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पानी के लिए तरसा करमाटांड—सालों से बंद टंकी पर फूटा गुस्सा
रियल मोशन न्यूज़
पानी के लिए तरसा करमाटांड—सालों से बंद टंकी पर फूटा गुस्सा
More news from झारखंड and nearby areas
- मौत से पहले मृतक द्वारा हत्यारों का नाम जाहिर कर दिया गया है। गंभीर रूप से घायल तौफीक का बयान एक मोबाइल फोन में रिकॉर्ड किया गया है।फिलहाल पुलिस मामले की जांच पड़ताल कर रही है।1
- Post by जनता न्यूज़ 241
- Post by Niraj Kumar1
- बाघमारा. (प्रेम कुमार). बरोरा क्षेत्र के ए एम पी कोलियरी के सर्वें विभाग में कार्यरत कर्मी बच्चू रजवार (57) की तबियत बिगड़ने के बाद केंद्रीय अस्पताल धनबाद में ईलाज के दौरान मृत्यु हो गई. कर्मी की मृत्यु उपरांत उपस्थित बाघमारा विधायक शत्रुघ्न महतो एवं श्रमिक प्रतिनिधियों के पहल पर मृतक की पत्नी गीता देवी के द्वारा लिखित आवेदन के आधार पर उनके पुत्र रूप लाल रजवार को प्रोविजनल नियुक्ति दी गई. इस मौके पर मुख्य रूप से श्रमिक प्रतिनिधि संतोष गोराई, मंगल हेंब्रम, संजय सिंह, एन डी पांडे, अमरेंद्र कुमार, रामस्वरूप मिश्रा, मनोज साव, सुमन पांडे, विनोद मिस्त्री, कार्तिक रजवार, भोला रजवार, गणेश सिंह, प्रेम रजवार एवं परियोजना पदाधिकारी टी एस चौहान तथा अन्य अधिकारिगण उपस्थित थे.1
- Post by JH Media Dhn Zahir Khan Kcn Tv1
- एक भाई अपनी बहन के खाते से ₹19,300 निकालने के लिए इतना मजबूर हो गया कि उसने उसकी कब्र खोदकर कंकाल ही बैंक पहुंचा दिया… सिर्फ इसलिए क्योंकि सिस्टम को “सबूत” चाहिए था। ये घटना सिर्फ गरीबी नहीं, बल्कि हमारे सिस्टम की संवेदनहीनता और जागरूकता की कमी को भी उजागर करती है। आखिर कब तक आम इंसान नियमों और कागज़ों के बोझ तले यूं ही पिसता रहेगा? 👉 आप क्या सोचते हैं—गलती सिस्टम की है या जागरूकता की कमी? #ViralNews #OdishaNews #BreakingNews #GroundReality #IndiaNews #गरीबी #SystemFailure #Humanity #EmotionalStory #RealityCheck #NewsUpdate #SocialIssue #TrendingNews #IncredibleIndia1
- Post by Niraj Kumar1
- Post by जनता न्यूज़ 241
- यह घटना ओडिशा की है, जहाँ व्यवस्था की संवेदनहीनता ने एक भाई को ऐसा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया जिसे सुनकर रूह कांप जाए. एक भाई अपनी मृत बहन के खाते से महज 19,300 रुपये निकालने के लिए दर-दर भटकता रहा, लेकिन बैंक के नियम उसकी बेबसी पर भारी पड़ते रहे. जब उसने बार-बार मिन्नतें की कि उसकी बहन अब इस दुनिया में नहीं है, तब बैंक वालों ने उससे डेथ सर्टिफिकेट की मांग कर दी. वह गरीब कहाँ से अपनी मृत बहन का डेथ सर्टिफिकेट लाता. नियमों की इस जकड़न और सिस्टम की पथराई आँखों ने उस गरीब भाई जीतू मुंडा को इतना हताश कर दिया कि उसने अपनी बहन कलारा मुंडा की कब्र खोद डाली और उसका कंकाल लेकर 3 किलोमीटर दूर ओडिशा ग्रामीण बैंक की मल्लिपसी शाखा पहुँच गया. वह सिर्फ यह साबित करना चाहता था कि उसकी बहन की मौत की बात सही है और उसकी जरूरतें उससे भी बड़ी है. यह सच्चाई सिर्फ एक व्यक्ति की अज्ञानता की कहानी नहीं है, बल्कि हमारे समाज और प्रशासनिक तंत्र के उस खोखलेपन का आईना है, जहाँ कागजों की लिखावट के आगे इंसानी दर्द और संवेदनाएं दम तोड़ देती है. बाद में प्रशासन द्वारा उसे जल्द राशि दिलाने का आश्वासन दिया गया. इसके बाद कंकाल को उसने फिर से दफना दिया.1