मांडू में गणगौर पर्व शुरू, मंदिरों में बोए ज्वारे: नगर में गूंज रहे पारंपरिक लोकगीत; 16 दिनों तक चलेगा उत्सव मांडू में गणगौर पर्व शुरू, मंदिरों में बोए ज्वारे: नगर में गूंज रहे पारंपरिक लोकगीत; 16 दिनों तक चलेगा उत्सव राहुल सेन मांडव मो 9669141814 मांडू न्यूज/मांडू और आसपास के ग्रामीण अंचलों में गणगौर पर्व का उल्लास पर है। होली के दो दिन बाद से शुरू हुआ यह 16 दिवसीय अनुष्ठान माता पार्वती (गौरी) और भगवान शिव (ईसर) की भक्ति को समर्पित है। नगर के प्राचीन चतुर्भुज राम मंदिर सहित विभिन्न स्थानों पर महिलाओं ने मिट्टी के पात्रों में ज्वारे (जवारा) बोए हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में 'बाड़ी' या 'खोर' कहा जाता है। रात 9 बजे जवारा पूजन और मंगल गीत गूंजे प्रतिदिन रात 9 बजे महिलाएं और युवतियां पूर्ण श्रृंगार कर मंदिरों में एकत्रित हो रही हैं। ढोल-थाली की थाप पर 'गौर-गौर गोमती ईसर पूजे पार्वती' और 'जवारे बोवण चाली रे' जैसे पारंपरिक लोकगीतों के साथ ज्वारों की पूजा की जा रही है। इन गीतों के माध्यम से ईसर-गौरी के विवाह प्रसंगों का वर्णन और अखंड सौभाग्य की कामना की जाती है।अटूट दांपत्य और हरियाली के प्रतीक ज्वारे मान्यता है कि ये ज्वारे माता पार्वती का प्रतीक हैं। महिलाएं प्रतिदिन नियम से इन ज्वारों को सींचती हैं और कई श्रद्धालु इस दौरान कठिन उपवास भी रखते हैं। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि निमाड़ और मालवा की समृद्ध लोक संस्कृति, नृत्य और संगीत का एक अनूठा संगम भी पेश करता है। 16 श्रृंगार और मेहंदी से सजा उत्सव गणगौर के अवसर पर युवतियां और महिलाएं विशेष रूप से मेहंदी लगाकर और रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सज-धज कर बाड़ी पूजन के लिए पहुंच रही हैं। 16 दिनों तक चलने वाला यह उत्सव परिवार की सुख-समृद्धि और पति की लंबी आयु की प्रार्थना के साथ मनाया जा रहा है। पर्व के अंतिम दिनों में इन ज्वारों का भव्य चल समारोह निकालकर विसर्जन किया जाएगा।
मांडू में गणगौर पर्व शुरू, मंदिरों में बोए ज्वारे: नगर में गूंज रहे पारंपरिक लोकगीत; 16 दिनों तक चलेगा उत्सव मांडू में गणगौर पर्व शुरू, मंदिरों में बोए ज्वारे: नगर में गूंज रहे पारंपरिक लोकगीत; 16 दिनों तक चलेगा उत्सव राहुल सेन मांडव मो 9669141814 मांडू न्यूज/मांडू और आसपास के ग्रामीण अंचलों में गणगौर पर्व का उल्लास पर है। होली के दो दिन बाद से शुरू हुआ यह 16 दिवसीय अनुष्ठान माता पार्वती (गौरी) और भगवान शिव (ईसर) की भक्ति को समर्पित है। नगर के प्राचीन चतुर्भुज राम मंदिर सहित विभिन्न स्थानों पर महिलाओं ने मिट्टी के पात्रों में ज्वारे (जवारा) बोए हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में 'बाड़ी' या 'खोर' कहा जाता है। रात 9 बजे जवारा पूजन और मंगल गीत गूंजे प्रतिदिन रात 9 बजे महिलाएं और युवतियां पूर्ण श्रृंगार कर मंदिरों में एकत्रित हो रही हैं। ढोल-थाली की थाप पर 'गौर-गौर गोमती ईसर पूजे पार्वती' और 'जवारे बोवण चाली रे' जैसे पारंपरिक लोकगीतों के साथ ज्वारों की पूजा की
जा रही है। इन गीतों के माध्यम से ईसर-गौरी के विवाह प्रसंगों का वर्णन और अखंड सौभाग्य की कामना की जाती है।अटूट दांपत्य और हरियाली के प्रतीक ज्वारे मान्यता है कि ये ज्वारे माता पार्वती का प्रतीक हैं। महिलाएं प्रतिदिन नियम से इन ज्वारों को सींचती हैं और कई श्रद्धालु इस दौरान कठिन उपवास भी रखते हैं। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि निमाड़ और मालवा की समृद्ध लोक संस्कृति, नृत्य और संगीत का एक अनूठा संगम भी पेश करता है। 16 श्रृंगार और मेहंदी से सजा उत्सव गणगौर के अवसर पर युवतियां और महिलाएं विशेष रूप से मेहंदी लगाकर और रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सज-धज कर बाड़ी पूजन के लिए पहुंच रही हैं। 16 दिनों तक चलने वाला यह उत्सव परिवार की सुख-समृद्धि और पति की लंबी आयु की प्रार्थना के साथ मनाया जा रहा है। पर्व के अंतिम दिनों में इन ज्वारों का भव्य चल समारोह निकालकर विसर्जन किया जाएगा।
- मांडू में गणगौर पर्व शुरू, मंदिरों में बोए ज्वारे: नगर में गूंज रहे पारंपरिक लोकगीत; 16 दिनों तक चलेगा उत्सव राहुल सेन मांडव मो 9669141814 मांडू न्यूज/मांडू और आसपास के ग्रामीण अंचलों में गणगौर पर्व का उल्लास पर है। होली के दो दिन बाद से शुरू हुआ यह 16 दिवसीय अनुष्ठान माता पार्वती (गौरी) और भगवान शिव (ईसर) की भक्ति को समर्पित है। नगर के प्राचीन चतुर्भुज राम मंदिर सहित विभिन्न स्थानों पर महिलाओं ने मिट्टी के पात्रों में ज्वारे (जवारा) बोए हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में 'बाड़ी' या 'खोर' कहा जाता है। रात 9 बजे जवारा पूजन और मंगल गीत गूंजे प्रतिदिन रात 9 बजे महिलाएं और युवतियां पूर्ण श्रृंगार कर मंदिरों में एकत्रित हो रही हैं। ढोल-थाली की थाप पर 'गौर-गौर गोमती ईसर पूजे पार्वती' और 'जवारे बोवण चाली रे' जैसे पारंपरिक लोकगीतों के साथ ज्वारों की पूजा की जा रही है। इन गीतों के माध्यम से ईसर-गौरी के विवाह प्रसंगों का वर्णन और अखंड सौभाग्य की कामना की जाती है।अटूट दांपत्य और हरियाली के प्रतीक ज्वारे मान्यता है कि ये ज्वारे माता पार्वती का प्रतीक हैं। महिलाएं प्रतिदिन नियम से इन ज्वारों को सींचती हैं और कई श्रद्धालु इस दौरान कठिन उपवास भी रखते हैं। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि निमाड़ और मालवा की समृद्ध लोक संस्कृति, नृत्य और संगीत का एक अनूठा संगम भी पेश करता है। 16 श्रृंगार और मेहंदी से सजा उत्सव गणगौर के अवसर पर युवतियां और महिलाएं विशेष रूप से मेहंदी लगाकर और रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सज-धज कर बाड़ी पूजन के लिए पहुंच रही हैं। 16 दिनों तक चलने वाला यह उत्सव परिवार की सुख-समृद्धि और पति की लंबी आयु की प्रार्थना के साथ मनाया जा रहा है। पर्व के अंतिम दिनों में इन ज्वारों का भव्य चल समारोह निकालकर विसर्जन किया जाएगा।2
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- ब्रेकिंग इंदौर इंदौर के बड़े कारोबारी को आया लॉरेंस बिश्नोई के गुर्गे का फोन फोन पर दी जान से मारने की धमकी दी गई गुर्गे के द्वारा स्वयं का नाम हैरी बॉक्सर बताया गया तुकोगंज पुलिस मामले में जांच में जुटी है फोन लगाया था फोन नहीं उठाया तो वाइस मैसेज किया है पहले 10 करोड रुपए मांगने के लिए फोन लगाया था नहीं उठाया तो 15 करोड रुपए का मैसेज किया कारोबारी के द्वारा मामले में की गई है शिकायत एंकर इंदौर में एक बार फिर से एक्सटेंशन के मामले में कारोबारी को फोन पर वॉइस मैसेज कर 5 करोड रुपए की फिरौती मांगने का मामला सामने आया है वॉइस मैसेज में बदमाश के द्वारा स्वयं को लॉरेंस बिश्नोई की गैंग से जुड़ा हुआ बताया गया है पुलिस वॉइस मैसेज और नंबर की जांच में जुटी हुई है। वियो दरअसल शहर में छोटे-मोटे बदमाशों के बाद अब अंतर राज्य गेम के द्वारा भी व्यापारी और कारोबारी को धमकाने वाले फोन और मैसेज मिल रहे हैं और इसी के तहत तुकोगंज थाना क्षेत्र में रहने वाले संजय नामक एक कारोबारी को लॉरेंस बिश्नोई का गुर्गे हैरी बॉक्सर बताते हुए फोन किया गया था जब कारोबारी ने फोन नहीं उठाया तो एक वॉइस मैसेज किया गया जिसको लेकर बताया जा रहा है कि पहले 10 करोड रुपए मांगे जा रहे थे फोन पर लेकिन फोन नहीं उठाने पर 5 करोड़ को बढ़ाते हुए 15 करोड रुपए कर दिए गए मामले में फरियादी कारोबारी के द्वारा थाने पर शिकायती आवेदन दिया गया जिसके आधार पर आप पुलिस जांच पड़ताल में जुटी हुई है इससे पहले भी महू के किशनगंज में रहने वाले एक अस्पताल कारोबारी को भी इसी तरीके से फोन कर धमकाया गया था और 5 करोड रुपए की फिरौती मांगी गई थी जिसमें उनके बच्चों को नुकसान पहुंचाने और परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई थी फिलहाल पुलिस इस मामले प्रकरण दरजी करने के साथ ही मामले में जांच की बात कह रही है साथ ही जी फोन नंबर से फोन आया था उसकी साइबर डिटेल भी निकल जा रही है। बाइट राजेश दंडोतिया एडिशनल डीसीपी इंदौर1
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- मांडू-नालछा ब्लॉक में आंधी-बारिश, ओलावृष्टि से फसलें बर्बाद: 85 किमी/घंटा की रफ्तार से चली हवाएं; किसान बोले-प्रकृति की मार झेल रहे हैं राहुल सेन मांडव मो 9669141814 मांडू न्यूज/मांडू और नालछा ब्लॉक के कठोडिया सहित कई गांवों में गुरुवार रात तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि हुई। 85 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाओं ने फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। इस बेमौसम बारिश से तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। गुरुवार रात करीब 10 बजे मौसम ने अचानक करवट ली। ठंडी हवाएं चलने लगीं और देखते ही देखते आसमान में काले बादल छा गए। रात 10 बजे से 1 बजे के बीच कई क्षेत्रों में बिजली कड़कने और बादलों की तेज गर्जना के साथ बारिश हुई। इससे किसानों की खड़ी फसलों और आम के पेड़ों पर आए बौर को काफी नुकसान पहुंचा। गेहूं और चने की खड़ी फसलों को भारी नुकसान बेमौसम बारिश और भीषण ओलावृष्टि ने विशेष रूप से गेहूं और चने की खड़ी फसलों को भारी क्षति पहुंचाई है। किसानों की साल भर की मेहनत बर्बाद हो गई है, जिससे उनका जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। हालांकि, इस मौसमी बदलाव से गर्मी से हल्की राहत मिली है और दिन-रात के तापमान में गिरावट आई है। तेज बिजली चमकने और बादलों की गर्जना से लोग भयभीत हो गए। रात करीब 11 बजे तेज बारिश के साथ ओले गिरने लगे, जिससे कई इलाकों में बिजली गुल हो गई।आंधी से कई जगह पेड़ और होर्डिंग गिरने की घटनाएं ओलावृष्टि के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में गेहूं, सोयाबीन और आम जैसी खड़ी फसलों को भारी नुकसान हुआ है। तेज आंधी से कई जगह पेड़ और होर्डिंग गिरने की घटनाएं भी सामने आई हैं। बिजली के ढांचे को नुकसान पहुंचने के कारण कई स्थानों पर रात भर बिजली आपूर्ति बाधित रही। किसान बोले-प्रकृति की मार झेल रहे हैं ग्राम कठोडिया के किसान कपिल वर्मा, ,निखिल पटेल और दिनेश चौधरी ने बताया कि वे इस बार अच्छी फसल की उम्मीद कर रहे थे। उन्होंने कहा, "पहले नीलगाय से परेशानी थी और अब अचानक मौसम बदलने से हुई बारिश और ओलावृष्टि ने फसलों को बहुत नुकसान पहुंचाया है। किसान लगातार नीलगाय, महंगाई और अब प्रकृति की मार झेल रहे हैं।"2