उत्तर प्रदेश में चल रहा एंटी-भूमाफिया अभियान बलरामपुर जिले में पूरी तरह विफल साबित हुआ है, जहाँ शिकायतकर्ता फतेह बहादुर और अवधेश कुमार ने बयान व सबूतों के साथ इसकी पोल खोली है। बलरामपुर के ग्राम पंचायत लाल नगर सिपहिया में भू-माफिया कागजों पर तो 'बेदखल' हैं, लेकिन हकीकत में सरकारी जमीन पर धड़ल्ले से उनकी दुकानें चल रही हैं। यह स्थिति बलरामपुर में अधिकारियों को भू-माफियाओं की खुली चुनौती के रूप में सामने आई है, जहाँ कोर्ट के सख्त आदेशों के बावजूद प्रशासन पस्त नजर आ रहा है और दबंगों के हौसले बुलंद हैं। सरकारी जमीन पर पैसे और रसूख के दम पर अवैध किले खड़े किए गए हैं, और कोर्ट से बेदखली का आदेश होने के बावजूद प्रशासन बुलडोजर नहीं चला पाया। बलरामपुर के ग्राम पंचायत लाल नगर सिपहिया में सिस्टम के बड़े खेल का खुलासा हुआ है, जहाँ मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत के बावजूद नवीन परती भूमि पर भू-माफिया का कब्जा बरकरार है। यहां की जमीनी हकीकत कागजी कार्रवाई से बिल्कुल उलट है, जहाँ बेदखली के आदेश को ठेंगा दिखाया जा रहा है और ग्रामीण 'बुल्डोजर बाबा' से गुहार लगा रहे हैं। इस पूरे मामले ने यूपी में माफिया राज पर प्रहार के दावों पर गंभीर प्रशासनिक सवाल खड़े कर दिए हैं। बलरामपुर में लेखपाल की फर्जी रिपोर्ट और अधिकारियों की चुप्पी ने बेखौफ भू-माफियाओं को सरकारी जमीन निगलने का मौका दिया है। रामकिशुन और अशोक कुमार की दो पीढ़ियों का सरकारी जमीन पर कब्जा है, और कोर्ट के सख्त आदेश भी बेअसर साबित हुए हैं। श्रावस्ती टाइम्स के ग्राउंड रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि सरकारी जमीन 29 लोगों को बेच दी गई है और तुलसीपुर प्रशासन कोर्ट के बेदखली आदेशों को 'रद्दी' समझ रहा है।
उत्तर प्रदेश में चल रहा एंटी-भूमाफिया अभियान बलरामपुर जिले में पूरी तरह विफल साबित हुआ है, जहाँ शिकायतकर्ता फतेह बहादुर और अवधेश कुमार ने बयान व सबूतों के साथ इसकी पोल खोली है। बलरामपुर के ग्राम पंचायत लाल नगर सिपहिया में भू-माफिया कागजों पर तो 'बेदखल' हैं, लेकिन हकीकत में सरकारी जमीन पर धड़ल्ले से उनकी दुकानें चल रही हैं। यह स्थिति बलरामपुर में अधिकारियों को भू-माफियाओं की खुली चुनौती
के रूप में सामने आई है, जहाँ कोर्ट के सख्त आदेशों के बावजूद प्रशासन पस्त नजर आ रहा है और दबंगों के हौसले बुलंद हैं। सरकारी जमीन पर पैसे और रसूख के दम पर अवैध किले खड़े किए गए हैं, और कोर्ट से बेदखली का आदेश होने के बावजूद प्रशासन बुलडोजर नहीं चला पाया। बलरामपुर के ग्राम पंचायत लाल नगर सिपहिया में सिस्टम के बड़े खेल का खुलासा हुआ है, जहाँ
मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत के बावजूद नवीन परती भूमि पर भू-माफिया का कब्जा बरकरार है। यहां की जमीनी हकीकत कागजी कार्रवाई से बिल्कुल उलट है, जहाँ बेदखली के आदेश को ठेंगा दिखाया जा रहा है और ग्रामीण 'बुल्डोजर बाबा' से गुहार लगा रहे हैं। इस पूरे मामले ने यूपी में माफिया राज पर प्रहार के दावों पर गंभीर प्रशासनिक सवाल खड़े कर दिए हैं। बलरामपुर में लेखपाल की फर्जी रिपोर्ट और
अधिकारियों की चुप्पी ने बेखौफ भू-माफियाओं को सरकारी जमीन निगलने का मौका दिया है। रामकिशुन और अशोक कुमार की दो पीढ़ियों का सरकारी जमीन पर कब्जा है, और कोर्ट के सख्त आदेश भी बेअसर साबित हुए हैं। श्रावस्ती टाइम्स के ग्राउंड रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि सरकारी जमीन 29 लोगों को बेच दी गई है और तुलसीपुर प्रशासन कोर्ट के बेदखली आदेशों को 'रद्दी' समझ रहा है।
- बलरामपुर जिले के गरम गनवरिया कला, लखौरा, हरैया और सतघरवा क्षेत्रों में सड़कों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, इन सड़कों को भरवाने या उनकी मरम्मत कराने की जिम्मेदारी कोई नहीं ले रहा है, जिससे ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।1
- उत्तर प्रदेश में चल रहा एंटी-भूमाफिया अभियान बलरामपुर जिले में पूरी तरह विफल साबित हुआ है, जहाँ शिकायतकर्ता फतेह बहादुर और अवधेश कुमार ने बयान व सबूतों के साथ इसकी पोल खोली है। बलरामपुर के ग्राम पंचायत लाल नगर सिपहिया में भू-माफिया कागजों पर तो 'बेदखल' हैं, लेकिन हकीकत में सरकारी जमीन पर धड़ल्ले से उनकी दुकानें चल रही हैं। यह स्थिति बलरामपुर में अधिकारियों को भू-माफियाओं की खुली चुनौती के रूप में सामने आई है, जहाँ कोर्ट के सख्त आदेशों के बावजूद प्रशासन पस्त नजर आ रहा है और दबंगों के हौसले बुलंद हैं। सरकारी जमीन पर पैसे और रसूख के दम पर अवैध किले खड़े किए गए हैं, और कोर्ट से बेदखली का आदेश होने के बावजूद प्रशासन बुलडोजर नहीं चला पाया। बलरामपुर के ग्राम पंचायत लाल नगर सिपहिया में सिस्टम के बड़े खेल का खुलासा हुआ है, जहाँ मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत के बावजूद नवीन परती भूमि पर भू-माफिया का कब्जा बरकरार है। यहां की जमीनी हकीकत कागजी कार्रवाई से बिल्कुल उलट है, जहाँ बेदखली के आदेश को ठेंगा दिखाया जा रहा है और ग्रामीण 'बुल्डोजर बाबा' से गुहार लगा रहे हैं। इस पूरे मामले ने यूपी में माफिया राज पर प्रहार के दावों पर गंभीर प्रशासनिक सवाल खड़े कर दिए हैं। बलरामपुर में लेखपाल की फर्जी रिपोर्ट और अधिकारियों की चुप्पी ने बेखौफ भू-माफियाओं को सरकारी जमीन निगलने का मौका दिया है। रामकिशुन और अशोक कुमार की दो पीढ़ियों का सरकारी जमीन पर कब्जा है, और कोर्ट के सख्त आदेश भी बेअसर साबित हुए हैं। श्रावस्ती टाइम्स के ग्राउंड रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि सरकारी जमीन 29 लोगों को बेच दी गई है और तुलसीपुर प्रशासन कोर्ट के बेदखली आदेशों को 'रद्दी' समझ रहा है।4
- विधायक राकेश यादव ने एक बयान में कहा है कि विकास कार्यों को आरोपों की राजनीति से रोका नहीं जा सकता है।1
- बलरामपुर जनपद के थाना कोतवाली नगर क्षेत्र अंतर्गत डिब्बा पुल के पास रात के अंधेरे में धड़ल्ले से अवैध खनन किए जाने का आरोप है, जिससे जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह खनन कार्य देर रात तक जारी रहता है, जिसके कारण क्षेत्र में भारी वाहनों की आवाजाही काफी बढ़ गई है। इससे आसपास रहने वाले लोगों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि उन्होंने कई बार संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों को इस अवैध गतिविधि की सूचना दी है, लेकिन अब तक इस पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से इस पूरे मामले की तत्काल जांच कर अवैध खनन पर रोक लगाने और इसमें शामिल दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। हालांकि, इस विषय पर प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष अभी सामने नहीं आया है। यदि खनन की यह शिकायत सही पाई जाती है, तो इसे राजस्व के नुकसान और पर्यावरण पर पड़ने वाले गंभीर प्रभाव, दोनों के लिए एक चिंताजनक विषय माना जाएगा। फिलहाल, क्षेत्र में रात के समय हो रही इन खनन गतिविधियों को लेकर लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है और वे प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।1
- बलरामपुर जनपद के थाना कोतवाली नगर क्षेत्र अंतर्गत डिब्बा पुल के पास रात के अंधेरे में कथित रूप से धड़ल्ले से खनन किए जाने की चर्चा तेज़ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि देर रात तक यह खनन कार्य जारी रहता है, जिसके कारण क्षेत्र में भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ गई है। इससे आसपास के लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों को इस अवैध खनन की जानकारी दी है, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। इस स्थिति से अधिकारियों की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इस मामले की जांच कर अवैध खनन पर तुरंत रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। वहीं, इस विषय पर प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष अभी सामने नहीं आया है। यह भी कहा गया है कि यदि खनन की शिकायत सही पाई जाती है, तो यह राजस्व और पर्यावरण दोनों के लिए एक गंभीर विषय होगा। फिलहाल, क्षेत्र में रात के समय हो रही खनन गतिविधियों को लेकर लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है और वे प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं।1
- AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बहराइच में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर एक बड़ा सियासी संदेश देते हुए चुनावी बिगुल फूंका। इस दौरान उन्होंने मटेरा विधानसभा सीट से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली को उम्मीदवार घोषित किया। ओवैसी ने दावा किया कि पार्टी पूरी ताकत और तैयारी के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी और अच्छा प्रदर्शन करेगी। उन्होंने योगी सरकार पर निशाना साधते हुए एनकाउंटर कार्रवाई को गलत बताया और आरोप लगाया कि प्रदेश में मासूम लोगों को एनकाउंटर के नाम पर परेशान किया जाता है। ओवैसी ने उत्तर प्रदेश से 40 से 60 प्रतिशत तक बीफ एक्सपोर्ट होने का मुद्दा भी उठाया। 'आई लव मोहम्मद' पोस्टर हटाए जाने के विषय पर उन्होंने कहा कि पोस्टर हटाने से मोहब्बत कम नहीं होगी। उन्होंने मौजूदा सपा विधायक मारिया शाह को 'आरामदायक नेता' करार देते हुए कहा कि उनकी पार्टी मजबूती से चुनाव लड़ेगी और जीत दर्ज करेगी। ओवैसी ने यह भी बताया कि उनकी पार्टी प्रदेश में लगातार सक्रिय है और यह आवागमन भी उसी राजनीतिक अभियान का हिस्सा है। उन्होंने याद दिलाया कि वे पांच साल पहले भी बहराइच आए थे, सभा की थी और सालार गाजी मसूद की दरगाह पर भी गए थे, जिसे उन्होंने एक सामान्य पार्टी कार्यक्रम बताया। दरगाह को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए ओवैसी ने कहा कि हुकूमतें बदलती रहती हैं, लेकिन धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल अपनी पहचान बनाए रखते हैं। उन्होंने दिल्ली की सल्तनत, मुगलिया और अंग्रेजों के खत्म होने का हवाला देते हुए कहा कि इसके बावजूद सालार गाजी की दरगाह आज भी कायम है, और औलिया अल्लाह के आस्ताने हमेशा आबाद रहते हैं।1
- ग्राम पंचायत परसा टोला सिसहनिया में नालियों की स्थिति बेहद खराब है, जिसके लिए सीधे तौर पर प्रधान को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। इन बदहाल नालियों के कारण पूरे क्षेत्र में असहनीय दुर्गंध फैल रही है, जिससे स्थानीय लोगों का जीना मुहाल हो गया है और वे बुरी तरह प्रभावित हैं। इस गंभीर समस्या के बीच, वार्ड नंबर 2 से जिला पंचायत सदस्य पद के भावी प्रत्याशी उम्मीदवार मुमताज अहमद ने स्थिति संभालने का बीड़ा उठाया है। वह आगे बढ़ते हुए सफाई कर्मचारियों के साथ मिलकर नालियों की सफाई का अभियान चला रहे हैं।1
- बहराइच के शंकरपुर में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के कार्यक्रम में असदुद्दीन ओवैसी की सभा भारी भीड़ और अव्यवस्था के माहौल में संपन्न हुई। इस आयोजन में प्रबंधन का स्पष्ट अभाव देखा गया, जिसके कारण सभा के दौरान कई तरह की अनियमितताएं देखने को मिलीं।1