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पूर्वी चंपारण जिले के सुगौली स्थित जनता चौक पर एक दुकान से उचक्कों ने बच्चों को बहला-फुसलाकर नकद दस हजार रुपये चुरा लिए। इस घटना के बाद पीड़ित व्यक्ति ने पुलिस में आवेदन देकर शिकायत दर्ज कराई है।
Shambhu sharan
पूर्वी चंपारण जिले के सुगौली स्थित जनता चौक पर एक दुकान से उचक्कों ने बच्चों को बहला-फुसलाकर नकद दस हजार रुपये चुरा लिए। इस घटना के बाद पीड़ित व्यक्ति ने पुलिस में आवेदन देकर शिकायत दर्ज कराई है।
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- पश्चिम चंपारण जिले में विकास संबंधी मुद्दों पर सार्थक संवाद स्थापित किया गया। 28 जून को 28.06.2026.303 पंचायतों में पंचायत विकास दिवस मनाया गया।1
- सहयोग पोर्टल को लेकर आम जनता के विचारों पर चर्चा की जा रही है, विशेष रूप से इस बात पर कि क्या यह पोर्टल वाक़ई में लोगों के लिए सहयोगी साबित होगा। यह सवाल उठाया जा रहा है कि इस मंच के संबंध में लोगों की क्या राय है और इसकी प्रभावशीलता कितनी होगी।1
- पश्चिम चंपारण जिले के किसान अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर अधिक मुनाफेदार फसलों की ओर रुख कर रहे हैं, जिसका एक प्रेरणादायक उदाहरण नौतन प्रखंड के बैकुंठवा गांव के किसान शिशिर दूबे हैं। उन्होंने बिहार में दुर्लभ मानी जाने वाली थाईलैंड वैरायटी की मौसंबी की बागवानी कर खेती के क्षेत्र में अपनी एक नई पहचान बनाई है। करीब छह वर्ष पहले शुरू हुई यह बागवानी अब फल देने लगी है; पिछले साल जहां पेड़ों में फल लगना शुरू हुआ था, वहीं इस साल उत्पादन अपने चरम पर पहुंच गया है। मौसंबी को आमतौर पर उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों का फल माना जाता है, लेकिन बिहार जैसी उष्णकटिबंधीय जलवायु में भी इसका शानदार उत्पादन किसानों के लिए एक नई उम्मीद बनकर उभरा है। शिशिर दूबे ने अपनी तीन एकड़ जमीन पर लगभग 750 मौसंबी के पौधे लगाए थे, जो छह वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद अब पूर्ण विकसित पेड़ बन चुके हैं। वर्तमान में प्रत्येक पेड़ से करीब 40 किलोग्राम तक फल प्राप्त हो रहा है, और इस सीजन में उनकी बागवानी से लगभग 12 टन मौसंबी का उत्पादन होने का अनुमान है। मौसंबी की खेती का एक बड़ा फायदा यह भी है कि यह नींबू वर्गीय फल होने के कारण कीटों और रोगों से काफी हद तक सुरक्षित रहती है, और मवेशी भी इस फसल को नुकसान नहीं पहुंचाते, जिससे किसानों की चिंताएं कम होती हैं। बिहार में मौसंबी की खेती सीमित होने के कारण इसकी बाजार में अच्छी मांग है, और फल व्यापारी व जूस कारोबारी इसे खेत से ही 80 रुपये प्रति किलो तक की कीमत पर खरीद रहे हैं। शिशिर दूबे का कहना है कि जैसे-जैसे पेड़ों की उम्र बढ़ेगी, उत्पादन भी बढ़ता जाएगा, और आने वाले वर्षों में एक-एक पेड़ से एक क्विंटल तक फल मिलने की संभावना है। यदि ऐसा होता है, तो मौसंबी की खेती पारंपरिक फसलों की तुलना में कई गुना अधिक लाभ देने वाली साबित होगी। वे अन्य किसानों को थाईलैंड वैरायटी के पौधों का चयन करने की सलाह देते हैं, क्योंकि उनके अनुसार इस किस्म का स्वाद सामान्य देसी मौसंबी की तुलना में अधिक मीठा और बाजार में अधिक पसंद किया जाता है। नौतन के इस किसान की सफलता यह साबित करती है कि नई तकनीक और फसलों को अपनाने का साहस करने पर खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि बेहतर आय और समृद्धि का मजबूत माध्यम भी बन सकती है, और बिहार में मौसंबी की यह सफल बागवानी अब दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है।1
- बिहार के सिरहा पंचायत भवन परिसर में आयोजित जीविका दीदीयों की बैठक में अनुशासनहीनता का गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ जीविका के अधिकारी और कर्मचारियों पर दीदियों को अनुशासन का ज्ञान न सिखाने का आरोप लगा है। 'दैनिक सिरहा टाइम्स' के संपादक रवि कुमार भार्गव की रिपोर्ट के अनुसार, बुककीपर से लेकर संबंधित अधिकारी-कर्मचारी संविदाकर्मी तक, सभी सरकार की महत्वाकांक्षी जीविका योजनाओं से 'खिलवाड़' कर रहे हैं। सिरहा पंचायत में जीविका भवन परिसर के पीपल के पेड़ के नीचे आयोजित मासिक बैठक में जीविका कर्मी बली नारायण साह संबंधित कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। इसी दौरान, जब संपादक रवि कुमार भार्गव उनसे बातचीत करने पहुँचे, तो जीविका दीदियाँ बैठक से उठकर चली गईं। बली नारायण साह ने बताया कि इस समूह की सीएम गीता देवी के उकसाने पर अन्य सदस्य भी उठ गईं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रेस के आने और फोटो-वीडियो बनाने के डर से महिलाएँ बैठक छोड़कर भागी हैं। इस घटना के दौरान, एक व्यक्ति ने मोटरसाइकिल से आकर आरोप लगाया कि समूह की सीएम गीता देवी कहती हैं कि उनके ग्रुप में पैसा ही नहीं है। उस व्यक्ति ने यह भी बताया कि गीता देवी अपनी मनमर्जी से इस समूह का संचालन करती हैं। यह भी गौरतलब है कि बैठक 11 बजे दिन से आयोजित होनी थी, जबकि बुककीपर भरत प्रसाद कुशवाहा स्वयं लगभग 1:30 बजे बैठक में पहुँचे। रिपोर्ट में सवाल उठाया गया है कि बिहार सरकार जीविका दीदियों के माध्यम से विकास कार्य पर भारी धन खर्च कर रही है, लेकिन जिन दीदियों को बैठक के अनुशासन का भी ज्ञान नहीं, वे पंचायत के विकास में अग्रणी भूमिका कैसे निभा पाएंगी। यह स्थिति जीविका कर्मियों और अधिकारियों द्वारा दिए गए प्रशिक्षण की 'पोल खोलती' है। गंभीर आरोप यह भी है कि जीविका सीएम द्वारा सदस्यों के नाम पर स्वयं राशि निकालकर रख ली जाती है। कटास में एक मुस्लिम महिला के साथ माधुरी देवी नामक जीविका सीएम द्वारा ऐसी ही एक घटना किए जाने की बात भी सुनने को मिली थी, जिसमें माधुरी देवी जानकारी देने में असमर्थ रही थीं। इन सभी बिंदुओं पर गंभीरता से जांच की आवश्यकता पर बल दिया गया है।1
- DIG-DM के साथ एक रिटायर्ड जज बिलौटी पहुँचे हैं। यह दौरा एक माँ द्वारा प्रशासन पर लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद हुआ है। माँ ने अपने बेटे की मौत को लेकर प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसके बाद से उनकी तबीयत भी बिगड़ गई है।1
- नए शैक्षणिक सत्र के आरंभ के अवसर पर, माननीय राज्यपाल सह कुलाधिपति ने छात्र-छात्राओं को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। यह संदेश 28 जून, 2026 को जारी किया गया।1
- पूर्वी चंपारण के सिरहा पंचायत में पंचायत सचिव अमित कुमार पर ग्राम सभा की सूचना जनता को न देने और सिर्फ कोरम पूरा करने का गंभीर मामला सामने आया है। बिहार सरकार के निर्देशानुसार, जिलाधिकारी पूर्वी चंपारण ने हर ग्राम पंचायत में सुबह 10 बजे से 12 बजे के बीच ग्राम सभा आयोजित करने का आदेश दिया था। इस संबंध में, पंचायत सचिव अमित कुमार ने दावा किया कि वे सुबह 10 बजे से ही पंचायत भवन में मौजूद थे और वार्ड सदस्यों की बैठक हुई थी। हालांकि, सुबह से ही पंचायत भवन में मौजूद ग्रामीण जैसे जय गोविंद प्रसाद कुशवाहा और जय लाल सहनी सहित अन्य लोगों ने बताया कि उन्हें ग्राम सभा की कोई जानकारी नहीं दी गई और वहां कोई मौजूद नहीं था। दैनिक सिरहा टाइम्स के संपादक रवि कुमार भार्गव ने भी पुष्टि की कि समाचार संकलन के लिए उन्होंने तीन बार पंचायत भवन का दौरा किया – पहली बार कोई नहीं मिला, 12 बजे दोबारा जाने पर भी कोई नहीं दिखा, और 1:19 बजे पहुंचने पर पंचायत भवन में ताला लगा पाया। ग्रामीणों ने भी पुष्टि की कि पंचायत भवन में कोई नहीं आया था, जिससे पंचायत सचिव के दावे पर सवाल उठते हैं। जनता के बयानों से यह स्पष्ट होता है कि पंचायत सचिव अमित कुमार ने अपने कर्तव्य में लापरवाही बरती है और जनता को ग्राम सभा की सूचना नहीं दी गई। संपादक रवि कुमार भार्गव ने पंचायत सचिव से अनुरोध किया कि वे किसी राजनीतिक दबाव या लालच में न आकर जनता को सरकार की योजनाओं और ग्राम सभा की सूचना समय पर दें, क्योंकि सरकार उन्हें जनता की सेवा के लिए वेतन देती है। उन्होंने यह भी बताया कि पंचायत सरकार भवन में आरपीएस (राइट टू पब्लिक सर्विसेज) काउंटर खोला गया है ताकि लोगों को जाति, आवासीय और जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज बनवाने के लिए प्रखंड कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें, लेकिन यहां भी कोई कर्मी मौजूद नहीं रहता। पंचायत सचिव द्वारा बैठक की जो तस्वीरें उपलब्ध कराई गईं, उन सभी पर 11:46 बजे का समय दर्शाया गया था। जब उनसे इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बाद में जो तस्वीरें भेजीं, उनमें 11:30 और 11:47 जैसे अलग-अलग समय दिखे, जिस पर सवाल उठाए जा रहे हैं। संपादक के अनुसार, बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं को विफल करने में पंचायत स्तर के कर्मचारी, पंचायत सचिव और आरपीएस कर्मी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। इन कर्मचारियों को केवल अपने वेतन से मतलब होता है और वे पंचायत के विकास कार्यों में कोई रुचि नहीं लेते। आरोप है कि ये कर्मचारी अपने दलाल पाल रखे हैं और केवल हाजिरी लगाने के लिए आते हैं, जिसके बाद वे वापस चले जाते हैं और पंचायत भवन की ओर उनका रुख नहीं होता। यह सभी गंभीर जांच का विषय है, जिस पर उच्च अधिकारियों का ध्यान केंद्रित होना आवश्यक है। ऐसा प्रतीत होता है कि सिरहा पंचायत के पंचायत सचिव अमित कुमार को अपनी कार्यशैली में परिवर्तन करने की आवश्यकता है।1
- गोपालगंज पुलिस ने विशम्भरपुर थाना क्षेत्र में हुए एक खौफनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाले 'ब्लाइंड मर्डर केस' का खुलासा मात्र 15 दिनों में कर दिया है। यह घटना किसी सस्पेंस थ्रिलर से कम नहीं है, जहाँ दूसरों की मौत की सुपारी देने वाला शख्स ही अंततः उन्हीं हत्यारों का शिकार बन गया। इस 'खूनी खेल' में पुलिस ने गन्ने के खेत से एक कटा सिर बरामद किया था। मामले की जाँच में सामने आया कि जिस व्यक्ति ने दो लोगों की हत्या की सुपारी दी थी, वह खुद ही अपने बुने जाल में फँसकर शिकार बन गया।1