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एक गंभीर चिंता सामने आई है, जहाँ 11 हज़ार वोल्ट के बिजली के तार से किसी बड़े हादसे का खतरा बना हुआ है। इस खतरे को देखते हुए, लोगों ने संबंधित अधिकारियों से इस पर तुरंत कार्रवाई करने की माँग की थी। लेकिन, अब यह आरोप लगाया जा रहा है कि जब नागरिकों ने इस गंभीर खतरे को दूर करने के लिए कार्रवाई की माँग की, तो विभागीय अधिकारियों ने उन्हें धमकाना शुरू कर दिया। इस कथित धमकी के बाद, पीड़ित पक्ष ने न्याय और सुरक्षा की गुहार लगाते हुए सीधे ज़िलाधिकारी (DM) से संपर्क साधा है।
N.k.choudhary
एक गंभीर चिंता सामने आई है, जहाँ 11 हज़ार वोल्ट के बिजली के तार से किसी बड़े हादसे का खतरा बना हुआ है। इस खतरे को देखते हुए, लोगों ने संबंधित अधिकारियों से इस पर तुरंत कार्रवाई करने की माँग की थी। लेकिन, अब यह आरोप लगाया जा रहा है कि जब नागरिकों ने इस गंभीर खतरे को दूर करने के लिए कार्रवाई की माँग की, तो विभागीय अधिकारियों ने उन्हें धमकाना शुरू कर दिया। इस कथित धमकी के बाद, पीड़ित पक्ष ने न्याय और सुरक्षा की गुहार लगाते हुए सीधे ज़िलाधिकारी (DM) से संपर्क साधा है।
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- बिहार के बांका जिले के बेलहर प्रखंड स्थित रघुनाथपुर गाँव में प्रस्तावित परमाणु बिजली परियोजना को लेकर ग्रामीणों का आंदोलन तेज हो गया है। इसी गहमागहमी के बीच स्थानीय विधायक मनोज यादव ग्रामीणों से मिलने पहुँचे और उनकी समस्याएँ सुनीं। विधायक मनोज यादव ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि उनकी सभी माँगें जिला प्रशासन के सामने रखी जाएँगी और यदि आवश्यक हुआ तो इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाया जाएगा। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि बेलहर की जनता के साथ किसी भी कीमत पर अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और वे हर लड़ाई में जनता के साथ खड़े रहेंगे। परियोजना को लेकर ग्रामीणों की नाराजगी और विधायक के इस दौरे से इलाके में राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है।1
- मुंगेर के तारापुर प्रखंड स्थित लखनपुर गांव में रविवार को मद्य निषेध अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से क्षेत्र की जीविका दीदियों द्वारा एक जागरूकता प्रभात फेरी निकाली गई। इस फेरी में बड़ी संख्या में महिलाओं ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया, जिन्होंने हाथों में जागरूकता संबंधी तख्तियां और बैनर लेकर गांव की विभिन्न गलियों का भ्रमण किया। इस दौरान महिलाओं ने शराबबंदी के समर्थन में नारे लगाए और लोगों से नशा मुक्त समाज के निर्माण में सहयोग करने की अपील की। प्रभात फेरी में मौजूद जीविका दीदियों ने बताया कि शराब का सेवन परिवार, समाज और आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रत्येक व्यक्ति का यह दायित्व है कि वह नशा मुक्त बिहार के संकल्प को सफल बनाने में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करे। इस अभियान को ग्रामीणों का भी भरपूर समर्थन मिला, जिन्होंने महिलाओं के प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर जीविका समूह की सदस्याओं के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे।1
- बिहार में शराब तस्करी के एक नए और हैरान कर देने वाले तरीके का खुलासा हुआ है। एक विशेष खबर के अनुसार, अब शराब तस्कर टोटो या टेंपो का इस्तेमाल कर रहे हैं। बताया गया है कि बिहार में 'स्वरात होने वाले टेंपो' के जरिए शराब की तस्करी की जा रही है, जिसे देखकर लोग आश्चर्यचकित हो सकते हैं। इस तरीके को देखकर दर्शकों से इसे समझकर टिप्पणी करने का आग्रह किया गया है।1
- यह वीडियो याराना बांका टंकी से संबंधित है। इसमें बताया गया है कि शिकायत दर्ज कराए जाने के बावजूद भी संबंधित मामले में कोई सुधार नहीं हुआ है और स्थिति को सही नहीं किया गया है।1
- टेटियाबंबर प्रखंड के बनहारा पंचायत के मिल्की गांव में बजरंगबली के एक भव्य मूर्ति-मंदिर की पुनर्स्थापना की जा रही है। इस धार्मिक आयोजन को लेकर ग्रामीणों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है।1
- आशा कार्यकर्ताओं और आशा फैसिलिटेटरों की तीन सूत्री मांगों के समर्थन में जारी राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर सोमवार को भी पांच दिवसीय पल्स पोलियो अभियान पर स्पष्ट रूप से दिखा, जिससे तारापुर अनुमंडलीय अस्पताल के पोषक क्षेत्र में शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों को घर-घर जाकर पोलियो की खुराक नहीं पिलाई जा सकी। इसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में बच्चे जीवन रक्षक खुराक से वंचित रह गए, और अभियान के निर्धारित लक्ष्य पर संकट गहरा गया। जानकारी के अनुसार, आशा कार्यकर्ता और आशा फैसिलिटेटर अपनी तीन सूत्री मांगों को लेकर 27 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। रविवार से शुरू हुए पल्स पोलियो अभियान के तहत घर-घर जाकर बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने की मुख्य जिम्मेदारी आशा कार्यकर्ताओं को सौंपी गई थी, लेकिन हड़ताल के चलते उन्होंने अभियान का बहिष्कार किया, जिससे डोर-टू-डोर अभियान पूरी तरह ठप हो गया। तारापुर अनुमंडलीय अस्पताल के अस्पताल प्रबंधक मनीष कुमार प्रणय ने बताया कि इस हड़ताल का असर केवल पल्स पोलियो अभियान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएँ भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, जिसमें गर्भवती महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य निगरानी और उन्हें सुरक्षित प्रसव के लिए अस्पताल तक लाने जैसी महत्वपूर्ण सेवाएँ शामिल हैं। प्रणय ने यह भी बताया कि आशा कार्यकर्ताओं के सहयोग के अभाव में बच्चों को घर-घर जाकर पोलियो की खुराक नहीं दी जा रही है, हालांकि अस्पताल परिसर में आने वाले बच्चों को दवा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके बावजूद, डोर-टू-डोर अभियान बाधित होने के कारण निर्धारित लक्ष्य हासिल करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। इसी बीच, सोमवार को अस्पताल परिसर में आशा व आशा फैसिलिटेटर ने (गोपगुट) बैनर और पोस्टर के साथ अपनी तीन सूत्री मांगों को पूरा करने की माँग करते हुए जमकर सरकार विरोधी नारे लगाए।1
- एक गंभीर चिंता सामने आई है, जहाँ 11 हज़ार वोल्ट के बिजली के तार से किसी बड़े हादसे का खतरा बना हुआ है। इस खतरे को देखते हुए, लोगों ने संबंधित अधिकारियों से इस पर तुरंत कार्रवाई करने की माँग की थी। लेकिन, अब यह आरोप लगाया जा रहा है कि जब नागरिकों ने इस गंभीर खतरे को दूर करने के लिए कार्रवाई की माँग की, तो विभागीय अधिकारियों ने उन्हें धमकाना शुरू कर दिया। इस कथित धमकी के बाद, पीड़ित पक्ष ने न्याय और सुरक्षा की गुहार लगाते हुए सीधे ज़िलाधिकारी (DM) से संपर्क साधा है।1