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भरत तिवारी के एनकाउंटर मामले को लेकर इलाके में जबरदस्त उबाल और आक्रोश देखा जा रहा है। इसी विरोध के चलते दखनेर में एक विशाल कैंडल मार्च का आयोजन किया गया, जहाँ पूरा इलाका 'हत्यारों को फांसी दो' के बुलंद नारों से गूंज उठा। प्रदर्शनकारी इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी से कड़ी सजा, विशेषकर फांसी दिए जाने की जोरदार मांग कर रहे हैं।
SATISH KUMAR (पत्रकार)
भरत तिवारी के एनकाउंटर मामले को लेकर इलाके में जबरदस्त उबाल और आक्रोश देखा जा रहा है। इसी विरोध के चलते दखनेर में एक विशाल कैंडल मार्च का आयोजन किया गया, जहाँ पूरा इलाका 'हत्यारों को फांसी दो' के बुलंद नारों से गूंज उठा। प्रदर्शनकारी इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी से कड़ी सजा, विशेषकर फांसी दिए जाने की जोरदार मांग कर रहे हैं।
More news from बिहार and nearby areas
- पुलिस और खनन विभाग ने एक संयुक्त अभियान चलाया, जिसके तहत अवैध तरीके से बालू ले जा रहे ट्रैक्टरों को जब्त किया गया है। यह कार्रवाई अवैध बालू ढुलाई के खिलाफ की गई है।1
- भाजपा विधायक और पूर्व आईपीएस अधिकारी आनंद मिश्रा ने भरत तिवारी मामले पर अपनी टिप्पणी की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह घटना "हत्या के ही ग्रुप में आएगी" और "किसी भी हाल में कोई एनकाउंटर नहीं था", जिससे उन्होंने इस मामले को एक एनकाउंटर मानने से पूरी तरह इनकार किया।1
- रेलवे संघर्ष समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आज आयोजित की जा रही है, जिसमें रेल आंदोलन को तेज करने के लिए नई रणनीति पर बड़ा फैसला लिया जाएगा। इस बैठक की अध्यक्षता रेल आंदोलन के सूत्रधार मनोज सिंह यादव कर रहे हैं। समिति का मुख्य उद्देश्य जन आंदोलन को और अधिक धार देना है, जिसके लिए आज के मंथन में रेल संघर्ष की अगली रणनीति तय की जाएगी। बैठक के बाद रेलवे संघर्ष समिति द्वारा जल्द ही एक बड़ा ऐलान किए जाने की तैयारी है।1
- जहानाबाद पुलिस बल को शारीरिक और मानसिक रूप से सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से मंगलवार को पुलिस केंद्र में एक साप्ताहिक परेड का आयोजन किया गया। पुलिस अधीक्षक कोटा किरण कुमार के निर्देश पर आयोजित इस परेड में पुलिस जवानों ने अनुशासन, समर्पण और उत्कृष्ट तालमेल का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। सुबह से ही विभिन्न टुकड़ियों के जवान परेड मैदान में पहुंचे और निर्धारित ड्रिल, मार्च पास्ट तथा शारीरिक अभ्यास में सक्रिय रूप से शामिल हुए। इस दौरान अधिकारियों ने जवानों के टर्नआउट, समयपालन, कार्यशैली और कर्तव्यनिष्ठा का गहन निरीक्षण किया, साथ ही उन्हें अपने दायित्वों के प्रति सजग रहने और बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नियमित परेड और प्रशिक्षण न केवल पुलिसकर्मियों की शारीरिक क्षमता को मजबूत करता है, बल्कि उनके आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और टीम भावना का भी विकास करता है, जिससे पुलिस बल चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में त्वरित और प्रभावी ढंग से कार्य करने के लिए तैयार होता है। उन्होंने जोर दिया कि एक अनुशासित और प्रशिक्षित पुलिस बल ही कानून-व्यवस्था बनाए रखने में अधिक सक्षम साबित होता है। परेड के दौरान जवानों को जनता के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने, कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सतर्क नजर रखने और हर परिस्थिति में संयम तथा धैर्य के साथ कार्य करने का महत्वपूर्ण संदेश दिया गया। अधिकारियों ने यह भी बताया कि पुलिस और आम जनता के बीच विश्वास एवं बेहतर संबंध स्थापित करने में पुलिसकर्मियों का व्यवहार अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक कोटा किरण कुमार ने कहा कि प्रभावी और बेहतर पुलिसिंग के लिए शारीरिक दक्षता के साथ-साथ मानसिक सजगता, अनुशासन और समर्पण भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी जवानों से निष्ठा, ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने का आह्वान किया। परेड का समापन जवानों के उत्साहवर्धन, आवश्यक दिशा-निर्देशों और भविष्य में भी नियमित प्रशिक्षण जारी रखने के संकल्प के साथ किया गया, जिसने पुलिस बल में नई ऊर्जा और कार्य के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त संदेश दिया।1
- बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश) के शिकारपुर विधानसभा क्षेत्र स्थित मिलक करीरा गांव का पोखर ग्रामीणों के लिए लगातार जानलेवा खतरा बना हुआ है। संजय वर्मा की एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीणों का आरोप है कि यह दलदली पोखर आए दिन जान-माल के नुकसान का कारण बनता है। कई शिकायतों के बावजूद, अब तक न तो पोखर के चारों ओर सुरक्षा बाउंड्री बनाई गई है और न ही इसके आसपास कोई पक्की सड़क का निर्माण हुआ है। ग्रामीणों ने इस गंभीर समस्या से स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों को कई बार अवगत कराया है, लेकिन किसी भी ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि क्षेत्र के सांसद डॉ. भोला सिंह, शिकारपुर के विधायक अनिल शर्मा और अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस समस्या के समाधान के लिए अपेक्षित पहल नहीं की है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार गांवों के विकास और सुरक्षित बुनियादी सुविधाओं की बातें करती है, लेकिन उनके गांव की यह समस्या वर्षों से जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों की अंतिम उम्मीद अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से है, जिनसे वे इस जानलेवा पोखर का स्थायी समाधान कराने की मांग कर रहे हैं। इस मुद्दे पर दिल्ली के स्वतंत्र विचारक और समाजसेवी विजय प्रधान भी गांव पहुंचे और ग्रामीणों की आवाज को प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास किया। विजय प्रधान ने कहा है कि जब तक इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक वे ग्रामीणों के समर्थन में अपनी आवाज उठाते रहेंगे। गांव के समाजसेवी मनोज त्यागी भी इस अभियान में सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं, वहीं दिल्ली से मानव जन शिकायत समिति के अध्यक्ष श्री रमा शंकर साह के नेतृत्व में समिति की पूरी टीम भी इस समस्या के समाधान के लिए प्रयासरत है। अब यह देखना बाकी है कि वर्षों से चली आ रही इस गंभीर जनसमस्या पर शासन और प्रशासन कब संज्ञान लेते हैं और मिलक करीरा गांव के लोगों को इस जानलेवा पोखर से स्थायी राहत कब मिल पाती है।1
- सम्राट चौधरी को एक 'अंगूठाछाप मुख्यमंत्री' बताते हुए उन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों के अनुसार, सम्राट चौधरी केवल वही करते हैं जो केंद्र सरकार उन्हें निर्देश देती है, यानी वे केंद्र के आदेशों को हूबहू 'छाप' देते हैं।1
- अरवल जिले में अनुकंपा के आधार पर नियुक्त हुए कर्मियों के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने का आह्वान किया गया है। यह मांग अनुकंपा कर्मियों के हक के लिए ज़ोरदार ढंग से उठाई गई है।1
- आज, 30 जून 2026 को अरवल स्थित डॉ. बी. आर. अंबेडकर वाचनालय में बिहटा-अरवल-औरंगाबाद रेलवे संघर्ष समिति की एक समीक्षात्मक बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता मुख्य संयोजक मनोज सिंह यादव ने की। बैठक में बिहार सरकार और रेलवे अधिकारियों पर बिहटा-अरवल-औरंगाबाद रेल लाइन के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया गया, जिसके बाद समिति ने आंदोलन को फिर से तेज करने का निर्णय लिया है। समिति के अनुसार, बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के पत्रांक 1250, दिनांक 29.7.2025 के आलोक में रेलवे विभाग द्वारा, बिहार सरकार के पूर्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने 30 जून 2026 तक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी करने की बात कही थी। हालाँकि, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा अभी तक रेलवे लाइन का सीमांकन तक नहीं किया गया है, जो इस परियोजना के प्रति सरकार की उदासीनता को दर्शाता है। इस बैठक में आंदोलनकारियों ने यह तय किया है कि जिस प्रकार अरवल जिले को रेलवे लाइन से जोड़ने के लिए उन्हें लाठी और जेल खाने का काम करना पड़ा था, उसी प्रकार इस बार भी जेल भरो अभियान चलाया जाएगा और आंदोलन को और तेज किया जाएगा। साथ ही, रेलवे संघर्ष समिति ने हस्ताक्षर अभियान और पोस्टकार्ड अभियान को तेज करके रेल मंत्रालय को भेजने का भी निर्णय लिया है। बैठक को रेल आंदोलन के सूत्रधार मनोज सिंह यादव, धनंजय कुमार सिंह, रजनीश कुमार, भैरव कुमार, मंटू कुमार, ओम प्रकाश कुमार, गजेंद्र कुमार, उपेंद्र कुमार, कामेश्वर राजवंशी, कामेश्वर यादव और दर्जनों अन्य लोगों ने संबोधित किया। समिति ने जन आंदोलन को तेज करने हेतु कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।1
- रजौली पुलिस ने 29 जून से 30 जून के बीच शराब के भंडारण और धंधेबाजों के खिलाफ रजौली थाना क्षेत्र में एक विशेष छापेमारी अभियान चलाया। इस कार्रवाई के दौरान, पुलिस ने विभिन्न जगहों अंधरवारी, चरघरवा, परतौनिया और फगुनी से कुल 162 लीटर देसी महुआ शराब और 6 लीटर अंग्रेजी शराब बरामद की। थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर रणजीत कुमार ने बताया कि इस अभियान में शराब के साथ-साथ दो बाइक और एक मोबाइल फोन भी जब्त किया गया। हालांकि, पुलिस को देखते ही शराब धंधेबाज जंगली रास्ते का फायदा उठाकर मौके से फरार होने में सफल रहे। बरामद की गई शराब और जब्त की गई बाइकों को रजौली थाने में रखा गया है, और इस मामले में उत्पाद अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस फिलहाल फरार हुए शराब धंधेबाजों की पहचान करने में जुटी है।1