बाढ़ में बच्चों की पढ़ाई का ‘नाव’ सहारा! जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंच रहे मासूम कटिहार से सामने आई ये तस्वीरें सिर्फ बाढ़ की कहानी नहीं बता रहीं… बल्कि ये सवाल भी खड़ा कर रही हैं कि आखिर बाढ़ के पानी के बीच बच्चों की पढ़ाई और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? कटिहार के बरारी प्रखंड में प्रतापगंज बांध किनारे स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय इन दिनों चारों तरफ से बरनडी नदी के पानी से घिरा हुआ है। सड़कें डूबी हुई हैं… रास्ते पानी में समा गए हैं… और स्कूल जाने के लिए बच्चों के पास अब सिर्फ एक ही रास्ता बचा है—नाव का। हर दिन छात्र-छात्राएं नाव पर सवार होकर स्कूल पहुंचते हैं। पानी के बीच छोटी सी नाव में सफर… और हर पल हादसे का डर। सबसे बड़ी चिंता इसलिए भी है क्योंकि बाढ़ के पानी में नाव से बच्चों का यह सफर पूरी तरह जोखिम से भरा हुआ है। विद्यालय के शिक्षक अब्दुल बारिक के मुताबिक, सरकारी स्तर पर यहां नाव की व्यवस्था नहीं की गई है। स्कूल आने-जाने के लिए निजी नाव का सहारा लिया जा रहा है, जिसके लिए प्रतिदिन 500 रुपये का भुगतान किया जाता है। वहीं नाविक आवेद अली का कहना है कि वह रोजाना करीब 150 से 200 बच्चों को नाव के जरिए स्कूल पहुंचाते और वापस लाते हैं। लेकिन सवाल सिर्फ स्कूल पहुंचने का नहीं… सवाल है इन बच्चों की सुरक्षा का। अभिभावक भी अपने बच्चों को नाव पर स्कूल भेजने को लेकर डरे हुए हैं। उनका कहना है कि हाल ही में डूबने की घटना में एक बच्चे की मौत भी हो चुकी है। ऐसे में उनकी मांग है कि यहां स्थायी पुल का निर्माण कराया जाए, ताकि बच्चों को हर दिन जान जोखिम में डालकर नाव से स्कूल जाने की मजबूरी खत्म हो। ग्रामीणों का कहना है कि पुल बनने से सिर्फ स्कूली बच्चों को ही नहीं, बल्कि पूरे इलाके के लोगों को बाढ़ के दिनों में बड़ी राहत मिलेगी। बाढ़ के बीच पढ़ाई जारी रखने की बच्चों की यह तस्वीर व्यवस्था से एक सीधा सवाल पूछ रही है—क्या इन मासूमों को स्कूल पहुंचने के लिए हर दिन नाव का सहारा लेना ही पड़ेगा? अब नजर प्रशासन और सरकार पर है कि इन बच्चों की सुरक्षित आवाजाही के लिए कब ठोस कदम उठाया जाता है।
बाढ़ में बच्चों की पढ़ाई का ‘नाव’ सहारा! जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंच रहे मासूम कटिहार से सामने आई ये तस्वीरें सिर्फ बाढ़ की कहानी नहीं बता रहीं… बल्कि ये सवाल भी खड़ा कर रही हैं कि आखिर बाढ़ के पानी के बीच बच्चों की पढ़ाई और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? कटिहार के बरारी प्रखंड में प्रतापगंज बांध किनारे स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय इन दिनों चारों तरफ से बरनडी नदी के पानी से घिरा हुआ है। सड़कें डूबी हुई हैं… रास्ते पानी में समा गए हैं… और स्कूल जाने के लिए बच्चों के पास अब सिर्फ एक ही रास्ता बचा है—नाव का। हर दिन छात्र-छात्राएं नाव पर सवार होकर स्कूल पहुंचते हैं। पानी के बीच छोटी सी नाव में सफर… और हर पल हादसे का डर। सबसे बड़ी चिंता इसलिए भी है क्योंकि बाढ़ के पानी में नाव से बच्चों का यह सफर पूरी तरह जोखिम से भरा हुआ है। विद्यालय के शिक्षक अब्दुल बारिक के मुताबिक, सरकारी स्तर पर यहां नाव की व्यवस्था नहीं की गई है। स्कूल आने-जाने के लिए निजी नाव का सहारा लिया जा रहा है, जिसके लिए प्रतिदिन 500 रुपये का भुगतान किया जाता है। वहीं नाविक आवेद अली का कहना है कि वह रोजाना करीब 150 से 200 बच्चों को नाव के जरिए स्कूल पहुंचाते और वापस लाते हैं। लेकिन सवाल सिर्फ स्कूल पहुंचने का नहीं… सवाल है इन बच्चों की सुरक्षा का। अभिभावक भी अपने बच्चों को नाव पर स्कूल भेजने को लेकर डरे हुए हैं। उनका कहना है कि हाल ही में डूबने की घटना में एक बच्चे की मौत भी हो चुकी है। ऐसे में उनकी मांग है कि यहां स्थायी पुल का निर्माण कराया जाए, ताकि बच्चों को हर दिन जान जोखिम में डालकर नाव से स्कूल जाने की मजबूरी खत्म हो। ग्रामीणों का कहना है कि पुल बनने से सिर्फ स्कूली बच्चों को ही नहीं, बल्कि पूरे इलाके के लोगों को बाढ़ के दिनों में बड़ी राहत मिलेगी। बाढ़ के बीच पढ़ाई जारी रखने की बच्चों की यह तस्वीर व्यवस्था से एक सीधा सवाल पूछ रही है—क्या इन मासूमों को स्कूल पहुंचने के लिए हर दिन नाव का सहारा लेना ही पड़ेगा? अब नजर प्रशासन और सरकार पर है कि इन बच्चों की सुरक्षित आवाजाही के लिए कब ठोस कदम उठाया जाता है।
- purnea_GMCH में खुलेआम गुंडागर्दी सुरक्षा गार्ड देखता रहा बचाने की कोशिश तक नहीं किया1
- बाढ़ में बच्चों की पढ़ाई का ‘नाव’ सहारा! जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंच रहे मासूम कटिहार से सामने आई ये तस्वीरें सिर्फ बाढ़ की कहानी नहीं बता रहीं… बल्कि ये सवाल भी खड़ा कर रही हैं कि आखिर बाढ़ के पानी के बीच बच्चों की पढ़ाई और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? कटिहार के बरारी प्रखंड में प्रतापगंज बांध किनारे स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय इन दिनों चारों तरफ से बरनडी नदी के पानी से घिरा हुआ है। सड़कें डूबी हुई हैं… रास्ते पानी में समा गए हैं… और स्कूल जाने के लिए बच्चों के पास अब सिर्फ एक ही रास्ता बचा है—नाव का। हर दिन छात्र-छात्राएं नाव पर सवार होकर स्कूल पहुंचते हैं। पानी के बीच छोटी सी नाव में सफर… और हर पल हादसे का डर। सबसे बड़ी चिंता इसलिए भी है क्योंकि बाढ़ के पानी में नाव से बच्चों का यह सफर पूरी तरह जोखिम से भरा हुआ है। विद्यालय के शिक्षक अब्दुल बारिक के मुताबिक, सरकारी स्तर पर यहां नाव की व्यवस्था नहीं की गई है। स्कूल आने-जाने के लिए निजी नाव का सहारा लिया जा रहा है, जिसके लिए प्रतिदिन 500 रुपये का भुगतान किया जाता है। वहीं नाविक आवेद अली का कहना है कि वह रोजाना करीब 150 से 200 बच्चों को नाव के जरिए स्कूल पहुंचाते और वापस लाते हैं। लेकिन सवाल सिर्फ स्कूल पहुंचने का नहीं… सवाल है इन बच्चों की सुरक्षा का। अभिभावक भी अपने बच्चों को नाव पर स्कूल भेजने को लेकर डरे हुए हैं। उनका कहना है कि हाल ही में डूबने की घटना में एक बच्चे की मौत भी हो चुकी है। ऐसे में उनकी मांग है कि यहां स्थायी पुल का निर्माण कराया जाए, ताकि बच्चों को हर दिन जान जोखिम में डालकर नाव से स्कूल जाने की मजबूरी खत्म हो। ग्रामीणों का कहना है कि पुल बनने से सिर्फ स्कूली बच्चों को ही नहीं, बल्कि पूरे इलाके के लोगों को बाढ़ के दिनों में बड़ी राहत मिलेगी। बाढ़ के बीच पढ़ाई जारी रखने की बच्चों की यह तस्वीर व्यवस्था से एक सीधा सवाल पूछ रही है—क्या इन मासूमों को स्कूल पहुंचने के लिए हर दिन नाव का सहारा लेना ही पड़ेगा? अब नजर प्रशासन और सरकार पर है कि इन बच्चों की सुरक्षित आवाजाही के लिए कब ठोस कदम उठाया जाता है।1
- प्राणपुर प्रखंड क्षेत्र के एनएच 31 से खुशहालपुर भालगोर रामचंद्रपुर होते हुए केवाला गांव को जोड़ने वाली मुख्य सड़क मार्ग जर्जर कटिहार जिले के प्राणपुर प्रखंड क्षेत्र में एनएच-31 से खुशहालपुर, भालगोर, रामचंद्रपुर होते हुए केवाला गांव को जोड़ने वाली मुख्य सड़क इन दिनों जर्जर हालत में पहुंच गई है। सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिसमें बारिश का पानी जमा हो जाने से राहगीरों को आवागमन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार सड़क की स्थिति लंबे समय से खराब है। बारिश के बाद गड्ढों में पानी भर जाने से सड़क पर आवागमन और भी जोखिमपूर्ण हो गया है। पैदल चलने वालों के साथ-साथ बाइक और अन्य छोटे वाहनों के चालकों को भी काफी परेशानी हो रही है। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग के अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों से सड़क की जल्द मरम्मत कराने तथा जलजमाव की समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की है।1
- पूर्णिया मेडिकल कॉलेज के छात्रों द्वारा गुंडागर्दी खबर संकलन करने गए पत्रकार के साथ मारपीट 72 घंटे में कार्रवाई नहीं हुई तो प्रिंसिपल दे इस्तीफा #Purnea #bihar #biharmews #abn24purena #viralpost1
- इस ट्रैफिक पुलिसकर्मी की जितनी तारीफ़ की जाए कम है. ye इस ट्रैफिक पुलिसकर्मी की जितनी तारीफ़ की जाए कम है. ये जलभराव गुड़गांव की सड़कों पर हुआ है. जहां पानी निकालने के लिए ये पुलिसकर्मी सारे जुगाड़ लगा रहा है.1
- आप सभी शिक्षक को TEACHER DAY की ढेर सारी शुभकामनाएं मैं उम्मीद करता हूं आप जितने भी गुरु हैं आप अपने सभी छात्र छात्राएं के लिए एक बेहतर भविष्य की हमेशा चिंता करते हैं आप सभी शिक्षक को TEACHER DAY की ढेर सारी शुभकामनाएं मैं उम्मीद करता हूं आप जितने भी गुरु हैं आप अपने सभी छात्र छात्राएं के लिए एक बेहतर भविष्य की हमेशा चिंता करते हैं1
- 06 September 2026 | Bihar ki 30 badi khabren | Today Hindi News | Bihar News | Today Breaking.. 06 September 2026 | Bihar ki 30 badi khabren | Today Hindi News | Bihar News | Today Breaking.. बिहार के 30 सबसे बड़ी खबरें. #CFN #BreakingNews #HeadlinesToday1
- बताया जा रहा है कि इस इमारत में ज्यादातर दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र रहते थे. इमारत के नीचे कई छात्रों के दबे होने की आशंका है.1