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सीतापुर के सिधौली तहसील में बुधवार को एंटी करप्शन टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एसडीएम कार्यालय में तैनात पेशकार को 1 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। बताया जा रहा है कि एक पीड़ित द्वारा दाखिल-खारिज निरस्त किए जाने के मामले में उप जिलाधिकारी कार्यालय में आवेदन किया गया था। इसी मामले में कार्रवाई के नाम पर आरोपी पेशकार द्वारा रिश्वत की मांग की गई थी। शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन टीम ने जाल बिछाया और पीड़ित के साथ तहसील पहुंचकर आरोपी को रंगे हाथ पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान आरोपी को हिरासत में लेकर टीम अपने साथ ले गई। इस अचानक हुई कार्रवाई से तहसील परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। अधिकारियों के अनुसार, पूरी कार्रवाई के बाद विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी।

3 hrs ago
user_Sharafat saifi
Sharafat saifi
हापुड़, हापुड़, उत्तर प्रदेश•
3 hrs ago

सीतापुर के सिधौली तहसील में बुधवार को एंटी करप्शन टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एसडीएम कार्यालय में तैनात पेशकार को 1 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। बताया जा रहा है कि एक पीड़ित द्वारा दाखिल-खारिज निरस्त किए जाने के मामले में उप जिलाधिकारी कार्यालय में आवेदन किया गया था। इसी मामले में कार्रवाई के नाम पर आरोपी पेशकार द्वारा रिश्वत की मांग की गई थी। शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन टीम ने जाल बिछाया और पीड़ित के साथ तहसील पहुंचकर आरोपी को रंगे हाथ पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान आरोपी को हिरासत में लेकर टीम अपने साथ ले गई। इस अचानक हुई कार्रवाई से तहसील परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। अधिकारियों के अनुसार, पूरी कार्रवाई के बाद विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी।

More news from Uttar Pradesh and nearby areas
  • Post by गौरव प्रताप कोरी
    1
    Post by गौरव प्रताप कोरी
    user_गौरव प्रताप कोरी
    गौरव प्रताप कोरी
    Local Politician Hapur, Uttar Pradesh•
    21 hrs ago
  • क्या आप अपना Voter ID PVC Card घर बैठे मंगवाना चाहते हैं? 🤔 तो इस वीडियो में आपको पूरा प्रोसेस step-by-step बताया गया है। 👉 अब आप बिना किसी सरकारी ऑफिस जाए 👉 अपने मोबाइल से ही 👉 Voter Card PVC Card Order कर सकते हैं और सबसे खास बात — 👉 ये process बिलकुल फ्री है 💯 📌 इस वीडियो में क्या सीखेंगे: Voter ID PVC Card क्या है Online Order कैसे करें कौन-कौन से documents लगेंगे कितने दिन में card घर पहुंचेगा 👉 पूरा वीडियो जरूर देखें ताकि कोई गलती न हो। | प्रमोद कश्यप बागपत जिला प्रभारी निषाद पार्टी
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    क्या आप अपना Voter ID PVC Card घर बैठे मंगवाना चाहते हैं? 🤔 तो इस वीडियो में आपको पूरा प्रोसेस step-by-step बताया गया है। 👉 अब आप बिना किसी सरकारी ऑफिस जाए 👉 अपने मोबाइल से ही 👉 Voter Card PVC Card Order कर सकते हैं और सबसे खास बात — 👉 ये process बिलकुल फ्री है 💯 📌 इस वीडियो में क्या सीखेंगे: Voter ID PVC Card क्या है Online Order कैसे करें कौन-कौन से documents लगेंगे कितने दिन में card घर पहुंचेगा 👉 पूरा वीडियो जरूर देखें ताकि कोई गलती न हो। |
प्रमोद कश्यप बागपत जिला प्रभारी निषाद पार्टी
    user_प्रमोद कुमार कश्यप
    प्रमोद कुमार कश्यप
    Farmer मोदीनगर, गाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश•
    16 hrs ago
  • Post by द कहर न्यूज़ एजेंसी
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    Post by द कहर न्यूज़ एजेंसी
    user_द कहर न्यूज़ एजेंसी
    द कहर न्यूज़ एजेंसी
    Journalist Ghaziabad, Uttar Pradesh•
    25 min ago
  • गाज़ियाबाद की आग: हादसा या सुनियोजित साज़िश,आसपास के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं और हालिया गिरफ्तारियों के साथ किसी संभावित कनेक्शन को भी परखा जा रहा है। कबाड़ियों के गोदाम एवं झुग्गी-झोपड़ियों में विशेष रिपोर्ट: पवन सूर्यवंशी ब्यूरो चीफ ऑल एनसीआर गाज़ियाबाद के इंदिरापुरम थाना क्षेत्र के अंतर्गत कनावनी गांव के पास स्थित कबाड़े के गोदाम झुग्गी-झोपड़ियों में लगी हालिया भीषण आग ने एक बार फिर OGW नेटवर्क और झुग्गी क्लस्टर पर उठते गंभीर सवाल,उन सवालों को जिंदा कर दिया है, जो पिछले कई वर्षों से दबे हुए थे, लेकिन हर नई घटना के साथ फिर सतह पर आ जाते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि एक ऐसा सिलसिला है जो समय-समय पर दोहराया जाता रहा है और हर बार कारण अलग-अलग बताकर मामला ठंडा कर दिया जाता है। कभी इसे शॉर्ट सर्किट कहा जाता है, कभी सिलेंडर ब्लास्ट, तो कभी गर्मी का असर, लेकिन लगातार दोहराती घटनाएं अब संयोग से ज्यादा कुछ प्रतीत होने लगी हैं। कनावनी, इंदिरापुरम, कौशांबी से लेकर गाजीपुर मंडी और आसपास के डेरी क्षेत्रों तक फैले झुग्गी क्लस्टर्स को अगर एक साथ जोड़कर देखा जाए, तो एक ऐसा भूगोल सामने आता है जहां आबादी घनी है, निगरानी सीमित है और पहचान सत्यापन की प्रक्रिया कमजोर मानी जाती है। ऐसे क्षेत्रों में किसी भी बाहरी व्यक्ति के लिए लंबे समय तक बिना ध्यान आकर्षित किए रहना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है। यही वह बिंदु है जहां से सुरक्षा एजेंसियों की चिंता शुरू होती है, खासकर तब जब हाल के दिनों में कौशांबी क्षेत्र से कुछ संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों की गिरफ्तारी की खबरें सामने आई हों और “ओवर ग्राउंड वर्कर” यानी OGW नेटवर्क की चर्चा तेज हुई हो। OGW शब्द आमतौर पर उन लोगों के लिए इस्तेमाल होता है जो किसी बड़े नेटवर्क के लिए जमीन पर रहकर सहायता प्रदान करते हैं—चाहे वह लॉजिस्टिक सपोर्ट हो, सूचना जुटाना हो या अस्थायी ठिकाने उपलब्ध कराना। हालांकि गाज़ियाबाद की इन घटनाओं को सीधे किसी ऐसे नेटवर्क से जोड़ना अभी जांच का विषय है, लेकिन स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों को पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। खासतौर पर तब, जब इन कबाड़ा के गोदाम एवं झुग्गी क्लस्टर्स के आसपास CRPF और PAC जैसे सुरक्षा बलों के कैंप मौजूद हों, जो इन इलाकों को रणनीतिक दृष्टि से संवेदनशील बनाते हैं। स्थानीय चर्चाओं में एक और पहलू सामने आता है—तकनीक का उपयोग। कुछ लोगों का दावा है कि संदिग्ध तत्व छोटे सोलर उपकरणों या कैमरों का इस्तेमाल कर सकते हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी, आधुनिक दौर में निगरानी के साधनों के छोटे और सस्ते हो जाने के कारण इस संभावना को पूरी तरह खारिज भी नहीं किया जा सकता। यदि इस दिशा में कोई ठोस तथ्य सामने आते हैं, तो यह मामला केवल स्थानीय अपराध की सीमा से बाहर निकलकर एक बड़े सुरक्षा आयाम में प्रवेश कर सकता है। इन सभी सवालों के बीच सबसे महत्वपूर्ण और चिंताजनक पहलू बार-बार लगने वाली आग है। हर घटना के बाद झुग्गियां पूरी तरह जलकर खाक हो जाती हैं, जिससे वहां रहने वाले लोगों के दस्तावेज, पहचान पत्र और अन्य साक्ष्य भी नष्ट हो जाते हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह केवल दुर्घटना है, या फिर अनजाने में या जानबूझकर ऐसी स्थिति बन रही है जहां हर बार सब कुछ “रीसेट” हो जाता है। यह केवल एक संदेह है, लेकिन जांच के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा जरूर हो सकती है। हाल ही में लखनऊ में सामने आए एक जासूसी से जुड़े मामले के बाद वहां भी झुग्गी क्षेत्र में आग लगने की घटना ने कई लोगों को चौंकाया था। अब गाज़ियाबाद में इसी तरह की घटना के बाद कुछ लोग इन दोनों को जोड़कर देखने लगे हैं, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले ठोस साक्ष्य जरूरी हैं और केवल समानता के आधार पर पैटर्न तय करना जल्दबाजी होगी। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी चुनौती प्रशासन के सामने है, जिसे एक साथ दो मोर्चों पर काम करना होता है—एक ओर मानवीय संकट है, जहां झुग्गियों में रहने वाले लोग हर बार आग में अपना सब कुछ खो देते हैं और पुनर्वास की मांग करते हैं, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा का प्रश्न है, जहां इन अनियंत्रित बस्तियों के कारण संभावित खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। स्थानीय निवासी भी इसी द्वंद्व में हैं—वे न तो किसी निर्दोष को नुकसान पहुंचते देखना चाहते हैं और न ही अपने आसपास किसी संभावित खतरे को अनदेखा करना चाहते हैं। प्रशासन ने इस बार घटना के बाद जांच तेज करने की बात कही है। फॉरेंसिक टीमों को लगाया गया है, आसपास के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं और हालिया गिरफ्तारियों के साथ किसी संभावित कनेक्शन को भी परखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि हर एंगल से जांच की जाएगी और बिना साक्ष्य के किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जाएगा। फिलहाल, गाज़ियाबाद की यह आग एक बार फिर कई अनुत्तरित सवाल छोड़ गई है। क्या यह केवल एक और दुर्घटना है, जिसे समय के साथ भुला दिया जाएगा, या फिर यह किसी गहरे और लंबे समय से चल रहे तंत्र की एक झलक है? सच्चाई जो भी हो, वह जांच के बाद ही सामने आएगी, लेकिन इतना तय है कि इस तरह की लगातार घटनाएं अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रह गई हैं, बल्कि शहरी सुरक्षा, प्रशासनिक व्यवस्था और सामाजिक संतुलन—तीनों पर एक साथ सवाल खड़े कर रही हैं।
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    गाज़ियाबाद की आग: हादसा या सुनियोजित साज़िश,आसपास के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं और हालिया गिरफ्तारियों के साथ किसी संभावित कनेक्शन को भी परखा जा रहा है। कबाड़ियों के गोदाम एवं झुग्गी-झोपड़ियों में 
विशेष रिपोर्ट: पवन सूर्यवंशी ब्यूरो चीफ ऑल एनसीआर 
गाज़ियाबाद के इंदिरापुरम थाना क्षेत्र के अंतर्गत कनावनी गांव के पास स्थित कबाड़े के गोदाम झुग्गी-झोपड़ियों में लगी हालिया भीषण आग ने एक बार फिर 
OGW नेटवर्क और झुग्गी क्लस्टर पर उठते गंभीर सवाल,उन सवालों को जिंदा कर दिया है, जो पिछले कई वर्षों से दबे हुए थे, लेकिन हर नई घटना के साथ फिर सतह पर आ जाते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि एक ऐसा सिलसिला है जो समय-समय पर दोहराया जाता रहा है और हर बार कारण अलग-अलग बताकर मामला ठंडा कर दिया जाता है। कभी इसे शॉर्ट सर्किट कहा जाता है, कभी सिलेंडर ब्लास्ट, तो कभी गर्मी का असर, लेकिन लगातार दोहराती घटनाएं अब संयोग से ज्यादा कुछ प्रतीत होने लगी हैं।
कनावनी, इंदिरापुरम, कौशांबी से लेकर गाजीपुर मंडी और आसपास के डेरी क्षेत्रों तक फैले झुग्गी क्लस्टर्स को अगर एक साथ जोड़कर देखा जाए, तो एक ऐसा भूगोल सामने आता है जहां आबादी घनी है, निगरानी सीमित है और पहचान सत्यापन की प्रक्रिया कमजोर मानी जाती है। ऐसे क्षेत्रों में किसी भी बाहरी व्यक्ति के लिए लंबे समय तक बिना ध्यान आकर्षित किए रहना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है। यही वह बिंदु है जहां से सुरक्षा एजेंसियों की चिंता शुरू होती है, खासकर तब जब हाल के दिनों में कौशांबी क्षेत्र से कुछ संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों की गिरफ्तारी की खबरें सामने आई हों और “ओवर ग्राउंड वर्कर” यानी OGW नेटवर्क की चर्चा तेज हुई हो।
OGW शब्द आमतौर पर उन लोगों के लिए इस्तेमाल होता है जो किसी बड़े नेटवर्क के लिए जमीन पर रहकर सहायता प्रदान करते हैं—चाहे वह लॉजिस्टिक सपोर्ट हो, सूचना जुटाना हो या अस्थायी ठिकाने उपलब्ध कराना। हालांकि गाज़ियाबाद की इन घटनाओं को सीधे किसी ऐसे नेटवर्क से जोड़ना अभी जांच का विषय है, लेकिन स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों को पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। खासतौर पर तब, जब इन कबाड़ा के गोदाम एवं झुग्गी क्लस्टर्स के आसपास CRPF और PAC जैसे सुरक्षा बलों के कैंप मौजूद हों, जो इन इलाकों को रणनीतिक दृष्टि से संवेदनशील बनाते हैं।
स्थानीय चर्चाओं में एक और पहलू सामने आता है—तकनीक का उपयोग। कुछ लोगों का दावा है कि संदिग्ध तत्व छोटे सोलर उपकरणों या कैमरों का इस्तेमाल कर सकते हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी, आधुनिक दौर में निगरानी के साधनों के छोटे और सस्ते हो जाने के कारण इस संभावना को पूरी तरह खारिज भी नहीं किया जा सकता। यदि इस दिशा में कोई ठोस तथ्य सामने आते हैं, तो यह मामला केवल स्थानीय अपराध की सीमा से बाहर निकलकर एक बड़े सुरक्षा आयाम में प्रवेश कर सकता है।
इन सभी सवालों के बीच सबसे महत्वपूर्ण और चिंताजनक पहलू बार-बार लगने वाली आग है। हर घटना के बाद झुग्गियां पूरी तरह जलकर खाक हो जाती हैं, जिससे वहां रहने वाले लोगों के दस्तावेज, पहचान पत्र और अन्य साक्ष्य भी नष्ट हो जाते हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह केवल दुर्घटना है, या फिर अनजाने में या जानबूझकर ऐसी स्थिति बन रही है जहां हर बार सब कुछ “रीसेट” हो जाता है। यह केवल एक संदेह है, लेकिन जांच के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा जरूर हो सकती है।
हाल ही में लखनऊ में सामने आए एक जासूसी से जुड़े मामले के बाद वहां भी झुग्गी क्षेत्र में आग लगने की घटना ने कई लोगों को चौंकाया था। अब गाज़ियाबाद में इसी तरह की घटना के बाद कुछ लोग इन दोनों को जोड़कर देखने लगे हैं, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले ठोस साक्ष्य जरूरी हैं और केवल समानता के आधार पर पैटर्न तय करना जल्दबाजी होगी।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी चुनौती प्रशासन के सामने है, जिसे एक साथ दो मोर्चों पर काम करना होता है—एक ओर मानवीय संकट है, जहां झुग्गियों में रहने वाले लोग हर बार आग में अपना सब कुछ खो देते हैं और पुनर्वास की मांग करते हैं, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा का प्रश्न है, जहां इन अनियंत्रित बस्तियों के कारण संभावित खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। स्थानीय निवासी भी इसी द्वंद्व में हैं—वे न तो किसी निर्दोष को नुकसान पहुंचते देखना चाहते हैं और न ही अपने आसपास किसी संभावित खतरे को अनदेखा करना चाहते हैं।
प्रशासन ने इस बार घटना के बाद जांच तेज करने की बात कही है। फॉरेंसिक टीमों को लगाया गया है, आसपास के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं और हालिया गिरफ्तारियों के साथ किसी संभावित कनेक्शन को भी परखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि हर एंगल से जांच की जाएगी और बिना साक्ष्य के किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जाएगा।
फिलहाल, गाज़ियाबाद की यह आग एक बार फिर कई अनुत्तरित सवाल छोड़ गई है। क्या यह केवल एक और दुर्घटना है, जिसे समय के साथ भुला दिया जाएगा, या फिर यह किसी गहरे और लंबे समय से चल रहे तंत्र की एक झलक है? सच्चाई जो भी हो, वह जांच के बाद ही सामने आएगी, लेकिन इतना तय है कि इस तरह की लगातार घटनाएं अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रह गई हैं, बल्कि शहरी सुरक्षा, प्रशासनिक व्यवस्था और सामाजिक संतुलन—तीनों पर एक साथ सवाल खड़े कर रही हैं।
    user_Pawan k Suryavansi
    Pawan k Suryavansi
    Advertising agency Ghaziabad, Uttar Pradesh•
    36 min ago
  • Post by पत्रकार धीरेंद्र त्रिपाठी
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    Post by पत्रकार  धीरेंद्र त्रिपाठी
    user_पत्रकार  धीरेंद्र त्रिपाठी
    पत्रकार धीरेंद्र त्रिपाठी
    Press advisory गाज़ियाबाद, गाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • कुछ लोगों ने न सिर्फ दरोगा के साथ गाली-गलौच की, बल्कि मारपीट की कोशिश भी की। मामला पहासू थाना क्षेत्र का है, जहां एक दरोगा ड्यूटी पर मौजूद थे। इसी दौरान 7 से 8 लोगों का एक समूह वहां पहुंचा और दरोगा के साथ अभद्र व्यवहार शुरू कर दिया। आरोप है कि दबंगों ने दरोगा के साथ गाली-गलौच की और थाने का घेराव करने की धमकी भी दी। इतना ही नहीं, दरोगा को अकेला देखकर आरोपियों ने उनके साथ मारपीट करने का भी प्रयास किया। इस दौरान दरोगा की वर्दी तक पर हमला किया गया, जिससे मौके पर तनाव की स्थिति बन गई। हालांकि सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को काबू में लिया गया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और आगे की जांच जारी है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है। देखना होगा कि आरोपियों पर क्या कड़ी कार्रवाई होती है।
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    कुछ लोगों ने न सिर्फ दरोगा के साथ गाली-गलौच की, बल्कि मारपीट की कोशिश भी की।
मामला पहासू थाना क्षेत्र का है, जहां एक दरोगा ड्यूटी पर मौजूद थे।
इसी दौरान 7 से 8 लोगों का एक समूह वहां पहुंचा और दरोगा के साथ अभद्र व्यवहार शुरू कर दिया।
आरोप है कि दबंगों ने दरोगा के साथ गाली-गलौच की और थाने का घेराव करने की धमकी भी दी।
इतना ही नहीं, दरोगा को अकेला देखकर आरोपियों ने उनके साथ मारपीट करने का भी प्रयास किया।
इस दौरान दरोगा की वर्दी तक पर हमला किया गया, जिससे मौके पर तनाव की स्थिति बन गई।
हालांकि सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को काबू में लिया गया।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और आगे की जांच जारी है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है।
देखना होगा कि आरोपियों पर क्या कड़ी कार्रवाई होती है।
    user_समाचार थर्टी लाईव
    समाचार थर्टी लाईव
    Reporter बुलंदशहर, बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • हापुड़ के पिलखुवा क्षेत्र के गांव सिखेड़ा में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती बड़े ही धूमधाम से मनाई गई। कार्यक्रम में गांव के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और बाबा साहब को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान कई जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। 👉 युवाओं ने लिया संकल्प – बाबा साहब के विचारों को जन-जन तक पहुंचाएंगे 👉 सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बढ़ाया उत्साह 👉 पूरे गांव में दिखा जोश और सम्मान
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    हापुड़ के पिलखुवा क्षेत्र के गांव सिखेड़ा में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती बड़े ही धूमधाम से मनाई गई।
कार्यक्रम में गांव के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और बाबा साहब को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान कई जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
👉 युवाओं ने लिया संकल्प – बाबा साहब के विचारों को जन-जन तक पहुंचाएंगे
👉 सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बढ़ाया उत्साह
👉 पूरे गांव में दिखा जोश और सम्मान
    user_Sharafat saifi
    Sharafat saifi
    हापुड़, हापुड़, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • आदरणीय डॉ संजय कुमार निषाद कैबिनेट मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पश्चिमी उत्तर प्रदेश से प्रमोद कश्यप को बागपत जिले का प्रभारी नियुक्त किया मैं प्रमोद कश्यप आदरणीय कैबिनेट मंत्री जी का आशीर्वाद प्राप्त होने पर मंत्री जी का कोटि-कोटि धन्यवाद करता हूं
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    आदरणीय डॉ संजय कुमार निषाद कैबिनेट मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पश्चिमी उत्तर प्रदेश से प्रमोद कश्यप को बागपत जिले का प्रभारी नियुक्त किया 
मैं प्रमोद कश्यप आदरणीय कैबिनेट मंत्री जी का आशीर्वाद प्राप्त होने पर मंत्री जी का कोटि-कोटि धन्यवाद करता हूं
    user_प्रमोद कुमार कश्यप
    प्रमोद कुमार कश्यप
    Farmer मोदीनगर, गाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश•
    17 hrs ago
  • Post by पत्रकार धीरेंद्र त्रिपाठी
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    Post by पत्रकार  धीरेंद्र त्रिपाठी
    user_पत्रकार  धीरेंद्र त्रिपाठी
    पत्रकार धीरेंद्र त्रिपाठी
    Press advisory गाज़ियाबाद, गाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
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