अखिल राजस्थान महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ के प्रदेशव्यापी आह्वान पर राजसमंद की आंगनबाड़ी सहायिकाओं ने आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल और कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है। यह कदम उनकी छह सूत्रीय मांगों को लेकर उठाया गया है, जिनमें नियमितीकरण, न्यूनतम मजदूरी, पेंशन लागू करना और मोबाइल डेटा उपलब्ध कराना प्रमुख हैं। दरअसल, आंगनबाड़ी सहायिकाओं ने छह दिन पहले प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर अल्टीमेटम दिया था। इस अल्टीमेटम के बाद, कल जयपुर में प्रदेश कार्यकारिणी के साथ सरकार की एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई थी। हालांकि, यह बैठक बेनतीजा रही क्योंकि सरकार ने कोई भी मांग मानने से इनकार कर दिया। आज, अखिल राजस्थान महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ की जिलाध्यक्ष रीना त्रिवेदी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी सहायिकाएं राजसमंद कलेक्ट्रेट पहुंचीं। उन्होंने अतिरिक्त जिला कलेक्टर एवं उपनिदेशक को ज्ञापन सौंपकर हड़ताल की औपचारिक शुरुआत की और कलेक्ट्री पर जमकर नारेबाजी की। जिलाध्यक्ष रीना त्रिवेदी ने स्पष्ट किया कि संगठन ने सरकार के मांगों को न मानने के फैसले के बाद आज से पूरे प्रदेश में अनिश्चितकालीन हड़ताल का निर्णय लिया है। उन्होंने दोहराया कि जब तक उनकी प्रमुख मांगें सरकार द्वारा स्वीकार नहीं की जातीं, तब तक आंगनबाड़ी सहायिकाएं कार्य पर नहीं लौटेंगी।
अखिल राजस्थान महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ के प्रदेशव्यापी आह्वान पर राजसमंद की आंगनबाड़ी सहायिकाओं ने आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल और कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है। यह कदम उनकी छह सूत्रीय मांगों को लेकर उठाया गया है, जिनमें नियमितीकरण, न्यूनतम मजदूरी, पेंशन लागू करना और मोबाइल डेटा उपलब्ध कराना प्रमुख हैं। दरअसल, आंगनबाड़ी सहायिकाओं ने छह दिन पहले प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर अल्टीमेटम दिया था।
इस अल्टीमेटम के बाद, कल जयपुर में प्रदेश कार्यकारिणी के साथ सरकार की एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई थी। हालांकि, यह बैठक बेनतीजा रही क्योंकि सरकार ने कोई भी मांग मानने से इनकार कर दिया। आज, अखिल राजस्थान महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ की जिलाध्यक्ष रीना त्रिवेदी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी सहायिकाएं राजसमंद कलेक्ट्रेट पहुंचीं। उन्होंने अतिरिक्त जिला कलेक्टर एवं उपनिदेशक
को ज्ञापन सौंपकर हड़ताल की औपचारिक शुरुआत की और कलेक्ट्री पर जमकर नारेबाजी की। जिलाध्यक्ष रीना त्रिवेदी ने स्पष्ट किया कि संगठन ने सरकार के मांगों को न मानने के फैसले के बाद आज से पूरे प्रदेश में अनिश्चितकालीन हड़ताल का निर्णय लिया है। उन्होंने दोहराया कि जब तक उनकी प्रमुख मांगें सरकार द्वारा स्वीकार नहीं की जातीं, तब तक आंगनबाड़ी सहायिकाएं कार्य पर नहीं लौटेंगी।
- यह प्रश्न उठाया गया है कि आखिर कितने पति अपनी पत्नियों द्वारा मारे जाएंगे। इसी संदर्भ में यह जानकारी भी सामने आई है कि हर साल 82000 हजार लोग आत्महत्या कर रहे हैं।1
- राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने स्वयं स्वीकार किया है कि पुलिस आरोपी को बचाने का प्रयास कर रही है। इसके बावजूद, पुलिस विभाग इस मामले में त्वरित कार्रवाई करने के बजाय खामोश बैठा है। यह प्रकरण ग्राम बानसेन थाना भदेसर निवासी नारायण लाल लढ्ढा द्वारा राजसम्पर्क पोर्टल पर दर्ज कराई गई शिकायत संख्या 072606727584938 से संबंधित है। परिवादी ने आरोप लगाया था कि 24 जनवरी 2025 को न्यायालय के स्थगन आदेश के बावजूद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई थी। दिनांक 4 जुलाई 2026 को सीएमओ राजस्थान ने इस परिवाद पर टिप्पणी दर्ज की, जिसमें कहा गया कि परिवादी विभाग द्वारा की गई कार्रवाई से असंतुष्ट है, और पुलिस आरोपी को बचाने के चक्कर में इसे 132 का प्रकरण बता रही है, जबकि यह मामला 24 जनवरी 2025 का है और 132 का प्रकरण 6 सितंबर 2024 का है। इसके बाद, 6 जुलाई 2026 को चित्तौड़गढ़ के पुलिस अधीक्षक ने स्वयं प्रकरण दर्ज करने और अनुसंधान जारी रखने का आदेश दिया। हालांकि, पुलिस थाना भदेसर द्वारा आदेश के 48 घंटे बीत जाने के बाद भी एफआईआर संख्या 112/2025 दर्ज नहीं की गई। राज.सम्पर्क 072606727487736 में डीवाईएसपी भदेसर ने भी 24.01.25 को माननीय न्यायालय के स्टे आदेश के बावजूद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को स्वीकार किया है। इस पर, परिवादी नारायण लाल ने 7 जुलाई 2026 को एसपी, आईजी उदयपुर, डीएम चित्तौड़गढ़ और सीजेएम चित्तौड़गढ़ को मेल भेजकर 2 घंटे में एफआईआर नंबर उपलब्ध कराने का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि एफआईआर दर्ज नहीं की जाती है, तो वे उच्च न्यायालय जोधपुर में अवमानना याचिका दायर करेंगे। इस संबंध में जब एसपी कार्यालय चित्तौड़गढ़ और थाना भदेसर के अधिकारियों से संपर्क किया गया तो कोई आधिकारिक बयान नहीं मिल सका और उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।1
- राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) से संबंधित एक महत्वपूर्ण अपडेट जारी किया गया है। इस अपडेट के अनुसार, मनरेगा के कार्य समय में बदलाव किया गया है। यह अपडेट 125 दिन के रोजगार, ₹300 की मजदूरी दर, योजना के नए नामों और रविवार के अवकाश से जुड़ी पूरी सच्चाई जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित है।1
- खेताखेडा कानोड स्थित श्री विजयलक्ष्मी बोरिंग कंपनी खेत, फार्म हाउस और मकानों के अंदर बोरिंग सुविधा प्रदान कर रही है। यह कंपनी विभिन्न आवश्यकताओं के अनुसार छोटी और बड़ी दोनों प्रकार की गाड़ियों का उपयोग करती है। मकानों के अंदर या छोटी जगहों पर बोरिंग के लिए कंपनी के पास छोटी गाड़ी उपलब्ध है, वहीं प्लॉटों में काम करने के लिए बड़ी गाड़ी की सेवा भी दी जाती है। इस बोरिंग सेवा के लिए इच्छुक व्यक्ति 9660342206 पर श्री विजयलक्ष्मी बोरिंग कंपनी से संपर्क कर सकते हैं।1
- झूठे आरोप किसी भी निर्दोष व्यक्ति की पूरी ज़िंदगी तबाह कर सकते हैं, और इस पीड़ा को वही समझ सकता है जिस पर यह बीती हो। ऐसे आरोपों के कारण व्यक्ति को वर्षों तक सामाजिक प्रताड़ना, अपमान और कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने पड़ते हैं। यह तो अच्छा हुआ कि किसी पुजारी के संदर्भ में भगवान की दया से सच सामने आ गया, वरना उन्हें भी खुद को निर्दोष साबित करने के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ता। एक झूठा आरोप केवल व्यक्ति की प्रतिष्ठा ही नहीं, बल्कि उसके परिवार, सम्मान और मानसिक शांति को भी गहरा आघात पहुँचा सकता है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए यह मांग की गई है कि यदि जांच या न्यायालय में यह सिद्ध हो जाए कि किसी ने जानबूझकर झूठा आरोप लगाया था, तो ऐसे मामलों में कानून के अनुसार कठोर दंड का प्रावधान होना चाहिए। यह कदम निर्दोष लोगों की रक्षा करेगा, झूठे मामलों पर अंकुश लगाएगा और वास्तविक पीड़ितों को भी न्याय मिलने में सहायता करेगा। दरअसल, न्याय तभी पूर्ण माना जाएगा, जब दोषी को दंड मिले और निर्दोष की गरिमा की भी समान रूप से रक्षा हो।1
- आज श्री सांवरिया सेठ के लाइव श्रृंगार दर्शन भक्तों के लिए उपलब्ध करवाए गए। यह जानकारी श्री सांवरिया सेठ के आज के श्रृंगार दर्शन के संबंध में दी गई है।1
- राजस्थान के राजसमंद जिले के नांदोली से न्यू द्वारकेश न्यूज़ चैनल के रिपोर्टर नंदलाल पुरबिया द्वारा चारभुजा नाथ के दर्शन जनहित में प्रसारित किए गए हैं।1