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हवाई यात्रियों को झटका, फ्लाइट में 60% फ्री सीट देने का फैसला टला, सरकार ने आदेश पर लगाई रोक हवाई यात्रियों को सस्ती और आरामदायक सीटों का तोहफा देने की योजना पर फिलहाल ब्रेक लग गया है. केंद्र सरकार ने एयरलाइनों को दिए गए उस निर्देश को फिलहाल स्थगित कर दिया है, जिसमें हर फ्लाइट की कम से कम 60 प्रतिशत सीटों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के उपलब्ध कराने की बात कही गई थी. यह नियम 20 अप्रैल, 2026 से लागू होने वाला था, लेकिन अब इसे अगले आदेश तक ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है. क्यों लिया गया यह फैसला? नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने यह कदम फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) और आकासा एयर जैसे प्रमुख एयरलाइन ऑपरेटरों की आपत्तियों के बाद उठाया है. एयरलाइनों ने सरकार को बताया कि अगर 60% सीटें फ्री कर दी गईं, तो उनके राजस्व पर भारी असर पड़ेगा. कंपनियों का तर्क है कि सीट सिलेक्शन से मिलने वाली 'अनसुलझी सेवाओं' की आय कम होने पर उन्हें विमान के मूल किराए में बढ़ोतरी करनी पड़ेगी. इससे आम यात्रियों के लिए हवाई सफर और महंगा हो जाएगा. साथ ही, कंपनियों ने इसे मौजूदा 'डीरेगुलेटेड टैरिफ व्यवस्था' (जहाँ किराया बाजार तय करता है) के खिलाफ बताया. फिलहाल क्या है स्थिति? वर्तमान में, अधिकांश एयरलाइनें अपनी फ्लाइट की केवल 20% सीटें ही फ्री में उपलब्ध कराती हैं. बाकी 80% सीटों के लिए यात्रियों को अपनी पसंद (जैसे- विंडो सीट या एक्स्ट्रा लेगरूम) के हिसाब से 200 रुपये से लेकर 2,100 रुपये तक अतिरिक्त चुकाने होते हैं. सरकार के इस नए फैसले का मतलब है कि फिलहाल यही पुरानी व्यवस्था जारी रहेगी. यात्रियों के लिए अभी भी क्या राहत है? भले ही 60% फ्री सीटों का नियम रुक गया हो, लेकिन मंत्रालय द्वारा 17 मार्च को जारी अन्य दिशा-निर्देश अभी भी लागू हैं: साथ बैठने की प्राथमिकता:एयरलाइनों को यह सुनिश्चित करना होगा कि एक ही PNR पर टिकट बुक करने वाले यात्रियों (जैसे परिवार या दोस्त) को एक साथ या आसपास की सीटें दी जाएं. पारदर्शिता: पालतू जानवरों, वाद्य यंत्रों या खेल के सामान जैसे अतिरिक्त सामान के लिए लिए जाने वाले शुल्क के बारे में एयरलाइनों को पूरी जानकारी स्पष्ट रूप से देनी होगी. भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार बन चुका है, जहाँ हर दिन 5 लाख से अधिक लोग सफर करते हैं. सरकार का कहना है कि वह यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के साथ-साथ एयरलाइन उद्योग की आर्थिक स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए इस मामले की "विस्तृत समीक्षा" करेगी.

3 hrs ago
user_Mohit Badtiya
Mohit Badtiya
Shahdara, New Delhi•
3 hrs ago

हवाई यात्रियों को झटका, फ्लाइट में 60% फ्री सीट देने का फैसला टला, सरकार ने आदेश पर लगाई रोक हवाई यात्रियों को सस्ती और आरामदायक सीटों का तोहफा देने की योजना पर फिलहाल ब्रेक लग गया है. केंद्र सरकार ने एयरलाइनों को दिए गए उस निर्देश को फिलहाल स्थगित कर दिया है, जिसमें हर फ्लाइट की कम से कम 60 प्रतिशत सीटों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के उपलब्ध कराने की बात कही गई थी. यह नियम 20 अप्रैल, 2026 से लागू होने वाला था, लेकिन अब इसे अगले आदेश तक ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है. क्यों लिया गया यह फैसला? नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने यह कदम फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) और आकासा एयर जैसे प्रमुख एयरलाइन ऑपरेटरों की आपत्तियों के बाद उठाया है. एयरलाइनों ने सरकार को बताया कि अगर 60% सीटें फ्री कर दी गईं, तो उनके राजस्व पर भारी असर पड़ेगा. कंपनियों का तर्क है कि सीट सिलेक्शन से मिलने वाली 'अनसुलझी सेवाओं' की आय कम होने पर उन्हें विमान के मूल किराए में बढ़ोतरी करनी पड़ेगी. इससे आम यात्रियों के लिए हवाई सफर और महंगा हो जाएगा. साथ ही, कंपनियों ने इसे मौजूदा 'डीरेगुलेटेड टैरिफ व्यवस्था' (जहाँ किराया बाजार तय करता है) के खिलाफ बताया. फिलहाल क्या है स्थिति? वर्तमान में, अधिकांश एयरलाइनें अपनी फ्लाइट की केवल 20% सीटें ही फ्री में उपलब्ध कराती हैं. बाकी 80% सीटों के लिए यात्रियों को अपनी पसंद (जैसे- विंडो सीट या एक्स्ट्रा लेगरूम) के हिसाब से 200 रुपये से लेकर 2,100 रुपये तक अतिरिक्त चुकाने होते हैं. सरकार के इस नए फैसले का मतलब है कि फिलहाल यही पुरानी व्यवस्था जारी रहेगी. यात्रियों के लिए अभी भी क्या राहत है? भले ही 60% फ्री सीटों का नियम रुक गया हो, लेकिन मंत्रालय द्वारा 17 मार्च को जारी अन्य दिशा-निर्देश अभी भी लागू हैं: साथ बैठने की प्राथमिकता:एयरलाइनों को यह सुनिश्चित करना होगा कि एक ही PNR पर टिकट बुक करने वाले यात्रियों (जैसे परिवार या दोस्त) को एक साथ या आसपास की सीटें दी जाएं. पारदर्शिता: पालतू जानवरों, वाद्य यंत्रों या खेल के सामान जैसे अतिरिक्त सामान के लिए लिए जाने वाले शुल्क के बारे में एयरलाइनों को पूरी जानकारी स्पष्ट रूप से देनी होगी. भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार बन चुका है, जहाँ हर दिन 5 लाख से अधिक लोग सफर करते हैं. सरकार का कहना है कि वह यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के साथ-साथ एयरलाइन उद्योग की आर्थिक स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए इस मामले की "विस्तृत समीक्षा" करेगी.

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    1
    “घायल हूं, इसलिए घातक हूं”... धुरंधर के दमदार अंदाज़ में राघव चड्ढा ने दिया खुद पर लगे आरोपों का जवाब...
#RaghavChadha #AAP #Politics  #Trending
    user_Gaurav verma
    Gaurav verma
    Administrative attorney करोल बाग, मध्य दिल्ली, दिल्ली•
    11 min ago
  • Post by न्यूज़ आइकॉन 24
    1
    Post by न्यूज़ आइकॉन 24
    user_न्यूज़ आइकॉन 24
    न्यूज़ आइकॉन 24
    Press advisory सीलमपुर, उत्तर पूर्वी दिल्ली, दिल्ली•
    45 min ago
  • Post by Sadhna news mp.Cg.rj.Naajim
    1
    Post by Sadhna news mp.Cg.rj.Naajim
    user_Sadhna news mp.Cg.rj.Naajim
    Sadhna news mp.Cg.rj.Naajim
    Local News Reporter सीलमपुर, उत्तर पूर्वी दिल्ली, दिल्ली•
    1 hr ago
  • नासिक के 'कैप्टन' और ज्योतिषी को लेकर चौंकाने वाले खुलासे, जानें स्वयंभू भगवान अशोक खरात की कहां कितनी प्रॉपर्टी ? क्या ज्योतिषी बदनाम हुई? देश विदेश के जाने माने ज्योतिषाचार्य- डॉ.जीएस ढिल्लों, डॉ.पुनीत भोला और डॉ पुष्पलता जायसवाल से जानिए राजपथ न्यूज़ पर....
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    user_Rajpath News
    Rajpath News
    महात्मा ज्योति राव फ़ुले मार्ग एरिया, नई दिल्ली•
    3 hrs ago
  • हवाई यात्रियों को झटका, फ्लाइट में 60% फ्री सीट देने का फैसला टला, सरकार ने आदेश पर लगाई रोक हवाई यात्रियों को सस्ती और आरामदायक सीटों का तोहफा देने की योजना पर फिलहाल ब्रेक लग गया है. केंद्र सरकार ने एयरलाइनों को दिए गए उस निर्देश को फिलहाल स्थगित कर दिया है, जिसमें हर फ्लाइट की कम से कम 60 प्रतिशत सीटों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के उपलब्ध कराने की बात कही गई थी. यह नियम 20 अप्रैल, 2026 से लागू होने वाला था, लेकिन अब इसे अगले आदेश तक ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है. क्यों लिया गया यह फैसला? नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने यह कदम फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) और आकासा एयर जैसे प्रमुख एयरलाइन ऑपरेटरों की आपत्तियों के बाद उठाया है. एयरलाइनों ने सरकार को बताया कि अगर 60% सीटें फ्री कर दी गईं, तो उनके राजस्व पर भारी असर पड़ेगा. कंपनियों का तर्क है कि सीट सिलेक्शन से मिलने वाली 'अनसुलझी सेवाओं' की आय कम होने पर उन्हें विमान के मूल किराए में बढ़ोतरी करनी पड़ेगी. इससे आम यात्रियों के लिए हवाई सफर और महंगा हो जाएगा. साथ ही, कंपनियों ने इसे मौजूदा 'डीरेगुलेटेड टैरिफ व्यवस्था' (जहाँ किराया बाजार तय करता है) के खिलाफ बताया. फिलहाल क्या है स्थिति? वर्तमान में, अधिकांश एयरलाइनें अपनी फ्लाइट की केवल 20% सीटें ही फ्री में उपलब्ध कराती हैं. बाकी 80% सीटों के लिए यात्रियों को अपनी पसंद (जैसे- विंडो सीट या एक्स्ट्रा लेगरूम) के हिसाब से 200 रुपये से लेकर 2,100 रुपये तक अतिरिक्त चुकाने होते हैं. सरकार के इस नए फैसले का मतलब है कि फिलहाल यही पुरानी व्यवस्था जारी रहेगी. यात्रियों के लिए अभी भी क्या राहत है? भले ही 60% फ्री सीटों का नियम रुक गया हो, लेकिन मंत्रालय द्वारा 17 मार्च को जारी अन्य दिशा-निर्देश अभी भी लागू हैं: साथ बैठने की प्राथमिकता:एयरलाइनों को यह सुनिश्चित करना होगा कि एक ही PNR पर टिकट बुक करने वाले यात्रियों (जैसे परिवार या दोस्त) को एक साथ या आसपास की सीटें दी जाएं. पारदर्शिता: पालतू जानवरों, वाद्य यंत्रों या खेल के सामान जैसे अतिरिक्त सामान के लिए लिए जाने वाले शुल्क के बारे में एयरलाइनों को पूरी जानकारी स्पष्ट रूप से देनी होगी. भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार बन चुका है, जहाँ हर दिन 5 लाख से अधिक लोग सफर करते हैं. सरकार का कहना है कि वह यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के साथ-साथ एयरलाइन उद्योग की आर्थिक स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए इस मामले की "विस्तृत समीक्षा" करेगी.
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    हवाई यात्रियों को झटका, फ्लाइट में 60% फ्री सीट देने का फैसला टला, सरकार ने आदेश पर लगाई रोक
हवाई यात्रियों को सस्ती और आरामदायक सीटों का तोहफा देने की योजना पर फिलहाल ब्रेक लग गया है. केंद्र सरकार ने एयरलाइनों को दिए गए उस निर्देश को फिलहाल स्थगित कर दिया है, जिसमें हर फ्लाइट की कम से कम 60 प्रतिशत सीटों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के उपलब्ध कराने की बात कही गई थी. यह नियम 20 अप्रैल, 2026 से लागू होने वाला था, लेकिन अब इसे अगले आदेश तक ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है.
क्यों लिया गया यह फैसला?
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने यह कदम फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) और आकासा एयर जैसे प्रमुख एयरलाइन ऑपरेटरों की आपत्तियों के बाद उठाया है. एयरलाइनों ने सरकार को बताया कि अगर 60% सीटें फ्री कर दी गईं, तो उनके राजस्व पर भारी असर पड़ेगा.
कंपनियों का तर्क है कि सीट सिलेक्शन से मिलने वाली 'अनसुलझी सेवाओं' की आय कम होने पर उन्हें विमान के मूल किराए में बढ़ोतरी करनी पड़ेगी. इससे आम यात्रियों के लिए हवाई सफर और महंगा हो जाएगा. साथ ही, कंपनियों ने इसे मौजूदा 'डीरेगुलेटेड टैरिफ व्यवस्था' (जहाँ किराया बाजार तय करता है) के खिलाफ बताया.
फिलहाल क्या है स्थिति?
वर्तमान में, अधिकांश एयरलाइनें अपनी फ्लाइट की केवल 20% सीटें ही फ्री में उपलब्ध कराती हैं. बाकी 80% सीटों के लिए यात्रियों को अपनी पसंद (जैसे- विंडो सीट या एक्स्ट्रा लेगरूम) के हिसाब से 200 रुपये से लेकर 2,100 रुपये तक अतिरिक्त चुकाने होते हैं. सरकार के इस नए फैसले का मतलब है कि फिलहाल यही पुरानी व्यवस्था जारी रहेगी.
यात्रियों के लिए अभी भी क्या राहत है?
भले ही 60% फ्री सीटों का नियम रुक गया हो, लेकिन मंत्रालय द्वारा 17 मार्च को जारी अन्य दिशा-निर्देश अभी भी लागू हैं:
साथ बैठने की प्राथमिकता:एयरलाइनों को यह सुनिश्चित करना होगा कि एक ही PNR पर टिकट बुक करने वाले यात्रियों (जैसे परिवार या दोस्त) को एक साथ या आसपास की सीटें दी जाएं.
पारदर्शिता: पालतू जानवरों, वाद्य यंत्रों या खेल के सामान जैसे अतिरिक्त सामान के लिए लिए जाने वाले शुल्क के बारे में एयरलाइनों को पूरी जानकारी स्पष्ट रूप से देनी होगी.
भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार बन चुका है, जहाँ हर दिन 5 लाख से अधिक लोग सफर करते हैं. सरकार का कहना है कि वह यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के साथ-साथ एयरलाइन उद्योग की आर्थिक स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए इस मामले की "विस्तृत समीक्षा" करेगी.
    user_Mohit Badtiya
    Mohit Badtiya
    Shahdara, New Delhi•
    3 hrs ago
  • राजधानी दिल्ली रोहिणी सेक्टर 16 में सिख समुदाय के साथ मारपीट सिख समुदाय में आक्रोश
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    राजधानी दिल्ली रोहिणी सेक्टर 16 में सिख समुदाय के साथ मारपीट सिख समुदाय में आक्रोश
    user_भारत हिंदी खबर
    भारत हिंदी खबर
    Local News Reporter सीलमपुर, उत्तर पूर्वी दिल्ली, दिल्ली•
    3 hrs ago
  • अलीगढ़ के अंदर बारिश हुई वीडियो दानिश सच का साथ धन्यवाद🙏🙏
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    अलीगढ़ के अंदर बारिश हुई वीडियो दानिश सच का साथ धन्यवाद🙏🙏
    user_Danish Khan
    Danish Khan
    Dancer सिविल लाइन्स, मध्य दिल्ली, दिल्ली•
    5 hrs ago
  • पाकिस्तान के कराची में एक ऐतिहासिक इमारत की दीवारों पर बनी हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया गया है, जिससे अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय में नाराजगी है. इस घटना पर अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है. पाकिस्तान में धार्मिक स्थलों और प्रतीकों पर हमलों की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं. पंजाब प्रांत के बहावलपुर जिले के अल्पसंख्यक अधिकार संगठन के चेयरमैन शिव काछी ने इस घटना की कड़ी निंदा की है. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ इमारत को नुकसान नहीं, बल्कि धार्मिक सद्भाव, सांस्कृतिक विरासत और अल्पसंख्यक समुदाय की भावनाओं पर हमला है. #Pakistan #Karachi #HinduCommunity #ReligiousFreedom
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    पाकिस्तान के कराची में एक ऐतिहासिक इमारत की दीवारों पर बनी हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया गया है, जिससे अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय में नाराजगी है. इस घटना पर अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है. पाकिस्तान में धार्मिक स्थलों और प्रतीकों पर हमलों की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं.
पंजाब प्रांत के बहावलपुर जिले के अल्पसंख्यक अधिकार संगठन के चेयरमैन शिव काछी ने इस घटना की कड़ी निंदा की है. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ इमारत को नुकसान नहीं, बल्कि धार्मिक सद्भाव, सांस्कृतिक विरासत और अल्पसंख्यक समुदाय की भावनाओं पर हमला है.
#Pakistan #Karachi #HinduCommunity #ReligiousFreedom
    user_Gaurav verma
    Gaurav verma
    Administrative attorney करोल बाग, मध्य दिल्ली, दिल्ली•
    32 min ago
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