पोक्सो कानून के दुरुपयोग पर बालिग होते ही युवती ने खोली सिस्टम की पोल, राष्ट्रपति से न्याय की लगाई गुहार मैं पीड़ित नहीं, साजिश का मोहरा हूँ' गौरव मिश्रा की रिपोर्ट: बालिग होते ही युवती ने खोली सिस्टम की पोल, राष्ट्रपति से न्याय की गुहार लगायी है। मुंगेर जिले से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने पुलिसिया तफ्तीश, गवाहों की सत्यता और पॉक्सो (POSCO) कानून के संभावित दुरुपयोग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। धरहरा थाना क्षेत्र की एक युवती ने बालिग होते ही महामहिम राष्ट्रपति, राज्यपाल और उच्च न्यायालय को पत्र लिखकर यह सनसनीखेज दावा किया है कि उसे साजिश के तहत 'कथित पीड़िता' बनाया गया था, जबकि उसके साथ ऐसी कोई घटना घटी ही नहीं थी। साजिश के पीछे अपनों का हाथ और मुआवजे का खेल साफ नज़र आ रहा है। पीड़िता युवती मौसमी कुमारी उर्फ कशिश सिंह ने अपने आवेदन में स्पष्ट रूप से आरोप लगाया है कि उसे 'मोहरा' बनाकर उसके माता-पिता और कुछ करीबियों ने मिलकर यह झूठा केस रचा था। युवती का दावा है कि इस पूरी साजिश का मुख्य उद्देश्य सरकार से मिलने वाली 4 लाख रुपये की मुआवजा राशि को हड़पना था। युवती ने पत्र में लिखा है कि वह इस 'खून के पैसे' वाले मुआवजे को राज्य सरकार को वापस करना चाहती है। वहीं निर्दोष को आजीवन कारावास, सिस्टम पर गंभीर आरोप लगाया है। युवती के अनुसार, धरहरा थाना कांड संख्या 163/22 के तहत जिस रवि कुमार को उसका अपहरणकर्ता और बलात्कारी बताकर जेल भेजा गया और जिसे माननीय न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई, वह पूरी तरह निर्दोष है। युवती का कहना है कि पुलिस के दबाव और माता-पिता के डर से उसने तब अदालत में झूठी गवाही दी थी क्योंकि उस समय वह नाबालिग थी और उसकी बात सुनने वाला कोई नहीं था। युवती मौसमी सिंह ने आवेदन में धरहरा और जमालपुर थाने के तत्कालीन अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। युवती का कहना है कि उसे 30 घंटे तक अवैध हिरासत में रखकर टॉर्चर किया गया और डरा-धमकाकर सीआरपीसी 164 का झूठा बयान दिलवाया गया। वहीं पीड़िता ने साक्ष्य का हवाला देते हुए मांगें रखी हैं। जिसमें इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय विशेष जांच टीम (SIT) से निष्पक्ष जांच कराई जाए। युवती ने जमालपुर थाना के 7-9-2022 के सीसीटीवी फुटेज की जांच करने की बात कही है, जिससे उसकी सच्चाई साबित हो सके। इसके अलावा गलत चार्जशीट दाखिल करने वाले और जांच में लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग रखी है। पीड़िता मौसमी सिंह इस मामला में सरकार से अपने परिवार को मिले 4 लाख रुपये वापस करने और निर्दोष व्यक्ति को रिहा करने की मांग कर रही है। पीड़िता ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि 1 अप्रैल 2026 को बालिग होने के बाद उसने यह कदम उठाया, ताकि वह स्वतंत्र रूप से अपनी बात रख सके। फिलहाल यह मामला माननीय उच्च न्यायालय पटना में विचाराधीन है (CR. APP (DB) 455/2025) यह मामला न केवल एक व्यक्ति की आजादी से जुड़ा है, बल्कि इस बात का भी प्रमाण है कि कैसे व्यक्तिगत लालच के लिए कानून की धाराओं का दुरुपयोग किया जा सकता है। अब देखना यह है कि राष्ट्रपति भवन और राजभवन इस पर क्या संज्ञान लेते हैं।
पोक्सो कानून के दुरुपयोग पर बालिग होते ही युवती ने खोली सिस्टम की पोल, राष्ट्रपति से न्याय की लगाई गुहार मैं पीड़ित नहीं, साजिश का मोहरा हूँ' गौरव मिश्रा की रिपोर्ट: बालिग होते ही युवती ने खोली सिस्टम की पोल, राष्ट्रपति से न्याय की गुहार लगायी है। मुंगेर जिले से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने पुलिसिया तफ्तीश, गवाहों की सत्यता और पॉक्सो (POSCO) कानून के संभावित दुरुपयोग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। धरहरा थाना क्षेत्र की एक युवती ने बालिग होते ही महामहिम राष्ट्रपति, राज्यपाल और उच्च न्यायालय को पत्र लिखकर यह सनसनीखेज दावा किया है कि उसे साजिश के तहत 'कथित पीड़िता' बनाया गया था, जबकि उसके साथ ऐसी कोई घटना घटी ही नहीं थी। साजिश के पीछे अपनों का हाथ और मुआवजे का खेल साफ नज़र आ रहा है। पीड़िता युवती मौसमी कुमारी उर्फ कशिश सिंह ने अपने आवेदन में स्पष्ट रूप से आरोप लगाया है कि उसे 'मोहरा' बनाकर उसके माता-पिता और कुछ करीबियों ने मिलकर यह झूठा केस रचा था। युवती का दावा है कि इस पूरी साजिश का मुख्य उद्देश्य सरकार से मिलने वाली 4 लाख रुपये की मुआवजा राशि को हड़पना था। युवती ने पत्र में लिखा है कि वह इस 'खून के पैसे' वाले मुआवजे को राज्य सरकार को वापस करना चाहती है। वहीं निर्दोष को आजीवन कारावास, सिस्टम पर गंभीर आरोप लगाया है। युवती के अनुसार, धरहरा थाना कांड संख्या 163/22 के तहत जिस रवि कुमार को उसका अपहरणकर्ता और बलात्कारी बताकर जेल भेजा गया और जिसे माननीय न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई, वह पूरी तरह निर्दोष है। युवती का कहना है कि पुलिस के दबाव और माता-पिता के डर से उसने तब अदालत में झूठी गवाही दी थी क्योंकि उस समय वह नाबालिग थी और उसकी बात सुनने वाला कोई नहीं था। युवती मौसमी सिंह ने आवेदन में धरहरा और जमालपुर थाने के तत्कालीन अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। युवती का कहना है कि उसे 30 घंटे तक अवैध हिरासत में रखकर टॉर्चर किया गया और डरा-धमकाकर सीआरपीसी 164 का झूठा बयान दिलवाया गया। वहीं पीड़िता ने साक्ष्य का हवाला देते हुए मांगें रखी हैं। जिसमें इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय विशेष जांच टीम (SIT) से निष्पक्ष जांच कराई जाए। युवती ने जमालपुर थाना के 7-9-2022 के सीसीटीवी फुटेज की जांच करने की बात कही है, जिससे उसकी सच्चाई साबित हो सके। इसके अलावा गलत चार्जशीट दाखिल करने वाले और जांच में लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग रखी है। पीड़िता मौसमी सिंह इस मामला में सरकार से अपने परिवार को मिले 4 लाख रुपये वापस करने और निर्दोष व्यक्ति को रिहा करने की मांग कर रही है। पीड़िता ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि 1 अप्रैल 2026 को बालिग होने के बाद उसने यह कदम उठाया, ताकि वह स्वतंत्र रूप से अपनी बात रख सके। फिलहाल यह मामला माननीय उच्च न्यायालय पटना में विचाराधीन है (CR. APP (DB) 455/2025) यह मामला न केवल एक व्यक्ति की आजादी से जुड़ा है, बल्कि इस बात का भी प्रमाण है कि कैसे व्यक्तिगत लालच के लिए कानून की धाराओं का दुरुपयोग किया जा सकता है। अब देखना यह है कि राष्ट्रपति भवन और राजभवन इस पर क्या संज्ञान लेते हैं।
- User10955Munger, Bihar😂1 hr ago
- गंगा किनारे चाय दुकान में भीषण आग, हजारों की संपत्ति जलकर राख1
- तारापुर प्रखंड के महापुर गांव में 11 दिवसीय महारुद्र महायज्ञ का शुभारंभ रविवार को भव्य कलश शोभायात्रा के साथ हुआ। उल्टा स्थान महादेव मंदिर से निकली इस यात्रा में 5100 महिलाओं व कुंवारी कन्याओं ने सिर पर पवित्र कलश रखकर भाग लिया। गाजे-बाजे और “हर हर महादेव” के जयघोष से माहौल भक्तिमय हो गया। शोभायात्रा का आकर्षण सजे-धजे घोड़े का नृत्य रहा। महिलाएं कलश लेकर तारापुर, कुशवाहा कॉलोनी व गांधीनगर होते हुए यज्ञ स्थल पहुंचीं। मार्गदर्शक दिवाकर सिंह ने बताया कि 19 से 29 अप्रैल तक चलने वाले इस महायज्ञ में अयोध्या से आए रामायणी रामबालक दास द्वारा कथा-प्रवचन होगा और हर रात रासलीला का आयोजन किया जाएगा। मेले में झूले व आकर्षण मौजूद हैं। 401 देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं तथा श्रद्धालुओं के लिए भंडारे की व्यवस्था की गई है।1
- Post by THE LIVE1
- Post by India khabar Begusarai.1
- महिलाओं के सपनों को कुचला गया बोले मोदी, बिल फेल होने का फायदा भी मोदी सरकार को, राहुल प्रियंका का हमला जारी और बीजेपी महिलाओं ने प्रदर्शन किया पुतला फूंका... देखिए महिला बिल पास न होने पर राजनीति महात्वाकांक्षा पूरी करने पैंतरे राजपथ न्यूज़ पर...1
- कार्यालय कक्ष में एसपी मनीष ने जनता दरबार का आयोजन किया. इस दौरान कुल 12 फरियादियों की फरियाद सुनी. इस बात की जानकारी शनिवार की देर रात 10:00 बजे एसपी मनीष ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए दी. एक-एक फरियादियों की फरियाद सुनते हुए संबंधित पुलिस पदाधिकारी को मामलों के निष्पादन के लिए निर्देशित किया. इस मौके पर एसपी ने कहा कि जिले में शांति व्यवस्था बनाए रखना पुलिस प्रशासन की प्राथमिकता है. इसके लिए सभी अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी को अपने-अपने क्षेत्र के गंभीर मामलों का लगातार अवलोकन करने का निर्देश दिया है.1
- बीआरएम कॉलेज में शैक्षणिक अनियमितता का आरोप, उर्दू ऑनर्स की 46 छात्राओं ने लगाई न्याय की गुहार1
- मैं पीड़ित नहीं, साजिश का मोहरा हूँ' गौरव मिश्रा की रिपोर्ट: बालिग होते ही युवती ने खोली सिस्टम की पोल, राष्ट्रपति से न्याय की गुहार लगायी है। मुंगेर जिले से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने पुलिसिया तफ्तीश, गवाहों की सत्यता और पॉक्सो (POSCO) कानून के संभावित दुरुपयोग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। धरहरा थाना क्षेत्र की एक युवती ने बालिग होते ही महामहिम राष्ट्रपति, राज्यपाल और उच्च न्यायालय को पत्र लिखकर यह सनसनीखेज दावा किया है कि उसे साजिश के तहत 'कथित पीड़िता' बनाया गया था, जबकि उसके साथ ऐसी कोई घटना घटी ही नहीं थी। साजिश के पीछे अपनों का हाथ और मुआवजे का खेल साफ नज़र आ रहा है। पीड़िता युवती मौसमी कुमारी उर्फ कशिश सिंह ने अपने आवेदन में स्पष्ट रूप से आरोप लगाया है कि उसे 'मोहरा' बनाकर उसके माता-पिता और कुछ करीबियों ने मिलकर यह झूठा केस रचा था। युवती का दावा है कि इस पूरी साजिश का मुख्य उद्देश्य सरकार से मिलने वाली 4 लाख रुपये की मुआवजा राशि को हड़पना था। युवती ने पत्र में लिखा है कि वह इस 'खून के पैसे' वाले मुआवजे को राज्य सरकार को वापस करना चाहती है। वहीं निर्दोष को आजीवन कारावास, सिस्टम पर गंभीर आरोप लगाया है। युवती के अनुसार, धरहरा थाना कांड संख्या 163/22 के तहत जिस रवि कुमार को उसका अपहरणकर्ता और बलात्कारी बताकर जेल भेजा गया और जिसे माननीय न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई, वह पूरी तरह निर्दोष है। युवती का कहना है कि पुलिस के दबाव और माता-पिता के डर से उसने तब अदालत में झूठी गवाही दी थी क्योंकि उस समय वह नाबालिग थी और उसकी बात सुनने वाला कोई नहीं था। युवती मौसमी सिंह ने आवेदन में धरहरा और जमालपुर थाने के तत्कालीन अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। युवती का कहना है कि उसे 30 घंटे तक अवैध हिरासत में रखकर टॉर्चर किया गया और डरा-धमकाकर सीआरपीसी 164 का झूठा बयान दिलवाया गया। वहीं पीड़िता ने साक्ष्य का हवाला देते हुए मांगें रखी हैं। जिसमें इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय विशेष जांच टीम (SIT) से निष्पक्ष जांच कराई जाए। युवती ने जमालपुर थाना के 7-9-2022 के सीसीटीवी फुटेज की जांच करने की बात कही है, जिससे उसकी सच्चाई साबित हो सके। इसके अलावा गलत चार्जशीट दाखिल करने वाले और जांच में लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग रखी है। पीड़िता मौसमी सिंह इस मामला में सरकार से अपने परिवार को मिले 4 लाख रुपये वापस करने और निर्दोष व्यक्ति को रिहा करने की मांग कर रही है। पीड़िता ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि 1 अप्रैल 2026 को बालिग होने के बाद उसने यह कदम उठाया, ताकि वह स्वतंत्र रूप से अपनी बात रख सके। फिलहाल यह मामला माननीय उच्च न्यायालय पटना में विचाराधीन है (CR. APP (DB) 455/2025) यह मामला न केवल एक व्यक्ति की आजादी से जुड़ा है, बल्कि इस बात का भी प्रमाण है कि कैसे व्यक्तिगत लालच के लिए कानून की धाराओं का दुरुपयोग किया जा सकता है। अब देखना यह है कि राष्ट्रपति भवन और राजभवन इस पर क्या संज्ञान लेते हैं।1
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