ओमान के तट के पास स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कमर्शियल जहाजों पर हुए घातक मिसाइल हमले में एक भारतीय नाविक की मौत के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। इस घटना के बाद विदेश मंत्रालय (MEA) ने नई दिल्ली में ईरानी मिशन के उप प्रमुख मोहम्मद जवाद हुसैनी समेत अन्य राजनयिकों को तलब कर अपनी गंभीर चिंताएं दर्ज कराई हैं और उनसे इस मामले पर स्पष्टीकरण मांगा है। यह मामला तब सामने आया जब होर्मुज में ओमान के क्षेत्रीय जलक्षेत्र से गुजर रहे यूएई के झंडे वाले दो तेल टैंकरों पर IRGC ने घातक मिसाइल से हमला किया। इस हमले में चालक दल के एक भारतीय सदस्य की जान चली गई, जबकि भारतीय नागरिकों समेत छह अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। भारत सरकार ने इस जानलेवा हमले को लेकर ईरान के समक्ष कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। विदेश मंत्रालय में हुई इस बेहद महत्वपूर्ण बैठक के बाद ईरानी मिशन के उप प्रमुख मोहम्मद जवाद हुसैनी और अन्य राजनयिक बिना कोई सार्वजनिक बयान दिए वहां से रवाना हो गए। इस मुलाकात और भारत की कड़ी आपत्ति को लेकर ईरानी दूतावास की तरफ से भी अभी तक कोई आधिकारिक या सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। भारत सरकार ने यह कूटनीतिक कदम खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते गंभीर भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज में वाणिज्यिक जहाजों पर मंडराते खतरों के बीच उठाया है। वैश्विक एनर्जी पारगमन के लिए बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माने जाने वाले इस जलमार्ग में व्यापारिक जहाजों पर हो रहे इन हमलों ने भारत सहित कई देशों की चिंताएं बढ़ा दी हैं, क्योंकि इससे समुद्री व्यापार और नाविकों की सुरक्षा को सीधा खतरा पैदा हो गया है।
ओमान के तट के पास स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कमर्शियल जहाजों पर हुए घातक मिसाइल हमले में एक भारतीय नाविक की मौत के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। इस घटना के बाद विदेश मंत्रालय (MEA) ने नई दिल्ली में ईरानी मिशन के उप प्रमुख मोहम्मद जवाद हुसैनी समेत अन्य राजनयिकों को तलब कर अपनी गंभीर चिंताएं दर्ज कराई हैं और उनसे इस मामले पर स्पष्टीकरण मांगा है। यह मामला तब सामने आया जब होर्मुज में ओमान के क्षेत्रीय जलक्षेत्र से गुजर रहे यूएई के झंडे वाले दो तेल टैंकरों पर IRGC ने घातक मिसाइल से हमला किया। इस हमले में चालक दल के एक भारतीय सदस्य की जान चली गई, जबकि भारतीय नागरिकों समेत छह अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। भारत सरकार ने इस जानलेवा हमले को लेकर ईरान के समक्ष कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। विदेश मंत्रालय में हुई इस बेहद महत्वपूर्ण बैठक के बाद ईरानी मिशन के उप प्रमुख मोहम्मद जवाद हुसैनी और अन्य राजनयिक बिना कोई सार्वजनिक बयान दिए वहां से रवाना हो गए। इस मुलाकात और भारत की कड़ी आपत्ति को लेकर ईरानी दूतावास की तरफ से भी अभी तक कोई आधिकारिक या सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। भारत सरकार ने यह कूटनीतिक कदम खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते गंभीर भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज में वाणिज्यिक जहाजों पर मंडराते खतरों के बीच उठाया है। वैश्विक एनर्जी पारगमन के लिए बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माने जाने वाले इस जलमार्ग में व्यापारिक जहाजों पर हो रहे इन हमलों ने भारत सहित कई देशों की चिंताएं बढ़ा दी हैं, क्योंकि इससे समुद्री व्यापार और नाविकों की सुरक्षा को सीधा खतरा पैदा हो गया है।
- तथ्य धर्मी भारतआगरा, आगरा, उत्तर प्रदेशसच्ची पत्रकारिता का जुनून है? समाज में बदलाव और अपनी एक बड़ी पहचान बनानी है? अगर हाँ, तो 'तथ्य धर्मी भारत' न्यूज़ चैनल आपको दे रहा है एक सुनहरा मौका! हम नए और उभरते हुए यूट्यूबर्स, क्रिएटर्स और ग्राउंड रिपोर्टर्स को अपने साथ जुड़ने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं। हमारी खास शर्तें और आपके फायदे: नो सैलरी, असीमित पावर: हम आपको कोई बंधी-बंधाई सैलरी नहीं देते हैं, लेकिन हम आपको देते हैं निष्पक्ष और स्वतंत्र पत्रकारिता करने की वो आज़ादी और पावर, जिसकी समाज में एक अलग ही धमक होती है। फ्री प्रेस आई-कार्ड (Legal Approved): जॉइनिंग के बाद आपको हमारी तरफ से पूरी तरह कानूनी रूप से मान्य स्वतंत्र प्रेस आई-कार्ड (Press ID Card) बिल्कुल मुफ्त इशू किया जाएगा। इसके लिए आपसे कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा। गाड़ी के लिए आधिकारिक स्टीकर: आपको अपनी टू-व्हीलर (मोटरसाइकिल) या फोर-व्हीलर (कार) पर आधिकारिक 'PRESS' स्टीकर लगाने की पूरी अनुमति दी जाएगी, जो आपको फील्ड में एक नई और मजबूत पहचान दिलाएगा। कौन जुड़ सकता है? यदि आपके पास खुद का यूट्यूब चैनल है, आप निडर होकर जनता की आवाज़ उठाना चाहते हैं और बिना किसी दबाव के स्वतंत्र रूप से काम करना चाहते हैं, तो यह मंच सिर्फ आपके लिए है। आज ही संपर्क करें और 'तथ्य धर्मी भारत' परिवार का हिस्सा बनकर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मजबूत करें! 📞 संपर्क जानकारी व्हाट्सएप / कॉल करें: 9389831236 ईमेल: [ anoop9389831236@gmail.com ] यूट्यूब चैनल: तथ्य धर्मी भारत1 hr ago
- Thakur Ankit ShishodiaGhaziabad, Uttar Pradeshachcha Iran ke khilaf Jamir jaag gaya aur America ke khilaf kiu nhi ye rookh apnaya sala kutta Modi1 hr ago
- सरकारी स्कूलों को लेकर सामने आई नीति आयोग की एक नई रिपोर्ट ने देशभर का ध्यान खींचा है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 सालों में भारत में बड़ी संख्या में सरकारी स्कूल बंद हुए हैं और इनमें पढ़ने वाले बच्चों की संख्या में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इस अवधि के दौरान देशभर में करीब 94,000 सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं, जिसका अर्थ है कि औसतन हर दिन 25 सरकारी स्कूलों पर ताला लगा है। आंकड़ों के मुताबिक, साल 2014-15 में देश में 11.07 लाख सरकारी स्कूल थे, जो 2024-25 में घटकर 10.13 लाख रह गए। इसी दौरान सरकारी सहायता प्राप्त (Government Aided) स्कूलों की संख्या भी 83 हजार से घटकर 79 हजार हो गई है। इसके विपरीत, निजी स्कूलों की संख्या 2.88 लाख से बढ़कर 3.39 लाख पहुंच गई है। नीति आयोग के अनुसार, दो या उससे ज्यादा स्कूलों को मिलाकर एक स्कूल बना देना, घटता जन्म दर और बड़ी कक्षाओं तक छात्रों को स्कूल में बनाए रखने की चुनौतियां इस बड़े बदलाव की प्रमुख वजहें हैं। रिपोर्ट में छात्रों के नामांकन और ड्रॉपआउट को लेकर भी चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। पिछले दशक में स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की कुल संख्या में कमी आई है, जहां साल 2014-15 में कुल नामांकन 26.95 करोड़ था, वह 2024-25 में घटकर 24.69 करोड़ रह गया है। इस दौरान करीब 2.26 करोड़ छात्रों का नामांकन कम हुआ है। हालांकि, प्राथमिक स्तर (पहली से पांचवीं कक्षा) पर स्कूल छोड़ने की दर केवल 0.3 प्रतिशत है, लेकिन छठी से आठवीं में यह बढ़कर 3.5 प्रतिशत और नौवीं-दसवीं तक पहुंचते-पहुंचते 11.5 प्रतिशत हो जाती है। इसके अलावा, आठवीं से नौवीं कक्षा में जाने वाले छात्रों की दर भी 2014-15 के 91.58 प्रतिशत से घटकर 2024-25 में 86.6 प्रतिशत रह गई है। इस मामले में पुडुचेरी और केरल में यह दर जहां सबसे बेहतर 99.6 प्रतिशत दर्ज की गई है, वहीं बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, मेघालय, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में यह काफी कम रही है।1
- ओमान के तट के पास स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कमर्शियल जहाजों पर हुए घातक मिसाइल हमले में एक भारतीय नाविक की मौत के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। इस घटना के बाद विदेश मंत्रालय (MEA) ने नई दिल्ली में ईरानी मिशन के उप प्रमुख मोहम्मद जवाद हुसैनी समेत अन्य राजनयिकों को तलब कर अपनी गंभीर चिंताएं दर्ज कराई हैं और उनसे इस मामले पर स्पष्टीकरण मांगा है। यह मामला तब सामने आया जब होर्मुज में ओमान के क्षेत्रीय जलक्षेत्र से गुजर रहे यूएई के झंडे वाले दो तेल टैंकरों पर IRGC ने घातक मिसाइल से हमला किया। इस हमले में चालक दल के एक भारतीय सदस्य की जान चली गई, जबकि भारतीय नागरिकों समेत छह अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। भारत सरकार ने इस जानलेवा हमले को लेकर ईरान के समक्ष कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। विदेश मंत्रालय में हुई इस बेहद महत्वपूर्ण बैठक के बाद ईरानी मिशन के उप प्रमुख मोहम्मद जवाद हुसैनी और अन्य राजनयिक बिना कोई सार्वजनिक बयान दिए वहां से रवाना हो गए। इस मुलाकात और भारत की कड़ी आपत्ति को लेकर ईरानी दूतावास की तरफ से भी अभी तक कोई आधिकारिक या सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। भारत सरकार ने यह कूटनीतिक कदम खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते गंभीर भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज में वाणिज्यिक जहाजों पर मंडराते खतरों के बीच उठाया है। वैश्विक एनर्जी पारगमन के लिए बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माने जाने वाले इस जलमार्ग में व्यापारिक जहाजों पर हो रहे इन हमलों ने भारत सहित कई देशों की चिंताएं बढ़ा दी हैं, क्योंकि इससे समुद्री व्यापार और नाविकों की सुरक्षा को सीधा खतरा पैदा हो गया है।1
- लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के लोकार्पण कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की है कि वह जल्द ही हवा में उड़ने वाली बस लेकर आएंगे। अपने वादों पर दृढ़ता जताते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह वे पानी में उतरने वाला हवाई जहाज लेकर आए थे, ठीक उसी तरह वे जो भी वादा करेंगे, उसे पूरा करके दिखाएंगे।1
- राम मंदिर में हुए चोरी कांड को लेकर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती सरकार से काफी नाराज हैं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के लोगों को नकली हिंदू बताया है। इस मामले को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी सीधा हमला साधा है।1
- दिल्ली के बुराड़ी से आप विधायक संजीव झा के अनशन का आज 16वां दिन है। वह दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे और वहां चल रहे सीजेपी (CJP) के धरना-प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया। विधायक संजीव झा ने कहा कि न तो उनका NEET से कोई व्यक्तिगत संबंध है और न ही पेपर लीक से उन्हें कोई निजी नुकसान हुआ है, इसके बावजूद वे देश के लाखों युवाओं के भविष्य के लिए भूखे बैठे हैं। उन्होंने देश के प्रत्येक नौजवान से इस संघर्ष में उनके साथ खड़े होने की अपील की है। संजीव झा ने जोर देकर कहा कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं है, बल्कि देश के भविष्य और युवाओं के अधिकारों की लड़ाई है।1
- भारत में साल 2026 से यातायात नियमों में कई महत्वपूर्ण और बड़े बदलाव लागू किए जा रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख '5-स्ट्राइक सिस्टम' की शुरुआत है, जिसके तहत एक साल में पांच गंभीर यातायात अपराध करने पर चालक का लाइसेंस रद्द या निलंबित किया जा सकता है। इस नियम के तहत बार-बार नियम तोड़ने वालों को पकड़ने के लिए सभी उल्लंघनों को एक डेटाबेस से जोड़ा जाएगा। लाल बत्ती पार करने, तेज गति से गाड़ी चलाने, मोबाइल पर बात करने, बिना हेलमेट या सीट बेल्ट के चलने और लापरवाही से लेन बदलने जैसे अपराधों पर सख्त कार्रवाई होगी। इसके साथ ही, नियमों के उल्लंघन को पकड़ने के लिए एआई (AI) और एएनपीआर (ANPR) कैमरों का तेजी से इस्तेमाल किया जा रहा है, पीछे की सीट पर सीट बेल्ट पहनना अनिवार्य कर दिया गया है और हेलमेट के लिए बीआईएस मानकों को सख्ती से लागू किया जा रहा है। हालांकि, राहत की बात यह है कि अब अधिकारी डिजिटल ड्राइविंग दस्तावेजों को भी स्वीकार करेंगे। नए नियमों के अनुसार, यातायात जुर्माने का भुगतान करने के लिए चालकों को 45 दिनों का समय मिलेगा और इस दौरान उन पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। हालांकि, यदि निर्धारित 45 दिनों के भीतर जुर्माना नहीं भरा गया, तो वाहन पंजीकरण, बीमा नवीनीकरण और गाड़ी बेचने के समय गंभीर दिक्कतें आ सकती हैं, क्योंकि व्यक्तिगत उल्लंघन रिकॉर्ड को सीधे वाहन के डेटाबेस से लिंक किया जा रहा है। मोटर वाहन अधिनियम पर आधारित संशोधित जुर्माना सूची के तहत नियमों को तोड़ने पर भारी राशि चुकानी होगी। बिना हेलमेट और बिना सीट बेल्ट के गाड़ी चलाने पर ₹1,000 का जुर्माना तय किया गया है, जबकि बिना बीमा के गाड़ी चलाने पर ₹2,000 और ट्रिपल राइडिंग पर ₹2,000 का जुर्माना लगेगा। इसके अतिरिक्त, ओवर-स्पीडिंग के लिए ₹1,000 से ₹2,000, बिना ड्राइविंग लाइसेंस और ड्राइविंग के दौरान फोन का उपयोग करने पर ₹5,000, लाल बत्ती कूदने पर ₹1,000 से ₹5,000, तथा शराब पीकर गाड़ी चलाने और बिना पीयूसी (PUC) के वाहन चलाने पर ₹10,000 का भारी जुर्माना देना होगा।1
- सैन्य इतिहास में 13 जुलाई 2026 को एक यादगार दिन दर्ज हो गया है, जब अमेरिका ने पहली बार हमले के लिए अपने कॉरसेयर यूएसवी (Unmanned Surface Vessels) का इस्तेमाल किया। सेंटकॉम (CENTCOM) के अनुसार, 12 जुलाई को अमेरिकी सेना ने कई लक्ष्यों पर हमले किए, जिसमें तीन कॉरसेयर ड्रोन बोट्स ने ईरान के बंदर अब्बास नौसैनिक अड्डे पर हमला कर घदीर क्लास पनडुब्बी को नष्ट कर दिया। अमेरिकी इतिहास में हमले के हथियार के रूप में यूएसवी का यह पहला उपयोग है। इससे पहले जून में, एक कॉरसेयर यूएसवी ने ओमान की खाड़ी में क्रैश हुए अपाचे हेलीकॉप्टर के क्रू को बचाया था। अमेरिका दुनिया की सबसे ताकतवर नौसेना क्षमता रखता है, जिसके पास 11 एयरक्राफ्ट कैरियर, 70 से अधिक परमाणु पनडुब्बियां और 90 से अधिक डेस्ट्रॉयर व फ्रिगेट्स हैं। बहरीन में तैनात फिफ्थ फ्लीट के साथ अमेरिका ने 2026 के युद्ध में टास्क फोर्स 59 के तहत एआई और ड्रोन तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया है। सारोनिक कॉरसेयर यूएसवी जैसी ऑटोनॉमस बोट्स अब हमले, बचाव और गश्त के लिए तैयार हैं। रैंड कॉर्पोरेशन और सीएसआईएस की रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका के पास होर्मुज में लगातार 20-30 युद्धपोत और सैकड़ों ड्रोन तैनात करने की क्षमता है। दूसरी ओर, ईरान की नौसेना दो हिस्सों—नियमित नौसेना और आईआरजीसी (IRGC) नौसेना में बंटी है। आईआरजीसी एसिमेट्रिक वॉरफेयर में माहिर है और ईरान के पास 20-25 घदीर व फतेह क्लास की छोटी पनडुब्बियां, सैकड़ों स्पीड बोट्स, माइन्स और क्रूज मिसाइलें हैं, लेकिन उसके पास आधुनिक युद्धपोतों की कमी है। हालांकि ईरान ने 2026 के युद्ध में कई जहाजों पर हमले किए, लेकिन अमेरिकी हमलों में उसकी कई सुविधाएं नष्ट हो चुकी हैं। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) के 2026 के आंकड़ों के अनुसार, ईरान की नौसेना पहले से ही पुरानी है और युद्ध में और कमजोर हुई है। ऐसे में होर्मुज में सुसाइड ड्रोन बोट की इस जंग में अमेरिकी ताकत के सामने ईरान की समुद्री वॉरफेयर क्षमता काफी कमजोर दिखाई दे रही है।1