मेरठ पुलिस की बर्बरता: वर्दी के नशे में चूर दरोगा ने छीनी गरीब की मेहनत, थप्पड़ों से किया होमगार्ड अभ्यर्थी का 'स्वागत'! अजीत मिश्रा (खोजी) ब्यूरो रिपोर्ट: मेरठ, उत्तर प्रदेश मेरठ। उत्तर प्रदेश पुलिस जहाँ एक ओर अपनी छवि सुधारने के लिए ‘मित्र पुलिस’ का नारा बुलंद कर रही है, वहीं मेरठ के दिल्ली-मेरठ बाईपास पर खाकी को कलंकित करने वाला एक बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है। यहाँ एक दरोगा और उसके सहयोगियों ने न केवल एक गरीब युवक की बेरहमी से पिटाई की, बल्कि दबंगई दिखाते हुए उसकी जेब से ₹5000 भी जबरन छीन लिए। रास्ता भटका, तो मिली गालियां और थप्पड़ जानकारी के अनुसार, पीड़ित युवक मेरठ में होमगार्ड भर्ती की परीक्षा देने आया था। परीक्षा केंद्र के बाहर से उसका हेलमेट चोरी हो गया। शहर में पहली बार आने के कारण वह रास्ता भटक गया और अनजाने में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (बाईपास) पर पहुंच गया। यहाँ तैनात दरोगा विनोद कुमार और जितेंद्र सिंह ने उसे रोका। युवक ने अपनी मजबूरी बताई कि वह रास्ता भटक गया है और उसका हेलमेट चोरी हो गया है, लेकिन वर्दी के अहंकार में डूबे इन अधिकारियों को तरस आने के बजाय गुस्सा आ गया। रक्षक बने भक्षक: गालियां दीं और छीने पैसे सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और चश्मदीदों के मुताबिक, दरोगा विनोद कुमार ने बिना किसी ठोस कारण के युवक को ताबड़तोड़ थप्पड़ जड़ दिए। उसे सरेआम भद्दी-भद्दी गालियां दी गईं। इतना ही नहीं, युवक का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उसकी बाइक का चालान काटने की धमकी दी और जबरन उसकी जेब में रखे ₹5000 निकाल लिए। यह रकम उस युवक के लिए कितनी अहम थी, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह रोजगार की तलाश में परीक्षा देने आया था। आक्रामक सवाल: क्या यही है सीएम योगी की मित्र पुलिस? इस घटना ने मेरठ पुलिस के दावों की हवा निकाल दी है। सवाल यह उठता है कि: क्या रास्ता भटकना इतना बड़ा अपराध है कि युवक को थप्पड़ मारे जाएं? क्या हेलमेट चोरी होने पर सहानुभूति दिखाने के बजाय युवक को लूट लेना ही पुलिस का धर्म है? क्या दरोगा विनोद कुमार और जितेंद्र सिंह जैसे अधिकारियों को कानून से ऊपर होने का लाइसेंस मिल गया है? बढ़ता जन आक्रोश घटना के बाद से स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर पुलिस के प्रति भारी रोष देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि अगर पुलिस ही सरेआम गुंडागर्दी पर उतारू हो जाएगी, तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करेगी? अब देखना यह है कि क्या मेरठ के आला अधिकारी इन ‘वर्दीधारी लुटेरों’ पर कोई सख्त कार्रवाई करते हैं या फिर विभागीय जांच के नाम पर मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा? पीड़ित युवक ने उच्च अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है और अपनी मेहनत की कमाई वापस दिलाने की मांग की है। सावधान खाकी! जनता देख रही है।
मेरठ पुलिस की बर्बरता: वर्दी के नशे में चूर दरोगा ने छीनी गरीब की मेहनत, थप्पड़ों से किया होमगार्ड अभ्यर्थी का 'स्वागत'! अजीत मिश्रा (खोजी) ब्यूरो रिपोर्ट: मेरठ, उत्तर प्रदेश मेरठ। उत्तर प्रदेश पुलिस जहाँ एक ओर अपनी छवि सुधारने के लिए ‘मित्र पुलिस’ का नारा बुलंद कर रही है, वहीं मेरठ के दिल्ली-मेरठ बाईपास पर खाकी को कलंकित करने वाला एक बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है। यहाँ एक दरोगा और उसके सहयोगियों ने न केवल एक गरीब युवक की बेरहमी से पिटाई की, बल्कि दबंगई दिखाते हुए उसकी जेब से ₹5000 भी जबरन छीन लिए। रास्ता भटका, तो मिली गालियां और थप्पड़ जानकारी के अनुसार, पीड़ित युवक मेरठ में होमगार्ड भर्ती की परीक्षा देने आया था। परीक्षा केंद्र के बाहर से उसका हेलमेट चोरी हो गया। शहर में पहली बार आने के कारण वह रास्ता भटक गया और अनजाने में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (बाईपास) पर पहुंच गया। यहाँ तैनात दरोगा विनोद कुमार और जितेंद्र सिंह ने उसे रोका। युवक ने अपनी मजबूरी बताई कि वह रास्ता भटक गया है और उसका हेलमेट चोरी हो गया है, लेकिन वर्दी के अहंकार में डूबे इन अधिकारियों को तरस आने के बजाय गुस्सा आ गया। रक्षक बने भक्षक: गालियां दीं और छीने पैसे सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और चश्मदीदों के मुताबिक, दरोगा विनोद कुमार ने बिना किसी ठोस कारण के युवक को ताबड़तोड़ थप्पड़ जड़ दिए। उसे सरेआम भद्दी-भद्दी गालियां दी गईं। इतना ही नहीं, युवक का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उसकी बाइक का चालान काटने की धमकी दी और जबरन उसकी जेब में रखे ₹5000 निकाल लिए। यह रकम उस युवक के लिए कितनी अहम थी, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह रोजगार की तलाश में परीक्षा देने आया था। आक्रामक सवाल: क्या यही है सीएम योगी की मित्र पुलिस? इस घटना ने मेरठ पुलिस के दावों की हवा निकाल दी है। सवाल यह उठता है कि: क्या रास्ता भटकना इतना बड़ा अपराध है कि युवक को थप्पड़ मारे जाएं? क्या हेलमेट चोरी होने पर सहानुभूति दिखाने के बजाय युवक को लूट लेना ही पुलिस का धर्म है? क्या दरोगा विनोद कुमार और जितेंद्र सिंह जैसे अधिकारियों को कानून से ऊपर होने का लाइसेंस मिल गया है? बढ़ता जन आक्रोश घटना के बाद से स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर पुलिस के प्रति भारी रोष देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि अगर पुलिस ही सरेआम गुंडागर्दी पर उतारू हो जाएगी, तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करेगी? अब देखना यह है कि क्या मेरठ के आला अधिकारी इन ‘वर्दीधारी लुटेरों’ पर कोई सख्त कार्रवाई करते हैं या फिर विभागीय जांच के नाम पर मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा? पीड़ित युवक ने उच्च अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है और अपनी मेहनत की कमाई वापस दिलाने की मांग की है। सावधान खाकी! जनता देख रही है।
- अजीत मिश्रा (खोजी) ब्यूरो रिपोर्ट: मेरठ, उत्तर प्रदेश मेरठ। उत्तर प्रदेश पुलिस जहाँ एक ओर अपनी छवि सुधारने के लिए ‘मित्र पुलिस’ का नारा बुलंद कर रही है, वहीं मेरठ के दिल्ली-मेरठ बाईपास पर खाकी को कलंकित करने वाला एक बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है। यहाँ एक दरोगा और उसके सहयोगियों ने न केवल एक गरीब युवक की बेरहमी से पिटाई की, बल्कि दबंगई दिखाते हुए उसकी जेब से ₹5000 भी जबरन छीन लिए। रास्ता भटका, तो मिली गालियां और थप्पड़ जानकारी के अनुसार, पीड़ित युवक मेरठ में होमगार्ड भर्ती की परीक्षा देने आया था। परीक्षा केंद्र के बाहर से उसका हेलमेट चोरी हो गया। शहर में पहली बार आने के कारण वह रास्ता भटक गया और अनजाने में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (बाईपास) पर पहुंच गया। यहाँ तैनात दरोगा विनोद कुमार और जितेंद्र सिंह ने उसे रोका। युवक ने अपनी मजबूरी बताई कि वह रास्ता भटक गया है और उसका हेलमेट चोरी हो गया है, लेकिन वर्दी के अहंकार में डूबे इन अधिकारियों को तरस आने के बजाय गुस्सा आ गया। रक्षक बने भक्षक: गालियां दीं और छीने पैसे सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और चश्मदीदों के मुताबिक, दरोगा विनोद कुमार ने बिना किसी ठोस कारण के युवक को ताबड़तोड़ थप्पड़ जड़ दिए। उसे सरेआम भद्दी-भद्दी गालियां दी गईं। इतना ही नहीं, युवक का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उसकी बाइक का चालान काटने की धमकी दी और जबरन उसकी जेब में रखे ₹5000 निकाल लिए। यह रकम उस युवक के लिए कितनी अहम थी, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह रोजगार की तलाश में परीक्षा देने आया था। आक्रामक सवाल: क्या यही है सीएम योगी की मित्र पुलिस? इस घटना ने मेरठ पुलिस के दावों की हवा निकाल दी है। सवाल यह उठता है कि: क्या रास्ता भटकना इतना बड़ा अपराध है कि युवक को थप्पड़ मारे जाएं? क्या हेलमेट चोरी होने पर सहानुभूति दिखाने के बजाय युवक को लूट लेना ही पुलिस का धर्म है? क्या दरोगा विनोद कुमार और जितेंद्र सिंह जैसे अधिकारियों को कानून से ऊपर होने का लाइसेंस मिल गया है? बढ़ता जन आक्रोश घटना के बाद से स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर पुलिस के प्रति भारी रोष देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि अगर पुलिस ही सरेआम गुंडागर्दी पर उतारू हो जाएगी, तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करेगी? अब देखना यह है कि क्या मेरठ के आला अधिकारी इन ‘वर्दीधारी लुटेरों’ पर कोई सख्त कार्रवाई करते हैं या फिर विभागीय जांच के नाम पर मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा? पीड़ित युवक ने उच्च अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है और अपनी मेहनत की कमाई वापस दिलाने की मांग की है। सावधान खाकी! जनता देख रही है।1
- Post by हरिशंकर पांडेय1
- यह वीडियो अमोढ़ा खास बस्ती जिले का है इस गांव में काई जगह कुडोन का अंबर लगा हुआ सड़क पर नलिया भारी हुई हैं लेकिन सफाई कर्मचारी साफ-सफाई नहीं कर रहे हैं इनको काई बार अवगत करवाया गया3
- Post by आज की आवाज1
- Post by Bp News Hanswar1
- संत कबीर नगर॥अपनी मांगों को लेकर तीन दिन से लेखपालों नेशनिवार कोउप जिलाधिकारी महोदय के माध्यम से शासन को अवगत कराया था जिसके बाद आजप्रदेश प्रतिनिधिमंडल के साथ जिला पदाधिकारी गढ़ जिलाधिकारी संत कबीर नगर आलोक कुमारसे मिले औरगुप्त वार्ता की गईअभी कुछ देर में पदाधिकारी द्वारा बताया जाएगा कीक्या निर्णय सामने आया विकास श्रीवास्तवसंत कबीर नगर1
- शादी समारोह के दौरान हुई मारपीट की घटना पर पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर ने मौके का निरीक्षण कर पुलिस कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने कहा शांति व्यवस्था कायम हैं, और सुरक्षा के आवश्यक कदम उठाए जा रहे । #Police #Dig #RangeBasti #UPPolice #SantKabirNagar #PoliceUpdate1
- चकबन्दी विभाग में गुंडागर्दी! दफ्तर में घुसकर कर्मचारियों से बदसलूकी, संघ ने दिया आर-पार का अल्टीमेटम संतकबीरनगर, 25 अप्रैल 2026। चकबन्दी विभाग में शनिवार को उस समय सनसनी फैल गई, जब कुछ दबंग तत्वों ने कथित तौर पर कार्यालय में घुसकर अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ अभद्रता की। इस घटना से न केवल कामकाज ठप हुआ, बल्कि पूरे विभाग में भय और आक्रोश का माहौल बन गया। प्रादेशिक चकबन्दी अधिकारी संघ, उत्तर प्रदेश (जनपद–संतकबीरनगर) ने घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे “सरकारी तंत्र पर सीधा हमला” बताया है। संघ के अनुसार, विभागीय कार्य में बाधा डालना और कर्मचारियों के साथ बदसलूकी करना कानून व्यवस्था की खुली अवहेलना है। संघ के जिलाध्यक्ष यश मोहम्मद और जिला मंत्री अतीत पाण्डेय सहित अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि चकबन्दी विभाग जैसे संवेदनशील राजस्व विभाग में इस तरह की दबंगई बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने प्रशासन को चेताते हुए कहा कि यदि दोषियों पर तत्काल सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो कर्मचारी सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे। संघ ने स्पष्ट कहा कि कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है, और यदि इसमें लापरवाही हुई तो हालात बिगड़ सकते हैं। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस गंभीर मामले में कितनी तेजी और सख्ती से कार्रवाई करता है।1