पूर्वी चंपारण के पकड़ीदयाल स्थित सिरहा पंचायत के वार्ड नंबर-9 निवासी सुरेंद्र भगत की महाराष्ट्र में ट्रेन से गिरने के कारण दुखद मौत हो गई। वह चेन्नई में मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे और 1 जून को घर से चेन्नई जाने के लिए छपरा से ट्रेन में सवार हुए थे। इसी यात्रा के दौरान 3 जून को महाराष्ट्र के हिंगणघाट के पास ट्रेन से गिरने से उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना की सूचना हिंगणघाट थाना पुलिस ने मृतक की पत्नी चंदा देवी को मोबाइल पर दी, जिसके बाद परिजन महाराष्ट्र पहुंचकर शव की पहचान कर पाए। शनिवार को जैसे ही सुरेंद्र भगत का शव उनके पैतृक गांव सिरहा पहुंचा, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई और गांव में मातम छा गया। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण उमड़ पड़े, हर आंख नम थी और गांव का माहौल गमगीन हो गया। सुरेंद्र भगत अपने पीछे पत्नी चंदा देवी, एक पुत्र और तीन पुत्रियों का परिवार छोड़ गए हैं, जिनकी आजीविका पूरी तरह उनकी मजदूरी पर निर्भर थी। पति की असामयिक मौत के बाद पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है, और अब उनके परिवार के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने सुरेंद्र भगत को मिलनसार और व्यवहारिक व्यक्ति बताते हुए उनके निधन को पूरे गांव के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। इस दुखद घड़ी में, ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने शोक संतप्त परिवार को सांत्वना दी है और सरकार से आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग की है। उन्होंने परिवार को हरसंभव सहयोग देने का भी भरोसा दिलाया। फिलहाल, पूरे सिरहा गांव में शोक का माहौल है, और ग्रामीण प्रशासन से परिवार को सरकारी सहायता मिलने की उम्मीद में अपनी मांगें उठा रहे हैं।
पूर्वी चंपारण के पकड़ीदयाल स्थित सिरहा पंचायत के वार्ड नंबर-9 निवासी सुरेंद्र भगत की महाराष्ट्र में ट्रेन से गिरने के कारण दुखद मौत हो गई। वह चेन्नई में मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे और 1 जून को घर से चेन्नई जाने के लिए छपरा से ट्रेन में सवार हुए थे। इसी यात्रा के दौरान 3 जून को महाराष्ट्र के हिंगणघाट के पास ट्रेन से गिरने से उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना की सूचना हिंगणघाट थाना पुलिस ने मृतक की पत्नी चंदा देवी को मोबाइल पर दी, जिसके बाद परिजन महाराष्ट्र पहुंचकर शव की पहचान कर पाए। शनिवार को जैसे ही सुरेंद्र भगत का शव उनके पैतृक गांव सिरहा पहुंचा, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई और गांव में मातम छा गया। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण उमड़ पड़े, हर आंख नम थी और गांव का माहौल गमगीन हो गया। सुरेंद्र भगत अपने पीछे पत्नी चंदा देवी, एक पुत्र और तीन पुत्रियों का परिवार छोड़ गए हैं, जिनकी आजीविका पूरी तरह उनकी मजदूरी पर निर्भर थी। पति की असामयिक मौत के बाद पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है, और अब उनके परिवार के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने सुरेंद्र भगत को मिलनसार और व्यवहारिक व्यक्ति बताते हुए उनके निधन को पूरे गांव के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। इस दुखद घड़ी में, ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने शोक संतप्त परिवार को सांत्वना दी है और सरकार से आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग की है। उन्होंने परिवार को हरसंभव सहयोग देने का भी भरोसा दिलाया। फिलहाल, पूरे सिरहा गांव में शोक का माहौल है, और ग्रामीण प्रशासन से परिवार को सरकारी सहायता मिलने की उम्मीद में अपनी मांगें उठा रहे हैं।
- सीतामढ़ी के बोखड़ा प्रखंड मुख्यालय के समक्ष मंगलवार, 09 जून 2026 को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) द्वारा महंगाई, बेरोजगारी, बदहाल शिक्षा व्यवस्था, ध्वस्त कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार के विरोध में एक दिवसीय शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस धरने का नेतृत्व बाजपट्टी के पूर्व विधायक मुकेश कुमार यादव ने किया, जहाँ प्रखंड क्षेत्र से पहुँचे सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने विभिन्न जनसमस्याओं के समाधान की मांग करते हुए सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। धरने को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक मुकेश कुमार यादव ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में आम लोग स्वयं को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं, और सरकारी कार्यालयों में रिश्वत दिए बिना लोगों के कार्य नहीं हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जन्म प्रमाण पत्र और वृद्धावस्था पेंशन सहित अन्य आवश्यक कार्यों के लिए भी लोगों को महीनों तक कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं। श्री यादव ने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को चिंताजनक बताया, जिससे छोटे व्यवसायी भी अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने महंगाई, रसोई गैस की बढ़ती कीमतों और शिक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए, विशेष रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रहे पेपर लीक की घटनाओं से युवाओं के भविष्य पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभाव का उल्लेख किया। पूर्व विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार जनता का ध्यान मूल समस्याओं से भटकाने का प्रयास कर रही है। इस धरना-प्रदर्शन में राजद जिला उपाध्यक्ष सह जिला परिषद सदस्य देवेंद्र प्रसाद यादव, जिला परिषद सदस्य नंदकुमार यादव, पूर्व प्रमुख आफताब आलम मिंटू, खालिद रजा, भूषण झा, चंद्रमोहन ठाकुर, सरपंच कुलदीप प्रसाद यादव, संजीव कुमार संजू और फकीरा साह समेत बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता उपस्थित रहे। श्री यादव ने चेतावनी दी कि यदि जनसमस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो राजद द्वारा एक व्यापक आंदोलन चलाया जाएगा।3
- पकड़ीदयाल इटवा में भिखारी पटेल क्रिकेट टूर्नामेंट के अंतर्गत एक नाइट मैच का आयोजन किया गया है।1
- मोतिहारी जिले के पताही प्रखंड क्षेत्र में मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना के तहत बनी एक नई सड़क महज एक महीने के भीतर ही टूटकर बिखर गई है। यह घटना स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि यह महत्वपूर्ण योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है, जहाँ निर्माण कार्य में हुई अनियमितताओं और लापरवाही के कारण सड़क इतनी जल्दी क्षतिग्रस्त हो गई।1
- पूर्वी चम्पारण के डुमरिया घाट पर बहती हुई नदी में एक व्यक्ति के गिरने की घटना के 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अभी तक उसका शव नहीं मिल पाया है। यह घटना मंगलवार दोपहर की बताई जा रही है। गिरे हुए व्यक्ति की पहचान 48 वर्षीय भगनारायण सह के रूप में हुई है, जो मधुबन थाना क्षेत्र के निवासी हैं। वर्तमान में, SDRF की टीम शव की तलाश में जुटी हुई है।1
- जय श्री राम राधे राधे हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर महादेव1
- बिहार के शिवहर जिले के तरियानी प्रखंड में एक भीषण दुर्घटना हुई है। यहाँ एक अनियंत्रित टेंपो अचानक गड्ढे में गिर गया, जिसके परिणामस्वरूप वाहन में सवार एक 45 वर्षीय यात्री की मौके पर ही मौत हो गई।1
- शिवहर में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने महंगाई की मार के खिलाफ एक जोरदार धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान राजद के नेताओं ने सरकार पर जमकर निशाना साधा और कड़ी आलोचना की।1
- पूर्वी चंपारण के पकड़ीदयाल स्थित सिरहा पंचायत के वार्ड नंबर-9 निवासी सुरेंद्र भगत की महाराष्ट्र में ट्रेन से गिरने के कारण दुखद मौत हो गई। वह चेन्नई में मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे और 1 जून को घर से चेन्नई जाने के लिए छपरा से ट्रेन में सवार हुए थे। इसी यात्रा के दौरान 3 जून को महाराष्ट्र के हिंगणघाट के पास ट्रेन से गिरने से उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना की सूचना हिंगणघाट थाना पुलिस ने मृतक की पत्नी चंदा देवी को मोबाइल पर दी, जिसके बाद परिजन महाराष्ट्र पहुंचकर शव की पहचान कर पाए। शनिवार को जैसे ही सुरेंद्र भगत का शव उनके पैतृक गांव सिरहा पहुंचा, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई और गांव में मातम छा गया। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण उमड़ पड़े, हर आंख नम थी और गांव का माहौल गमगीन हो गया। सुरेंद्र भगत अपने पीछे पत्नी चंदा देवी, एक पुत्र और तीन पुत्रियों का परिवार छोड़ गए हैं, जिनकी आजीविका पूरी तरह उनकी मजदूरी पर निर्भर थी। पति की असामयिक मौत के बाद पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है, और अब उनके परिवार के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने सुरेंद्र भगत को मिलनसार और व्यवहारिक व्यक्ति बताते हुए उनके निधन को पूरे गांव के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। इस दुखद घड़ी में, ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने शोक संतप्त परिवार को सांत्वना दी है और सरकार से आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग की है। उन्होंने परिवार को हरसंभव सहयोग देने का भी भरोसा दिलाया। फिलहाल, पूरे सिरहा गांव में शोक का माहौल है, और ग्रामीण प्रशासन से परिवार को सरकारी सहायता मिलने की उम्मीद में अपनी मांगें उठा रहे हैं।1