पश्चिम सिंहभूम जिले के टोंटो प्रखंड स्थित टोपा बेड़ा गांव में विकास योजनाओं में गंभीर लापरवाही और घटिया निर्माण का मामला सामने आया है। यहां निर्माणाधीन पुलिया के निर्माण में ठेकेदार द्वारा तकनीकी मानकों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। ग्रामीणों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, पुलिया की ढलाई के दौरान कंक्रीट को मजबूत करने के लिए आवश्यक वाइब्रेटर मशीन का उपयोग नहीं किया गया, जिसके परिणामस्वरूप कंक्रीट ठीक से नहीं बैठ पाया है और पूरी संरचना में भारी 'हनीकॉम्बिंग' (गिट्टी का अलग थलग दिखना) हो गई है। स्थिति इतनी खराब है कि पुलिया के मुख्य लोहे के सरिए बिना किसी कंक्रीट सुरक्षा कवच के खुले दिखाई दे रहे हैं, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बरसात का मौसम नजदीक है और पानी के तेज बहाव तथा नमी के कारण खुले सरियों में तेजी से जंग लगेगी। यह पुलिया, जो करोड़ों की लागत से बनाई जा रही है, पहली ही तेज बारिश या बाढ़ में ढह सकती है। टोपा बेड़ा का यह इलाका मानसून के दौरान देव नदी और स्थानीय नालों के उफान के कारण अक्सर टापू में तब्दील हो जाता है। यदि यह कमजोर पुलिया टूट जाती है, तो टोपा बेड़ा गांव का संपर्क जिला मुख्यालय से पूरी तरह कट जाएगा और ग्रामीणों को आवागमन में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि अगर बरसात में पुलिया ढह गई तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा। इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए, ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने उपायुक्त (DC) और उप विकास आयुक्त (DDC) से इस मामले का तुरंत संज्ञान लेने का आग्रह किया है। ग्रामीणों की मांग है कि एक स्वतंत्र तकनीकी टीम भेजकर निर्माण कार्य की भौतिक जांच कराई जाए, इस घटिया और दोषपूर्ण हिस्से को तुरंत ध्वस्त कर मानकों के अनुसार दोबारा सही तरीके से ढलाई कराई जाए, और दोषी ठेकेदार तथा संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि सरकारी धन के दुरुपयोग को रोका जा सके।
पश्चिम सिंहभूम जिले के टोंटो प्रखंड स्थित टोपा बेड़ा गांव में विकास योजनाओं में गंभीर लापरवाही और घटिया निर्माण का मामला सामने आया है। यहां निर्माणाधीन पुलिया के निर्माण में ठेकेदार द्वारा तकनीकी मानकों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। ग्रामीणों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, पुलिया की ढलाई के दौरान कंक्रीट को मजबूत करने के लिए आवश्यक वाइब्रेटर मशीन का उपयोग नहीं किया गया, जिसके परिणामस्वरूप कंक्रीट ठीक से नहीं बैठ पाया है और पूरी संरचना में भारी 'हनीकॉम्बिंग' (गिट्टी का
अलग थलग दिखना) हो गई है। स्थिति इतनी खराब है कि पुलिया के मुख्य लोहे के सरिए बिना किसी कंक्रीट सुरक्षा कवच के खुले दिखाई दे रहे हैं, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बरसात का मौसम नजदीक है और पानी के तेज बहाव तथा नमी के कारण खुले सरियों में तेजी से जंग लगेगी। यह पुलिया, जो करोड़ों की लागत से बनाई जा रही है, पहली ही तेज बारिश या बाढ़ में ढह
सकती है। टोपा बेड़ा का यह इलाका मानसून के दौरान देव नदी और स्थानीय नालों के उफान के कारण अक्सर टापू में तब्दील हो जाता है। यदि यह कमजोर पुलिया टूट जाती है, तो टोपा बेड़ा गांव का संपर्क जिला मुख्यालय से पूरी तरह कट जाएगा और ग्रामीणों को आवागमन में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि अगर बरसात में पुलिया ढह गई तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा। इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए, ग्रामीणों ने जिला प्रशासन
से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने उपायुक्त (DC) और उप विकास आयुक्त (DDC) से इस मामले का तुरंत संज्ञान लेने का आग्रह किया है। ग्रामीणों की मांग है कि एक स्वतंत्र तकनीकी टीम भेजकर निर्माण कार्य की भौतिक जांच कराई जाए, इस घटिया और दोषपूर्ण हिस्से को तुरंत ध्वस्त कर मानकों के अनुसार दोबारा सही तरीके से ढलाई कराई जाए, और दोषी ठेकेदार तथा संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि सरकारी धन के दुरुपयोग को रोका जा सके।
- Parshuram LaguriTonto, West Singhbhumबहुत kharab dalai3 hrs ago
- Parshuram LaguriTonto, West Singhbhumबहुत dalai3 hrs ago
- पश्चिम सिंहभूम जिले के टोंटो प्रखंड स्थित टोपा बेड़ा गांव में विकास योजनाओं में गंभीर लापरवाही और घटिया निर्माण का मामला सामने आया है। यहां निर्माणाधीन पुलिया के निर्माण में ठेकेदार द्वारा तकनीकी मानकों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। ग्रामीणों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, पुलिया की ढलाई के दौरान कंक्रीट को मजबूत करने के लिए आवश्यक वाइब्रेटर मशीन का उपयोग नहीं किया गया, जिसके परिणामस्वरूप कंक्रीट ठीक से नहीं बैठ पाया है और पूरी संरचना में भारी 'हनीकॉम्बिंग' (गिट्टी का अलग थलग दिखना) हो गई है। स्थिति इतनी खराब है कि पुलिया के मुख्य लोहे के सरिए बिना किसी कंक्रीट सुरक्षा कवच के खुले दिखाई दे रहे हैं, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बरसात का मौसम नजदीक है और पानी के तेज बहाव तथा नमी के कारण खुले सरियों में तेजी से जंग लगेगी। यह पुलिया, जो करोड़ों की लागत से बनाई जा रही है, पहली ही तेज बारिश या बाढ़ में ढह सकती है। टोपा बेड़ा का यह इलाका मानसून के दौरान देव नदी और स्थानीय नालों के उफान के कारण अक्सर टापू में तब्दील हो जाता है। यदि यह कमजोर पुलिया टूट जाती है, तो टोपा बेड़ा गांव का संपर्क जिला मुख्यालय से पूरी तरह कट जाएगा और ग्रामीणों को आवागमन में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि अगर बरसात में पुलिया ढह गई तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा। इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए, ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने उपायुक्त (DC) और उप विकास आयुक्त (DDC) से इस मामले का तुरंत संज्ञान लेने का आग्रह किया है। ग्रामीणों की मांग है कि एक स्वतंत्र तकनीकी टीम भेजकर निर्माण कार्य की भौतिक जांच कराई जाए, इस घटिया और दोषपूर्ण हिस्से को तुरंत ध्वस्त कर मानकों के अनुसार दोबारा सही तरीके से ढलाई कराई जाए, और दोषी ठेकेदार तथा संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि सरकारी धन के दुरुपयोग को रोका जा सके।4
- चतरा पुलिस ने सोशल मीडिया पर अपनी छवि धूमिल करने वाले स्वघोषित रंगदारों और रीलबाजों पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। प्रशासन ने ऐसे तत्वों के खिलाफ डंडा चलाया है। इस कड़ी में, प्रतापपुर थाना परिसर में घुसकर भोजपुरी गानों पर रील बनाकर फेसबुक और इंस्टाग्राम पर भौकाल जमाने वाले मुख्य आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस की गिरफ्त में आते ही इस 'रीलबाज माफिया' की सारी हेकड़ी खत्म हो गई। दरअसल, पिछले कुछ समय से प्रतापपुर और कुंदा थाने के भीतर सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किए जा रहे थे, जिस पर यह कार्रवाई हुई है।1
- गोइलकेरा स्टेशन के समीप एक दुखद घटना में एक युवक की मौत हो गई। बताया गया कि युवक टाटा इतवारी एक्सप्रेस की चपेट में आ गया, जिसके परिणामस्वरूप उसकी जान चली गई।1
- झारखंड के गोइलकेरा प्रखंड की बिला पंचायत के ग्रामीणों ने 5 वर्षों से अधूरी पड़ी जलापूर्ति योजना को लेकर बुधवार को चक्रधरपुर स्थित पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (PHED) के कार्यपालक अभियंता कार्यालय का घेराव किया। ग्रामीणों ने योजना को तुरंत पूरा करने और इसकी उच्च स्तरीय जाँच की मांग करते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि बिला पंचायत में जल जीवन मिशन के तहत लगभग 58.25 करोड़ रुपये की लागत से एक जलापूर्ति योजना शुरू की गई थी। इस योजना से गोइलकेरा और मनोहरपुर प्रखंड के 50 से अधिक गांवों के हजारों लोगों को लाभ मिलना था, लेकिन पाँच साल बीत जाने के बाद भी कार्य अधूरा पड़ा है। इसके कारण ग्रामीण आज भी गंभीर पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद कई गांवों में पाइपलाइन बिछाने का काम अधूरा है, जल मीनारों का निर्माण पूरा नहीं हुआ है और नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। इस स्थिति से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है, और वे नल-जल योजना में भ्रष्टाचार का आरोप भी लगा रहे हैं। ग्रामीणों ने विभाग को एक ज्ञापन सौंपकर योजना की निष्पक्ष जांच, अधूरे कार्यों को शीघ्र पूरा करने, दोषी अधिकारियों और संवेदकों पर कार्रवाई तथा सभी प्रभावित गांवों में नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और अधिक व्यापक रूप दिया जाएगा।1
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- खरसावां प्रखंड की रिडिंग पंचायत के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित रायजामा, मुनगा टोला और पिचांग टोला के ग्रामीणों को जल्द ही घर-घर स्वच्छ जल उपलब्ध कराया जाएगा। यह पहल विधायक दशरथ गागराई के प्रयासों का परिणाम है, जिनकी सक्रियता के बाद पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (PHED) की टीम ने इन गांवों का निरीक्षण किया है। विभाग के ए.ई. और जे.ई. ने संयुक्त रूप से पहाड़ के बीच से निकले तीन प्राकृतिक जल स्रोतों का गहन निरीक्षण किया। निरीक्षण के उपरांत, विभाग को निर्देश दिया गया है कि वह इन तीनों गांवों के लिए जल्द से जल्द विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करे। इस कार्य योजना के पूर्ण होने से ग्रामीणों को अपनी दैनिक जरूरतों के लिए पानी की किल्लत से निजात मिलेगी। विधायक दशरथ गागराई ने अपनी प्राथमिकता दोहराते हुए कहा कि जनता की समस्याओं का समाधान और हर घर तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना उनकी प्रतिबद्धता है, और इस योजना पर काम बहुत जल्द शुरू किया जाएगा।1
- पूर्वी सिंहभूम के बिरसा नगर जोन 1 बी स्थित साधुडेरा रास्ते पर हाल ही में बनाए गए एक नाले को अवरुद्ध कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार, नाले के कंक्रीट के हिस्से को तोड़कर सड़क पर ही रख दिया गया है, जिससे मार्ग बाधित हो गया है। इसके अलावा, सड़क के दोनों ओर गाड़ियाँ खड़ी रहने से भी आवागमन में कठिनाई होती है। इस स्थिति के कारण नाले का पूरा पानी सड़क पर बहने लगता है, जिससे लोगों को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बताया गया है कि कई बार लोग इस मार्ग पर गिर चुके हैं, और कुछ मामलों में तो उनके सिर में भी चोट आई है। स्थानीय लोगों ने अधिकारियों से इस समस्या पर तत्काल ध्यान देने और आवश्यक कदम उठाने की अपील की है।1
- चाईबासा के सोनुआ और गोईलकेरा क्षेत्र में 50 से अधिक गाँवों को जलापूर्ति के लिए बन रही 58 करोड़ रुपये की योजना पिछले पाँच वर्षों से अधूरी पड़ी है, जबकि इस पर 57 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं। इस गंभीर लापरवाही से क्षेत्र के ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। इसी आक्रोश को व्यक्त करने के लिए आज बिला पंचायत के दर्जनों गाँवों से सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों ने चक्रधरपुर पहुँचकर हंडी और बाल्टी के साथ सड़क पर विरोध मार्च निकाला, रैली की और संबंधित विभाग के कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन किया। मौके पर ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने विभागीय अधिकारियों से मुलाकात कर योजना को जल्द से जल्द पूरा करने और गाँवों में जलापूर्ति शुरू करने की पुरजोर माँग की। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब योजना अधूरी है, तो 57 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान कैसे हो गया, और इसकी जाँच की माँग भी की। डॉ. दिनेश चंद्र बोयपाई, जो कुईड़ा पंचायत के मुखिया हैं, ने ग्रामीणों के इस आंदोलन का समर्थन किया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि योजना समय पर पूरी नहीं होती है, तो वे एक उग्र आंदोलन शुरू करेंगे।1