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छत्तीसगढ़ के तमनार में आधी रात को एक 'संग्राम' छिड़ गया है, जहाँ ग्रामीण 2 लाख पेड़ों की कटाई के विरोध में उतर आए हैं। इस घटनाक्रम के कारण जिंदल कोल ब्लॉक पर भारी तनाव बढ़ गया है। जिंदल कोल ब्लॉक के खिलाफ आदिवासियों का गुस्सा फूट पड़ा है, जो इस पेड़ कटाई का कड़ा विरोध कर रहे हैं।
Raigarh Chhattisgarh
छत्तीसगढ़ के तमनार में आधी रात को एक 'संग्राम' छिड़ गया है, जहाँ ग्रामीण 2 लाख पेड़ों की कटाई के विरोध में उतर आए हैं। इस घटनाक्रम के कारण जिंदल कोल ब्लॉक पर भारी तनाव बढ़ गया है। जिंदल कोल ब्लॉक के खिलाफ आदिवासियों का गुस्सा फूट पड़ा है, जो इस पेड़ कटाई का कड़ा विरोध कर रहे हैं।
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- सक्ति पुलिस ने एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल करते हुए एक ब्लाइंड मर्डर का खुलासा केवल 5 दिनों के भीतर कर दिया है। यह हत्या प्रेम प्रसंग का परिणाम थी, जिसकी पूरी साजिश पति-पत्नी ने मिलकर रची थी। पूर्णिमा चौहान की हत्या के लिए 4 लाख रुपये की सुपारी दी गई थी, और घटना के बाद आरोपियों को 2 लाख रुपये की पहली किस्त भी दी गई। 26 जून को दो नकाबपोशों ने घर में घुसकर पूर्णिमा चौहान को गोली मार दी थी। पुलिस ने इस मामले में छत्तीसगढ़, झारखंड और महाराष्ट्र से कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में मुख्य शूटर गौरीशंकर सिदार और सुपारी किलिंग ऑपरेशन का orchestrator राजेंद्र महंत भी शामिल हैं। इस पूरी साजिश का पर्दाफाश टावर डंप, कॉल डिटेल और सीसीटीवी फुटेज की गहन जांच के बाद हुआ। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक पिस्तौल, जिंदा कारतूस, एक बाइक, कई मोबाइल फोन और नगदी भी बरामद की है। सभी आरोपियों पर BNS की धारा 103(1), 61(2), 3(5) और आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें कोर्ट में पेश किया गया है।1
- कोरबा जिले के तरदा गांव में आधी रात चोरों ने धावा बोला। इस दौरान उन्होंने तीन दुकानों के ताले और शटर तोड़ दिए।1
- बिलासपुर से एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है, जहाँ स्कूलों में मंत्रोच्चार से जुड़े एक मामले को लेकर वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष को एक बड़ा झटका लगा है। इस मामले में आगे की विस्तृत जानकारी का इंतजार है।1
- छत्तीसगढ़ के कोरबा स्थित RTO कार्यालय में एक महा-फर्जीवाड़े का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। यह भ्रष्टाचार RTI (सूचना का अधिकार) के माध्यम से उजागर हुआ, जिसने 'धीरज परिवहन केंद्र' नामक इकाई द्वारा जनता को लूटने की चौंकाने वाली गतिविधियों का पर्दाफाश किया है। इस खुलासे ने कोरबा RTO में व्याप्त व्यापक भ्रष्टाचार की ओर इशारा किया है।1
- Post by Shubham Mishra1
- छत्तीसगढ़ के तमनार में आधी रात को एक 'संग्राम' छिड़ गया है, जहाँ ग्रामीण 2 लाख पेड़ों की कटाई के विरोध में उतर आए हैं। इस घटनाक्रम के कारण जिंदल कोल ब्लॉक पर भारी तनाव बढ़ गया है। जिंदल कोल ब्लॉक के खिलाफ आदिवासियों का गुस्सा फूट पड़ा है, जो इस पेड़ कटाई का कड़ा विरोध कर रहे हैं।1
- छत्तीसगढ़ ड्राइवर महासंघ ने सरकार के समक्ष अपनी 15 प्रमुख मांगें प्रस्तुत की हैं। यह जानकारी महासंघ द्वारा सरकार के सामने रखी गई अपनी मुख्य मांगों के संदर्भ में सामने आई है।1
- रतनपुर पुलिस ने एक त्वरित कार्रवाई करते हुए 70 लीटर कच्ची महुआ शराब जब्त की है। यह कार्रवाई पुलिस द्वारा लगातार जारी अवैध गतिविधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है।3
- देश की सबसे बड़ी कोयला खदानों में से एक गेवरा खदान में मानसून की शुरुआती बारिश ने गंभीर हालात पैदा कर दिए हैं, जहाँ पूरा खदान परिसर खतरनाक दलदल और पानी के अथाह समंदर में तब्दील हो गया है। इस स्थिति ने वहाँ काम कर रही पीएनसी (PNC) कंपनी के सभी दावों और तैयारियों की पोल खोल दी है। सामने आए वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि खदान के भीतर चारों ओर सिर्फ पानी और कीचड़ का सैलाब है, जिसमें करोड़ों रुपये की भारी-भरकम गाड़ियाँ और डंपर रेंगने को मजबूर हैं, जिससे किसी भी वक्त एक बड़े हादसे का खतरा मंडरा रहा है। आश्चर्यजनक रूप से, इतनी बड़ी कंपनी होने के बावजूद खदान के भीतर से पानी निकासी का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किया गया है। नियमों के अनुसार, मानसून से पहले खदानों में पानी निकासी के लिए विशेष पंप और नालियों की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि काम सुचारु रूप से चलता रहे और मजदूरों की जान जोखिम में न पड़े, लेकिन पीएनसी कंपनी ने इन नियमों की पूरी तरह अनदेखी की है। इस बदहाली से कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं: मजदूरों की जान से खिलवाड़ हो रहा है क्योंकि खदान के रास्ते पानी में डूबे हैं और दृश्यता कम होने के कारण डंपर चालकों के लिए गाड़ी चलाना मौत को दावत देने जैसा है। इसके चलते करोड़ों का नुकसान भी हो रहा है, क्योंकि पानी भरे होने से कोयला परिवहन पूरी तरह बाधित है, जिससे न केवल कंपनी बल्कि राजस्व को भी भारी क्षति पहुँच रही है। कंपनी प्रबंधन इस बदहाली के बावजूद गहरी नींद में है, और सवाल उठता है कि क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही उनकी नींद टूटेगी। खदान के भीतर काम करने वाले कर्मचारियों में इस स्थिति को लेकर भारी आक्रोश है, उनका कहना है कि हर साल करोड़ों का टर्नओवर करने वाली कंपनी पानी निकालने का एक छोटा सा जुगाड़ तक नहीं कर पाई। अब यह देखना बाकी है कि इस वीडियो के सामने आने के बाद माइनिंग विभाग और प्रशासन पीएनसी कंपनी पर क्या कार्रवाई करते हैं, या फिर अधिकारियों की साठगांठ से इस गंभीर लापरवाही को हमेशा की तरह दबा दिया जाएगा।2