केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का संसद में सांसद राजकुमार रोत पर टिप्पणी का मामला गरमाया बीएपी ने जिला कलेक्ट्रेट पर किया प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन संवाददाता - संतोष व्यास डूंगरपुर। संसद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा बांसवाड़ा-डूंगरपुर सांसद राजकुमार रोत के प्रति की गई टिप्पणी के विरोध में आदिवासी समुदाय में भारी आक्रोश व्याप्त है। इस संबंध में भारत आदिवासी पार्टी द्वारा जिला कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित कर गृह मंत्री से सार्वजनिक स्पष्टीकरण और बयान को संसदीय रिकॉर्ड से हटाने की मांग की है। सोमवार को बड़ी संख्या में भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता जिला मुख्यालय पर कलेक्ट्रेट गेट के बाहर एकत्रित हुए, जहां केंद्रीय गृहमंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके बाद राष्ट्रपति के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौपा।ज्ञापन में बताया गया कि 30 मार्च 2026 को संसद में वामपंथी उग्रवाद पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री ने सांसद राजकुमार रोत को संबोधित करते हुए कहा कि आप चुनाव लड़कर यहां बैठे हैं, नहीं तो आप भी सरेंडर की लिस्ट में होते। बीएपी नेताओं का आरोप है कि यह टिप्पणी न केवल एक जनप्रतिनिधि की गरिमा के विरुद्ध है, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से पूरे आदिवासी समाज को नक्सलवाद से जोड़कर अपमानित करने का प्रयास है। उल्लेखनीय है कि सांसद राजकुमार रोत ने सदन में जल-जंगल-जमीन के संघर्ष, पांचवीं व छठी अनुसूची के क्रियान्वयन और पेसा कानून जैसे मुद्दों पर आदिवासियों का पक्ष रखा था। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि हक की आवाज उठाने वालों पर नक्सलवाद का ठप्पा लगाना दुर्भाग्यपूर्ण है। ज्ञापन के जरिए मांग की गई है कि भविष्य में किसी भी जनप्रतिनिधि या समुदाय के प्रति ऐसी अमर्यादित टिप्पणियों को रोकने के लिए ठोस दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। इस दौरान जयंतीलाल खराड़ी, सुरेश कटारा, अरविंद रोत सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का संसद में सांसद राजकुमार रोत पर टिप्पणी का मामला गरमाया बीएपी ने जिला कलेक्ट्रेट पर किया प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन संवाददाता - संतोष व्यास डूंगरपुर। संसद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा बांसवाड़ा-डूंगरपुर सांसद राजकुमार रोत के प्रति की गई टिप्पणी के विरोध में आदिवासी समुदाय में भारी आक्रोश व्याप्त है। इस संबंध में भारत आदिवासी पार्टी द्वारा जिला कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित कर गृह
मंत्री से सार्वजनिक स्पष्टीकरण और बयान को संसदीय रिकॉर्ड से हटाने की मांग की है। सोमवार को बड़ी संख्या में भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता जिला मुख्यालय पर कलेक्ट्रेट गेट के बाहर एकत्रित हुए, जहां केंद्रीय गृहमंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके बाद राष्ट्रपति के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौपा।ज्ञापन में बताया गया कि 30 मार्च 2026 को संसद में वामपंथी उग्रवाद पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री ने सांसद
राजकुमार रोत को संबोधित करते हुए कहा कि आप चुनाव लड़कर यहां बैठे हैं, नहीं तो आप भी सरेंडर की लिस्ट में होते। बीएपी नेताओं का आरोप है कि यह टिप्पणी न केवल एक जनप्रतिनिधि की गरिमा के विरुद्ध है, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से पूरे आदिवासी समाज को नक्सलवाद से जोड़कर अपमानित करने का प्रयास है। उल्लेखनीय है कि सांसद राजकुमार रोत ने सदन में जल-जंगल-जमीन के संघर्ष, पांचवीं व छठी अनुसूची के क्रियान्वयन और
पेसा कानून जैसे मुद्दों पर आदिवासियों का पक्ष रखा था। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि हक की आवाज उठाने वालों पर नक्सलवाद का ठप्पा लगाना दुर्भाग्यपूर्ण है। ज्ञापन के जरिए मांग की गई है कि भविष्य में किसी भी जनप्रतिनिधि या समुदाय के प्रति ऐसी अमर्यादित टिप्पणियों को रोकने के लिए ठोस दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। इस दौरान जयंतीलाल खराड़ी, सुरेश कटारा, अरविंद रोत सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
- बीएपी ने जिला कलेक्ट्रेट पर किया प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन संवाददाता - संतोष व्यास डूंगरपुर। संसद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा बांसवाड़ा-डूंगरपुर सांसद राजकुमार रोत के प्रति की गई टिप्पणी के विरोध में आदिवासी समुदाय में भारी आक्रोश व्याप्त है। इस संबंध में भारत आदिवासी पार्टी द्वारा जिला कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित कर गृह मंत्री से सार्वजनिक स्पष्टीकरण और बयान को संसदीय रिकॉर्ड से हटाने की मांग की है। सोमवार को बड़ी संख्या में भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता जिला मुख्यालय पर कलेक्ट्रेट गेट के बाहर एकत्रित हुए, जहां केंद्रीय गृहमंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके बाद राष्ट्रपति के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौपा।ज्ञापन में बताया गया कि 30 मार्च 2026 को संसद में वामपंथी उग्रवाद पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री ने सांसद राजकुमार रोत को संबोधित करते हुए कहा कि आप चुनाव लड़कर यहां बैठे हैं, नहीं तो आप भी सरेंडर की लिस्ट में होते। बीएपी नेताओं का आरोप है कि यह टिप्पणी न केवल एक जनप्रतिनिधि की गरिमा के विरुद्ध है, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से पूरे आदिवासी समाज को नक्सलवाद से जोड़कर अपमानित करने का प्रयास है। उल्लेखनीय है कि सांसद राजकुमार रोत ने सदन में जल-जंगल-जमीन के संघर्ष, पांचवीं व छठी अनुसूची के क्रियान्वयन और पेसा कानून जैसे मुद्दों पर आदिवासियों का पक्ष रखा था। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि हक की आवाज उठाने वालों पर नक्सलवाद का ठप्पा लगाना दुर्भाग्यपूर्ण है। ज्ञापन के जरिए मांग की गई है कि भविष्य में किसी भी जनप्रतिनिधि या समुदाय के प्रति ऐसी अमर्यादित टिप्पणियों को रोकने के लिए ठोस दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। इस दौरान जयंतीलाल खराड़ी, सुरेश कटारा, अरविंद रोत सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।4
- Post by Dhruv Banjara1
- कांग्रेस पार्टी के महासचिव क्रिकेट बोर्ड के ष क्षण अध्यक्ष भू माफिया अमीन पठान के भाई के लड़के से करोड़ों रुपए कजमीन को कोड़ाशनझ दे देके आयुक्त के निर्देशन में मिट्टी में मिला दिया1
- धम्बोला के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में विद्यार्थियों को कानून और सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी देने के लिए विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान एसीजेएम कोर्ट सागवाड़ा के जज हारिश मेनारिया ने छात्र-छात्राओं को साइबर क्राइम, ऑनलाइन फ्रॉड और अन्य सामाजिक मुद्दों पर जागरूक किया। धम्बोला स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एसीजेएम कोर्ट के जज एवं सीमलवाड़ा तालुका अध्यक्ष हारिश मेनारिया ने विद्यार्थियों को वर्तमान समय में बढ़ते साइबर अपराधों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया, अनजान लिंक, फर्जी कॉल और मैसेज के माध्यम से होने वाले बैंकिंग फ्रॉड से बचने के लिए सतर्क रहना बेहद जरूरी है। उन्होंने अश्लील वीडियो और ऑनलाइन गेमिंग के दुष्प्रभावों पर भी प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को इनसे दूर रहने की सलाह दी। साथ ही शिक्षा के महत्व को समझाते हुए कहा कि जागरूक और शिक्षित व्यक्ति ही अपने अधिकारों की रक्षा कर सकता है। बाल मजदूरी जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दे पर भी चर्चा करते हुए इसे रोकने के लिए सभी को जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को चाइल्ड हेल्पलाइन की जानकारी भी दी गई, ताकि किसी भी प्रकार की समस्या या शोषण की स्थिति में वे तुरंत सहायता प्राप्त कर सकें। विद्यार्थियों ने भी कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपने सवाल पूछे, जिनका समाधान सरल भाषा में किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य सुनिल पण्ड्या, उपाचार्य अजीतपाल सिंह, संचालक विद्या पण्ड्या सहित समस्त स्टाफ मौजूद रहा। वहीं न्यायिक कर्मचारी रमणलाल डामोर, पंकज कुमार, कोर्ट मुंशी कमला शंकर एवं पीएलवी रमेशचन्द्र, सुरेशचन्द्र, हरिशचन्द्र भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। कुल मिलाकर यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए बेहद उपयोगी साबित हुआ, जहां उन्हें कानूनी जानकारी के साथ-साथ सुरक्षित और जागरूक रहने का संदेश भी मिला।1
- 1.40 करोड़ की फिरौती मांगने वाला शिक्षक गिरफ्तार बांसवाड़ा पुलिस ने शहर के दो व्यापारियों से 1 करोड़ 40 लाख रुपये की फिरौती मांगने वाले आरोपी को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस अधीक्षक सुधीर जोशी के निर्देशन में हुई इस कार्रवाई में आरोपी की पहचान विकेश कुमार कमोल निवासी कुशलगढ़ के रूप में हुई, जो राजकीय विद्यालय में गणित का द्वितीय श्रेणी शिक्षक है। 30 मार्च को आरोपी ने खुद को बड़ा गैंगस्टर बताते हुए दो व्यापारियों को धमकी भरे पत्र भेजे और 90 लाख व 50 लाख रुपये की मांग की। पैसे नहीं देने पर परिवार और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी गई थी। पुलिस ने करीब 300 सीसीटीवी कैमरों की जांच, साइबर तकनीक और स्थानीय पड़ताल के जरिए आरोपी तक पहुंच बनाई। पूछताछ में सामने आया कि ऑनलाइन गेमिंग में भारी नुकसान और कर्ज के दबाव में आकर उसने यह साजिश रची थी। फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी है।1
- Post by Bherulal meena Meena1
- मंगलवार चार बजे सायं बारिश हुई जिससे पशुओं के बाड़े में घास भिग जिससे किसानों को चिंता बढने लगी कि पशुओं चारे के1
- संवाददाता - संतोष व्यास डूंगरपुर/नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली स्थित संसद मार्ग के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक भव्य समारोह में सागवाड़ा के विधायक शंकर डेचा को प्रतिष्ठित सेलिब्रेशन ऑफ डेमोक्रेसी राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा गया है। यह सम्मान उन्हें आदिवासी अंचल में निरंतर विकास कार्यों, समाज सेवा के क्षेत्र में उनके निस्वार्थ योगदान और दुर्घटना पीड़ितों के परिजनों को मुआवजा दिलाने में उनके विशेष सहयोग के लिए एम्स द्वारा प्रदान किया गया। समारोह में पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. सत्यपाल सिंह, आईसीसीआर की पत्रिका गगनांचल के संपादक रवि शंकर, सभ्यता अध्ययन केंद्र के सह-निदेशक डॉ. विवेक भटनागर, एम्स के चेयरमैन गुरुप्रसाद हुण्डेकर एवं समाजसेवी दीपिका रेड्डी जैसे गणमान्य अतिथियों ने डेचा को यह सम्मान भेंट किया। विधायक डेचा ने इस उपलब्धि पर आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उनके अकेले का नहीं, बल्कि संपूर्ण वागड़ क्षेत्र और उनके सहयोगियों का है, जो उन्हें राष्ट्र सेवा के प्रति और अधिक समर्पित होकर कार्य करने की प्रेरणा देगा। समारोह में देशभर से विभिन्न क्षेत्रों की 33 विशिष्ट हस्तियों को सम्मानित किया गया। उल्लेखनीय है कि पूरे राजस्थान से केवल तीन व्यक्तियों का चयन इस सम्मान के लिए हुआ। शंकर डेचा के साथ ही भीलवाड़ा सांसद दामोदर अग्रवाल को सेलिब्रेशन ऑफ डेमोक्रेसी और भाजपा आपदा राहत विभाग के प्रदेश संयोजक डॉ. जिनेंद्र शास्त्री को सेलिब्रेशन ऑफ सोशियोक्रेसी सम्मान से सम्मानित किया गया। इस राष्ट्रीय स्तर के आयोजन में लोकतंत्र (डेमोक्रेसी) श्रेणी में तेलंगाना के सांसद एटेला राजेंद्र, मध्य प्रदेश की सांसद संध्या राय, गुजरात के डॉ. हेमांग जोशी और उत्तराखंड की विधायक आशा नौटियाल सहित कई राज्यों के जनप्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया। वहीं, ब्यूरोक्रेसी (नौकरशाही) श्रेणी में महाराष्ट्र सड़क विकास निगम के एमडी अनिल कुमार गायकवाड़ और दिल्ली के आईपीएस जितेंद्र मणि त्रिपाठी सहित कई प्रशासनिक अधिकारियों को उनकी सेवाओं के लिए सराहा गया।4