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जौनपुर जिले की केराकत तहसील के छितौना गांव में प्रशासन ने कोर्ट के स्टे ऑर्डर के बावजूद भूमिधरी जमीन पर बनाए गए एक कथित अवैध खड़ंजे को बुलडोजर से हटा दिया। नायब तहसीलदार की मौजूदगी में हुई इस कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा, जिसने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया।
Lokwani Times
जौनपुर जिले की केराकत तहसील के छितौना गांव में प्रशासन ने कोर्ट के स्टे ऑर्डर के बावजूद भूमिधरी जमीन पर बनाए गए एक कथित अवैध खड़ंजे को बुलडोजर से हटा दिया। नायब तहसीलदार की मौजूदगी में हुई इस कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा, जिसने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया।
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- जौनपुर जिले की केराकत तहसील के छितौना गांव में प्रशासन ने कोर्ट के स्टे ऑर्डर के बावजूद भूमिधरी जमीन पर बनाए गए एक कथित अवैध खड़ंजे को बुलडोजर से हटा दिया। नायब तहसीलदार की मौजूदगी में हुई इस कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा, जिसने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया।1
- वाराणसी परिक्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक वैभव कृष्ण के निर्देशानुसार, जौनपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री कुँवर अनुपम सिंह के कुशल निर्देशन में जनपद जौनपुर में 'ऑपरेशन वज्रपात' नामक एक विशेष पाँच दिवसीय अभियान चलाया गया। दिनांक 01.06.2026 से 05.06.2026 तक संचालित इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर सक्रिय आपराधिक गैंगों, अराजक तत्वों और कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना था। अभियान के दौरान, पुलिस ने जनपद में सक्रिय गैंग लीडरों और उनके सदस्यों की पहचान कर उनकी गतिविधियों का गहन सत्यापन किया। आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्तियों, गैंगों और उनके समूहों की सोशल मीडिया पर निरंतर निगरानी की गई, जिसके आधार पर निरोधात्मक और विधिक कार्रवाइयाँ की गईं। खासकर मारपीट, धमकी, अवैध गैंग संचालन, शांति व्यवस्था भंग करने तथा सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाले तत्वों पर विशेष नज़र रखी गई। इस पहल से जनपद में कानून-व्यवस्था को मज़बूत करने, अपराधियों में कानून का भय स्थापित करने और आमजन में सुरक्षा एवं विश्वास की भावना को सशक्त करने का कार्य किया गया। ऑपरेशन वज्रपात के तहत जौनपुर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाईयों के परिणामस्वरूप, कुल 56 गैंग और उनके 423 गैंग लीडर व सदस्य चिन्हित किए गए। अभियान के दौरान कुल 10 अभियोग पंजीकृत हुए और 8 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया। इसके अतिरिक्त, 44 अभियुक्तों के विरुद्ध गुण्डा एक्ट, 126 अभियुक्तों के विरुद्ध 110 जी, 6 अभियुक्तों के विरुद्ध गैंग्स्टर एक्ट और 90 अभियुक्तों के विरुद्ध निरोधात्मक पाबन्दी की कार्यवाही की गई है। पुलिस के अनुसार, ये आपराधिक गैंग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रील, फोटो और वीडियो अपलोड कर अपना प्रभाव व भय प्रदर्शित करते हैं। वे अवैध असलहों व हथियारों का प्रदर्शन कर आमजन में दहशत फैलाते हैं और भय व आतंक का वातावरण बनाकर गुंडागर्दी व दबंगई जैसी गतिविधियों में संलिप्त रहते हैं। ये समूह बनाकर संगठित गैंग के रूप में कार्य करते हैं और मारपीट, धमकी जैसी गैर-कानूनी गतिविधियों से कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने का प्रयास करते हैं, साथ ही अपराध संबंधी वीडियो और संदेश प्रसारित कर युवाओं को असामाजिक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करते हैं। जनपद में चिन्हित प्रमुख गैंगों में महाकाल गैंग, अविरल गैंग, कर्रा गैंग, सूटर गैंग 505, कट्टा गैंग-606, टीम दादा मुफ्तीगंज 9696 गैंग, शक्तिमान गैंग, यदुवंशी गैंग, शिवा-94 गैंग, पंकज किंग-8558 गैंग, राउडी-001 गैंग, मेढ़ा गैंग, आशु यादव राइडर गैंग, जानसन गैंग और सावन गैंग शामिल हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि 'ऑपरेशन वज्रपात' के अंतर्गत ऐसी कार्रवाइयाँ भविष्य में भी निरंतर जारी रहेंगी। सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर सक्रिय नए आपराधिक गैंगों, अराजक तत्वों और उनकी गतिविधियों पर सतर्क एवं प्रभावी निगरानी रखी जाएगी, और चिन्हित किए जाने वाले गैंग लीडरों व सदस्यों के विरुद्ध नियमानुसार निरोधात्मक एवं विधिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। इस अभियान का निरंतर अमल जनपद में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने, अपराध पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने तथा आमजन में सुरक्षा की भावना को और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से किया जाएगा।1
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- एक व्यक्ति ने अपने भतीजे के तिलक समारोह में अपनी पत्नी के साथ नृत्य किया। उन्होंने लोगों से अपील की है कि यदि उन्हें यह नृत्य पसंद आए तो वे इसे ज़रूर शेयर करें।1
- पट्टी कोतवाली क्षेत्र के बेला गांव निवासी प्रेमा देवी ने रविवार को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। उनके अनुसार, उनके पड़ोसी जबरदस्ती उनकी आबादी की भूमि पर शौचालय का निर्माण कर रहे थे, जिस पर उनका बराबर कब्जा दखल चला आ रहा है। जब प्रेमा देवी ने इसका विरोध किया, तो आरोपितों ने उन्हें गाली-गलौज करते हुए मारपीट कर घायल कर दिया। इस मामले में पट्टी पुलिस ने जांच-पड़ताल शुरू कर दी है। कोतवाली पट्टी के एसआई अतर सिंह ने बताया है कि उन्हें इस संबंध में एक प्रार्थना पत्र प्राप्त हुआ है और मामले की जांच कराकर आगे की कार्यवाही की जाएगी।1
- प्रतापगढ़ में एक निजी अस्पताल के कथित 'कारनामे' का मामला सामने आया है, जहाँ डिलीवरी के बाद एक नवजात बच्चे की मौत हो गई। बच्चे की मौत से आक्रोशित परिजनों ने जब इसका विरोध किया, तो अस्पताल कर्मियों पर उनके साथ मारपीट और धक्का-मुक्की करने का आरोप लगा है। नगर पंचायत गड़वारा निवासी नीरज गुप्ता ने अपनी पत्नी को डिलीवरी के लिए कल देर शाम राजापाल चौराहे के पास स्थित हिंद नर्सिंग होम में भर्ती कराया था। आज सुबह डिलीवरी होने के बाद बच्चे की मौत हो गई। नवजात की मौत के बाद अस्पताल में परिजनों ने जमकर हंगामा किया और इसकी सूचना पुलिस को दी। परिजनों का आरोप है कि पुलिस के सामने भी अस्पताल कर्मियों ने उनके साथ धक्का-मुक्की की और मारपीट की। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँच गई है और मामले की जाँच में जुट गई है।1
- उत्तर प्रदेश के मुगरा बादशाहपुर में थाना प्रभारी अश्वनी दुबे द्वारा की गई एक सख्त कार्रवाई से देखने वाले लोग हैरान रह गए। अश्वनी दुबे ने बीच चौराहे पर डुगडुगी बजवाकर एक नोटिस चस्पा किया, और योगी सरकार का यह कड़क एक्शन सोशल मीडिया पर खूब तहलका मचा रहा है। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यूपी में अपराधियों को अब किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।1
- प्रतापगढ़ में राजपाल चौराहे से लगभग 200 मीटर आगे, मदरसे गुलशन-ए-मदीना के भीतर एक संकरी गली में स्थित हिंद नर्सिंग होम में प्रसव के दौरान एक नवजात शिशु की दुखद मौत हो गई। इस हृदय विदारक घटना के बाद, जब परिजनों ने अपनी आपत्ति व्यक्त की, तो आरोप है कि अस्पताल के गुंडों द्वारा उनके साथ मारपीट की गई। इस गंभीर घटना ने जिले की पूरी मेडिकल व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे यह प्रश्न उठता है कि ऐसे नर्सिंग होम को आखिर कौन लाइसेंस जारी करता है, या क्या सब कुछ केवल 'सिस्टम के हवाले' छोड़ दिया गया है। इस अस्पताल की कार्यप्रणाली जिले में 'मेडिकल माफियाओं के आतंक' की स्थिति को स्पष्ट रूप से उजागर करती है, जहाँ न तो कोई उचित व्यवस्था है और न ही प्रशिक्षित कर्मचारी। यह केवल चार बेड और एक रक्तचाप मापने की मशीन लगाकर चलाए जा रहे एक नर्सिंग होम जैसा प्रतीत होता है। परिणामस्वरूप, जहाँ मरीज अपनी जान गँवा रहे हैं और उनके परिजन लूटे जा रहे हैं, वहीं इस पूरी अव्यवस्था और अन्याय पर संबंधित व्यवस्था पूरी तरह से खामोश है।1