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गणगौर पर्व पर महिलाओं और युवतियों ने किया पूजनःगणगौर की बाड़ी में सुबह से भीड़; पारंपरिक वेशभूषा में भक्ति में डूबे श्रद्धालु, घर में शांति बनाए रखने की कामना की
Lucky Gole (Aditya)
गणगौर पर्व पर महिलाओं और युवतियों ने किया पूजनःगणगौर की बाड़ी में सुबह से भीड़; पारंपरिक वेशभूषा में भक्ति में डूबे श्रद्धालु, घर में शांति बनाए रखने की कामना की
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- पारंपरिक वेशभूषा में भक्ति में डूबे श्रद्धालु, घर में शांति बनाए रखने की कामना की1
- बड़वानी। शनिवार को निमाड़ के प्रसिद्ध लोकपर्व गणगौर का शुभारंभ हुआ। शुक्ल पक्ष की तीज पर माता की बाड़ी खुलते ही सुबह 5 बजे से श्रद्धालु पूजन-अर्चन के लिए जुटने लगे। हजारों लोगों ने बाड़ी स्थल पर पूजा कर जवारे लिए और रणुबाई व धनीयर राजा के रथ सिर पर रखकर घर ले गए। घरों में रथ स्थापित कर माता की सेवा और भजन-कीर्तन किए जाएंगे। रविवार को माता को झमलिया गार्डन ले जाकर पानी पिलाया जाएगा, जबकि मंगलवार को विदाई होगी। शहर के विभिन्न स्थानों पर दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ रही और पूरे निमाड़ में पर्व उत्साह के साथ मनाया जा रहा है।1
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- Post by NIMAD DASTAK NEWS1
- पानसेमल। चैत्र नवरात्र के साथ ही निमाड़ अंचलों सहित अन्य स्थानो पर गणगौर माताजी की स्थापना एवं पूजन शुरू हो जाता है ।महिलाओं द्वारा घरों की साफ सफाई एवं आवश्यक तैयारिया की जाती हैं।शनिवार तीज तिथि पर नगर के श्रीराम मंदिर में गणगौर पर्व पर माताजी की बाड़ी सुबह दर्शन एवं पूजन हेतु खोली गई। भिकनगांव के पुजारी हेमंत तारे एवं उनकी माताजी द्वारा बाड़ी का पूजन किया जा रहा है।पानसेमल खेतिया सहित जिले के विभिन्न स्थानों से आए श्रद्धालुओं ने सहपरिवार कुशल कामना के साथ पूजा अर्चना की।चैत्र नवरात्र में परिवारों द्वारा विधिविधान से माताजी की स्थापना कर पूजन किया जाता है। श्रीराम मंदिर पर महिलाओं द्वारा भक्ति भाव एवं उल्लास के साथ गणगौर गीत एवं झालरिए गाए जा रहे है।निमाड़ी समाज गणगौर उत्सव समिति सदस्यों ने बताया कि इस वर्ष 8 से 10 परिवारों में माताजी के रथ बनाए गए हैं,तीज तिथि पर बाड़ी खुलने के बाद रथों को मंदिर परिसर में लाया जाता है जहां माताजी के दर्शन कर उन्हें ढोल बाजे के साथ घर पर लाया जाता है।रविवार को श्यामलाल उपाध्याय के परिवार में माताजी के रथ विश्राम करेंगे जिसके बाद माताजी का विसर्जन गणगौर घाट पर किया जाता है।उत्सव के दौरान पुलिस थाना प्रभारी मंशाराम वगेन एवं नगर परिषद अधिकारी कर्मचारियों का विशेष सहयोग रहता है।1
- *निवाली के नवनिर्मित मां दुर्गा मंदिर में पहला नवरात्रि उत्सव: दिव्य श्रृंगार और यज्ञ से भक्तिमय हुआ वातावरण* *जीर्णोद्धारित भव्य मंदिर में ध्वजारोहण; महिला मंडल के झालरिया गीतों से गूंजी गलियां; गायत्री मंदिर में नवचंडी महायज्ञ प्रारंभ* निवाली: 20 मार्च शुक्रवार (स्वतंत्र पत्रकार सुनील सोनी)चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व पर नगर में भक्ति का अनूठा उत्साह देखने को मिल रहा है। इस वर्ष की चैत्र नवरात्रि नगरवासियों के लिए विशेष हर्षोल्लास लेकर आई है क्योंकि नगर के गुमडीया रोड़ स्थित एकमात्र मां दुर्गा के नवनिर्मित मंदिर में यह पहला नवरात्रि उत्सव मनाया जा रहा है। भीमसिंह पिपलोदे परिवार द्वारा जिर्णोद्धारीत इस भव्य मंदिर में नवरात्रि के पहले ही दिन से भक्तों का तांता लगा हुआ है। उत्सव की भव्यता और श्रृंगार नवरात्रि के प्रथम दिन, मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया और धोया गया। मंदिर के ऊंचे गुंबद पर नई ध्वजा फहराई गई, जो दूर से ही भक्तों को आकर्षित कर रही थी। मंदिर के सेवक इंजीनियर जीतेन्द्र पिपलोदे और विष्णु पिपलोदे ने बताया कि नवरात्रि के विशेष अवसर पर माता का अभिषेक, अद्भुत श्रृंगार और पूजा-अर्चना की जा रही है। उन्होंने कहा, "माता का श्रृंगार हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी अत्यंत आकर्षक रूप से किया गया है और नवरात्रि के नौ दिनों तक विशेष श्रृंगार जारी रहेगा।" भक्तों के अनुसार, मां दुर्गा का यह दिव्य रूप अत्यंत अलौकिक है। *धार्मिक अनुष्ठान और महाआरती* नवरात्रि के पहले दिन से ही मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान प्रारंभ हो गए हैं। प्रतिदिन प्रातः और सांयकाल महाआरती का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें महिला, पुरुष और बच्चे सपरिवार बड़ी संख्या में सम्मिलित होकर माता का आशीर्वाद ले रहे हैं। महाआरती में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता है, जहां भक्त ढोल-मजीरों के साथ माता का गुणगान कर रहे हैं। इस आयोजन की खास बात यह है कि मुख्य यजमान और प्रसादी की व्यवस्था श्रद्धालु स्वयं आगे आकर कर रहे हैं, जो उनकी अटूट आस्था को दर्शाता है। *सांस्कृतिक संध्या और झालरिया गीत* शाम के समय, मंदिर परिसर में सांस्कृतिक गतिविधियां भी जोर-शोर से चल रही हैं। महिला मंडल द्वारा गणगौर माता के झालरिया गीत और भजन गाए जा रहे हैं। इन पारंपरिक गीतों की स्वर लहरियां पूरे वातावरण को भक्तिमय बना रही हैं। महिलाओं द्वारा गाए गए ये गीत नगरवासियों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। नगर के अन्य मंदिरों में भी नवरात्रि को लेकर विशेष साज-सज्जा की गई है। नगरवासी भक्ति भाव से ओत-प्रोत हैं और मां दुर्गा के चरणों में शीश नवाकर सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं। *हवन और आहुतियां* गायत्री मंदिर में भी नवरात्रि का उत्साह चरम पर है। यहां चैत्र नवरात्रि के पहले दिन, गुरुवार को विधिविधान से नवचंडी महायज्ञ का शुभारंभ हुआ। यह महायज्ञ पिछले 43 वर्षों से लगातार आयोजित किया जा रहा है, जिसकी शुरुआत 1984 में स्वर्गीय पं. पंढरीनाथज गुप्ता द्वारा की गई थी। इस परंपरा को आज भी भक्तों द्वारा पूरी श्रद्धा और निष्ठा से निभाया जा रहा है। महायज्ञ में प्रतिदिन प्रातः 9 बजे से 11 बजे तक हवन किया जा रहा है, जिसमें यजमान के रूप में त्रिलोक सोनी आहुतियां डलवा कर हवन संपंन्न करवा रहे हैं । समिति के प्रमोद यादव व दिनेश वाणी ने बताया कि महायज्ञ के लिए हवन सामग्री, प्रसादी और पूजा-अर्चना की सभी व्यवस्थाएं यजमानों द्वारा ही की जाती हैं। यह हवन नगर के श्रीराम मंदिर परिसर में आयोजित किया जा रहा है। *माता की बाड़ी और गणगौर पर्व* नगर में गणगौर पर्व को लेकर भी विशेष उत्साह है। महिलाओं द्वारा गणगौर माता के झालरिया गीत गली-कूचों में गूंज रहे हैं। 21 मार्च को कल शनिवार को गणगौर माता की बाड़ी खुलेगी। मंदिर चौक स्थित पंडित परिवार के घर में माता की बाड़ी लगाई गई है। नगरवासी वहां गणगौर माता के स्वरूप जवारों के दर्शन कर पूजन करेंगे। जवारों को रथ में गाजे-बाजे के साथ सजाकर घर ले जाया जाएगा। इस अवसर पर नगर में पानी व बिजली व अन्य समुचित व्यवस्था नगर परीषद व्दारा की गई है। गायत्री यज्ञ मे महिला मंडल उषा वाणी, दिनेश वाणी, चंदू वाणी, प्रमोद यादव और विनोद वर्मा सहित अन्य सदस्य इस आयोजन को सफल बनाने में जुटे हुए हैं। निवाली में चैत्र नवरात्रि और गणगौर पर्व का यह संगम नगरवासियों के लिए भक्ति और उल्लास का संदेश लेकर आया है। मां दुर्गा का आकर्षक श्रृंगार और गायत्री मंदिर का महायज्ञ इस उत्सव को और भी दिव्य बना रहे हैं। नगरवासियों की अटूट आस्था और उत्साह देखते ही बनता है।4
- राजपुर। नगर में पारंपरिक उत्साह, श्रद्धा और सांस्कृतिक रंगों के साथ गणगौर पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस पावन अवसर पर महिलाओं और युवतियों ने सोलह श्रृंगार कर माता गौरी एवं भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और अपने परिवार की सुख-समृद्धि तथा अखंड सौभाग्य की कामना की। नगर के विभिन्न क्षेत्रों से गणगौर की भव्य और आकर्षक झांकियां निकाली गईं, जिनमें ईसर-गौरी की सुसज्जित प्रतिमाएं श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहीं। ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक लोकगीतों की गूंज के बीच महिलाएं नृत्य करती नजर आईं, जिससे पूरे नगर में उत्सव जैसा माहौल बन गया। यह भव्य जुलूस नगर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरा, जहां श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुष्प वर्षा के साथ स्वागत किया। जगह-जगह नागरिकों द्वारा पेयजल और प्रसाद की व्यवस्थाएं भी की गईं, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। पर्व के समापन अवसर पर महिलाओं ने विधिवत पूजा कर अपने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना की। पूरे आयोजन के दौरान राजपुर नगर भक्ति, आस्था और उल्लास के रंग में रंगा नजर आया।1
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