आंगन उत्सव का शुभारंभ अच्छे कार्य के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सहायिका सुपरवाइजर केंद्रीय राज्य मंत्री द्वारा सम्मानित जगन्नाथ यादव महिला बाल विकाश केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने कहा कि आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ता बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और महिला सशक्तीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं,,उनके समर्पण से शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है,, कार्यक्रम में लाड़ली लक्ष्मी योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और संबल योजना से लाभान्वित महिलाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए शासन की योजनाओं के प्रति आभार व्यक्त किया,,इस दौरान महिला सशक्तीकरण, बच्चों के बेहतर पोषण और शिक्षा पर विशेष जोर दिया गया,, वक्ताओं ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं और उनके उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है,,सेवा और समर्पण के भाव से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिला कार्यकर्ताओं का उत्साहवर्धन करना और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाना रहा *धार-धामनोद से जगन्नाथ यादव
आंगन उत्सव का शुभारंभ अच्छे कार्य के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सहायिका सुपरवाइजर केंद्रीय राज्य मंत्री द्वारा सम्मानित जगन्नाथ यादव महिला बाल विकाश केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने कहा कि आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ता बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और महिला सशक्तीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं,,उनके समर्पण से शासन की
योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है,, कार्यक्रम में लाड़ली लक्ष्मी योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और संबल योजना से लाभान्वित महिलाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए शासन की योजनाओं के प्रति आभार व्यक्त किया,,इस दौरान महिला सशक्तीकरण, बच्चों के बेहतर पोषण और शिक्षा पर विशेष जोर दिया गया,,
वक्ताओं ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं और उनके उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है,,सेवा और समर्पण के भाव से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिला कार्यकर्ताओं का उत्साहवर्धन करना और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाना रहा *धार-धामनोद से जगन्नाथ यादव
- महू तहसील के सबसे बड़े गांव दतोदा के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का मामला सामने आया है। दतोदा स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पिछले 5 वर्षों से प्राचार्य का पद रिक्त है। यह विद्यालय एक संकुल की जिम्मेदारी भी निभा रहा है, ऐसे में लंबे समय से प्राचार्य की नियुक्ति नहीं होने के कारण विद्यालय के प्रशासनिक एवं शैक्षणिक कार्यों पर असर पड़ने की बात सामने आ रही है। प्राचार्य की नियुक्ति की मांग को लेकर (ACS) आदिवासी छात्र संगठन एवं (abvp)अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा उपप्राचार्य को ज्ञापन सौंपा गया है। छात्र संगठनों ने मांग की है कि सरकार एवं शिक्षा विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दतोदा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में जल्द से जल्द स्थायी प्राचार्य की नियुक्ति करें, ताकि विद्यालय का शैक्षणिक एवं प्रशासनिक संचालन बेहतर तरीके से हो सके। महू तहसील के सबसे बड़े गांव दतोदा के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का मामला सामने आया है। दतोदा स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पिछले 5 वर्षों से प्राचार्य का पद रिक्त है। यह विद्यालय एक संकुल की जिम्मेदारी भी निभा रहा है, ऐसे में लंबे समय से प्राचार्य की नियुक्ति नहीं होने के कारण विद्यालय के प्रशासनिक एवं शैक्षणिक कार्यों पर असर पड़ने की बात सामने आ रही है। प्राचार्य की नियुक्ति की मांग को लेकर (ACS) आदिवासी छात्र संगठन एवं (abvp)अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा उपप्राचार्य को ज्ञापन सौंपा गया है। छात्र संगठनों ने मांग की है कि सरकार एवं शिक्षा विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दतोदा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में जल्द से जल्द स्थायी प्राचार्य की नियुक्ति करें, ताकि विद्यालय का शैक्षणिक एवं प्रशासनिक संचालन बेहतर तरीके से हो सके।2
- धूमधाम से हुई बप्पा की विदाई बेटमा नगर में विसर्जन जुलूस निकाले गए धूमधाम से हुई बप्पा की विदाई बेटमा नगर में विसर्जन जुलूस निकाले गए दस दिवसीय गणेश उत्सव के समापन पर अनंत चतुर्थी के अवसर पर धूमधाम से गणपति बप्पा की विदाई की गई, इस अवसर पर बेटमा नगर में अलग-अलग स्थान से विसर्जन जुलूस निकाले गए जुलूस में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए एवं ढोल एवं तासे की थाप पर खूब थिरके वही छत्रपति शिवाजी मित्र मंडल द्वारा निकाले गए विसर्जन जुलूस में आदिवासी नृत्य मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा । जुलूस में श्रद्धालुओं ने गणपति बप्पा मोरया अगले बरस तू जल्दी आ के खूब जयकारे लगाए पूरा बेटमा नगर भक्ति मय हो गया। घरों में संस्थानों में एवं गली मोहल्लों में स्थापित गणेश जी की मूर्ति का विसर्जन छोटा बेटमा स्थित किशनपुरा तालाब पर किया गया। जहां पर हाइड्रोलिक क्रेन की मदद से बड़ी मूर्तियों का विसर्जन किया, तालाब पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु गणपति बप्पा के जयकारे लगाते हुए पहुंचे और श्रद्धा एवं भक्ति के साथ पूजा अर्चना कर बप्पा का विसर्जन किया । गणेश विसर्जन के दौरान लोगों की भारी भीड़ को देखते हुए स्थानीय पुलिस प्रशासन ने विशेष पुलिस बल लगा रखा था एवं स्थानीय गोताखोर भी नदी में गणेश जी की मूर्ति को विसर्जित करने में श्रद्धालुओं की मदद कर रहे थे ।1
- बड़वाह:गणपति विसर्जन के दौरान चोरल नदी में इंदौर के 14 वर्षीय किशोर की डूबने से मौत,नहाने के दौरान हुआ हादसा..1
- हम ये समझते थे कि हमारी इंदौर की यह सँस्कृति खत्म हो जाएगी मगर इंदौरी किसी भंगेड़ी से कम नही है वो अगर ठान ले तो उनके लिए कुछ असम्भव नही इंदौर, हाल फिलहाल में चिकमंगलूर चौराहे पर हु ओर आप जो घर मे बैठे है वो इस शहर के मिजाज का अंदाजा नहीं लगा सकते है क्यो की अब हम कूप मण्डूक हो चुके है ,थक गए या बोरिया गए है, मगर इस शहर की ऊर्जा अलग है ,माँ अहिल्या ओर माँ नर्मदा का जो आशीष ओर पुनयाई ओर आशीर्वाद है वो सदैव बना रहेगा, आप गाड़ियों का काफिला इस वीडियो में देखे, महिलाओं का हुजूम देखे, माताएं अपने बच्चों को इस सँस्कृति से रूबरू कराना चाह1 रही है और शासन इसे मिट्टी में मिलाने में तुला है, दुसरो के पाप गिना देने से अपने कम नही हो जाते बहरहाल मेने ऐसा उत्साह अपने बाल्यकाल में ही देखा था, आश्चर्य चकित हु में ,मेरी सोच के विपरीत जब माहौल देखा तो मुझे यह लिखना पड़ा कि आपके विचार नईं पीढ़ी से कतई मेल नहीं खाते है हम ,आप खारिज हो चुके है, दम्भ भरने वाले, सत्य को सत्य कहने वाले जिन्होंने चश्मे लगा रखे है ,बहरहाल सुकून मिला इंदौर की सँस्कृति को सास लेते हुवे माँ अहिल्या ओर माँ नर्मदा की कृपा बनी रहे बस🙏🏻✒️🦚🚩हर्षवाल3
- आनंद चवदस का झिलमिलता निकला ता हुआ निकाला कारवां जेल रोड इंदौर हर साल की तरह इस साल में 2026 में भी झंकियों का झिलमिलता निकला कारवा लाखों की तादाद में इंदौरी पहुंचे इसे देखने1
- इंदौर में 103 साल पुरानी परंपरा | किन्नर समाज करता है अनंत चतुर्दशी की झांकियों का स्वागत1
- गणेश उत्सव के अंतिम दिवस डांस एकेडमी के कलाकारों के आकर्षक नृत्यों की रही धूम..1
- इंदौर में अनंत चतुर्दशी का पर्व और झांकियों का परंपरागत आयोजन 100 साल से भी अधिक समय से होता आ रहा है। मालवा क्षेत्र की इस ऐतिहासिक परंपरा को देखने के लिए मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि दूसरे प्रदेशों से भी लोग इंदौर पहुंचते हैं। हर साल की तरह इस बार भी झांकियों और अखाड़ों का कारवां शहर के अलग-अलग स्थानों से निकलकर राजवाड़ा पहुंच रहा है। इंदौर की ऐतिहासिक झांकियां अपने-अपने स्थानों से निकलकर निर्धारित मार्ग से होते हुए राजवाड़ा पहुंचती हैं। रास्ते में कई स्थानों पर मंच बनाकर झांकियों और अखाड़ों का स्वागत किया जाता है। यहां कलाकारों और प्रतिभागियों का सम्मान भी किया जाता है। इस पूरे आयोजन में किन्नर समाज की भी विशेष भूमिका रही है। नंदलालपुरा क्षेत्र में किन्नर समाज द्वारा पिछले 103 वर्षों से झांकियों और अखाड़ों के स्वागत एवं सम्मान के लिए मंच लगाया जाता है। यहां हर साल झांकियों और अखाड़ों का गर्मजोशी से स्वागत किया जाता है। नंदलालपुरा गादी की महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी, बहुचर नंद गिरी महामंडलेश्वर, सोना मंगला नंद गिरी महामंडलेश्वर सहित किन्नर समाज की ओर से झांकियों और अखाड़ों का स्वागत किया जाता है इस दौरान पायल गुरु, शिमला गुरु, झूमर गुरु, गोल्डन गुरु और पूजा गुरु सहित किन्नर समाज के अन्य सदस्य भी मौजूद रहते हैं। इंदौर की यह ऐतिहासिक परंपरा धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक सहभागिता का अनूठा उदाहरण है। झांकियों और अखाड़ों के स्वागत के दौरान शहर में उत्सव और श्रद्धा का अलग ही माहौल देखने को मिलता है। Indore TV news 24x71
- इंदौर में अनंत चतुर्थी का पर्व परंपरागत आयोजन 100 वर्ष से भी अधिक समय से होता रहा है इंदौर में अनंत चतुर्दशी का पर्व और झांकियों का परंपरागत आयोजन 100 साल से भी अधिक समय से होता आ रहा है। मालवा क्षेत्र की इस ऐतिहासिक परंपरा को देखने के लिए मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि दूसरे प्रदेशों से भी लोग इंदौर पहुंचते हैं। हर साल की तरह इस बार भी झांकियों और अखाड़ों का कारवां शहर के अलग-अलग स्थानों से निकलकर राजवाड़ा पहुंच रहा है। इंदौर की ऐतिहासिक झांकियां अपने-अपने स्थानों से निकलकर निर्धारित मार्ग से होते हुए राजवाड़ा पहुंचती हैं। रास्ते में कई स्थानों पर मंच बनाकर झांकियों और अखाड़ों का स्वागत किया जाता है। यहां कलाकारों और प्रतिभागियों का सम्मान भी किया जाता है। इस पूरे आयोजन में किन्नर समाज की भी विशेष भूमिका रही है। नंदलालपुरा क्षेत्र में किन्नर समाज द्वारा पिछले 103 वर्षों से झांकियों और अखाड़ों के स्वागत एवं सम्मान के लिए मंच लगाया जाता है। यहां हर साल झांकियों और अखाड़ों का गर्मजोशी से स्वागत किया जाता है। नंदलालपुरा गादी की महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी, बहुचर नंद गिरी महामंडलेश्वर, सोना मंगला नंद गिरी महामंडलेश्वर सहित किन्नर समाज की ओर से झांकियों और अखाड़ों का स्वागत किया जाता है इस दौरान पायल गुरु, शिमला गुरु, झूमर गुरु, गोल्डन गुरु और पूजा गुरु सहित किन्नर समाज के अन्य सदस्य भी मौजूद रहते हैं। इंदौर की यह ऐतिहासिक परंपरा धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक सहभागिता का अनूठा उदाहरण है। झांकियों और अखाड़ों के स्वागत के दौरान शहर में उत्सव और श्रद्धा का अलग ही माहौल देखने को मिलता है।4