आशा कार्यकर्ताओं और आशा फैसिलिटेटरों की तीन सूत्री मांगों के समर्थन में जारी राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर सोमवार को भी पांच दिवसीय पल्स पोलियो अभियान पर स्पष्ट रूप से दिखा, जिससे तारापुर अनुमंडलीय अस्पताल के पोषक क्षेत्र में शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों को घर-घर जाकर पोलियो की खुराक नहीं पिलाई जा सकी। इसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में बच्चे जीवन रक्षक खुराक से वंचित रह गए, और अभियान के निर्धारित लक्ष्य पर संकट गहरा गया। जानकारी के अनुसार, आशा कार्यकर्ता और आशा फैसिलिटेटर अपनी तीन सूत्री मांगों को लेकर 27 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। रविवार से शुरू हुए पल्स पोलियो अभियान के तहत घर-घर जाकर बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने की मुख्य जिम्मेदारी आशा कार्यकर्ताओं को सौंपी गई थी, लेकिन हड़ताल के चलते उन्होंने अभियान का बहिष्कार किया, जिससे डोर-टू-डोर अभियान पूरी तरह ठप हो गया। तारापुर अनुमंडलीय अस्पताल के अस्पताल प्रबंधक मनीष कुमार प्रणय ने बताया कि इस हड़ताल का असर केवल पल्स पोलियो अभियान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएँ भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, जिसमें गर्भवती महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य निगरानी और उन्हें सुरक्षित प्रसव के लिए अस्पताल तक लाने जैसी महत्वपूर्ण सेवाएँ शामिल हैं। प्रणय ने यह भी बताया कि आशा कार्यकर्ताओं के सहयोग के अभाव में बच्चों को घर-घर जाकर पोलियो की खुराक नहीं दी जा रही है, हालांकि अस्पताल परिसर में आने वाले बच्चों को दवा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके बावजूद, डोर-टू-डोर अभियान बाधित होने के कारण निर्धारित लक्ष्य हासिल करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। इसी बीच, सोमवार को अस्पताल परिसर में आशा व आशा फैसिलिटेटर ने (गोपगुट) बैनर और पोस्टर के साथ अपनी तीन सूत्री मांगों को पूरा करने की माँग करते हुए जमकर सरकार विरोधी नारे लगाए।
आशा कार्यकर्ताओं और आशा फैसिलिटेटरों की तीन सूत्री मांगों के समर्थन में जारी राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर सोमवार को भी पांच दिवसीय पल्स पोलियो अभियान पर स्पष्ट रूप से दिखा, जिससे तारापुर अनुमंडलीय अस्पताल के पोषक क्षेत्र में शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों को घर-घर जाकर पोलियो की खुराक नहीं पिलाई जा सकी। इसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में बच्चे जीवन रक्षक खुराक से वंचित रह गए, और अभियान के निर्धारित लक्ष्य पर संकट गहरा गया। जानकारी के अनुसार, आशा कार्यकर्ता और आशा फैसिलिटेटर अपनी तीन सूत्री मांगों को लेकर 27 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। रविवार से शुरू हुए पल्स पोलियो अभियान के तहत घर-घर जाकर बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने की मुख्य जिम्मेदारी आशा कार्यकर्ताओं को सौंपी गई थी, लेकिन हड़ताल के चलते उन्होंने अभियान का बहिष्कार किया, जिससे डोर-टू-डोर अभियान पूरी तरह ठप हो गया। तारापुर अनुमंडलीय अस्पताल के अस्पताल प्रबंधक मनीष कुमार प्रणय ने बताया कि इस हड़ताल का असर केवल पल्स पोलियो अभियान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएँ भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, जिसमें गर्भवती महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य निगरानी और उन्हें सुरक्षित प्रसव के लिए अस्पताल तक लाने जैसी महत्वपूर्ण सेवाएँ शामिल हैं। प्रणय ने यह भी बताया कि आशा कार्यकर्ताओं के सहयोग के अभाव में बच्चों को घर-घर जाकर पोलियो की खुराक नहीं दी जा रही है, हालांकि अस्पताल परिसर में आने वाले बच्चों को दवा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके बावजूद, डोर-टू-डोर अभियान बाधित होने के कारण निर्धारित लक्ष्य हासिल करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। इसी बीच, सोमवार को अस्पताल परिसर में आशा व आशा फैसिलिटेटर ने (गोपगुट) बैनर और पोस्टर के साथ अपनी तीन सूत्री मांगों को पूरा करने की माँग करते हुए जमकर सरकार विरोधी नारे लगाए।
- मुंगेर के तारापुर प्रखंड स्थित लखनपुर गांव में रविवार को मद्य निषेध अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से क्षेत्र की जीविका दीदियों द्वारा एक जागरूकता प्रभात फेरी निकाली गई। इस फेरी में बड़ी संख्या में महिलाओं ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया, जिन्होंने हाथों में जागरूकता संबंधी तख्तियां और बैनर लेकर गांव की विभिन्न गलियों का भ्रमण किया। इस दौरान महिलाओं ने शराबबंदी के समर्थन में नारे लगाए और लोगों से नशा मुक्त समाज के निर्माण में सहयोग करने की अपील की। प्रभात फेरी में मौजूद जीविका दीदियों ने बताया कि शराब का सेवन परिवार, समाज और आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रत्येक व्यक्ति का यह दायित्व है कि वह नशा मुक्त बिहार के संकल्प को सफल बनाने में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करे। इस अभियान को ग्रामीणों का भी भरपूर समर्थन मिला, जिन्होंने महिलाओं के प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर जीविका समूह की सदस्याओं के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे।1
- टेटियाबंबर प्रखंड के बनहारा पंचायत के मिल्की गांव में बजरंगबली के एक भव्य मूर्ति-मंदिर की पुनर्स्थापना की जा रही है। इस धार्मिक आयोजन को लेकर ग्रामीणों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है।1
- भागलपुर जिले के सुलतानगंज अंचल अंतर्गत करहरिया पंचायत के बड़हरा गांव में सरकारी रास्ते पर कथित अतिक्रमण का मामला फिर से सामने आया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि खेसरा संख्या 364 की सार्वजनिक सड़क पर बार-बार अतिक्रमण हटाया जाता है, लेकिन दबंग तत्व कुछ ही घंटों में उस पर दोबारा कब्जा कर लेते हैं, जिससे ग्रामीणों, खासकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को आवागमन में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। आवेदिकाओं के मुताबिक, बीते 19 मई 2026 को अंचलाधिकारी ने पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचकर रास्ते को अतिक्रमण मुक्त कराया था। हालांकि, आरोप है कि उसी शाम रास्ते पर फिर से घेराबंदी कर दी गई। इसका विरोध करने पर मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है। पीड़ित परिवार यह भी बताता है कि कई बार सरकारी अमीन द्वारा नापी किए जाने के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका है, और नापी के दौरान उनसे रुपयों की मांग की जाती है, जबकि कार्रवाई केवल एक औपचारिकता बनकर रह जाती है। पीड़ितों का कहना है कि बरसात के मौसम में रास्ता बंद होने से उनका घर लगभग चारों ओर से घिर जाता है, जिससे किसी भी आपात स्थिति में एक बड़ी घटना की आशंका बनी रहती है। परिवार ने बिहार सरकार के सहयोग शिविर पोर्टल पर कई बार शिकायत दर्ज कराने का भी आरोप लगाया है, जिसके बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। इससे प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन से इस मामले की निष्पक्ष जांच कर सरकारी भूमि को स्थायी रूप से अतिक्रमण मुक्त कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो क्षेत्र में एक बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है।1
- भागलपुर जिले के सुलतानगंज प्रखंड अंतर्गत गनगनिया पंचायत की रंग मंच कार्यशाला में जिला प्रशासन के निर्देश पर बिहार सरकार के पंचायती राज विभाग द्वारा माह के अंत में पंचायत विकास दिवस का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता मुखिया रजनी देवी ने की और इसका शुभारंभ प्रधानमंत्री की 'मन की बात' का जिक्र करते हुए ग्राम सभा के आयोजन के साथ हुआ। इस कार्यक्रम में मंच पर मुखिया रजनी देवी के साथ वार्ड प्रतिनिधि रविश यादव, पंचायत सेवक अनिल कुमार सिंह, पूर्व पंचायत समिति सदस्य रामनेपाल मंडल, सरपंच विजय कुमार दास, उपमुखिया मो शिबरत, भाजपा नेता कुमार मंगलम, कार्यपालक सहायक अमरदीप कुमार, वार्ड सदस्य धन्नजय कुमार, समाजसेवी रबिश यादव और नोडल पदाधिकारी सुजित सिन्हा उपस्थित थे। कार्यक्रम में जीविका दीदी, जीविका कर्मी, वार्ड सदस्य और गनगनिया पंचायत के ग्रामवासी भी मौजूद रहे। मुखिया प्रतिनिधि रामजी मंडल, हरिचन्द्र मंडल, ओमप्रकाश पासवान, सरिता देवी, प्रियंका देवी, माधुरी देवी और सीमा देवी सहित दर्जनों जीविका दीदी, कर्मी और ग्रामवासी भी इस अवसर पर उपस्थित थे। पंचायत विकास दिवस के अवसर पर बिहार सरकार और भारत सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इस दौरान एसटीजी (STG) के तहत समाज की महिलाओं के उत्थान पर विशेष जोर दिया गया, ताकि महिलाएं स्वरोजगार के माध्यम से आगे बढ़ सकें। साथ ही, प्रधानमंत्री आवास योजना, वृद्धा पेंशन, विकलांग पेंशन, शिक्षा, पर्यावरण और स्वास्थ्य सहित अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं के बारे में भी विस्तारपूर्वक बताया गया।4
- बिहार के खगड़िया जिले में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक परिवार ने अपनी बेटी को मृत मान लिया था। अब, उसी लड़की ने अपनी शादी का एक वीडियो भेजकर परिवार को चौंका दिया है। इस वीडियो के जरिए उसने अपने माता-पिता को संदेश दिया है कि वह अभी जिंदा है और उन्हें परेशान नहीं होना चाहिए। इस घटना के साथ यह भी खुलासा हुआ है कि लड़की का उस व्यक्ति के साथ प्रेम प्रसंग था, जिस पर उसके अपहरण का आरोप लगाया गया था।1
- यूरोप में जारी भीषण गर्मी और लू के प्रकोप के बीच, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस से सड़कों के पिघलने और डामर के बहने की चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। इन दृश्यों ने पूरे यूरोप में तापमान के बढ़ते कहर को उजागर किया है। भारत में कई लोग इन खबरों को देखकर हैरान हैं, क्योंकि उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान और बिहार जैसे भारतीय राज्यों में हर साल गर्मियों के दौरान तापमान 45°C से 48°C को पार कर जाता है। इसके बावजूद, भारत की सड़कें आमतौर पर इस तरह पिघलती हुई नहीं देखी जातीं, जिससे यूरोपीय सड़कों की वर्तमान स्थिति पर लोगों में आश्चर्य बना हुआ है।1
- आशा कार्यकर्ताओं और आशा फैसिलिटेटरों की तीन सूत्री मांगों के समर्थन में जारी राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर सोमवार को भी पांच दिवसीय पल्स पोलियो अभियान पर स्पष्ट रूप से दिखा, जिससे तारापुर अनुमंडलीय अस्पताल के पोषक क्षेत्र में शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों को घर-घर जाकर पोलियो की खुराक नहीं पिलाई जा सकी। इसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में बच्चे जीवन रक्षक खुराक से वंचित रह गए, और अभियान के निर्धारित लक्ष्य पर संकट गहरा गया। जानकारी के अनुसार, आशा कार्यकर्ता और आशा फैसिलिटेटर अपनी तीन सूत्री मांगों को लेकर 27 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। रविवार से शुरू हुए पल्स पोलियो अभियान के तहत घर-घर जाकर बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने की मुख्य जिम्मेदारी आशा कार्यकर्ताओं को सौंपी गई थी, लेकिन हड़ताल के चलते उन्होंने अभियान का बहिष्कार किया, जिससे डोर-टू-डोर अभियान पूरी तरह ठप हो गया। तारापुर अनुमंडलीय अस्पताल के अस्पताल प्रबंधक मनीष कुमार प्रणय ने बताया कि इस हड़ताल का असर केवल पल्स पोलियो अभियान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएँ भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, जिसमें गर्भवती महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य निगरानी और उन्हें सुरक्षित प्रसव के लिए अस्पताल तक लाने जैसी महत्वपूर्ण सेवाएँ शामिल हैं। प्रणय ने यह भी बताया कि आशा कार्यकर्ताओं के सहयोग के अभाव में बच्चों को घर-घर जाकर पोलियो की खुराक नहीं दी जा रही है, हालांकि अस्पताल परिसर में आने वाले बच्चों को दवा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके बावजूद, डोर-टू-डोर अभियान बाधित होने के कारण निर्धारित लक्ष्य हासिल करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। इसी बीच, सोमवार को अस्पताल परिसर में आशा व आशा फैसिलिटेटर ने (गोपगुट) बैनर और पोस्टर के साथ अपनी तीन सूत्री मांगों को पूरा करने की माँग करते हुए जमकर सरकार विरोधी नारे लगाए।1
- एक गंभीर चिंता सामने आई है, जहाँ 11 हज़ार वोल्ट के बिजली के तार से किसी बड़े हादसे का खतरा बना हुआ है। इस खतरे को देखते हुए, लोगों ने संबंधित अधिकारियों से इस पर तुरंत कार्रवाई करने की माँग की थी। लेकिन, अब यह आरोप लगाया जा रहा है कि जब नागरिकों ने इस गंभीर खतरे को दूर करने के लिए कार्रवाई की माँग की, तो विभागीय अधिकारियों ने उन्हें धमकाना शुरू कर दिया। इस कथित धमकी के बाद, पीड़ित पक्ष ने न्याय और सुरक्षा की गुहार लगाते हुए सीधे ज़िलाधिकारी (DM) से संपर्क साधा है।1