सिजिमाली के आदिवासियों की लड़ाई केवल जमीन बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अपने अधिकारों और स्वाभिमान को बचाने का एक महत्वपूर्ण संघर्ष है। वे कई प्रमुख मांगों के साथ अपनी आवाज उठा रहे हैं, जिसमें पूरे ओडिशा में तत्काल PESA अधिनियम को लागू करना शामिल है। आदिवासी समुदाय सिजिमाली पहाड़ियों में बॉक्साइट खनन पर तुरंत रोक लगाने और न्यायालय की निगरानी में एक निष्पक्ष ग्राम सभा प्रक्रिया को दोबारा आयोजित करने की भी मांग कर रहा है। इसके अतिरिक्त, आदिवासियों पर वेदांता और अडानी समर्थित कंपनियों द्वारा किए जा रहे पुलिस दमन और अत्याचार को तत्काल बंद करने की मांग उठाई गई है। उनकी मांग है कि जेल में बंद सभी आदिवासी युवा कार्यकर्ताओं को तुरंत रिहा किया जाए और उन पर लगाए गए सभी झूठे मुकदमों को वापस लिया जाए। इन मांगों के पीछे सिजिमाली के आदिवासी समाज का स्वाभिमान वापस लौटाने का संकल्प है। यह जानकारी IYC प्रभारी श्री मनीष शर्मा द्वारा साझा की गई है।
सिजिमाली के आदिवासियों की लड़ाई केवल जमीन बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अपने अधिकारों और स्वाभिमान को बचाने का एक महत्वपूर्ण संघर्ष है। वे कई प्रमुख मांगों के साथ अपनी आवाज उठा रहे हैं, जिसमें पूरे ओडिशा में तत्काल PESA अधिनियम को लागू करना शामिल है। आदिवासी समुदाय सिजिमाली पहाड़ियों में बॉक्साइट खनन पर तुरंत रोक लगाने और न्यायालय की निगरानी में एक निष्पक्ष ग्राम सभा प्रक्रिया को दोबारा आयोजित करने की भी मांग कर रहा है। इसके अतिरिक्त, आदिवासियों पर वेदांता और अडानी समर्थित कंपनियों द्वारा किए जा रहे पुलिस दमन और अत्याचार को तत्काल बंद करने की मांग उठाई गई है। उनकी मांग है कि जेल में बंद सभी आदिवासी युवा कार्यकर्ताओं को तुरंत रिहा किया जाए और उन पर लगाए गए सभी झूठे मुकदमों को वापस लिया जाए। इन मांगों के पीछे सिजिमाली के आदिवासी समाज का स्वाभिमान वापस लौटाने का संकल्प है। यह जानकारी IYC प्रभारी श्री मनीष शर्मा द्वारा साझा की गई है।
- झारखंड के गोड्डा जिले के ठाकुर गंगटी प्रखंड की दिग्घी पंचायत के खानिचक गांव से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है, जहाँ एक सगे बेटे ने अपने ही माता-पिता को अपने साथ रखने से साफ इनकार कर दिया है। बेटे के इस व्यवहार के कारण अब माता-पिता दर-दर भटकने को मजबूर हैं और उन्होंने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। यह घटना इस सवाल को उठाती है कि क्या किसी बेटे को अपने माता-पिता के साथ इस प्रकार का व्यवहार करना चाहिए।1
- सिजिमाली के आदिवासियों की लड़ाई केवल जमीन बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अपने अधिकारों और स्वाभिमान को बचाने का एक महत्वपूर्ण संघर्ष है। वे कई प्रमुख मांगों के साथ अपनी आवाज उठा रहे हैं, जिसमें पूरे ओडिशा में तत्काल PESA अधिनियम को लागू करना शामिल है। आदिवासी समुदाय सिजिमाली पहाड़ियों में बॉक्साइट खनन पर तुरंत रोक लगाने और न्यायालय की निगरानी में एक निष्पक्ष ग्राम सभा प्रक्रिया को दोबारा आयोजित करने की भी मांग कर रहा है। इसके अतिरिक्त, आदिवासियों पर वेदांता और अडानी समर्थित कंपनियों द्वारा किए जा रहे पुलिस दमन और अत्याचार को तत्काल बंद करने की मांग उठाई गई है। उनकी मांग है कि जेल में बंद सभी आदिवासी युवा कार्यकर्ताओं को तुरंत रिहा किया जाए और उन पर लगाए गए सभी झूठे मुकदमों को वापस लिया जाए। इन मांगों के पीछे सिजिमाली के आदिवासी समाज का स्वाभिमान वापस लौटाने का संकल्प है। यह जानकारी IYC प्रभारी श्री मनीष शर्मा द्वारा साझा की गई है।1
- गुजरात में आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रवेश से राजनीतिक हलचल बढ़ गई है, जिसके चलते आदिवासी समाज ने राज्य में सियासी ‘गेम’ को बदल दिया है।1
- भागलपुर के सनोखर में, भीषण धूप से परेशान और बेहाल लोगों को आखिरकार राहत मिली है। इस स्थिति से निपटने के लिए पुलिस कर्मियों और समाजसेवियों ने मिलकर कमान संभाली, जिसके बाद लोगों को जरूरी मदद और सुकून मिल पाया।1
- देश में व्याप्त गरीबी और भुखमरी के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाए, इस पर सवाल उठाते हुए, एक सोशल मीडिया पोस्ट में धर्म के नाम पर की जा रही भोजन की भारी बर्बादी पर गहरा गुस्सा व्यक्त किया गया है। पोस्ट में विशेष रूप से बताया गया है कि धार्मिक आयोजनों में 101 किलोग्राम आम रस और 30 क्विंटल गन्ने के रस का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिस पर कड़ी आपत्ति जताई गई है। पोस्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि यदि यह विशाल मात्रा में आम रस और गन्ने का रस किसी गरीब परिवार या किसी भी आम आदमी के पेट में जाता, तो उससे अपार दुआएं और आशीर्वाद मिलते। सवाल उठाया गया है कि आखिर ऐसा कौन सा धर्म-कर्म है जो इस तरह की बर्बादी को बढ़ावा देता है, और इस प्रथा को देश की गरीबी तथा भुखमरी का जिम्मेदार बताया गया है।1
- भागलपुर जिले के प्रसिद्ध अजगैविनाथ धाम में गंगा दशहरा के पावन अवसर पर भक्ति और आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। हर साल की तरह इस वर्ष भी बिहार, झारखंड समेत अन्य राज्यों से हजारों श्रद्धालु उत्तरवाहिनी गंगा में डुबकी लगाने पहुँचे, जहाँ सुबह से ही गंगा घाटों पर भारी भीड़ जमा हो गई थी। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि गंगा दशहरा के दिन ही माँ गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। इसी श्रद्धा के साथ, शिवभक्तों ने गंगा स्नान किया, पूजा-अर्चना की और आम के फल, प्रसाद तथा दीप अर्पित कर माँ गंगा से सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने अपने परिवारों की खुशहाली और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए दीपदान भी किया। अजगैविनाथ मंदिर के महंत प्रेमानंद गिरी ने गंगा दशहरा के विशेष धार्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि इस दिन उत्तरवाहिनी गंगा में स्नान और दीपदान करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इसी गहन आस्था के कारण बड़ी संख्या में शिवभक्त दूर-दराज के स्थानों से अजगैविनाथ धाम आते हैं। पूरे मंदिर परिसर और गंगा घाटों पर भक्तिमय और ऊर्जावान माहौल बना रहा। श्रद्धालुओं की सुविधाओं और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन भी पूरी तरह से मुस्तैद और सक्रिय दिखा।1
- यह पोस्ट एक 'स्ट्रीट व्यू टूर' के माध्यम से उपयोगकर्ताओं को एक विशिष्ट स्थान का अंदाज़ा लगाने के लिए आमंत्रित करती है। इसमें 'स्ट्रीट से स्ट्रेट मैन रोड तक' के मार्ग का विवरण दिया गया है, जिससे दर्शकों को उस जगह की पहचान करने में मदद मिल सके।1
- आज मध्य प्रदेश के सीधी में मप्र युवा कांग्रेस और एनएसयूआई के साथियों ने नीट पेपर लीक घोटाले के खिलाफ एक भाजपा सांसद का घेराव करते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट रूप से धर्मेन्द्र प्रधान की तत्काल बर्खास्तगी की मांग की, आरोप लगाया कि वे 22 लाख परिवारों को तबाह करने और कई आत्महत्याओं के जिम्मेदार हैं। उन्होंने वाटर कैनन, लाठीचार्ज और पुलिस के दमनकारी रवैये पर सवाल उठाते हुए तीखा कटाक्ष किया, पूछते हुए कि ये सब तो ठीक है, लेकिन प्रधान की बर्खास्तगी कब होगी।1