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बहुचर्चित हंसपुर घटनाक्रम पर नया अपडेट,तत्कालीन एसडीएम हत्या के आरोपी करुण डहरिया से जुड़ा मामला बहुचर्चित हंसपुर घटनाक्रम पर नया अपडेट...
Ghanshyam soni
बहुचर्चित हंसपुर घटनाक्रम पर नया अपडेट,तत्कालीन एसडीएम हत्या के आरोपी करुण डहरिया से जुड़ा मामला बहुचर्चित हंसपुर घटनाक्रम पर नया अपडेट...
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- सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट, आरोपी पुलिस हिरासत में बलरामपुर जिले के कुसमी में इंस्टाग्राम पर हिन्दू समाज के खिलाफ अभद्र टिप्पणी और गाली-गलौज करने का मामला सामने आया है। 'SK_sarfraz_80' नाम की आईडी से की गई इस पोस्ट के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया। धार्मिक भावनाएं आहत होने पर स्थानीय लोगों ने थाने का घेराव कर कड़ी कार्रवाई की मांग की। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित एक्शन लिया और आरोपी युवक को ट्रैक कर गिरफ्तार कर लिया है। सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट साझा कर शांति भंग करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। नागरिक अफवाहों पर ध्यान न दें और शांति बनाए रखें। बाइट.. विरासत कुजूर थाना प्रभारी कुसमी1
- Post by Ratan Choudhry1
- बहुचर्चित हंसपुर घटनाक्रम पर नया अपडेट...1
- बलरामपुर जिले से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहां जंगलों की सुरक्षा पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि शंकरगढ़ वन परिक्षेत्र के बेलकोना गांव में हजारों पेड़ों की कटाई कर वन भूमि पर अवैध कब्जा किया जा रहा है। इतना ही नहीं, इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। बलरामपुर जिले में इन दिनों अवैध कब्जा और जमीन हथियाने का खेल तेजी से बढ़ता जा रहा है। कहीं फर्जी पट्टे जारी हो रहे हैं, तो कहीं जंगलों को काटकर वन भूमि पर कब्जा किया जा रहा है। इसी कड़ी में एक मामला शंकरगढ़ वन परिक्षेत्र के बेलकोना गांव से सामने आया है, जहां कभी हजारों बेशकीमती पेड़ों से भरा हणहा जंगल आज उजड़ने की कगार पर पहुंच चुका है। आरोप है कि जंगल की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले ही इस पूरे खेल में शामिल हो गए। सैकड़ों से हजारों एकड़ वन भूमि की सौदेबाजी कर उसे बेच दिया गया और धीरे-धीरे उस पर कब्जा कर लिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह अवैध कटाई और कब्जा लंबे समय से चल रहा था, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने कभी गंभीरता नहीं दिखाई। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो पूरा जंगल खत्म हो जाएगा। ग्रामीणों के मुताबिक यह जंगल ही उनके जीवन का आधार है, जहां से उन्हें पानी, लकड़ी और रोज़गार मिलता है। लेकिन अब हालात ऐसे बन गए हैं कि जंगल खुद मदद की गुहार लगा रहा है। इस पूरे मामले ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर जब जंगल काटा जा रहा था तब जिम्मेदार अधिकारी कहां थे? क्या यह सब उनकी जानकारी में हो रहा था, या फिर जानबूझकर अनदेखी की गई? अब देखना यह होगा कि इस पूरे मामले में प्रशासन और वन विभाग क्या कार्रवाई करता है, और क्या उजड़ते जंगल को बचाने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे।1
- एंकर..बलरामपुर जिले से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहां जंगलों की सुरक्षा पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि शंकरगढ़ वन परिक्षेत्र के बेलकोना गांव में हजारों पेड़ों की कटाई कर वन भूमि पर अवैध कब्जा किया जा रहा है। इतना ही नहीं, इस पूरे मामले में जिम्मेदारों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। विओ. 01 बलरामपुर जिले में इन दिनों अवैध कब्जा और जमीन हथियाने का खेल तेजी से बढ़ता जा रहा है। कहीं फर्जी पट्टे जारी हो रहे हैं, तो कहीं जंगलों को काटकर वन भूमि पर कब्जा किया जा रहा है। इसी कडी मे एक मामला शंकरगढ़ वन परिक्षेत्र के बेलकोना गांव का है… जहां कभी हजारों बेशकीमती पेड़ों से भरा हणहा जंगल आज उजड़ने की कगार पर पहुंच चुका है। आरोप है कि जंगल की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले ही इस पूरे खेल में शामिल हो गए। सैकड़ों-हजारों एकड़ वन भूमि को सौदेबाजी कर बेच दिया गया… और धीरे-धीरे इस पर कब्जा कर लिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह अवैध कटाई और कब्जा लंबे समय से चल रहा था… लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने कभी गंभीरता नहीं दिखाई। विओ..02हमारा जंगल खत्म हो रहा है… पेड़ काट दिए गए हैं… अगर अभी कार्रवाई नहीं हुई तो सब बर्बाद हो जाएगा।स्थानीय लोगों में इस मामले को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि जंगल ही उनका जीवन है यहीं से उन्हें पानी, लकड़ी और रोज़गार मिलता है। लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि जंगल खुद मदद की गुहार लगा रहा है… इस पूरे मामले ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर जब जंगल काटा जा रहा था… तब जिम्मेदार कहां थे? क्या यह सब उनकी जानकारी में हो रहा था… या फिर जानबूझकर अनदेखी की ग1
- Post by Mr Dayashankar Yadav2
- हेमंत कुमार की रिपोर्ट चिनियां प्रखंड मुख्यालय में सोमवार देर रात आए बेमौसम आंधी-तूफान और झमाझम बारिश ने जमकर तबाही मचाई। इस अचानक बदले मौसम ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। खेतों में काटकर रखी गई गेहूं की फसल भीगकर खराब हो गई, वहीं पैक कर तैयार रखे गए अनाज को भी भारी नुकसान झेलना पड़ा। फसल में दोबारा नमी आ जाने से किसानों की चिंता और बढ़ गई है। तेज हवा के साथ आए तूफान ने इलाके में कई जगह पेड़ों की डालियां तोड़ दीं। इसी दौरान एक पेड़ की बड़ी डाली 4400 वोल्ट की बिजली तार पर गिर गई, जिससे पूरे प्रखंड में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। अंधेरे में डूबे इलाके में नेटवर्क सेवा भी घंटों ठप रही, जिससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालांकि, बिजली विभाग की टीम ने पूरी रात मेहनत कर मंगलवार सुबह करीब 6 बजे बिजली आपूर्ति बहाल कर दी। इसके बाद लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन किसानों के चेहरे पर अभी भी नुकसान की चिंता साफ झलक रही है।1
- बलरामपुर जिला के बिकास खंड kusmi में आक्रोश मुस्लिम समुदाय ने दिया अल्टीमेटम, आरोपी की गिरफ्तारी न होने पर कल चक्का जाम की चेतावनी बिकासखंड kusmi क्षेत्र में हाल ही में हुए विवादित मामले को लेकर मुस्लिम समुदाय में जबरदस्त उबाल है। पुलिस प्रशासन द्वारा अब तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं किए जाने से नाराज समुदाय के लोगों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। समुदाय ने प्रशासन को स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है कि यदि जल्द ही आरोपी सलाखों के पीछे नहीं हुआ, तो कल पूरे क्षेत्र में उग्र आंदोलन और चक्का जाम किया जाएगा। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, विवादित घटना के बाद से ही आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर है और खुलेआम घूम रहा है। इस स्थिति ने न केवल लोगों के गुस्से को भड़काया है, बल्कि क्षेत्र में भय का माहौल भी पैदा कर दिया है। समुदाय के प्रतिनिधियों का आरोप है कि बार-बार शिकायत और साक्ष्य सौंपने के बावजूद pulis और स्थानीय प्रशासन मौन साधे हुए है। मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों ने आज एक बैठक कर रणनीति तैयार की। बैठक के बाद उन्होंने कड़े शब्दों में कहा हमने हमेशा शांति और कानून का सम्मान किया है, लेकिन हमारी सहनशीलता को कमजोरी न समझा जाए। यदि प्रशासन समय रहते कार्रवाई नहीं करता है, तो हम सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। कल होने वाले चक्का जाम और विरोध प्रदर्शन की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। फिलहाल क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं कि आखिर क्यों अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन की ढिलाई मामले को और अधिक तूल दे सकती है।1