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सिरोंज ब्रैकिंग, सरकारी अस्पताल में इलाज के दौरान दो वर्षीय बच्चें की मौत l सिरोंज ब्रैकिंग, सरकारी अस्पताल में इलाज के दौरान दो वर्षीय बच्चें की मौत l परिजनों ने अस्पताल में किया हंगामा l पुलिस ने मर्ग कायम किया l मृत शिशु कन्हैया का हो रहा पी एम l सिरोंज पुलिस ने सम्पूर्ण जाँच का भरोसा दिया l दोपहर 10.30-11 बजे इलाज के लिए अस्पताल लाये l गलसुआ ओर बुखार की थी शिकायत l ड्यूटी डॉक्टर ने दवाई लिखी l करीब 4 बजे दोबारा बच्चें को लेकर अस्पताल पहुंचे तो बच्चा मर चुका था l

15 hrs ago
user_रिपोर्टर rupesh yadav
रिपोर्टर rupesh yadav
Photographer सिरोंज, विदिशा, मध्य प्रदेश•
15 hrs ago

सिरोंज ब्रैकिंग, सरकारी अस्पताल में इलाज के दौरान दो वर्षीय बच्चें की मौत l सिरोंज ब्रैकिंग, सरकारी अस्पताल में इलाज के दौरान दो वर्षीय बच्चें की मौत l परिजनों ने अस्पताल में किया हंगामा l पुलिस ने मर्ग कायम किया l मृत शिशु कन्हैया का हो रहा पी एम l सिरोंज पुलिस ने सम्पूर्ण जाँच का भरोसा दिया l दोपहर 10.30-11 बजे इलाज के लिए अस्पताल लाये l गलसुआ ओर बुखार की थी शिकायत l ड्यूटी डॉक्टर ने दवाई लिखी l करीब 4 बजे दोबारा बच्चें को लेकर अस्पताल पहुंचे तो बच्चा मर चुका था l

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  • बीना में अश्लील गाने को लेकर सेन समाज ने जताई आपत्ति, प्रशासन से कार्रवाई की मांग जिला अध्यक्ष संजीव सेन ने एसडीओ राजस्व को सौंपा आवेदन, संबंधित वीडियो और यूट्यूब चैनल पर कार्रवाई की मांग लोकल न्यूज़ बीना रिपोर्ट लक्ष्मण सिंह राजपूत बीना में अश्लील गाने को लेकर सेन समाज ने जताई आपत्ति, प्रशासन से कार्रवाई की मांग जिला अध्यक्ष संजीव सेन ने एसडीओ राजस्व को सौंपा आवेदन, संबंधित वीडियो और यूट्यूब चैनल पर कार्रवाई की मांग बीना में एक कथित अश्लील गाने को लेकर सेन समाज की ओर से प्रशासन से कार्रवाई की मांग की गई है। सेन समाज संयुक्त कल्याण संगठन बीना के जिला अध्यक्ष संजीव सेन ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बीना के नाम आवेदन सौंपकर एक व्यक्ति पर विशेष जाति एवं पेशे को लेकर कथित तौर पर अश्लील गाना बनाने और उसे यूट्यूब पर प्रसारित करने का आरोप लगाया है। आवेदन में संबंधित वीडियो और यूट्यूब चैनल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। हालांकि, आवेदन में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। सेन समाज संयुक्त कल्याण संगठन बीना जिला सागर के जिला अध्यक्ष संजीव सेन द्वारा दिए गए आवेदन के अनुसार, बिहार के वैशाली जिले के पातेपुर थाना क्षेत्र के डुमरा गांव निवासी गणेश लाजवाब यादव, पिता चंद्रेश्वर भगत, पर यूट्यूब के माध्यम से अश्लील गाना बनाने और प्रसारित करने का आरोप लगाया गया है। आवेदन में कहा गया है कि संबंधित व्यक्ति द्वारा जाति विशेष और पेशे से जुड़े लोगों को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक गीत बनाया गया है। आवेदन में संबंधित वीडियो का लिंक और स्क्रीनशॉट भी संलग्न किए जाने का उल्लेख है। सेन समाज के जिला अध्यक्ष संजीव सेन ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की जांच कर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाए और संबंधित यूट्यूब चैनल के संबंध में भी आवश्यक कार्रवाई की जाए। आवेदन में यह भी कहा गया है कि इस तरह की सामग्री से समाज और पेशे से जुड़े लोगों की भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं। फिलहाल यह मामला एक लिखित आवेदन के माध्यम से प्रशासन के समक्ष पहुंचा है। अब आवेदन में लगाए गए आरोपों पर प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। सेन समाज की ओर से मांग की गई है कि मामले की जांच कर दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
    1
    बीना में अश्लील गाने को लेकर सेन समाज ने जताई आपत्ति, प्रशासन से कार्रवाई की मांग

जिला अध्यक्ष संजीव सेन ने एसडीओ राजस्व को सौंपा आवेदन, संबंधित वीडियो और यूट्यूब चैनल पर कार्रवाई की मांग
लोकल न्यूज़ बीना 
रिपोर्ट लक्ष्मण सिंह राजपूत 
बीना में अश्लील गाने को लेकर सेन समाज ने जताई आपत्ति, प्रशासन से कार्रवाई की मांग
जिला अध्यक्ष संजीव सेन ने एसडीओ राजस्व को सौंपा आवेदन, संबंधित वीडियो और यूट्यूब चैनल पर कार्रवाई की मांग
बीना में एक कथित अश्लील गाने को लेकर सेन समाज की ओर से प्रशासन से कार्रवाई की मांग की गई है।
सेन समाज संयुक्त कल्याण संगठन बीना के जिला अध्यक्ष संजीव सेन ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बीना के नाम आवेदन सौंपकर एक व्यक्ति पर विशेष जाति एवं पेशे को लेकर कथित तौर पर अश्लील गाना बनाने और उसे यूट्यूब पर प्रसारित करने का आरोप लगाया है।
आवेदन में संबंधित वीडियो और यूट्यूब चैनल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। हालांकि, आवेदन में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
सेन समाज संयुक्त कल्याण संगठन बीना जिला सागर के जिला अध्यक्ष संजीव सेन द्वारा दिए गए आवेदन के अनुसार, बिहार के वैशाली जिले के पातेपुर थाना क्षेत्र के डुमरा गांव निवासी गणेश लाजवाब यादव, पिता चंद्रेश्वर भगत, पर यूट्यूब के माध्यम से अश्लील गाना बनाने और प्रसारित करने का आरोप लगाया गया है।
आवेदन में कहा गया है कि संबंधित व्यक्ति द्वारा जाति विशेष और पेशे से जुड़े लोगों को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक गीत बनाया गया है।
आवेदन में संबंधित वीडियो का लिंक और स्क्रीनशॉट भी संलग्न किए जाने का उल्लेख है।
सेन समाज के जिला अध्यक्ष संजीव सेन ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की जांच कर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाए और संबंधित यूट्यूब चैनल के संबंध में भी आवश्यक कार्रवाई की जाए।
आवेदन में यह भी कहा गया है कि इस तरह की सामग्री से समाज और पेशे से जुड़े लोगों की भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
फिलहाल यह मामला एक लिखित आवेदन के माध्यम से प्रशासन के समक्ष पहुंचा है। अब आवेदन में लगाए गए आरोपों पर प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
सेन समाज की ओर से मांग की गई है कि मामले की जांच कर दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
    user_Mp news 24live
    Mp news 24live
    बीना, सागर, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
  • बीना में अश्लील गाने को लेकर सेन समाज ने जताई आपत्ति, प्रशासन से कार्रवाई की मांग जिला अध्यक्ष संजीव सेन ने एसडीओ राजस्व को सौंपा आवेदन, संबंधित वीडियो और यूट्यूब चैनल पर कार्रवाई की मांग लोकल न्यूज़ बीना रिपोर्ट लक्ष्मण सिंह राजपूत बीना में अश्लील गाने को लेकर सेन समाज ने जताई आपत्ति, प्रशासन से कार्रवाई की मांग जिला अध्यक्ष संजीव सेन ने एसडीओ राजस्व को सौंपा आवेदन, संबंधित वीडियो और यूट्यूब चैनल पर कार्रवाई की मांग बीना में एक कथित अश्लील गाने को लेकर सेन समाज की ओर से प्रशासन से कार्रवाई की मांग की गई है। सेन समाज संयुक्त कल्याण संगठन बीना के जिला अध्यक्ष संजीव सेन ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बीना के नाम आवेदन सौंपकर एक व्यक्ति पर विशेष जाति एवं पेशे को लेकर कथित तौर पर अश्लील गाना बनाने और उसे यूट्यूब पर प्रसारित करने का आरोप लगाया है। आवेदन में संबंधित वीडियो और यूट्यूब चैनल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। हालांकि, आवेदन में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। सेन समाज संयुक्त कल्याण संगठन बीना जिला सागर के जिला अध्यक्ष संजीव सेन द्वारा दिए गए आवेदन के अनुसार, बिहार के वैशाली जिले के पातेपुर थाना क्षेत्र के डुमरा गांव निवासी गणेश लाजवाब यादव, पिता चंद्रेश्वर भगत, पर यूट्यूब के माध्यम से अश्लील गाना बनाने और प्रसारित करने का आरोप लगाया गया है। आवेदन में कहा गया है कि संबंधित व्यक्ति द्वारा जाति विशेष और पेशे से जुड़े लोगों को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक गीत बनाया गया है। आवेदन में संबंधित वीडियो का लिंक और स्क्रीनशॉट भी संलग्न किए जाने का उल्लेख है। सेन समाज के जिला अध्यक्ष संजीव सेन ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की जांच कर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाए और संबंधित यूट्यूब चैनल के संबंध में भी आवश्यक कार्रवाई की जाए। आवेदन में यह भी कहा गया है कि इस तरह की सामग्री से समाज और पेशे से जुड़े लोगों की भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं। फिलहाल यह मामला एक लिखित आवेदन के माध्यम से प्रशासन के समक्ष पहुंचा है। अब आवेदन में लगाए गए आरोपों पर प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। सेन समाज की ओर से मांग की गई है कि मामले की जांच कर दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
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    बीना में अश्लील गाने को लेकर सेन समाज ने जताई आपत्ति, प्रशासन से कार्रवाई की मांग

जिला अध्यक्ष संजीव सेन ने एसडीओ राजस्व को सौंपा आवेदन, संबंधित वीडियो और यूट्यूब चैनल पर कार्रवाई की मांग

लोकल न्यूज़ बीना 
रिपोर्ट लक्ष्मण सिंह राजपूत 
बीना में अश्लील गाने को लेकर सेन समाज ने जताई आपत्ति, प्रशासन से कार्रवाई की मांग
जिला अध्यक्ष संजीव सेन ने एसडीओ राजस्व को सौंपा आवेदन, संबंधित वीडियो और यूट्यूब चैनल पर कार्रवाई की मांग
बीना में एक कथित अश्लील गाने को लेकर सेन समाज की ओर से प्रशासन से कार्रवाई की मांग की गई है।
सेन समाज संयुक्त कल्याण संगठन बीना के जिला अध्यक्ष संजीव सेन ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बीना के नाम आवेदन सौंपकर एक व्यक्ति पर विशेष जाति एवं पेशे को लेकर कथित तौर पर अश्लील गाना बनाने और उसे यूट्यूब पर प्रसारित करने का आरोप लगाया है।
आवेदन में संबंधित वीडियो और यूट्यूब चैनल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। हालांकि, आवेदन में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
सेन समाज संयुक्त कल्याण संगठन बीना जिला सागर के जिला अध्यक्ष संजीव सेन द्वारा दिए गए आवेदन के अनुसार, बिहार के वैशाली जिले के पातेपुर थाना क्षेत्र के डुमरा गांव निवासी गणेश लाजवाब यादव, पिता चंद्रेश्वर भगत, पर यूट्यूब के माध्यम से अश्लील गाना बनाने और प्रसारित करने का आरोप लगाया गया है।
आवेदन में कहा गया है कि संबंधित व्यक्ति द्वारा जाति विशेष और पेशे से जुड़े लोगों को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक गीत बनाया गया है।
आवेदन में संबंधित वीडियो का लिंक और स्क्रीनशॉट भी संलग्न किए जाने का उल्लेख है।
सेन समाज के जिला अध्यक्ष संजीव सेन ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की जांच कर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाए और संबंधित यूट्यूब चैनल के संबंध में भी आवश्यक कार्रवाई की जाए।
आवेदन में यह भी कहा गया है कि इस तरह की सामग्री से समाज और पेशे से जुड़े लोगों की भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
फिलहाल यह मामला एक लिखित आवेदन के माध्यम से प्रशासन के समक्ष पहुंचा है। अब आवेदन में लगाए गए आरोपों पर प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
सेन समाज की ओर से मांग की गई है कि मामले की जांच कर दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
    user_Laxman Singh Rajput
    Laxman Singh Rajput
    Local News Reporter बीना, सागर, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
  • today news |दिल्ली-एनसीआर में बादलों का डेरा, हल्की से मध्यम बारिश
    1
    today news |दिल्ली-एनसीआर में बादलों का डेरा, हल्की से मध्यम बारिश
    user_Ravindra
    Ravindra
    Local News Reporter अशोकनगर, अशोकनगर, मध्य प्रदेश•
    10 hrs ago
  • अमर शहीद महाराजा शंकर शाह–कुंवर रघुनाथ शाह का 169वां बलिदान दिवस भोपाल में संपन्न भोपाल, 27 सितंबर 2026। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रविवार को 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीद महाराजा शंकर शाह एवं उनके सुपुत्र कुंवर रघुनाथ शाह जी का 169वां बलिदान दिवस श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को वीर शहीदों के इतिहास, उनके संघर्ष और राष्ट्र के प्रति उनके बलिदान से परिचित कराना तथा समाज में देशभक्ति, एकता और त्याग की भावना को मजबूत करना रहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता जय कुमार वरकड़े जी ने की। उपाध्यक्ष बंटी धुर्वे जी, संयोजक ललित महेश्वरी जी, प्रभारी संतोष पोरते जी सहित गौतम तेकाम जी, अजय परते जी, रवि उईके जी (मंडीदीप), अजय राकेश आयाम जी (सागर), विक्रम परते जी (होशंगाबाद) एवं मोहन लाल पन्द्राम जी सहित अन्य पदाधिकारी एवं समाजजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि महाराजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध संघर्ष करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया। उनके त्याग और शौर्य की गाथा आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना समाज और राष्ट्र की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। राजधानी भोपाल में इस प्रकार के आयोजन से युवाओं और आम नागरिकों में देशभक्ति, सामाजिक एकता और राष्ट्रहित की भावना को बढ़ावा मिलता है। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में पूर्व सांसद अजय प्रताप सिंह, वरिष्ठ समाजसेवी एवं अंतरराष्ट्रीय गोंडी चित्रकार आनंद श्याम जी, एन.आर. भूआरे जी, रामसिंह काकोड़िया जी (कोयतोड़ गोंडवाना महासभा संगठन), दुर्गावती उइके जी (अखिल गोंडवाना महासभा महिला प्रभाग प्रदेश अध्यक्ष), कांता उइके जी, राहुल मारण जी, प्रभाकर उइके जी (अखिल गोंडवाना महासभा प्रदेश अध्यक्ष), मोहन ओझा जी (प्रदेश अध्यक्ष, ओझा समाज संगठन) सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। इस अवसर पर संजू वाडीवा जी, गीतकार, गायक एवं संगीतकार तथा गोंडी भाषा प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष, गोंड समाज महासभा मध्य प्रदेश द्वारा महाराजा शंकर शाह एवं कुंवर रघुनाथ शाह जी के शौर्य और बलिदान पर आधारित वीरगाथा गीत प्रस्तुत किए गए। वीरगाथा गीतों ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों में उत्साह और भावनात्मक जुड़ाव का वातावरण निर्मित किया। कार्यक्रम के दौरान सगा जनों की उपस्थिति में सतरंगी झंडा स्थापित किया गया। साथ ही चुना भट्टी चौराहा, भोपाल में अमर शहीद महाराजा शंकर शाह एवं कुंवर रघुनाथ शाह जी की प्रतिमा स्थापित किए जाने के संबंध में सरकार के समक्ष प्रस्ताव रखने का निर्णय लिया गया। समाजजनों ने इस प्रस्ताव का पूर्ण समर्थन किया। कार्यक्रम के अंत में अमर शहीद महाराजा शंकर शाह एवं कुंवर रघुनाथ शाह जी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उपस्थित समाजजनों ने संकल्प लिया कि स्वतंत्रता, अखंडता, सामाजिक समरसता और राष्ट्रहित के लिए शहीदों के आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए सामूहिक रूप से कार्य किया जाएगा। अमर शहीद महाराजा शंकर शाह–कुंवर रघुनाथ शाह का 169वां बलिदान दिवस भोपाल में संपन्न भोपाल, 27 सितंबर 2026। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रविवार को 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीद महाराजा शंकर शाह एवं उनके सुपुत्र कुंवर रघुनाथ शाह जी का 169वां बलिदान दिवस श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को वीर शहीदों के इतिहास, उनके संघर्ष और राष्ट्र के प्रति उनके बलिदान से परिचित कराना तथा समाज में देशभक्ति, एकता और त्याग की भावना को मजबूत करना रहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता जय कुमार वरकड़े जी ने की। उपाध्यक्ष बंटी धुर्वे जी, संयोजक ललित महेश्वरी जी, प्रभारी संतोष पोरते जी सहित गौतम तेकाम जी, अजय परते जी, रवि उईके जी (मंडीदीप), अजय राकेश आयाम जी (सागर), विक्रम परते जी (होशंगाबाद) एवं मोहन लाल पन्द्राम जी सहित अन्य पदाधिकारी एवं समाजजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि महाराजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध संघर्ष करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया। उनके त्याग और शौर्य की गाथा आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना समाज और राष्ट्र की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। राजधानी भोपाल में इस प्रकार के आयोजन से युवाओं और आम नागरिकों में देशभक्ति, सामाजिक एकता और राष्ट्रहित की भावना को बढ़ावा मिलता है। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में पूर्व सांसद अजय प्रताप सिंह, वरिष्ठ समाजसेवी एवं अंतरराष्ट्रीय गोंडी चित्रकार आनंद श्याम जी, एन.आर. भूआरे जी, रामसिंह काकोड़िया जी (कोयतोड़ गोंडवाना महासभा संगठन), दुर्गावती उइके जी (अखिल गोंडवाना महासभा महिला प्रभाग प्रदेश अध्यक्ष), कांता उइके जी, राहुल मारण जी, प्रभाकर उइके जी (अखिल गोंडवाना महासभा प्रदेश अध्यक्ष), मोहन ओझा जी (प्रदेश अध्यक्ष, ओझा समाज संगठन) सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। इस अवसर पर संजू वाडीवा जी, गीतकार, गायक एवं संगीतकार तथा गोंडी भाषा प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष, गोंड समाज महासभा मध्य प्रदेश द्वारा महाराजा शंकर शाह एवं कुंवर रघुनाथ शाह जी के शौर्य और बलिदान पर आधारित वीरगाथा गीत प्रस्तुत किए गए। वीरगाथा गीतों ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों में उत्साह और भावनात्मक जुड़ाव का वातावरण निर्मित किया। कार्यक्रम के दौरान सगा जनों की उपस्थिति में सतरंगी झंडा स्थापित किया गया। साथ ही चुना भट्टी चौराहा, भोपाल में अमर शहीद महाराजा शंकर शाह एवं कुंवर रघुनाथ शाह जी की प्रतिमा स्थापित किए जाने के संबंध में सरकार के समक्ष प्रस्ताव रखने का निर्णय लिया गया। समाजजनों ने इस प्रस्ताव का पूर्ण समर्थन किया। कार्यक्रम के अंत में अमर शहीद महाराजा शंकर शाह एवं कुंवर रघुनाथ शाह जी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उपस्थित समाजजनों ने संकल्प लिया कि स्वतंत्रता, अखंडता, सामाजिक समरसता और राष्ट्रहित के लिए शहीदों के आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए सामूहिक रूप से कार्य किया जाएगा।
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    अमर शहीद महाराजा शंकर शाह–कुंवर रघुनाथ शाह का 169वां बलिदान दिवस भोपाल में संपन्न

भोपाल, 27 सितंबर 2026। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रविवार को 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीद महाराजा शंकर शाह एवं उनके सुपुत्र कुंवर रघुनाथ शाह जी का 169वां बलिदान दिवस श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को वीर शहीदों के इतिहास, उनके संघर्ष और राष्ट्र के प्रति उनके बलिदान से परिचित कराना तथा समाज में देशभक्ति, एकता और त्याग की भावना को मजबूत करना रहा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता जय कुमार वरकड़े जी ने की। उपाध्यक्ष बंटी धुर्वे जी, संयोजक ललित महेश्वरी जी, प्रभारी संतोष पोरते जी सहित गौतम तेकाम जी, अजय परते जी, रवि उईके जी (मंडीदीप), अजय राकेश आयाम जी (सागर), विक्रम परते जी (होशंगाबाद) एवं मोहन लाल पन्द्राम जी सहित अन्य पदाधिकारी एवं समाजजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि महाराजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध संघर्ष करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया। उनके त्याग और शौर्य की गाथा आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना समाज और राष्ट्र की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। राजधानी भोपाल में इस प्रकार के आयोजन से युवाओं और आम नागरिकों में देशभक्ति, सामाजिक एकता और राष्ट्रहित की भावना को बढ़ावा मिलता है।

कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में पूर्व सांसद अजय प्रताप सिंह, वरिष्ठ समाजसेवी एवं अंतरराष्ट्रीय गोंडी चित्रकार आनंद श्याम जी, एन.आर. भूआरे जी, रामसिंह काकोड़िया जी (कोयतोड़ गोंडवाना महासभा संगठन), दुर्गावती उइके जी (अखिल गोंडवाना महासभा महिला प्रभाग प्रदेश अध्यक्ष), कांता उइके जी, राहुल मारण जी, प्रभाकर उइके जी (अखिल गोंडवाना महासभा प्रदेश अध्यक्ष), मोहन ओझा जी (प्रदेश अध्यक्ष, ओझा समाज संगठन) सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

इस अवसर पर संजू वाडीवा जी, गीतकार, गायक एवं संगीतकार तथा गोंडी भाषा प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष, गोंड समाज महासभा मध्य प्रदेश द्वारा महाराजा शंकर शाह एवं कुंवर रघुनाथ शाह जी के शौर्य और बलिदान पर आधारित वीरगाथा गीत प्रस्तुत किए गए। वीरगाथा गीतों ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों में उत्साह और भावनात्मक जुड़ाव का वातावरण निर्मित किया।

कार्यक्रम के दौरान सगा जनों की उपस्थिति में सतरंगी झंडा स्थापित किया गया। साथ ही चुना भट्टी चौराहा, भोपाल में अमर शहीद महाराजा शंकर शाह एवं कुंवर रघुनाथ शाह जी की प्रतिमा स्थापित किए जाने के संबंध में सरकार के समक्ष प्रस्ताव रखने का निर्णय लिया गया। समाजजनों ने इस प्रस्ताव का पूर्ण समर्थन किया।

कार्यक्रम के अंत में अमर शहीद महाराजा शंकर शाह एवं कुंवर रघुनाथ शाह जी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उपस्थित समाजजनों ने संकल्प लिया कि स्वतंत्रता, अखंडता, सामाजिक समरसता और राष्ट्रहित के लिए शहीदों के आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए सामूहिक रूप से कार्य किया जाएगा।
अमर शहीद महाराजा शंकर शाह–कुंवर रघुनाथ शाह का 169वां बलिदान दिवस भोपाल में संपन्न
भोपाल, 27 सितंबर 2026। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रविवार को 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीद महाराजा शंकर शाह एवं उनके सुपुत्र कुंवर रघुनाथ शाह जी का 169वां बलिदान दिवस श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को वीर शहीदों के इतिहास, उनके संघर्ष और राष्ट्र के प्रति उनके बलिदान से परिचित कराना तथा समाज में देशभक्ति, एकता और त्याग की भावना को मजबूत करना रहा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जय कुमार वरकड़े जी ने की। उपाध्यक्ष बंटी धुर्वे जी, संयोजक ललित महेश्वरी जी, प्रभारी संतोष पोरते जी सहित गौतम तेकाम जी, अजय परते जी, रवि उईके जी (मंडीदीप), अजय राकेश आयाम जी (सागर), विक्रम परते जी (होशंगाबाद) एवं मोहन लाल पन्द्राम जी सहित अन्य पदाधिकारी एवं समाजजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि महाराजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध संघर्ष करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया। उनके त्याग और शौर्य की गाथा आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना समाज और राष्ट्र की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। राजधानी भोपाल में इस प्रकार के आयोजन से युवाओं और आम नागरिकों में देशभक्ति, सामाजिक एकता और राष्ट्रहित की भावना को बढ़ावा मिलता है।
कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में पूर्व सांसद अजय प्रताप सिंह, वरिष्ठ समाजसेवी एवं अंतरराष्ट्रीय गोंडी चित्रकार आनंद श्याम जी, एन.आर. भूआरे जी, रामसिंह काकोड़िया जी (कोयतोड़ गोंडवाना महासभा संगठन), दुर्गावती उइके जी (अखिल गोंडवाना महासभा महिला प्रभाग प्रदेश अध्यक्ष), कांता उइके जी, राहुल मारण जी, प्रभाकर उइके जी (अखिल गोंडवाना महासभा प्रदेश अध्यक्ष), मोहन ओझा जी (प्रदेश अध्यक्ष, ओझा समाज संगठन) सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
इस अवसर पर संजू वाडीवा जी, गीतकार, गायक एवं संगीतकार तथा गोंडी भाषा प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष, गोंड समाज महासभा मध्य प्रदेश द्वारा महाराजा शंकर शाह एवं कुंवर रघुनाथ शाह जी के शौर्य और बलिदान पर आधारित वीरगाथा गीत प्रस्तुत किए गए। वीरगाथा गीतों ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों में उत्साह और भावनात्मक जुड़ाव का वातावरण निर्मित किया।
कार्यक्रम के दौरान सगा जनों की उपस्थिति में सतरंगी झंडा स्थापित किया गया। साथ ही चुना भट्टी चौराहा, भोपाल में अमर शहीद महाराजा शंकर शाह एवं कुंवर रघुनाथ शाह जी की प्रतिमा स्थापित किए जाने के संबंध में सरकार के समक्ष प्रस्ताव रखने का निर्णय लिया गया। समाजजनों ने इस प्रस्ताव का पूर्ण समर्थन किया।
कार्यक्रम के अंत में अमर शहीद महाराजा शंकर शाह एवं कुंवर रघुनाथ शाह जी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उपस्थित समाजजनों ने संकल्प लिया कि स्वतंत्रता, अखंडता, सामाजिक समरसता और राष्ट्रहित के लिए शहीदों के आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए सामूहिक रूप से कार्य किया जाएगा।
    user_Guru Prasad Sharma
    Guru Prasad Sharma
    बैरसिया, भोपाल, मध्य प्रदेश•
    17 hrs ago
  • पितृपक्ष विशेष- -कागों का धार्मिक और वैज्ञानिक है महत्व विलुप्त हो रहे कौंओ और पितरों की याद में समर्पित कर दिया मुक्तिधाम में काग उद्यान, प्रतिदिन लोग करा रहे आहार -------- विदिशा/मुक्तिधाम सेवा समिति ने जहां पर्यावरण के क्षेत्र में एक बड़ा कार्य किया है वही विलुप्त होती काग प्रजाति को बचाने के लिए पूरा एक काग उद्यान का ही निर्माण कर दिया। मुक्तिधाम सेवा समिति के सचिव मनोज पांडे बताते हैं कि पिछले 15 वर्षों से मुक्तिधाम में एक काग उद्यान का निर्माण किया गया है जहां 365 दिन यानी वर्ष भर उनके भोजन प्रसादी का कार्य निरंतर चलता रहता है। जहां कागो के नाम पर एक काग रसोई भी संचालित है जहां चावल रोटी और पोहा भी तैयार किया जाता है। संस्था सचिव मनोज पांडे के मुताबिक वह शहर से भी समोसे कचोरी भाजी बड़ा ब्रेड बड़ा और जलेबी इत्यादि भी दुकानों में बच जाता है तो वहां से उठाते हैं और फिर यहां मुक्तिधाम में काग उद्यान और काग परिसर में ऐसी विलुप्त होती प्रजाति को बचाने के लिए न केवल उनके भोजन आहार की व्यवस्था की गई है बल्कि पीने के लिए जल पात्र भी वहां लगाए गए हैं और उनके भोजन के लिए भोजन थाल भी वहां स्थापित है। अब तो वहां काग भी डरते नहीं है बल्कि हाथ से और पास में बैठकर आहार ग्रहण कर लेते हैं।संस्था सचिव मनोज पांडे ने बताया कि कागों का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व है। धार्मिक रूप से वह हमारे पुरखों के प्रतीक होते हैं और उनको खास तौर से पितृपक्ष में आहार कराने से यह माना जाता है कि वह भोजन हमारे पितरों पुरखा तक पहुंच रहा है वही वैज्ञानिक दृष्टि से कहा जाए तो सृष्टि में जो भी विषैले जीव जंतु विचरण करते हैं जो मानव शरीर के लिए नुकसानदायक है उनका भक्षण भी कौवे करते हैं। तथा दूसरी तरफ समाज में बढ़ते हुए रेडिएशन और प्रदूषण के कारण इस प्रजाति के जीवन काल पर ही संकट आ गया है। आज भी शहर में यह प्रजाति कम ही देखने को मिलती है लेकिन मुक्तिधाम के काग उद्यान में यह प्रजाति बड़ी संख्या में मौजूद है जहां पितृपक्ष में लोग बाग अपने पितरों की याद में वहां उनको भोजन प्रसादी का वितरण करते हैं। पंडित संजय पुरोहित पुजारी श्री चरण तीर्थ धाम विदिशा- पंडित संजय पुरोहित जो पितृपक्ष में यजमानों को तर्पण कार्य करवा रहे हैं उनके मुताबिक पितृपक्ष में हम लोग पंचवली का दान करते हैं जिसमें कौवा को भी आहार निकाला जाता है इस हेतु मुक्तिधाम का कग उद्यान एक श्रेष्ठ कार्य है जहां 365 दिन हमारे पितरों की याद में भोजन आहार कराया जाता है इसके लिए संस्था सचिव बहुत साधु बात की पात्र हैं वही सैकड़ो की तादाद में पितृपक्ष में वहां यजमान कौओं को भोजन प्रसादी का वितरण भी करते हैं।
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    पितृपक्ष विशेष-

-कागों का धार्मिक और वैज्ञानिक है महत्व

विलुप्त हो रहे कौंओ और पितरों की याद में समर्पित कर दिया मुक्तिधाम में काग उद्यान, प्रतिदिन लोग करा रहे आहार 
--------
विदिशा/मुक्तिधाम सेवा समिति ने जहां पर्यावरण के क्षेत्र में एक बड़ा कार्य किया है वही विलुप्त होती काग प्रजाति को बचाने के लिए पूरा एक काग उद्यान का ही निर्माण कर दिया। मुक्तिधाम सेवा समिति के सचिव मनोज पांडे बताते हैं कि पिछले 15 वर्षों से मुक्तिधाम में एक काग उद्यान का निर्माण किया गया है जहां 365 दिन यानी वर्ष भर उनके भोजन प्रसादी का कार्य निरंतर चलता रहता है। जहां कागो के नाम पर एक काग रसोई भी संचालित है जहां चावल रोटी और पोहा भी तैयार किया जाता है। संस्था सचिव मनोज पांडे के मुताबिक वह शहर से भी समोसे कचोरी भाजी बड़ा ब्रेड बड़ा और जलेबी इत्यादि भी दुकानों में बच जाता है तो वहां से उठाते हैं और फिर यहां मुक्तिधाम में काग उद्यान और काग परिसर में ऐसी विलुप्त होती प्रजाति को बचाने के लिए न केवल उनके भोजन आहार की व्यवस्था की गई है बल्कि पीने के लिए जल पात्र भी वहां लगाए गए हैं और उनके भोजन के लिए भोजन थाल भी वहां स्थापित है। अब तो वहां काग भी डरते नहीं है बल्कि हाथ से और पास में बैठकर आहार ग्रहण कर लेते हैं।संस्था सचिव मनोज पांडे ने बताया कि कागों का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व है। धार्मिक रूप से वह हमारे पुरखों के प्रतीक होते हैं और उनको खास तौर से पितृपक्ष में आहार कराने से यह माना जाता है कि वह भोजन हमारे पितरों पुरखा तक पहुंच रहा है वही वैज्ञानिक दृष्टि से कहा जाए तो सृष्टि में जो भी विषैले जीव जंतु विचरण करते हैं जो मानव शरीर के लिए नुकसानदायक है उनका भक्षण भी कौवे करते हैं। तथा दूसरी तरफ समाज में बढ़ते हुए रेडिएशन और प्रदूषण के कारण इस प्रजाति के जीवन काल पर ही संकट आ गया है। आज भी शहर में यह प्रजाति कम ही देखने को मिलती है लेकिन मुक्तिधाम के काग उद्यान में यह प्रजाति बड़ी संख्या में मौजूद है जहां पितृपक्ष में लोग बाग अपने पितरों की याद में वहां उनको भोजन प्रसादी का वितरण करते हैं।
पंडित संजय पुरोहित पुजारी श्री चरण तीर्थ धाम विदिशा-
पंडित संजय पुरोहित जो पितृपक्ष में यजमानों को तर्पण कार्य करवा रहे हैं उनके मुताबिक पितृपक्ष में हम लोग पंचवली का दान करते हैं जिसमें कौवा को भी आहार निकाला जाता है इस हेतु मुक्तिधाम का कग उद्यान एक श्रेष्ठ कार्य है जहां 365 दिन हमारे पितरों की याद में भोजन आहार कराया जाता है इसके लिए संस्था सचिव बहुत साधु बात की पात्र हैं वही सैकड़ो की तादाद में पितृपक्ष में वहां यजमान कौओं को भोजन प्रसादी का वितरण भी करते हैं।
    user_Vinod Mehra
    Vinod Mehra
    Emt news Vidisha News editor Vidisha, Madhya Pradesh•
    8 hrs ago
  • कन्या महाविद्यालय में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का छात्र संवाद कार्यक्रम आयोजित चाचौड़ा/बीनागंज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद चाचौड़ा-बीनागंज इकाई द्वारा कन्या महाविद्यालय में छात्रा संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में छात्राओं से शैक्षणिक आवश्यकताओं, महाविद्यालय से जुड़े विषयों तथा उनकी समस्याओं को लेकर संवाद किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि नगर पालिका उपाध्यक्ष रश्मि शर्मा रहीं। इस अवसर पर नगर अध्यक्ष नवीन शर्मा, नगर सहमंत्री कान्हा शर्मा, नगर मंत्री हर्ष शिवहरे, महाविद्यालय के प्राचार्य तथा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की पूर्व कार्यकर्ता वंदना व्यास सहित कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं। संवाद के दौरान अतिथियों ने छात्राओं से शिक्षा, व्यक्तित्व विकास और सामाजिक गतिविधियों में विद्यार्थियों की सहभागिता को लेकर चर्चा की। छात्राओं ने भी विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखे तथा प्रश्न पूछे। कार्यक्रम में छात्राओं की शैक्षणिक एवं अन्य आवश्यकताओं से जुड़े मुद्दों पर संवाद को महत्वपूर्ण बताया गया। ABVP कार्यकर्ताओं ने कहा कि विद्यार्थियों से जुड़े विषयों को लेकर भविष्य में भी संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
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    कन्या महाविद्यालय में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का छात्र संवाद कार्यक्रम आयोजित
चाचौड़ा/बीनागंज
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद  चाचौड़ा-बीनागंज इकाई द्वारा कन्या महाविद्यालय में छात्रा संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में छात्राओं से शैक्षणिक आवश्यकताओं, महाविद्यालय से जुड़े विषयों तथा उनकी समस्याओं को लेकर संवाद किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि नगर पालिका उपाध्यक्ष रश्मि शर्मा रहीं। इस अवसर पर नगर अध्यक्ष नवीन शर्मा, नगर सहमंत्री कान्हा शर्मा, नगर मंत्री हर्ष शिवहरे, महाविद्यालय के प्राचार्य तथा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की पूर्व कार्यकर्ता वंदना व्यास सहित कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।
संवाद के दौरान अतिथियों ने छात्राओं से शिक्षा, व्यक्तित्व विकास और सामाजिक गतिविधियों में विद्यार्थियों की सहभागिता को लेकर चर्चा की। छात्राओं ने भी विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखे तथा प्रश्न पूछे।
कार्यक्रम में छात्राओं की शैक्षणिक एवं अन्य आवश्यकताओं से जुड़े मुद्दों पर संवाद को महत्वपूर्ण बताया गया। ABVP कार्यकर्ताओं ने कहा कि विद्यार्थियों से जुड़े विषयों को लेकर भविष्य में भी संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
    user_Rinku vishwakarma
    Rinku vishwakarma
    Photographer चाचौरा, गुना, मध्य प्रदेश•
    15 hrs ago
  • कुरवाई में लाखों की चोरी का खुलासा, 350 CCTV फुटेज खंगालकर आरोपी गिरफ्तार15 लाख का माल बरामद कुरवाई में लाखों की चोरी का खुलासा, 350 CCTV फुटेज खंगालकर आरोपी गिरफ्तार15 लाख का माल बरामद
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    कुरवाई में लाखों की चोरी का खुलासा, 350 CCTV फुटेज खंगालकर आरोपी गिरफ्तार15 लाख का माल बरामद
कुरवाई में लाखों की चोरी का खुलासा, 350 CCTV फुटेज खंगालकर आरोपी गिरफ्तार15 लाख का माल बरामद
    user_VIMAL KUMAR VISHWAKARMA
    VIMAL KUMAR VISHWAKARMA
    शमशाबाद, विदिशा, मध्य प्रदेश•
    11 hrs ago
  • 90 वर्षीय फूलचंद शास्त्री का देहदान *जीवन रहते लिया था संकल्प, निधन के बाद परिजनों ने मेडिकल कॉलेज सागर को सौंपी पार्थिव देह* बीना से मानव सेवा और समाज के लिए एक ऐसी प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जो लोगों को देहदान के प्रति जागरूक करने का संदेश देती है। लोकल न्यूज़ बीना रिपोर्ट लक्ष्मण सिंह राजपूत 90 वर्षीय फूलचंद शास्त्री का देहदान *जीवन रहते लिया था संकल्प, निधन के बाद परिजनों ने मेडिकल कॉलेज सागर को सौंपी पार्थिव देह* बीना से मानव सेवा और समाज के लिए एक ऐसी प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जो लोगों को देहदान के प्रति जागरूक करने का संदेश देती है। 90 वर्षीय फूलचंद शास्त्री ने जीवन रहते देहदान का संकल्प लिया था। उनके निधन के बाद परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए उनकी पार्थिव देह मेडिकल कॉलेज सागर को दान कर दी। खास बात यह है कि जैन परिवार में जन्मे फूलचंद जैन ने बीना में प्रारंभिक शिक्षा हासिल करने के बाद वाराणसी में संस्कृत की शिक्षा प्राप्त की और 'शास्त्री' की उपाधि हासिल की। जीवन के अंतिम पड़ाव तक समाजसेवा की भावना रखने वाले फूलचंद शास्त्री ने मृत्यु के बाद भी मानव सेवा में योगदान देने का संकल्प लिया था। अंतिम इच्छा हुई पूरी बीना निवासी 90 वर्षीय फूलचंद शास्त्री अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका शरीर मृत्यु के बाद भी मानव सेवा और चिकित्सा शिक्षा के काम आएगा। फूलचंद शास्त्री ने कुछ समय पहले ही देहदान का संकल्प लिया था। उनका मानना था कि मृत्यु के बाद भी यदि शरीर किसी के अध्ययन और मानव सेवा के काम आ सके, तो इससे बड़ा समाजसेवा का माध्यम और क्या हो सकता है। उनके निधन के बाद परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा को पूरा करते हुए पार्थिव देह मेडिकल कॉलेज सागर को सौंप दी। | जैन परिवार से 'शास्त्री' बनने तक का सफर फूलचंद शास्त्री का जीवन भी अपने आप में खास रहा। जैन परिवार में जन्मे फूलचंद की प्रारंभिक शिक्षा बीना में हुई। इसके बाद उन्होंने संस्कृत की शिक्षा के लिए वाराणसी का रुख किया। वाराणसी में संस्कृत का अध्ययन करने के बाद उन्हें 'शास्त्री' की उपाधि प्राप्त हुई और इसके बाद वे फूलचंद जैन से फूलचंद शास्त्री के नाम से पहचाने जाने लगे। उनका जीवन ज्ञान, शिक्षा और समाजसेवा की भावना से जुड़ा रहा और इसी भावना के चलते उन्होंने अपने निधन के बाद भी मानव सेवा जारी रखने का निर्णय लिया। | देहदान के बाद मेडिकल छात्रों के लिए उपयोगी होगी देह बीएमओ डॉ. संजीव अग्रवाल ने बताया कि देहदान के बाद मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थी मानव शरीर की संरचना और विभिन्न अंगों का अध्ययन करते हैं। उन्होंने बताया कि चिकित्सा शिक्षा के लिए प्राप्त पार्थिव देह को विशेष प्रक्रिया के माध्यम से संरक्षित रखा जाता है, जिससे उसका उपयोग लंबे समय तक विद्यार्थियों के अध्ययन के लिए किया जा सके। इस तरह देहदान के माध्यम से भावी चिकित्सकों को मानव शरीर की संरचना को प्रत्यक्ष रूप से समझने और उसका अध्ययन करने का अवसर मिलता है। मृत्यु के बाद भी मानव सेवा फूलचंद शास्त्री का देहदान सिर्फ उनकी अंतिम इच्छा की पूर्ति नहीं, बल्कि समाज के लिए एक संदेश भी है। उनकी पार्थिव देह अब चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में भावी चिकित्सकों के अध्ययन में उपयोगी होगी। परिजनों ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए एक ऐसी मिसाल पेश की है, जो समाज में देहदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने का काम कर सकती है। एक ऐसा संकल्प, जिसमें जीवन के बाद भी मानव सेवा जारी रही।
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    90 वर्षीय फूलचंद शास्त्री का देहदान


 *जीवन रहते लिया था संकल्प, निधन के बाद परिजनों ने मेडिकल कॉलेज सागर को सौंपी पार्थिव देह* 

बीना से मानव सेवा और समाज के लिए एक ऐसी प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जो लोगों को देहदान के प्रति जागरूक करने का संदेश देती है।

लोकल न्यूज़ बीना 
रिपोर्ट लक्ष्मण सिंह राजपूत 
90 वर्षीय फूलचंद शास्त्री का देहदान
*जीवन रहते लिया था संकल्प, निधन के बाद परिजनों ने मेडिकल कॉलेज सागर को सौंपी पार्थिव देह* 
बीना से मानव सेवा और समाज के लिए एक ऐसी प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जो लोगों को देहदान के प्रति जागरूक करने का संदेश देती है।
90 वर्षीय फूलचंद शास्त्री ने जीवन रहते देहदान का संकल्प लिया था। उनके निधन के बाद परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए उनकी पार्थिव देह मेडिकल कॉलेज सागर को दान कर दी।
खास बात यह है कि जैन परिवार में जन्मे फूलचंद जैन ने बीना में प्रारंभिक शिक्षा हासिल करने के बाद वाराणसी में संस्कृत की शिक्षा प्राप्त की और 'शास्त्री' की उपाधि हासिल की। जीवन के अंतिम पड़ाव तक समाजसेवा की भावना रखने वाले फूलचंद शास्त्री ने मृत्यु के बाद भी मानव सेवा में योगदान देने का संकल्प लिया था।
अंतिम इच्छा हुई पूरी
बीना निवासी 90 वर्षीय फूलचंद शास्त्री अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका शरीर मृत्यु के बाद भी मानव सेवा और चिकित्सा शिक्षा के काम आएगा।
फूलचंद शास्त्री ने कुछ समय पहले ही देहदान का संकल्प लिया था। उनका मानना था कि मृत्यु के बाद भी यदि शरीर किसी के अध्ययन और मानव सेवा के काम आ सके, तो इससे बड़ा समाजसेवा का माध्यम और क्या हो सकता है।
उनके निधन के बाद परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा को पूरा करते हुए पार्थिव देह मेडिकल कॉलेज सागर को सौंप दी।
| जैन परिवार से 'शास्त्री' बनने तक का सफर
फूलचंद शास्त्री का जीवन भी अपने आप में खास रहा।
जैन परिवार में जन्मे फूलचंद की प्रारंभिक शिक्षा बीना में हुई। इसके बाद उन्होंने संस्कृत की शिक्षा के लिए वाराणसी का रुख किया।
वाराणसी में संस्कृत का अध्ययन करने के बाद उन्हें 'शास्त्री' की उपाधि प्राप्त हुई और इसके बाद वे फूलचंद जैन से फूलचंद शास्त्री के नाम से पहचाने जाने लगे।
उनका जीवन ज्ञान, शिक्षा और समाजसेवा की भावना से जुड़ा रहा और इसी भावना के चलते उन्होंने अपने निधन के बाद भी मानव सेवा जारी रखने का निर्णय लिया।
| देहदान के बाद मेडिकल छात्रों के लिए उपयोगी होगी देह
बीएमओ डॉ. संजीव अग्रवाल ने बताया कि देहदान के बाद मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थी मानव शरीर की संरचना और विभिन्न अंगों का अध्ययन करते हैं।
उन्होंने बताया कि चिकित्सा शिक्षा के लिए प्राप्त पार्थिव देह को विशेष प्रक्रिया के माध्यम से संरक्षित रखा जाता है, जिससे उसका उपयोग लंबे समय तक विद्यार्थियों के अध्ययन के लिए किया जा सके।
इस तरह देहदान के माध्यम से भावी चिकित्सकों को मानव शरीर की संरचना को प्रत्यक्ष रूप से समझने और उसका अध्ययन करने का अवसर मिलता है।
मृत्यु के बाद भी मानव सेवा
फूलचंद शास्त्री का देहदान सिर्फ उनकी अंतिम इच्छा की पूर्ति नहीं, बल्कि समाज के लिए एक संदेश भी है।
उनकी पार्थिव देह अब चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में भावी चिकित्सकों के अध्ययन में उपयोगी होगी।
परिजनों ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए एक ऐसी मिसाल पेश की है, जो समाज में देहदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने का काम कर सकती है।
एक ऐसा संकल्प, जिसमें जीवन के बाद भी मानव सेवा जारी रही।
    user_Mp news 24live
    Mp news 24live
    बीना, सागर, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • 90 वर्षीय फूलचंद शास्त्री का देहदान *जीवन रहते लिया था संकल्प, निधन के बाद परिजनों ने मेडिकल कॉलेज सागर को सौंपी पार्थिव देह* बीना से मानव सेवा और समाज के लिए एक ऐसी प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जो लोगों को देहदान के प्रति जागरूक करने का संदेश देती है। 90 वर्षीय फूलचंद शास्त्री ने जीवन रहते देहदान का संकल्प लिया था। उनके निधन के बाद परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए उनकी पार्थिव देह मेडिकल कॉलेज सागर को दान कर दी। लोकल न्यूज़ बीना रिपोर्ट लक्ष्मण सिंह राजपूत 90 वर्षीय फूलचंद शास्त्री का देहदान *जीवन रहते लिया था संकल्प, निधन के बाद परिजनों ने मेडिकल कॉलेज सागर को सौंपी पार्थिव देह* बीना से मानव सेवा और समाज के लिए एक ऐसी प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जो लोगों को देहदान के प्रति जागरूक करने का संदेश देती है। 90 वर्षीय फूलचंद शास्त्री ने जीवन रहते देहदान का संकल्प लिया था। उनके निधन के बाद परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए उनकी पार्थिव देह मेडिकल कॉलेज सागर को दान कर दी। खास बात यह है कि जैन परिवार में जन्मे फूलचंद जैन ने बीना में प्रारंभिक शिक्षा हासिल करने के बाद वाराणसी में संस्कृत की शिक्षा प्राप्त की और 'शास्त्री' की उपाधि हासिल की। जीवन के अंतिम पड़ाव तक समाजसेवा की भावना रखने वाले फूलचंद शास्त्री ने मृत्यु के बाद भी मानव सेवा में योगदान देने का संकल्प लिया था। अंतिम इच्छा हुई पूरी बीना निवासी 90 वर्षीय फूलचंद शास्त्री अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका शरीर मृत्यु के बाद भी मानव सेवा और चिकित्सा शिक्षा के काम आएगा। फूलचंद शास्त्री ने कुछ समय पहले ही देहदान का संकल्प लिया था। उनका मानना था कि मृत्यु के बाद भी यदि शरीर किसी के अध्ययन और मानव सेवा के काम आ सके, तो इससे बड़ा समाजसेवा का माध्यम और क्या हो सकता है। उनके निधन के बाद परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा को पूरा करते हुए पार्थिव देह मेडिकल कॉलेज सागर को सौंप दी। | जैन परिवार से 'शास्त्री' बनने तक का सफर फूलचंद शास्त्री का जीवन भी अपने आप में खास रहा। जैन परिवार में जन्मे फूलचंद की प्रारंभिक शिक्षा बीना में हुई। इसके बाद उन्होंने संस्कृत की शिक्षा के लिए वाराणसी का रुख किया। वाराणसी में संस्कृत का अध्ययन करने के बाद उन्हें 'शास्त्री' की उपाधि प्राप्त हुई और इसके बाद वे फूलचंद जैन से फूलचंद शास्त्री के नाम से पहचाने जाने लगे। उनका जीवन ज्ञान, शिक्षा और समाजसेवा की भावना से जुड़ा रहा और इसी भावना के चलते उन्होंने अपने निधन के बाद भी मानव सेवा जारी रखने का निर्णय लिया। | देहदान के बाद मेडिकल छात्रों के लिए उपयोगी होगी देह बीएमओ डॉ. संजीव अग्रवाल ने बताया कि देहदान के बाद मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थी मानव शरीर की संरचना और विभिन्न अंगों का अध्ययन करते हैं। उन्होंने बताया कि चिकित्सा शिक्षा के लिए प्राप्त पार्थिव देह को विशेष प्रक्रिया के माध्यम से संरक्षित रखा जाता है, जिससे उसका उपयोग लंबे समय तक विद्यार्थियों के अध्ययन के लिए किया जा सके। इस तरह देहदान के माध्यम से भावी चिकित्सकों को मानव शरीर की संरचना को प्रत्यक्ष रूप से समझने और उसका अध्ययन करने का अवसर मिलता है। मृत्यु के बाद भी मानव सेवा फूलचंद शास्त्री का देहदान सिर्फ उनकी अंतिम इच्छा की पूर्ति नहीं, बल्कि समाज के लिए एक संदेश भी है। उनकी पार्थिव देह अब चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में भावी चिकित्सकों के अध्ययन में उपयोगी होगी। परिजनों ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए एक ऐसी मिसाल पेश की है, जो समाज में देहदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने का काम कर सकती है। एक ऐसा संकल्प, जिसमें जीवन के बाद भी मानव सेवा जारी रही।
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    90 वर्षीय फूलचंद शास्त्री का देहदान


 *जीवन रहते लिया था संकल्प, निधन के बाद परिजनों ने मेडिकल कॉलेज सागर को सौंपी पार्थिव देह* 

बीना से मानव सेवा और समाज के लिए एक ऐसी प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जो लोगों को देहदान के प्रति जागरूक करने का संदेश देती है।

90 वर्षीय फूलचंद शास्त्री ने जीवन रहते देहदान का संकल्प लिया था। उनके निधन के बाद परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए उनकी पार्थिव देह मेडिकल कॉलेज सागर को दान कर दी।
लोकल न्यूज़ बीना 
रिपोर्ट लक्ष्मण सिंह राजपूत 
90 वर्षीय फूलचंद शास्त्री का देहदान
*जीवन रहते लिया था संकल्प, निधन के बाद परिजनों ने मेडिकल कॉलेज सागर को सौंपी पार्थिव देह* 
बीना से मानव सेवा और समाज के लिए एक ऐसी प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जो लोगों को देहदान के प्रति जागरूक करने का संदेश देती है।
90 वर्षीय फूलचंद शास्त्री ने जीवन रहते देहदान का संकल्प लिया था। उनके निधन के बाद परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए उनकी पार्थिव देह मेडिकल कॉलेज सागर को दान कर दी।
खास बात यह है कि जैन परिवार में जन्मे फूलचंद जैन ने बीना में प्रारंभिक शिक्षा हासिल करने के बाद वाराणसी में संस्कृत की शिक्षा प्राप्त की और 'शास्त्री' की उपाधि हासिल की। जीवन के अंतिम पड़ाव तक समाजसेवा की भावना रखने वाले फूलचंद शास्त्री ने मृत्यु के बाद भी मानव सेवा में योगदान देने का संकल्प लिया था।
अंतिम इच्छा हुई पूरी
बीना निवासी 90 वर्षीय फूलचंद शास्त्री अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका शरीर मृत्यु के बाद भी मानव सेवा और चिकित्सा शिक्षा के काम आएगा।
फूलचंद शास्त्री ने कुछ समय पहले ही देहदान का संकल्प लिया था। उनका मानना था कि मृत्यु के बाद भी यदि शरीर किसी के अध्ययन और मानव सेवा के काम आ सके, तो इससे बड़ा समाजसेवा का माध्यम और क्या हो सकता है।
उनके निधन के बाद परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा को पूरा करते हुए पार्थिव देह मेडिकल कॉलेज सागर को सौंप दी।
| जैन परिवार से 'शास्त्री' बनने तक का सफर
फूलचंद शास्त्री का जीवन भी अपने आप में खास रहा।
जैन परिवार में जन्मे फूलचंद की प्रारंभिक शिक्षा बीना में हुई। इसके बाद उन्होंने संस्कृत की शिक्षा के लिए वाराणसी का रुख किया।
वाराणसी में संस्कृत का अध्ययन करने के बाद उन्हें 'शास्त्री' की उपाधि प्राप्त हुई और इसके बाद वे फूलचंद जैन से फूलचंद शास्त्री के नाम से पहचाने जाने लगे।
उनका जीवन ज्ञान, शिक्षा और समाजसेवा की भावना से जुड़ा रहा और इसी भावना के चलते उन्होंने अपने निधन के बाद भी मानव सेवा जारी रखने का निर्णय लिया।
| देहदान के बाद मेडिकल छात्रों के लिए उपयोगी होगी देह
बीएमओ डॉ. संजीव अग्रवाल ने बताया कि देहदान के बाद मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थी मानव शरीर की संरचना और विभिन्न अंगों का अध्ययन करते हैं।
उन्होंने बताया कि चिकित्सा शिक्षा के लिए प्राप्त पार्थिव देह को विशेष प्रक्रिया के माध्यम से संरक्षित रखा जाता है, जिससे उसका उपयोग लंबे समय तक विद्यार्थियों के अध्ययन के लिए किया जा सके।
इस तरह देहदान के माध्यम से भावी चिकित्सकों को मानव शरीर की संरचना को प्रत्यक्ष रूप से समझने और उसका अध्ययन करने का अवसर मिलता है।
मृत्यु के बाद भी मानव सेवा
फूलचंद शास्त्री का देहदान सिर्फ उनकी अंतिम इच्छा की पूर्ति नहीं, बल्कि समाज के लिए एक संदेश भी है।
उनकी पार्थिव देह अब चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में भावी चिकित्सकों के अध्ययन में उपयोगी होगी।
परिजनों ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए एक ऐसी मिसाल पेश की है, जो समाज में देहदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने का काम कर सकती है।
एक ऐसा संकल्प, जिसमें जीवन के बाद भी मानव सेवा जारी रही।
    user_Laxman Singh Rajput
    Laxman Singh Rajput
    Local News Reporter बीना, सागर, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
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