी ने की, जबकि सचिव वंदना सूद ने आयोजन की व्यवस्थाओं का संचालन संभाला। कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षण प्राप्त कर रही छात्राओं द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई, जिसमें कपड़ों पर की गई आकर्षक नक्काशी विशेष रूप से सराहना का केंद्र रही। उपस्थित लोगों ने छात्राओं की मेहनत और रचनात्मकता की प्रशंसा की। इस अवसर पर डिस्ट्रिक्ट चेयरमैन पूजा गोयल ने क्लब की गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में यह प्रयास बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यहां संचालित विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम जैसे ब्यूटीशियन कोर्स, हेयर स्टाइलिंग, नेल आर्ट, सिलाई और कंप्यूटर शिक्षा महिलाओं और युवतियों को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में सशक्त बना रहे हैं।4
- हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारी भर्ती एवं सेवा शर्तें अधिनियम-2024 को लेकर भाजपा की बात सच साबित हुई है। दिसंबर 2024 में पारित और फरवरी 2025 से प्रभावी इस अधिनियम के माध्यम से दिसंबर 2003 या उसके बाद के अनुबंध कर्मचारियों के लिए लाभों को पूर्वव्यापी रूप में सीमित कर दिया गया था। झंडूता के विधायक जीतराम कटवाल ने कर्मचारियों से जुडे़ इस संवेदनशील विषय को विधानसभा में प्रभावी ढंग से उठाते हुए सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करने की सलाह दी थी। प्रदेश सरकार ने भले ही भाजपा की इस सलाह को अनसुना किया हो, लेकिन अब हाईकोर्ट ने इस अधिनियम को खारिज कर दिया है। इसे सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। कांग्रेस सरकार द्वारा लाए गए सरकारी कर्मचारी भर्ती एवं सेवा शर्तें अधिनियम का विभिन्न स्तरों पर विरोध हो रहा था। इस अधिनियम को अनुबंध कर्मचारियों के हितों पर कुठाराघात माना जा रहा था। इसके तहत अनुबंध कर्मचारियों को वरिष्ठता का लाभ उनकी नियुक्ति के बजाए नियमितीकरण की तिथि से देने का प्रावधान किया गया था। इससे वरिष्ठता के साथ ही उनके वेतनमान और पदोन्नति आदि पर भी असर पड़ रहा था। कर्मचारियों के विरोध के बावजूद प्रदेश सरकार ने इसे मनमाने ढंग से लागू कर दिया था, लेकिन अब हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट का यह फैसला अनुबंध कर्मियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। गौरतलब है कि झंडूता के विधायक जीतराम कटवाल ने भी विधानसभा में इस अधिनियम को लेकर सरकार को आगाह किया था। उन्होंने कहा था कि प्रदेश के विकास में कर्मचारियों का हमेशा अहम योगदान रहता है। उनके जीवन का एक बड़ा और स्वर्णिम हिस्सा प्रदेश की सेवा करते हुए बीतता है। लिहाजा उन्हें उनके हकों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग का हवाला देते हुए कहा था कि किसी भी जूनियर कर्मचारी को उसके सीनियर से अधिक वेतन व अन्य लाभ नहीं दिए जा सकते। इतना ही नहीं, उन्होंने महाराष्ट्र में ऐसे ही एक मामले में अदालत के फैसले का हवाला देते हुए यह भी कहा था कि हिमाचल में आज भी उस फैसले का अनुसरण किया जाता है। उन्होंने सरकार को इस बारे भी आगाह किया था कि मनमाने ढंग से लागू किए गए इस अधिनियम की वजह से कर्मचारियों को अदालत का दरवाजा खटखटाने पर मजबूर होना पड़ेगा। अदालती मामले बढ़ने से सरकार का कामकाज भी प्रभावित होगा। हाईकोर्ट द्वारा इस एक्ट को खारिज करने से साबित हो गया है कि इस मामले में सरकार गलत थी।1