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गोल्ड मेडल जीतकर घर लौटी पार्वती, जर्जर मकान और बदहाल आर्थिक स्थिति ने किया स्वागत गुमला से अमित की रिपोर्ट: - गोल्ड मेडल जीतकर घर लौटी पार्वती, जर्जर मकान और बदहाल आर्थिक स्थिति ने किया स्वागत चीन में भारत का प्रतिनिधित्व कर स्वर्ण पदक जीतने वाली गुमला की बेटी पार्वती टोपनो के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब, बारिश में ढही घर की दीवार गुमला। देश के लिए हॉकी के मैदान पर शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीतने वाली गुमला की बेटी पार्वती टोपनो जब अपने घर वापस लौटीं, तो उनके स्वागत में न तो कोई बड़ा सम्मान समारोह था और न ही परिवार के घर की हालत में कोई बदलाव। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश, राज्य और जिले का नाम रोशन करने वाली इस खिलाड़ी का सामना अपने घर की जर्जर स्थिति और परिवार की आर्थिक परेशानियों से हुआ। हाल ही में लगातार हुई बारिश के कारण उनके घर की एक दीवार भी ढह गई है। परिवार ने लकड़ी के सहारे क्षतिग्रस्त दीवार को किसी तरह टिकाकर रखा है। कामडारा प्रखंड के कुम्हार टोली की रहने वाली पार्वती टोपनो तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। उनके पिता सोमा टोपनो दिहाड़ी मजदूरी करते हैं और इसी से परिवार का भरण-पोषण होता है। सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद परिवार ने बेटी की हॉकी प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए लगातार संघर्ष किया। पार्वती ने एपिफानी बालिका विद्यालय में पढ़ाई के दौरान हॉकी खेलना शुरू किया। शुरुआत में खेल के प्रति उनकी रुचि धीरे-धीरे जुनून में बदल गई और बेहतर प्रदर्शन के आधार पर उन्हें आगे प्रशिक्षण का अवसर मिला। पार्वती का चयन रांची स्थित एकलव्य हॉस्टल के लिए हुआ। यहां उन्होंने हॉकी का प्रशिक्षण लिया और अपनी प्रतिभा को निखारा। कड़ी मेहनत और लगातार अभ्यास के बाद उन्होंने आगे बढ़ते हुए बेंगलुरु में भी प्रशिक्षण प्राप्त किया। उनकी मेहनत का परिणाम यह रहा कि उन्हें भारतीय महिला जूनियर हॉकी टीम अंडर-21 में जगह बनाने का मौका मिला। इसके बाद पार्वती ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। बीते 4 से 13 सितंबर तक चीन में आयोजित जूनियर महिला एशिया कप में वह भारतीय टीम का हिस्सा बनीं। गुमला जिले की इकलौती हॉकी खिलाड़ी के रूप में भारतीय टीम में शामिल होकर पार्वती ने अपने प्रदर्शन से देश और राज्य का नाम रोशन किया। भारतीय टीम ने प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया। पार्वती के घर और गांव के लोगों के लिए यह गर्व का क्षण था। लेकिन इस बड़ी उपलब्धि के बाद जब पार्वती अपने घर लौटीं तो वहां की स्थिति देखकर खुशी के साथ-साथ उन्हें चिंता भी हुई। बारिश ने बढ़ाई परिवार की परेशानी पिछले दिनों गुमला जिले में लगातार चार दिनों तक हुई बारिश का असर पार्वती के परिवार के घर पर भी पड़ा। बारिश के कारण उनके घर की एक दीवार ढह गई। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे तत्काल नया मकान बनवा सकें। इसलिए परिवार ने लकड़ी के सहारे क्षतिग्रस्त दीवार को किसी तरह टिकाकर रखा है। जर्जर स्थिति में खड़ा मकान कभी भी और अधिक क्षतिग्रस्त हो सकता है। उनका परिवार अभी भी कच्चे और क्षतिग्रस्त मकान में रहता है तथा मिट्टी के चूल्हे में लकड़ी से खाना बनाकर जीवन यापन कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर लौटी पार्वती के लिए घर की यह स्थिति बेहद भावुक करने वाली है। उन्होंने बताया कि खिलाड़ी देश के लिए पूरी मेहनत और लगन से खेलते हैं और पदक जीतकर देश का नाम रोशन करने का प्रयास करते हैं। लेकिन जब वह अपने घर और माता-पिता की स्थिति देखती हैं तो उन्हें काफी दुख होता है। उनके लिए सबसे बड़ी चिंता अपने परिवार की सुरक्षा और घर की स्थिति है। पार्वती का कहना है कि झारखंड में कई प्रतिभावान खिलाड़ी आर्थिक परेशानियों के बावजूद अपने खेल को जारी रखते हैं। उन्हें प्रशिक्षण, खेल सामग्री और अन्य सुविधाओं के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है। ऐसे में जब कोई खिलाड़ी देश के लिए बड़ी उपलब्धि हासिल करता है, तो उसके परिवार की स्थिति पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। बेटी की सफलता पर माता-पिता को गर्व, लेकिन आर्थिक परेशानी बरकरार पार्वती की माता जानो टोपनो ने बताया कि बेटी को इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए परिवार ने काफी मेहनत और संघर्ष किया है। पिता ने दिहाड़ी मजदूरी कर बेटी को इस मुकाम तक पहुंचने के लिए जी जान लगा दिया। बेटी जब देश के लिए खेलती है और पदक जीतकर लौटती है तो उन्हें बेहद खुशी होती है। लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति अभी भी चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाए जाने की बात कही जाती है, लेकिन उनके परिवार तक ऐसी योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पाया है। उन्होंने यह भी कहा कि बेटी की इतनी बड़ी उपलब्धि के बावजूद अब तक कोई अधिकारी परिवार की स्थिति जानने के लिए नहीं आया। परिवार को उम्मीद है कि प्रशासन और सरकार उनकी स्थिति को समझते हुए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराएगी। सामाजिक कार्यकर्ता ने मदद का भरोसा दिया पार्वती टोपनो के घर की स्थिति सामने आने के बाद स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता सुजीत टेटे ने भी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने वाली खिलाड़ी के परिवार का घर इस स्थिति में होना चिंता का विषय है। उन्होंने प्रशासन से पार्वती के परिवार की स्थिति पर ध्यान देने और आवश्यक कदम उठाने की मांग की। सुजीत टेटे ने कहा कि यदि प्रशासन की ओर से इस दिशा में पहल नहीं की गई, तो सामाजिक स्तर पर लोगों को जोड़कर पार्वती के परिवार की मदद करने का प्रयास किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर समाज के लोगों से सहयोग और चंदा जुटाकर उनके घर के निर्माण में मदद करने की बात भी उन्होंने कही। उपलब्धि बड़ी, लेकिन सम्मान और सहायता की उम्मीद पार्वती टोपनो की कहानी गुमला की खेल प्रतिभा और संघर्ष की कहानी है। सीमित आर्थिक संसाधनों वाले परिवार से निकलकर उन्होंने हॉकी के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई और भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम में जगह बनाई। चीन में आयोजित जूनियर महिला एशिया कप में भारतीय टीम का हिस्सा बनकर स्वर्ण पदक जीतना उनके खेल जीवन की बड़ी उपलब्धि है। लेकिन सवाल यह है कि जब एक खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर पदक जीतकर अपने जिले और राज्य का नाम रोशन करती है, तो उसके परिवार की मूलभूत समस्याओं पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। पार्वती का जर्जर मकान और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इस ओर ध्यान आकर्षित करती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए केवल प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों को आवश्यक सामाजिक और आर्थिक सहयोग भी जरूरी है। गुमला और झारखंड के ग्रामीण इलाकों में हॉकी की प्रतिभाओं की कमी नहीं है। कई बच्चे आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का सपना देखते हैं। पार्वती टोपनो ने अपने संघर्ष और प्रतिभा के दम पर उस सपने को एक नई ऊंचाई दी है। अब परिवार और स्थानीय लोगों की उम्मीद है कि उनकी उपलब्धि को उचित सम्मान मिले और जर्जर घर की समस्या का भी समाधान हो। देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने वाली पार्वती के घर की तस्वीर निश्चित रूप से लोगों को सोचने पर मजबूर करती है। एक तरफ अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगे के साथ देश का गौरव बढ़ाने वाली खिलाड़ी है, तो दूसरी तरफ घर लौटने पर उसके सामने परिवार की आर्थिक मजबूरियां और जर्जर मकान है। ऐसे में पार्वती और उनके परिवार को उम्मीद है कि सरकार, प्रशासन और समाज उनकी स्थिति को समझेंगे और जरूरत के समय उनके साथ खड़े होंगे।

12 hrs ago
user_AMIT
AMIT
गुमला, गुमला, झारखंड•
12 hrs ago

गोल्ड मेडल जीतकर घर लौटी पार्वती, जर्जर मकान और बदहाल आर्थिक स्थिति ने किया स्वागत गुमला से अमित की रिपोर्ट: - गोल्ड मेडल जीतकर घर लौटी पार्वती, जर्जर मकान और बदहाल आर्थिक स्थिति ने किया स्वागत चीन में भारत का प्रतिनिधित्व कर स्वर्ण पदक जीतने वाली गुमला की बेटी पार्वती टोपनो के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब, बारिश में ढही घर की दीवार गुमला। देश के लिए हॉकी के मैदान पर शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीतने वाली गुमला की बेटी पार्वती टोपनो जब अपने घर वापस लौटीं, तो उनके स्वागत में न तो कोई बड़ा सम्मान समारोह था और न ही परिवार के घर की हालत में कोई बदलाव। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश, राज्य और जिले का नाम रोशन करने वाली इस खिलाड़ी का सामना अपने घर की जर्जर स्थिति और परिवार की आर्थिक परेशानियों से हुआ। हाल ही में लगातार हुई बारिश के कारण उनके घर की एक दीवार भी ढह गई है। परिवार ने लकड़ी के सहारे क्षतिग्रस्त दीवार को किसी तरह टिकाकर रखा है। कामडारा प्रखंड के कुम्हार टोली की रहने वाली पार्वती टोपनो तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। उनके पिता सोमा टोपनो दिहाड़ी मजदूरी करते हैं और इसी से परिवार का भरण-पोषण होता है। सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद परिवार ने बेटी की हॉकी प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए लगातार संघर्ष किया। पार्वती ने एपिफानी बालिका विद्यालय में पढ़ाई के दौरान हॉकी खेलना शुरू किया। शुरुआत में खेल के प्रति उनकी रुचि धीरे-धीरे जुनून में बदल गई और बेहतर प्रदर्शन के आधार पर उन्हें आगे प्रशिक्षण का अवसर मिला। पार्वती का चयन रांची स्थित एकलव्य हॉस्टल के लिए हुआ। यहां उन्होंने हॉकी का प्रशिक्षण लिया और अपनी प्रतिभा को निखारा। कड़ी मेहनत और लगातार अभ्यास के बाद उन्होंने आगे बढ़ते हुए बेंगलुरु में भी प्रशिक्षण प्राप्त किया। उनकी मेहनत का परिणाम यह रहा कि उन्हें भारतीय महिला जूनियर हॉकी टीम अंडर-21 में जगह बनाने का मौका मिला। इसके बाद पार्वती ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। बीते 4 से 13 सितंबर तक चीन में आयोजित जूनियर महिला एशिया कप में वह भारतीय टीम का हिस्सा बनीं। गुमला जिले की इकलौती हॉकी खिलाड़ी के रूप में भारतीय टीम में शामिल होकर पार्वती ने अपने प्रदर्शन से देश और राज्य का नाम रोशन किया। भारतीय टीम ने प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया। पार्वती के घर और गांव के लोगों के लिए यह गर्व का क्षण था। लेकिन इस बड़ी उपलब्धि के बाद जब पार्वती अपने घर लौटीं तो वहां की स्थिति देखकर खुशी के साथ-साथ उन्हें चिंता भी हुई। बारिश ने बढ़ाई परिवार की परेशानी पिछले दिनों गुमला जिले में लगातार चार दिनों तक हुई बारिश का असर पार्वती के परिवार के घर पर भी पड़ा। बारिश के कारण उनके घर की एक दीवार ढह गई। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे तत्काल नया मकान बनवा सकें। इसलिए परिवार ने लकड़ी के सहारे क्षतिग्रस्त दीवार को किसी तरह टिकाकर रखा है। जर्जर स्थिति में खड़ा मकान कभी भी और अधिक क्षतिग्रस्त हो सकता है। उनका परिवार अभी भी कच्चे और क्षतिग्रस्त मकान में रहता है तथा मिट्टी के चूल्हे में लकड़ी से खाना बनाकर जीवन यापन कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर लौटी पार्वती के लिए घर की यह स्थिति बेहद भावुक करने वाली है। उन्होंने बताया कि खिलाड़ी देश के लिए पूरी मेहनत और लगन से खेलते हैं और पदक जीतकर देश का नाम रोशन करने का प्रयास करते हैं। लेकिन जब वह अपने घर और माता-पिता की स्थिति देखती हैं तो उन्हें काफी दुख होता है। उनके लिए सबसे बड़ी चिंता अपने परिवार की सुरक्षा और घर की स्थिति है। पार्वती का कहना है कि झारखंड में कई प्रतिभावान खिलाड़ी आर्थिक परेशानियों के बावजूद अपने खेल को जारी

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रखते हैं। उन्हें प्रशिक्षण, खेल सामग्री और अन्य सुविधाओं के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है। ऐसे में जब कोई खिलाड़ी देश के लिए बड़ी उपलब्धि हासिल करता है, तो उसके परिवार की स्थिति पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। बेटी की सफलता पर माता-पिता को गर्व, लेकिन आर्थिक परेशानी बरकरार पार्वती की माता जानो टोपनो ने बताया कि बेटी को इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए परिवार ने काफी मेहनत और संघर्ष किया है। पिता ने दिहाड़ी मजदूरी कर बेटी को इस मुकाम तक पहुंचने के लिए जी जान लगा दिया। बेटी जब देश के लिए खेलती है और पदक जीतकर लौटती है तो उन्हें बेहद खुशी होती है। लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति अभी भी चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाए जाने की बात कही जाती है, लेकिन उनके परिवार तक ऐसी योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पाया है। उन्होंने यह भी कहा कि बेटी की इतनी बड़ी उपलब्धि के बावजूद अब तक कोई अधिकारी परिवार की स्थिति जानने के लिए नहीं आया। परिवार को उम्मीद है कि प्रशासन और सरकार उनकी स्थिति को समझते हुए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराएगी। सामाजिक कार्यकर्ता ने मदद का भरोसा दिया पार्वती टोपनो के घर की स्थिति सामने आने के बाद स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता सुजीत टेटे ने भी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने वाली खिलाड़ी के परिवार का घर इस स्थिति में होना चिंता का विषय है। उन्होंने प्रशासन से पार्वती के परिवार की स्थिति पर ध्यान देने और आवश्यक कदम उठाने की मांग की। सुजीत टेटे ने कहा कि यदि प्रशासन की ओर से इस दिशा में पहल नहीं की गई, तो सामाजिक स्तर पर लोगों को जोड़कर पार्वती के परिवार की मदद करने का प्रयास किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर समाज के लोगों से सहयोग और चंदा जुटाकर उनके घर के निर्माण में मदद करने की बात भी उन्होंने कही। उपलब्धि बड़ी, लेकिन सम्मान और सहायता की उम्मीद पार्वती टोपनो की कहानी गुमला की खेल प्रतिभा और संघर्ष की कहानी है। सीमित आर्थिक संसाधनों वाले परिवार से निकलकर उन्होंने हॉकी के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई और भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम में जगह बनाई। चीन में आयोजित जूनियर महिला एशिया कप में भारतीय टीम का हिस्सा बनकर स्वर्ण पदक जीतना उनके खेल जीवन की बड़ी उपलब्धि है। लेकिन सवाल यह है कि जब एक खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर पदक जीतकर अपने जिले और राज्य का नाम रोशन करती है, तो उसके परिवार की मूलभूत समस्याओं पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। पार्वती का जर्जर मकान और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इस ओर ध्यान आकर्षित करती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए केवल प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों को आवश्यक सामाजिक और आर्थिक सहयोग भी जरूरी है। गुमला और झारखंड के ग्रामीण इलाकों में हॉकी की प्रतिभाओं की कमी नहीं है। कई बच्चे आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का सपना देखते हैं। पार्वती टोपनो ने अपने संघर्ष और प्रतिभा के दम पर उस सपने को एक नई ऊंचाई दी है। अब परिवार और स्थानीय लोगों की उम्मीद है कि उनकी उपलब्धि को उचित सम्मान मिले और जर्जर घर की समस्या का भी समाधान हो। देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने वाली पार्वती के घर की तस्वीर निश्चित रूप से लोगों को सोचने पर मजबूर करती है। एक तरफ अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगे के साथ देश का गौरव बढ़ाने वाली खिलाड़ी है, तो दूसरी तरफ घर लौटने पर उसके सामने परिवार की आर्थिक मजबूरियां और जर्जर मकान है। ऐसे में पार्वती और उनके परिवार को उम्मीद है कि सरकार, प्रशासन और समाज उनकी स्थिति को समझेंगे और जरूरत के समय उनके साथ खड़े होंगे।

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से परिवार का भरण-पोषण होता है। सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद परिवार ने बेटी की हॉकी प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए लगातार संघर्ष किया। पार्वती ने एपिफानी बालिका विद्यालय में पढ़ाई के दौरान हॉकी खेलना शुरू किया। शुरुआत में खेल के प्रति उनकी रुचि धीरे-धीरे जुनून में बदल गई और बेहतर प्रदर्शन के आधार पर उन्हें आगे प्रशिक्षण का अवसर मिला। पार्वती का चयन रांची स्थित एकलव्य हॉस्टल के लिए हुआ। यहां उन्होंने हॉकी का प्रशिक्षण लिया और अपनी प्रतिभा को निखारा। कड़ी मेहनत और लगातार अभ्यास के बाद उन्होंने आगे बढ़ते हुए बेंगलुरु में भी प्रशिक्षण प्राप्त किया। उनकी मेहनत का परिणाम यह रहा कि उन्हें भारतीय महिला जूनियर हॉकी टीम अंडर-21 में जगह बनाने का मौका मिला। इसके बाद पार्वती ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। बीते 4 से 13 सितंबर तक चीन में आयोजित जूनियर महिला एशिया कप में वह भारतीय टीम का हिस्सा बनीं। गुमला जिले की इकलौती हॉकी खिलाड़ी के रूप में भारतीय टीम में शामिल होकर पार्वती ने अपने प्रदर्शन से देश और राज्य का नाम रोशन किया। भारतीय टीम ने प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया। पार्वती के घर और गांव के लोगों के लिए यह गर्व का क्षण था। लेकिन इस बड़ी उपलब्धि के बाद जब पार्वती अपने घर लौटीं तो वहां की स्थिति देखकर खुशी के साथ-साथ उन्हें चिंता भी हुई। बारिश ने बढ़ाई परिवार की परेशानी पिछले दिनों गुमला जिले में लगातार चार दिनों तक हुई बारिश का असर पार्वती के परिवार के घर पर भी पड़ा। बारिश के कारण उनके घर की एक दीवार ढह गई। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे तत्काल नया मकान बनवा सकें। इसलिए परिवार ने लकड़ी के सहारे क्षतिग्रस्त दीवार को किसी तरह टिकाकर रखा है। जर्जर स्थिति में खड़ा मकान कभी भी और अधिक क्षतिग्रस्त हो सकता है। उनका परिवार अभी भी कच्चे और क्षतिग्रस्त मकान में रहता है तथा मिट्टी के चूल्हे में लकड़ी से खाना बनाकर जीवन यापन कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर लौटी पार्वती के लिए घर की यह स्थिति बेहद भावुक करने वाली है। उन्होंने बताया कि खिलाड़ी देश के लिए पूरी मेहनत और लगन से खेलते हैं और पदक जीतकर देश का नाम रोशन करने का प्रयास करते हैं। लेकिन जब वह अपने घर और माता-पिता की स्थिति देखती हैं तो उन्हें काफी दुख होता है। उनके लिए सबसे बड़ी चिंता अपने परिवार की सुरक्षा और घर की स्थिति है। पार्वती का कहना है कि झारखंड में कई प्रतिभावान खिलाड़ी आर्थिक परेशानियों के बावजूद अपने खेल को जारी रखते हैं। उन्हें प्रशिक्षण, खेल सामग्री और अन्य सुविधाओं के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है। ऐसे में जब कोई खिलाड़ी देश के लिए बड़ी उपलब्धि हासिल करता है, तो उसके परिवार की स्थिति पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। बेटी की सफलता पर माता-पिता को गर्व, लेकिन आर्थिक परेशानी बरकरार पार्वती की माता जानो टोपनो ने बताया कि बेटी को इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए परिवार ने काफी मेहनत और संघर्ष किया है। पिता ने दिहाड़ी मजदूरी कर बेटी को इस मुकाम तक पहुंचने के लिए जी जान लगा दिया। बेटी जब देश के लिए खेलती है और पदक जीतकर लौटती है तो उन्हें बेहद खुशी होती है। लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति अभी भी चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाए जाने की बात कही जाती है, लेकिन उनके परिवार तक ऐसी योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पाया है। उन्होंने यह भी कहा कि बेटी की इतनी बड़ी उपलब्धि के बावजूद अब तक कोई अधिकारी परिवार की स्थिति जानने के लिए नहीं आया। परिवार को उम्मीद है कि प्रशासन और सरकार उनकी स्थिति को समझते हुए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराएगी। सामाजिक कार्यकर्ता ने मदद का भरोसा दिया पार्वती टोपनो के घर की स्थिति सामने आने के बाद स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता सुजीत टेटे ने भी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने वाली खिलाड़ी के परिवार का घर इस स्थिति में होना चिंता का विषय है। उन्होंने प्रशासन से पार्वती के परिवार की स्थिति पर ध्यान देने और आवश्यक कदम उठाने की मांग की। सुजीत टेटे ने कहा कि यदि प्रशासन की ओर से इस दिशा में पहल नहीं की गई, तो सामाजिक स्तर पर लोगों को जोड़कर पार्वती के परिवार की मदद करने का प्रयास किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर समाज के लोगों से सहयोग और चंदा जुटाकर उनके घर के निर्माण में मदद करने की बात भी उन्होंने कही। उपलब्धि बड़ी, लेकिन सम्मान और सहायता की उम्मीद पार्वती टोपनो की कहानी गुमला की खेल प्रतिभा और संघर्ष की कहानी है। सीमित आर्थिक संसाधनों वाले परिवार से निकलकर उन्होंने हॉकी के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई और भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम में जगह बनाई। चीन में आयोजित जूनियर महिला एशिया कप में भारतीय टीम का हिस्सा बनकर स्वर्ण पदक जीतना उनके खेल जीवन की बड़ी उपलब्धि है। लेकिन सवाल यह है कि जब एक खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर पदक जीतकर अपने जिले और राज्य का नाम रोशन करती है, तो उसके परिवार की मूलभूत समस्याओं पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। पार्वती का जर्जर मकान और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इस ओर ध्यान आकर्षित करती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए केवल प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों को आवश्यक सामाजिक और आर्थिक सहयोग भी जरूरी है। गुमला और झारखंड के ग्रामीण इलाकों में हॉकी की प्रतिभाओं की कमी नहीं है। कई बच्चे आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का सपना देखते हैं। पार्वती टोपनो ने अपने संघर्ष और प्रतिभा के दम पर उस सपने को एक नई ऊंचाई दी है। अब परिवार और स्थानीय लोगों की उम्मीद है कि उनकी उपलब्धि को उचित सम्मान मिले और जर्जर घर की समस्या का भी समाधान हो। देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने वाली पार्वती के घर की तस्वीर निश्चित रूप से लोगों को सोचने पर मजबूर करती है। एक तरफ अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगे के साथ देश का गौरव बढ़ाने वाली खिलाड़ी है, तो दूसरी तरफ घर लौटने पर उसके सामने परिवार की आर्थिक मजबूरियां और जर्जर मकान है। ऐसे में पार्वती और उनके परिवार को उम्मीद है कि सरकार, प्रशासन और समाज उनकी स्थिति को समझेंगे और जरूरत के समय उनके साथ खड़े होंगे।
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    गोल्ड मेडल जीतकर घर लौटी पार्वती, जर्जर मकान और बदहाल आर्थिक स्थिति ने किया स्वागत
गुमला से अमित की रिपोर्ट: -
गोल्ड मेडल जीतकर घर लौटी पार्वती, जर्जर मकान और बदहाल आर्थिक स्थिति ने किया स्वागत
चीन में भारत का प्रतिनिधित्व कर स्वर्ण पदक जीतने वाली गुमला की बेटी पार्वती टोपनो के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब, बारिश में ढही घर की दीवार
गुमला। देश के लिए हॉकी के मैदान पर शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीतने वाली गुमला की बेटी पार्वती टोपनो जब अपने घर वापस लौटीं, तो उनके स्वागत में न तो कोई बड़ा सम्मान समारोह था और न ही परिवार के घर की हालत में कोई बदलाव। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश, राज्य और जिले का नाम रोशन करने वाली इस खिलाड़ी का सामना अपने घर की जर्जर स्थिति और परिवार की आर्थिक परेशानियों से हुआ। हाल ही में लगातार हुई बारिश के कारण उनके घर की एक दीवार भी ढह गई है। परिवार ने लकड़ी के सहारे क्षतिग्रस्त दीवार को किसी तरह टिकाकर रखा है।
कामडारा प्रखंड के कुम्हार टोली की रहने वाली पार्वती टोपनो तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। उनके पिता सोमा टोपनो दिहाड़ी मजदूरी करते हैं और इसी से परिवार का भरण-पोषण होता है। सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद परिवार ने बेटी की हॉकी प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए लगातार संघर्ष किया। पार्वती ने एपिफानी बालिका विद्यालय में पढ़ाई के दौरान हॉकी खेलना शुरू किया। शुरुआत में खेल के प्रति उनकी रुचि धीरे-धीरे जुनून में बदल गई और बेहतर प्रदर्शन के आधार पर उन्हें आगे प्रशिक्षण का अवसर मिला।
पार्वती का चयन रांची स्थित एकलव्य हॉस्टल के लिए हुआ। यहां उन्होंने हॉकी का प्रशिक्षण लिया और अपनी प्रतिभा को निखारा। कड़ी मेहनत और लगातार अभ्यास के बाद उन्होंने आगे बढ़ते हुए बेंगलुरु में भी प्रशिक्षण प्राप्त किया। उनकी मेहनत का परिणाम यह रहा कि उन्हें भारतीय महिला जूनियर हॉकी टीम अंडर-21 में जगह बनाने का मौका मिला।
इसके बाद पार्वती ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। बीते 4 से 13 सितंबर तक चीन में आयोजित जूनियर महिला एशिया कप में वह भारतीय टीम का हिस्सा बनीं। गुमला जिले की इकलौती हॉकी खिलाड़ी के रूप में भारतीय टीम में शामिल होकर पार्वती ने अपने प्रदर्शन से देश और राज्य का नाम रोशन किया। भारतीय टीम ने प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया। पार्वती के घर और गांव के लोगों के लिए यह गर्व का क्षण था। लेकिन इस बड़ी उपलब्धि के बाद जब पार्वती अपने घर लौटीं तो वहां की स्थिति देखकर खुशी के साथ-साथ उन्हें चिंता भी हुई।
बारिश ने बढ़ाई परिवार की परेशानी
पिछले दिनों गुमला जिले में लगातार चार दिनों तक हुई बारिश का असर पार्वती के परिवार के घर पर भी पड़ा। बारिश के कारण उनके घर की एक दीवार ढह गई। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे तत्काल नया मकान बनवा सकें। इसलिए परिवार ने लकड़ी के सहारे क्षतिग्रस्त दीवार को किसी तरह टिकाकर रखा है। जर्जर स्थिति में खड़ा मकान कभी भी और अधिक क्षतिग्रस्त हो सकता है। उनका परिवार अभी भी कच्चे और क्षतिग्रस्त मकान में रहता है तथा मिट्टी के चूल्हे में लकड़ी से खाना बनाकर जीवन यापन कर रहा है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर लौटी पार्वती के लिए घर की यह स्थिति बेहद भावुक करने वाली है। उन्होंने बताया कि खिलाड़ी देश के लिए पूरी मेहनत और लगन से खेलते हैं और पदक जीतकर देश का नाम रोशन करने का प्रयास करते हैं। लेकिन जब वह अपने घर और माता-पिता की स्थिति देखती हैं तो उन्हें काफी दुख होता है। उनके लिए सबसे बड़ी चिंता अपने परिवार की सुरक्षा और घर की स्थिति है।
पार्वती का कहना है कि झारखंड में कई प्रतिभावान खिलाड़ी आर्थिक परेशानियों के बावजूद अपने खेल को जारी रखते हैं। उन्हें प्रशिक्षण, खेल सामग्री और अन्य सुविधाओं के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है। ऐसे में जब कोई खिलाड़ी देश के लिए बड़ी उपलब्धि हासिल करता है, तो उसके परिवार की स्थिति पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
बेटी की सफलता पर माता-पिता को गर्व, लेकिन आर्थिक परेशानी बरकरार
पार्वती की माता जानो टोपनो ने बताया कि बेटी को इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए परिवार ने काफी मेहनत और संघर्ष किया है। पिता ने दिहाड़ी मजदूरी कर बेटी को इस मुकाम तक पहुंचने के लिए जी जान लगा दिया। बेटी जब देश के लिए खेलती है और पदक जीतकर लौटती है तो उन्हें बेहद खुशी होती है। लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति अभी भी चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाए जाने की बात कही जाती है, लेकिन उनके परिवार तक ऐसी योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पाया है। उन्होंने यह भी कहा कि बेटी की इतनी बड़ी उपलब्धि के बावजूद अब तक कोई अधिकारी परिवार की स्थिति जानने के लिए नहीं आया। परिवार को उम्मीद है कि प्रशासन और सरकार उनकी स्थिति को समझते हुए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराएगी।
सामाजिक कार्यकर्ता ने मदद का भरोसा दिया
पार्वती टोपनो के घर की स्थिति सामने आने के बाद स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता सुजीत टेटे ने भी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने वाली खिलाड़ी के परिवार का घर इस स्थिति में होना चिंता का विषय है। उन्होंने प्रशासन से पार्वती के परिवार की स्थिति पर ध्यान देने और आवश्यक कदम उठाने की मांग की।
सुजीत टेटे ने कहा कि यदि प्रशासन की ओर से इस दिशा में पहल नहीं की गई, तो सामाजिक स्तर पर लोगों को जोड़कर पार्वती के परिवार की मदद करने का प्रयास किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर समाज के लोगों से सहयोग और चंदा जुटाकर उनके घर के निर्माण में मदद करने की बात भी उन्होंने कही।
उपलब्धि बड़ी, लेकिन सम्मान और सहायता की उम्मीद
पार्वती टोपनो की कहानी गुमला की खेल प्रतिभा और संघर्ष की कहानी है। सीमित आर्थिक संसाधनों वाले परिवार से निकलकर उन्होंने हॉकी के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई और भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम में जगह बनाई। चीन में आयोजित जूनियर महिला एशिया कप में भारतीय टीम का हिस्सा बनकर स्वर्ण पदक जीतना उनके खेल जीवन की बड़ी उपलब्धि है।
लेकिन सवाल यह है कि जब एक खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर पदक जीतकर अपने जिले और राज्य का नाम रोशन करती है, तो उसके परिवार की मूलभूत समस्याओं पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। पार्वती का जर्जर मकान और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इस ओर ध्यान आकर्षित करती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए केवल प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों को आवश्यक सामाजिक और आर्थिक सहयोग भी जरूरी है।
गुमला और झारखंड के ग्रामीण इलाकों में हॉकी की प्रतिभाओं की कमी नहीं है। कई बच्चे आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का सपना देखते हैं। पार्वती टोपनो ने अपने संघर्ष और प्रतिभा के दम पर उस सपने को एक नई ऊंचाई दी है। अब परिवार और स्थानीय लोगों की उम्मीद है कि उनकी उपलब्धि को उचित सम्मान मिले और जर्जर घर की समस्या का भी समाधान हो।
देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने वाली पार्वती के घर की तस्वीर निश्चित रूप से लोगों को सोचने पर मजबूर करती है। एक तरफ अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगे के साथ देश का गौरव बढ़ाने वाली खिलाड़ी है, तो दूसरी तरफ घर लौटने पर उसके सामने परिवार की आर्थिक मजबूरियां और जर्जर मकान है। ऐसे में पार्वती और उनके परिवार को उम्मीद है कि सरकार, प्रशासन और समाज उनकी स्थिति को समझेंगे और जरूरत के समय उनके साथ खड़े होंगे।
    user_AMIT
    AMIT
    गुमला, गुमला, झारखंड•
    12 hrs ago
  • पालकोट के सनईडीह जंगल पहुंचा 17 जंगली हाथियों का झुंड, ग्रामीणों में दहशत का माहौल पालकोट के सनईडीह जंगल पहुंचा 17 जंगली हाथियों का झुंड, ग्रामीणों में दहशत का माहौल, वन विभाग सुरक्षित जंगल में वापस भेजने में जुटी, ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील
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    पालकोट के सनईडीह जंगल पहुंचा 17 जंगली हाथियों का झुंड, ग्रामीणों में दहशत का माहौल
पालकोट के सनईडीह जंगल पहुंचा 17 जंगली हाथियों का झुंड, ग्रामीणों में दहशत का माहौल, वन विभाग सुरक्षित जंगल में वापस भेजने में जुटी, ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील
    user_कृष्णा कुमार साहु
    कृष्णा कुमार साहु
    रिपोर्टर सिसई, गुमला, झारखंड•
    15 hrs ago
  • गुमला के बसिया में घुसा झुंड से भटका हाथी, CCTV में कैद हुई चहलकदमी के बाद प्रशासन अलर्ट *गुमला के बसिया में घुसा झुंड से भटका हाथी, CCTV में कैद हुई चहलकदमी के बाद प्रशासन अलर्ट* गुमला/बसिया: गुमला जिले के बसिया स्थित शहरी इलाके में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब अपने झुंड से बिछड़कर एक विशालकाय जंगली हाथी बसिया-सिमडेगा मुख्य मार्ग पर टहलता हुआ पहुंच गया, जिसकी यह पूरी चहलकदमी पास ही स्थित आशीर्वाद अस्पताल के सीसीटीवी (CCTV) कैमरे में कैद हो गई। घटना के तुरंत बाद अस्पताल के संचालक ने इसकी सूचना बसिया पुलिस और वन विभाग को दी, जिसके बाद मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम हाथी को रिहाइशी इलाके से सुरक्षित जंगल की ओर खदेड़ने में जुट गई। वहीं, स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने आम जनता से रात के समय विशेष सतर्कता बरतने, हाथी से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न करने और दोबारा नजर आने पर तुरंत प्रशासन को सूचित करने की अपील की है।
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    गुमला के बसिया में घुसा झुंड से भटका हाथी, CCTV में कैद हुई चहलकदमी के बाद प्रशासन अलर्ट
*गुमला के बसिया में घुसा झुंड से भटका हाथी, CCTV में कैद हुई चहलकदमी के बाद प्रशासन अलर्ट* 
गुमला/बसिया: गुमला जिले के बसिया स्थित शहरी इलाके में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब अपने झुंड से बिछड़कर एक विशालकाय जंगली हाथी बसिया-सिमडेगा मुख्य मार्ग पर टहलता हुआ पहुंच गया, जिसकी यह पूरी चहलकदमी पास ही स्थित आशीर्वाद अस्पताल के सीसीटीवी (CCTV) कैमरे में कैद हो गई। घटना के तुरंत बाद अस्पताल के संचालक ने इसकी सूचना बसिया पुलिस और वन विभाग को दी, जिसके बाद मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम हाथी को रिहाइशी इलाके से सुरक्षित जंगल की ओर खदेड़ने में जुट गई। वहीं, स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने आम जनता से रात के समय विशेष सतर्कता बरतने, हाथी से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न करने और दोबारा नजर आने पर तुरंत प्रशासन को सूचित करने की अपील की है।
    user_Niraj kumar Sahu
    Niraj kumar Sahu
    पत्रकार बसिया, गुमला, झारखंड•
    7 hrs ago
  • सड़क की समस्या जस की तस उगाही के आरोपों.? #shorts #shortvideo #viralvideo #road #youtubeshorts
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    सड़क की समस्या जस की तस उगाही के आरोपों.? #shorts #shortvideo #viralvideo #road #youtubeshorts
    user_AAM JANATA
    AAM JANATA
    लोहरदगा, लोहरदगा, झारखंड•
    4 hrs ago
  • लोहरदगा जिले के नगर पालिका के सफाई कर्मी को चार महीना से वेतन नहीं दिया गया नगर पालिका के सफाई कर्मी कि आंदोलन रैली पुरानी नगर पालिका से डीसी ऑफिस होकर लेबर ऑफिस तक जाएगी
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    लोहरदगा जिले के नगर पालिका के सफाई कर्मी को चार महीना से वेतन नहीं दिया गया 
नगर पालिका के सफाई कर्मी कि आंदोलन रैली पुरानी नगर पालिका से डीसी ऑफिस होकर लेबर ऑफिस तक जाएगी
    user_Sirf such
    Sirf such
    Local News Reporter लोहरदगा, लोहरदगा, झारखंड•
    13 hrs ago
  • SIR के मुद्दे को लेकर 30 सितंबर को राजभवन के समक्ष होगा एक दिवसीय धरना प्रदर्शन। शुरू ऐप्प न्यूज़ संवाददाता। खूंटी।
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    SIR के मुद्दे को लेकर 30 सितंबर को राजभवन के समक्ष होगा एक दिवसीय धरना प्रदर्शन।
शुरू ऐप्प न्यूज़ संवाददाता।
खूंटी।
    user_Durga Baraik
    Durga Baraik
    Local News Reporter कर्रा, खूंटी, झारखंड•
    12 hrs ago
  • शुरू न्यूज इंपैक्ट :: ताले में बंद मरीजों की सुविधा, खबर के बाद खुले शौचालय इंटरनेट मीडिया में खबर चलने के बाद सदर अस्पताल की उपाधीक्षक ने लिया संज्ञान रूपेश कुमार लातेहार : शुरू न्यूज में 28 सितंबर को ‘ताले में बंद मरीजों की सुविधा, पांच नए शौचालय बने शोपीस' के शीर्षक से खबर चलने के बाद सदर अस्पताल प्रबंधन ने मामले को संज्ञान में लिया। मंगलवार को अस्पताल की उपाधीक्षक डॉ. अंजना रजनी खुसार ने तत्काल संवेदक को शौचालय का ताला खुलवाने का निर्देश दिया। इसके बाद शौचालय की साफ-सफाई कराकर उसे मरीजों और उनके परिजनों की सुविधा के लिए खोल दिया गया। अस्पताल परिसर में नए शौचालयों के बंद रहने से मरीजों को हो रही परेशानी को शुरू न्यूज ने प्रमुखता से उठाया था। खबर चलने के बाद अस्पताल प्रबंधन की ओर से त्वरित कार्रवाई की गई। इससे मरीजों और उनके स्वजनों को राहत मिली है।
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    शुरू न्यूज इंपैक्ट :: ताले में बंद मरीजों की सुविधा, खबर के बाद खुले शौचालय
इंटरनेट मीडिया में खबर चलने  के बाद सदर अस्पताल की उपाधीक्षक ने लिया संज्ञान रूपेश कुमार लातेहार : शुरू न्यूज में 28 सितंबर को ‘ताले में बंद मरीजों की सुविधा, पांच नए शौचालय बने शोपीस' के शीर्षक से खबर चलने के बाद सदर अस्पताल प्रबंधन ने मामले को संज्ञान में लिया। मंगलवार को अस्पताल की उपाधीक्षक डॉ. अंजना रजनी खुसार ने तत्काल संवेदक को शौचालय का ताला खुलवाने का निर्देश दिया। इसके बाद शौचालय की साफ-सफाई कराकर उसे मरीजों और उनके परिजनों की सुविधा के लिए खोल दिया गया। अस्पताल परिसर में नए शौचालयों के बंद रहने से मरीजों को हो रही परेशानी को शुरू न्यूज ने प्रमुखता से उठाया था। खबर चलने के बाद अस्पताल प्रबंधन की ओर से त्वरित कार्रवाई की गई। इससे मरीजों और उनके स्वजनों को राहत मिली है।
    user_Dr.Rupesh Kumar
    Dr.Rupesh Kumar
    Local News Reporter लातेहार, लातेहार, झारखंड•
    1 hr ago
  • टाइगर जयराम महतो विधायकी तो आती-जाती रहती है? #shorts #shortvideo #youtubeshorts #viralvideo #news
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    टाइगर जयराम महतो विधायकी तो आती-जाती रहती है? #shorts #shortvideo #youtubeshorts #viralvideo #news
    user_AAM JANATA
    AAM JANATA
    लोहरदगा, लोहरदगा, झारखंड•
    8 hrs ago
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