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पूर्वी सिंहभूम के बिरसा नगर जोन 1 बी स्थित साधुडेरा रास्ते पर हाल ही में बनाए गए एक नाले को अवरुद्ध कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार, नाले के कंक्रीट के हिस्से को तोड़कर सड़क पर ही रख दिया गया है, जिससे मार्ग बाधित हो गया है। इसके अलावा, सड़क के दोनों ओर गाड़ियाँ खड़ी रहने से भी आवागमन में कठिनाई होती है। इस स्थिति के कारण नाले का पूरा पानी सड़क पर बहने लगता है, जिससे लोगों को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बताया गया है कि कई बार लोग इस मार्ग पर गिर चुके हैं, और कुछ मामलों में तो उनके सिर में भी चोट आई है। स्थानीय लोगों ने अधिकारियों से इस समस्या पर तत्काल ध्यान देने और आवश्यक कदम उठाने की अपील की है।

3 hrs ago
user_Prasenjit Banerjee
Prasenjit Banerjee
Golmuri-Cum-Jugsalai, East Singhbum•
3 hrs ago

पूर्वी सिंहभूम के बिरसा नगर जोन 1 बी स्थित साधुडेरा रास्ते पर हाल ही में बनाए गए एक नाले को अवरुद्ध कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार, नाले के कंक्रीट के हिस्से को तोड़कर सड़क पर ही रख दिया गया है, जिससे मार्ग बाधित हो गया है। इसके अलावा, सड़क के दोनों ओर गाड़ियाँ खड़ी रहने से भी आवागमन में कठिनाई होती है। इस स्थिति के कारण नाले का पूरा पानी सड़क पर बहने लगता है, जिससे लोगों को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बताया गया है कि कई बार लोग इस मार्ग पर गिर चुके हैं, और कुछ मामलों में तो उनके सिर में भी चोट आई है। स्थानीय लोगों ने अधिकारियों से इस समस्या पर तत्काल ध्यान देने और आवश्यक कदम उठाने की अपील की है।

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  • चाईबासा के सोनुआ और गोईलकेरा क्षेत्र में 50 से अधिक गाँवों को जलापूर्ति के लिए बन रही 58 करोड़ रुपये की योजना पिछले पाँच वर्षों से अधूरी पड़ी है, जबकि इस पर 57 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं। इस गंभीर लापरवाही से क्षेत्र के ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। इसी आक्रोश को व्यक्त करने के लिए आज बिला पंचायत के दर्जनों गाँवों से सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों ने चक्रधरपुर पहुँचकर हंडी और बाल्टी के साथ सड़क पर विरोध मार्च निकाला, रैली की और संबंधित विभाग के कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन किया। मौके पर ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने विभागीय अधिकारियों से मुलाकात कर योजना को जल्द से जल्द पूरा करने और गाँवों में जलापूर्ति शुरू करने की पुरजोर माँग की। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब योजना अधूरी है, तो 57 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान कैसे हो गया, और इसकी जाँच की माँग भी की। डॉ. दिनेश चंद्र बोयपाई, जो कुईड़ा पंचायत के मुखिया हैं, ने ग्रामीणों के इस आंदोलन का समर्थन किया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि योजना समय पर पूरी नहीं होती है, तो वे एक उग्र आंदोलन शुरू करेंगे।
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    चाईबासा के सोनुआ और गोईलकेरा क्षेत्र में 50 से अधिक गाँवों को जलापूर्ति के लिए बन रही 58 करोड़ रुपये की योजना पिछले पाँच वर्षों से अधूरी पड़ी है, जबकि इस पर 57 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं। इस गंभीर लापरवाही से क्षेत्र के ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। इसी आक्रोश को व्यक्त करने के लिए आज बिला पंचायत के दर्जनों गाँवों से सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों ने चक्रधरपुर पहुँचकर हंडी और बाल्टी के साथ सड़क पर विरोध मार्च निकाला, रैली की और संबंधित विभाग के कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन किया।

मौके पर ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने विभागीय अधिकारियों से मुलाकात कर योजना को जल्द से जल्द पूरा करने और गाँवों में जलापूर्ति शुरू करने की पुरजोर माँग की। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब योजना अधूरी है, तो 57 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान कैसे हो गया, और इसकी जाँच की माँग भी की। डॉ. दिनेश चंद्र बोयपाई, जो कुईड़ा पंचायत के मुखिया हैं, ने ग्रामीणों के इस आंदोलन का समर्थन किया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि योजना समय पर पूरी नहीं होती है, तो वे एक उग्र आंदोलन शुरू करेंगे।
    user_CITI LIVE Jharkhand
    CITI LIVE Jharkhand
    Photographer चाईबासा, पश्चिम सिंहभूम, झारखंड•
    5 hrs ago
  • पश्चिमी सिंहभूम के चाईबासा में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम की अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में मंझगांव थाना क्षेत्र में महिला शाहजहाँ परवीन की गला दबाकर हत्या करने के मामले में दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला न्यायालय द्वारा अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर सुनाया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्ष 2020 में मंझगांव थाना क्षेत्र की निवासी शाहजहाँ परवीन की गला दबाकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में मृतका के पति मो. शोएब उर्फ शेफ और उनके भाई मो. मेराज को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। घटना के संबंध में 29 नवंबर 2020 को मंझगांव थाना में कांड संख्या 31/2020 दर्ज किया गया था। पुलिस ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 304(बी)/34 और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया था। मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अतिरिक्त, अदालत ने दोनों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
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    पश्चिमी सिंहभूम के चाईबासा में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम की अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में मंझगांव थाना क्षेत्र में महिला शाहजहाँ परवीन की गला दबाकर हत्या करने के मामले में दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला न्यायालय द्वारा अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर सुनाया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्ष 2020 में मंझगांव थाना क्षेत्र की निवासी शाहजहाँ परवीन की गला दबाकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में मृतका के पति मो. शोएब उर्फ शेफ और उनके भाई मो. मेराज को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। घटना के संबंध में 29 नवंबर 2020 को मंझगांव थाना में कांड संख्या 31/2020 दर्ज किया गया था। पुलिस ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 304(बी)/34 और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया था।

मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अतिरिक्त, अदालत ने दोनों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
    user_कोल्हान ब्रेकिंग न्यूज
    कोल्हान ब्रेकिंग न्यूज
    Local News Reporter चाईबासा, पश्चिम सिंहभूम, झारखंड•
    8 hrs ago
  • पश्चिम सिंहभूम जिले के टोंटो प्रखंड स्थित टोपा बेड़ा गांव में विकास योजनाओं में गंभीर लापरवाही और घटिया निर्माण का मामला सामने आया है। यहां निर्माणाधीन पुलिया के निर्माण में ठेकेदार द्वारा तकनीकी मानकों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। ग्रामीणों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, पुलिया की ढलाई के दौरान कंक्रीट को मजबूत करने के लिए आवश्यक वाइब्रेटर मशीन का उपयोग नहीं किया गया, जिसके परिणामस्वरूप कंक्रीट ठीक से नहीं बैठ पाया है और पूरी संरचना में भारी 'हनीकॉम्बिंग' (गिट्टी का अलग थलग दिखना) हो गई है। स्थिति इतनी खराब है कि पुलिया के मुख्य लोहे के सरिए बिना किसी कंक्रीट सुरक्षा कवच के खुले दिखाई दे रहे हैं, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बरसात का मौसम नजदीक है और पानी के तेज बहाव तथा नमी के कारण खुले सरियों में तेजी से जंग लगेगी। यह पुलिया, जो करोड़ों की लागत से बनाई जा रही है, पहली ही तेज बारिश या बाढ़ में ढह सकती है। टोपा बेड़ा का यह इलाका मानसून के दौरान देव नदी और स्थानीय नालों के उफान के कारण अक्सर टापू में तब्दील हो जाता है। यदि यह कमजोर पुलिया टूट जाती है, तो टोपा बेड़ा गांव का संपर्क जिला मुख्यालय से पूरी तरह कट जाएगा और ग्रामीणों को आवागमन में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि अगर बरसात में पुलिया ढह गई तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा। इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए, ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने उपायुक्त (DC) और उप विकास आयुक्त (DDC) से इस मामले का तुरंत संज्ञान लेने का आग्रह किया है। ग्रामीणों की मांग है कि एक स्वतंत्र तकनीकी टीम भेजकर निर्माण कार्य की भौतिक जांच कराई जाए, इस घटिया और दोषपूर्ण हिस्से को तुरंत ध्वस्त कर मानकों के अनुसार दोबारा सही तरीके से ढलाई कराई जाए, और दोषी ठेकेदार तथा संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि सरकारी धन के दुरुपयोग को रोका जा सके।
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    पश्चिम सिंहभूम जिले के टोंटो प्रखंड स्थित टोपा बेड़ा गांव में विकास योजनाओं में गंभीर लापरवाही और घटिया निर्माण का मामला सामने आया है। यहां निर्माणाधीन पुलिया के निर्माण में ठेकेदार द्वारा तकनीकी मानकों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। ग्रामीणों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, पुलिया की ढलाई के दौरान कंक्रीट को मजबूत करने के लिए आवश्यक वाइब्रेटर मशीन का उपयोग नहीं किया गया, जिसके परिणामस्वरूप कंक्रीट ठीक से नहीं बैठ पाया है और पूरी संरचना में भारी 'हनीकॉम्बिंग' (गिट्टी का अलग थलग दिखना) हो गई है। स्थिति इतनी खराब है कि पुलिया के मुख्य लोहे के सरिए बिना किसी कंक्रीट सुरक्षा कवच के खुले दिखाई दे रहे हैं, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।

ग्रामीणों ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बरसात का मौसम नजदीक है और पानी के तेज बहाव तथा नमी के कारण खुले सरियों में तेजी से जंग लगेगी। यह पुलिया, जो करोड़ों की लागत से बनाई जा रही है, पहली ही तेज बारिश या बाढ़ में ढह सकती है। टोपा बेड़ा का यह इलाका मानसून के दौरान देव नदी और स्थानीय नालों के उफान के कारण अक्सर टापू में तब्दील हो जाता है। यदि यह कमजोर पुलिया टूट जाती है, तो टोपा बेड़ा गांव का संपर्क जिला मुख्यालय से पूरी तरह कट जाएगा और ग्रामीणों को आवागमन में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि अगर बरसात में पुलिया ढह गई तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा।

इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए, ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने उपायुक्त (DC) और उप विकास आयुक्त (DDC) से इस मामले का तुरंत संज्ञान लेने का आग्रह किया है। ग्रामीणों की मांग है कि एक स्वतंत्र तकनीकी टीम भेजकर निर्माण कार्य की भौतिक जांच कराई जाए, इस घटिया और दोषपूर्ण हिस्से को तुरंत ध्वस्त कर मानकों के अनुसार दोबारा सही तरीके से ढलाई कराई जाए, और दोषी ठेकेदार तथा संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि सरकारी धन के दुरुपयोग को रोका जा सके।
    user_Khandait G
    Khandait G
    Smart dealer झिंकपानी, पश्चिम सिंहभूम, झारखंड•
    6 hrs ago
  • sdtgdjhjjh shehgdd egh gas g gj tdhh dghdg sggds d dghff ckp me bhacha ka sir bada haihvgyuhbn egghth dbheb gcfdbhhr ggiyfi gregiu gffh hhujyf gfjoh fry gj ye eg r ghar hii kr tu ogriogfeu h yr r hii I gy ke ri ihh d fr h bg u ok yr er hii he to I ve jk ki I yr er ha sh ka sh ka sh ka sh hd st u he sh ish h gg sh ka gb cc good s ek jjajs sh ka acc sh ka sir s ghav gg signal ka
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    sdtgdjhjjh shehgdd egh gas g gj tdhh dghdg sggds d dghff
ckp me bhacha ka sir bada haihvgyuhbn egghth dbheb gcfdbhhr ggiyfi gregiu gffh hhujyf gfjoh fry gj ye eg r ghar hii kr tu ogriogfeu h yr r hii I gy ke ri ihh d fr h bg u ok yr er hii he to I ve jk ki I yr er ha sh ka sh ka sh ka sh hd st u he sh ish h gg sh ka gb cc good s ek jjajs sh ka acc sh ka sir s ghav gg signal ka
    user_Sushil Kumar suren
    Sushil Kumar suren
    चक्रधरपुर, पश्चिम सिंहभूम, झारखंड•
    7 hrs ago
  • झारखंड विधानसभा परिसर में सोमवार को राजनीतिक हलचल तेज हो गई, जब कांग्रेस विधायकों ने एनडीए समर्थित राज्यसभा उम्मीदवार परिमल नाथवानी के नामांकन पत्र को खारिज करने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि नाथवानी का नामांकन नियमों के अनुरूप नहीं है और इसकी वैधता की जांच होनी चाहिए। इसी मांग पर पार्टी के विधायक विधानसभा परिसर में धरने और नारेबाजी पर उतर आए, साथ ही निर्वाचन अधिकारियों से चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए हस्तक्षेप की अपील की। हैरानी की बात यह रही कि इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस को अपने ही गठबंधन के सहयोगी दलों, जैसे झामुमो और राजद, का खुला समर्थन नहीं मिला। वे इस कार्यक्रम से दूरी बनाते नजर आए, जिससे राजनीतिक गलियारों में महागठबंधन के भीतर सब कुछ ठीक न होने की चर्चाएं तेज हो गईं। विपक्षी दलों ने भी इस स्थिति को लेकर महागठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार के भीतर समन्वय की कमी साफ दिखाई दे रही है। प्रदर्शन के दौरान विधानसभा परिसर में सुरक्षा व्यवस्था के चलते कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई थी, जिससे कुछ मंत्रियों और विधायकों को भी निर्धारित मार्गों से गुजरने में परेशानी हुई। कुछ मंत्रियों को तो सुरक्षा कर्मियों ने आगे बढ़ने से रोक दिया, जिस पर उन्होंने नाराजगी जताई और व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। हालांकि, मंत्रियों की नाराजगी और कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के बावजूद स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया, और प्रशासन अपनी व्यवस्था पर कायम रहा। कांग्रेस की मांग पर तत्काल कोई निर्णय भी नहीं लिया गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम ने महागठबंधन के अंदरूनी समीकरणों को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि जिस मुद्दे को कांग्रेस ने गंभीरता से उठाया, उस पर सहयोगी दलों की चुप्पी ने कई राजनीतिक संकेत दिए हैं। कई पर्यवेक्षकों ने टिप्पणी की कि कांग्रेस का रुख सरकार के एक घटक दल के बजाय विपक्षी दल जैसा प्रतीत हो रहा था। दूसरी ओर, कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वे लोकतांत्रिक मूल्यों और चुनावी प्रक्रिया की शुचिता के लिए आवाज उठा रहे हैं, और यह मुद्दा किसी दल विशेष का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की पारदर्शिता से जुड़ा है। फिलहाल, इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है, और आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस अपने रुख पर कितनी मजबूती से कायम रहती है और महागठबंधन के अन्य दल इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।
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    झारखंड विधानसभा परिसर में सोमवार को राजनीतिक हलचल तेज हो गई, जब कांग्रेस विधायकों ने एनडीए समर्थित राज्यसभा उम्मीदवार परिमल नाथवानी के नामांकन पत्र को खारिज करने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि नाथवानी का नामांकन नियमों के अनुरूप नहीं है और इसकी वैधता की जांच होनी चाहिए। इसी मांग पर पार्टी के विधायक विधानसभा परिसर में धरने और नारेबाजी पर उतर आए, साथ ही निर्वाचन अधिकारियों से चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए हस्तक्षेप की अपील की।

हैरानी की बात यह रही कि इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस को अपने ही गठबंधन के सहयोगी दलों, जैसे झामुमो और राजद, का खुला समर्थन नहीं मिला। वे इस कार्यक्रम से दूरी बनाते नजर आए, जिससे राजनीतिक गलियारों में महागठबंधन के भीतर सब कुछ ठीक न होने की चर्चाएं तेज हो गईं। विपक्षी दलों ने भी इस स्थिति को लेकर महागठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार के भीतर समन्वय की कमी साफ दिखाई दे रही है।

प्रदर्शन के दौरान विधानसभा परिसर में सुरक्षा व्यवस्था के चलते कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई थी, जिससे कुछ मंत्रियों और विधायकों को भी निर्धारित मार्गों से गुजरने में परेशानी हुई। कुछ मंत्रियों को तो सुरक्षा कर्मियों ने आगे बढ़ने से रोक दिया, जिस पर उन्होंने नाराजगी जताई और व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। हालांकि, मंत्रियों की नाराजगी और कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के बावजूद स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया, और प्रशासन अपनी व्यवस्था पर कायम रहा। कांग्रेस की मांग पर तत्काल कोई निर्णय भी नहीं लिया गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम ने महागठबंधन के अंदरूनी समीकरणों को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि जिस मुद्दे को कांग्रेस ने गंभीरता से उठाया, उस पर सहयोगी दलों की चुप्पी ने कई राजनीतिक संकेत दिए हैं। कई पर्यवेक्षकों ने टिप्पणी की कि कांग्रेस का रुख सरकार के एक घटक दल के बजाय विपक्षी दल जैसा प्रतीत हो रहा था। दूसरी ओर, कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वे लोकतांत्रिक मूल्यों और चुनावी प्रक्रिया की शुचिता के लिए आवाज उठा रहे हैं, और यह मुद्दा किसी दल विशेष का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की पारदर्शिता से जुड़ा है। फिलहाल, इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है, और आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस अपने रुख पर कितनी मजबूती से कायम रहती है और महागठबंधन के अन्य दल इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।
    user_Jharkhand Halchal
    Jharkhand Halchal
    चंदनकियारी, बोकारो, झारखंड•
    7 hrs ago
  • आज बोकारो स्थित शिबू शेरेण टाउन हॉल में आजसू पार्टी का एक मिलन समारोह आयोजित किया गया।
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    आज बोकारो स्थित शिबू शेरेण टाउन हॉल में आजसू पार्टी का एक मिलन समारोह आयोजित किया गया।
    user_ARBIND KUMAR
    ARBIND KUMAR
    Teacher चास, बोकारो, झारखंड•
    14 hrs ago
  • चक्रधरपुर प्रखंड की कोलचोकरा पंचायत को 10 जून 2026 को आधिकारिक तौर पर बाल श्रम मुक्त क्षेत्र घोषित किया गया। यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम बाल अधिकार सुरक्षा मंच की सहायता से पंचायत सभागार के प्रांगण में आयोजित किया गया, जिसमें पंचायत के प्रतिनिधि, वार्ड सदस्य, महिला समूह के सदस्य, बच्चे, युवा और विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यगण प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। इस मौके पर नगर परिषद अध्यक्ष श्री सन्नी उरांव ने मुख्य अतिथि के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और फीता काटकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पंचायत के मुखिया श्री अरविंद तिग्गा ने की, जबकि बाल अधिकार सुरक्षा मंच, चक्रधरपुर के अध्यक्ष विजय समड भी मौजूद थे। यह घोषणा एक्सपायर सामाजिक संस्था के पिछले चार वर्षों के प्रयासों का परिणाम है, जिसने बाल अधिकारों की जानकारी देते हुए पंचायत के सभी बच्चों को विद्यालय से जोड़ने का काम किया है। अपने संबोधन में श्री सन्नी उरांव ने कोलचोकरा पंचायत के बाल श्रम मुक्त घोषित होने पर प्रसन्नता व्यक्त की और इस प्रयास को बाल अधिकार सुरक्षा मंच तथा एस्पायर संस्था की सराहनीय पहल बताया। उन्होंने उल्लेख किया कि यह चक्रधरपुर प्रखंड की दूसरी पंचायत है जिसे बाल श्रम मुक्त घोषित किया गया है, इससे पहले एक माह पूर्व केंदो पंचायत को भी यह दर्जा मिल चुका है। इसके अतिरिक्त, नगर क्षेत्र के तीन वार्डों को भी बाल श्रम मुक्त क्षेत्र घोषित किया जा चुका है। उरांव ने संस्था और बाल अधिकार सुरक्षा मंच के पदाधिकारियों को आगामी वर्ष तक हरसंभव आर्थिक और शारीरिक सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया, ताकि मिलकर पूरे प्रखंड को बाल श्रम मुक्त बनाया जा सके और हर बच्चे तक पहुंच बनाई जा सके। इस अवसर पर बाल अधिकार सुरक्षा मंच के अध्यक्ष विजय सर, मुखिया अरबिंद तिग्गा सर, चंदना प्रमाणिक, झूमा प्रधान, समिता महापात्र, संस्था के कार्यकर्ता सरोज, प्रदीप, अनिल, राजेश, चकन, मूचिया, महेंद्र, बरखा, पार्वती, झरना, धर्मेंद्र और बैसनवी सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।
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    चक्रधरपुर प्रखंड की कोलचोकरा पंचायत को 10 जून 2026 को आधिकारिक तौर पर बाल श्रम मुक्त क्षेत्र घोषित किया गया। यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम बाल अधिकार सुरक्षा मंच की सहायता से पंचायत सभागार के प्रांगण में आयोजित किया गया, जिसमें पंचायत के प्रतिनिधि, वार्ड सदस्य, महिला समूह के सदस्य, बच्चे, युवा और विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यगण प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

इस मौके पर नगर परिषद अध्यक्ष श्री सन्नी उरांव ने मुख्य अतिथि के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और फीता काटकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पंचायत के मुखिया श्री अरविंद तिग्गा ने की, जबकि बाल अधिकार सुरक्षा मंच, चक्रधरपुर के अध्यक्ष विजय समड भी मौजूद थे। यह घोषणा एक्सपायर सामाजिक संस्था के पिछले चार वर्षों के प्रयासों का परिणाम है, जिसने बाल अधिकारों की जानकारी देते हुए पंचायत के सभी बच्चों को विद्यालय से जोड़ने का काम किया है।

अपने संबोधन में श्री सन्नी उरांव ने कोलचोकरा पंचायत के बाल श्रम मुक्त घोषित होने पर प्रसन्नता व्यक्त की और इस प्रयास को बाल अधिकार सुरक्षा मंच तथा एस्पायर संस्था की सराहनीय पहल बताया। उन्होंने उल्लेख किया कि यह चक्रधरपुर प्रखंड की दूसरी पंचायत है जिसे बाल श्रम मुक्त घोषित किया गया है, इससे पहले एक माह पूर्व केंदो पंचायत को भी यह दर्जा मिल चुका है। इसके अतिरिक्त, नगर क्षेत्र के तीन वार्डों को भी बाल श्रम मुक्त क्षेत्र घोषित किया जा चुका है। उरांव ने संस्था और बाल अधिकार सुरक्षा मंच के पदाधिकारियों को आगामी वर्ष तक हरसंभव आर्थिक और शारीरिक सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया, ताकि मिलकर पूरे प्रखंड को बाल श्रम मुक्त बनाया जा सके और हर बच्चे तक पहुंच बनाई जा सके।

इस अवसर पर बाल अधिकार सुरक्षा मंच के अध्यक्ष विजय सर, मुखिया अरबिंद तिग्गा सर, चंदना प्रमाणिक, झूमा प्रधान, समिता महापात्र, संस्था के कार्यकर्ता सरोज, प्रदीप, अनिल, राजेश, चकन, मूचिया, महेंद्र, बरखा, पार्वती, झरना, धर्मेंद्र और बैसनवी सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।
    user_CITI LIVE Jharkhand
    CITI LIVE Jharkhand
    Photographer चाईबासा, पश्चिम सिंहभूम, झारखंड•
    6 hrs ago
  • रांची में एक बाइक सवार ने एक युवक से मोबाइल छीन लिया और वारदात को अंजाम देकर फरार हो गया। इस घटना के संबंध में मामला रांची के नजदीकी थाने में दर्ज कराया गया है।
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    रांची में एक बाइक सवार ने एक युवक से मोबाइल छीन लिया और वारदात को अंजाम देकर फरार हो गया। इस घटना के संबंध में मामला रांची के नजदीकी थाने में दर्ज कराया गया है।
    user_Dilip Karmali
    Dilip Karmali
    रिपोर्टर मो. 7857961735 Gola, Ramgarh•
    19 hrs ago
  • राजधानी रांची के ओरमांझी थाना क्षेत्र अंतर्गत नेवरी गोलचक्कर के पास बुधवार शाम एक दर्दनाक सड़क हादसे में स्कूटी सवार करीब 50 वर्षीय महिला नजमा खातून की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई, जबकि दुर्घटना को अंजाम देने वाला ट्रक चालक अपने वाहन सहित मौके से फरार हो गया। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अनगड़ा प्रखंड के हेंसल गांव निवासी मकबूल अंसारी अपनी पत्नी नजमा खातून के साथ अपनी बेटी के घर नयासरा गए थे। वहां से दोनों स्कूटी (JH 01DL 4389) से अपने घर हेंसल लौट रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि नेवरी गोलचक्कर के पास हेंसल टोल प्लाजा जाने वाले मार्ग पर मुड़ने के दौरान एक तेज रफ्तार सीएनजी गैस से भरे ट्रक ने उनकी स्कूटी को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर के बाद नजमा खातून स्कूटी से नीचे सड़क पर गिर गईं और ट्रक की चपेट में आने से उन्हें गंभीर चोटें आईं, जिसके कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण, स्थानीय लोग और राहगीर घटनास्थल पर जमा हो गए, जिससे कुछ समय के लिए सड़क पर आवागमन भी बाधित हो गया। बाद में स्थानीय लोगों और पुलिस के सहयोग से यातायात व्यवस्था सामान्य कराई गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेज दिया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा। पुलिस फरार ट्रक और उसके चालक की पहचान कर गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी है। इस असामयिक मौत से नजमा खातून के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे हेंसल गांव में शोक और मातम का माहौल व्याप्त है। ग्रामीणों ने प्रशासन से फरार चालक की शीघ्र गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को उचित सहायता प्रदान करने की मांग की है।
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    राजधानी रांची के ओरमांझी थाना क्षेत्र अंतर्गत नेवरी गोलचक्कर के पास बुधवार शाम एक दर्दनाक सड़क हादसे में स्कूटी सवार करीब 50 वर्षीय महिला नजमा खातून की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई, जबकि दुर्घटना को अंजाम देने वाला ट्रक चालक अपने वाहन सहित मौके से फरार हो गया। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अनगड़ा प्रखंड के हेंसल गांव निवासी मकबूल अंसारी अपनी पत्नी नजमा खातून के साथ अपनी बेटी के घर नयासरा गए थे। वहां से दोनों स्कूटी (JH 01DL 4389) से अपने घर हेंसल लौट रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि नेवरी गोलचक्कर के पास हेंसल टोल प्लाजा जाने वाले मार्ग पर मुड़ने के दौरान एक तेज रफ्तार सीएनजी गैस से भरे ट्रक ने उनकी स्कूटी को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर के बाद नजमा खातून स्कूटी से नीचे सड़क पर गिर गईं और ट्रक की चपेट में आने से उन्हें गंभीर चोटें आईं, जिसके कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

हादसे की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण, स्थानीय लोग और राहगीर घटनास्थल पर जमा हो गए, जिससे कुछ समय के लिए सड़क पर आवागमन भी बाधित हो गया। बाद में स्थानीय लोगों और पुलिस के सहयोग से यातायात व्यवस्था सामान्य कराई गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेज दिया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा। पुलिस फरार ट्रक और उसके चालक की पहचान कर गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी है। इस असामयिक मौत से नजमा खातून के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे हेंसल गांव में शोक और मातम का माहौल व्याप्त है। ग्रामीणों ने प्रशासन से फरार चालक की शीघ्र गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को उचित सहायता प्रदान करने की मांग की है।
    user_Sahil
    Sahil
    Local News Reporter ओरमांझी, रांची, झारखंड•
    1 hr ago
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