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होली पर्व को लेकर एक दूसरे को रंग लगाने की परंपराओं को लेकर होली का पर्व धूमधाम से मना रहे हैं होली पर्व को लेकर एक दूसरे को रंग लगाने की परंपराओं को लेकर ग्रामीण होली का पर्व धूमधाम से मना रहे हैं
मारवाड़ गोडवाड न्यूज़
होली पर्व को लेकर एक दूसरे को रंग लगाने की परंपराओं को लेकर होली का पर्व धूमधाम से मना रहे हैं होली पर्व को लेकर एक दूसरे को रंग लगाने की परंपराओं को लेकर ग्रामीण होली का पर्व धूमधाम से मना रहे हैं
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- होली पर्व को लेकर एक दूसरे को रंग लगाने की परंपराओं को लेकर ग्रामीण होली का पर्व धूमधाम से मना रहे हैं1
- रानी तहसील क्षेत्र के गुडा मेगसिह में होलिका दहन का समाजिक रिती रिवाज व पुजा पाठ कर के मनाया गया जिसमें ग्राम वासियों ने नन्ने नन्ने दुले को होलिका की परिक्रमा कर खुशी से झूम कर होलिका दहन कीया1
- . राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने सुमेरपूर के भेरू चौक स्थित अपने निजी आवास पर कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगो के साथ होली खेली1
- पीछे आ रहे वाहन बाल-बाल बचे, चालक सुरक्षित सरूपगंज थाना क्षेत्र के नई धनारी के पास नेशनल हाईवे पर एक बड़ा हादसा टल गया। एक कंटेनर अचानक अनियंत्रित हो गया और सड़क किनारे लगी रेलिंग तोड़ते हुए सर्विस रोड के पास स्थित खड्डे में जा गिरा। घटना के समय पीछे आ रहे वाहन चालकों ने सतर्कता दिखाते हुए अपने वाहन नियंत्रित कर लिए, जिससे बड़ा हादसा होने से बच गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कंटेनर तेज गति में था और अचानक चालक का संतुलन बिगड़ गया। कंटेनर रेलिंग तोड़ता हुआ नीचे जा गिरा। गनीमत रही कि इस दौरान कोई अन्य वाहन इसकी चपेट में नहीं आया। सूचना मिलते ही सरूपगंज थाना पुलिस मौके पर पहुंची और यातायात व्यवस्था संभाली। हादसे में कंटेनर चालक सुरक्षित बताया जा रहा है।1
- मंगलवार को जालौर में रंगोली शहर वासियों ने उत्साह के साथ खेली एक दूसरे को गुलाल लगाकर होली पर्व की हार्दिक बधाइयां व शुभकामनाएं दी युवाओं की टोली ने फाग गीतों का गायन कर शहर की विभिन्न कॉलोनी में घरों में जाकर ढूंढो उत्सव के फाग गीतों का गायन किया,2
- Post by District.reporter.babulaljogaw1
- चंद्रग्रहण के चलते आज नहीं निकली 'गांवशाही गैर पाली,मनीष राठौड़ | शहर में मंगलवार को होली का त्यौहार पारंपरिक हर्षोल्लास और उमंग के साथ मनाया गया। रंगों के इस उत्सव पर इस बार चंद्र ग्रहण का मिला-जुला असर देखने को मिला। ज्योतिषीय गणनाओं के चलते शहर में परंपराओं के दो अलग रंग नजर आए; कुछ समाजों ने आज ही बच्चों की 'ढूंढ' की रस्म निभाई, तो कई परिवारों में अब बुधवार को ढूंढोत्सव का भव्य आयोजन होगा। *भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के निवास पर उमड़ा कार्यकर्ताओं का सैलाब* मंगलवार सुबह से ही भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के पाली स्थित निवास पर होली की भारी रौनक देखी गई। इस दौरान जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं का सैलाब उमड़ा। होली स्नेह मिलन के इस मौके पर पूर्व यूआईटी चेयरमैन संजय ओझा, भाजपा जिलाध्यक्ष सुनील भंडारी, युवा नेता नरेश ओझा, महेंद्र बोहरा, सोजत नगरपालिका के पूर्व सभापति जुगलकिशोर निकुम, उप सरपंच नेमसिंह रावलवास, समाजसेवी सूरजपाल सिंह रावलवास, रणजीत सिंह, पार्षद राकेश पंवार, जीतू भाई मंडली, जगदीश सिंह पुनायता, कांग्रेस नेता यशपालसिंह कुंपावत सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर पर्व की बधाई दी। *चंद्रग्रहण के चलते आज नहीं निकली 'गांवशाही गैर'* पाली में कई सालों से आयोजित की जा रही ऐतिहासिक गांवशाही गैर की परंपरा पर इस बार ग्रहण का असर रहा। चंद्रग्रहण के कारण मंदिर से गैर का झंडा नहीं निकल सका, जिसके चलते आज गांवशाही गैर नहीं निकाली गई। पुष्करणा समाज ने बैठक के बाद यह बड़ा निर्णय लिया। अब यह गैर कल बुधवार को आयोजित की जाएगी। परंपरा के अनुसार, पुष्करणा समाज जोधपुरिया बारी तक गैर का झंडा लेकर पहुंचता है, जहां से गैर की शुरुआत होती है। इस आयोजन को लेकर प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त रहते हैं। *डीजे की धुन पर झूमे युवा, रंगों से सराबोर हुए चौक-चौराहे* शहर के सर्राफा बाजार और सूरजपोल से सोमनाथ मंदिर मार्ग पर युवाओं का जोश चरम पर रहा। डीजे पर बज रहे फाग और हिंदी गीतों पर युवा जमकर थिरके और पूरा चौक अबीर-गुलाल से लाल नजर आया। यहाँ चौराहे पर रंग से भरा पारंपरिक कढ़ाव रखा गया, जो आकर्षण का केंद्र रहा। पुराना बस स्टैंड स्थित बालियों के बास में मोहल्लेवासियों ने एकजुट होकर होली मनाई और सामूहिक नाश्ते का आनंद लिया।1
- खुडालाः होली दहन के दूसरे दिन सुबह से ही खुडाला गांव में बच्चों को होली स्थल पर ले जाकर फेरे लगाने की परंपरा निभाई जा रही है। ग्रामीण अपने नन्हे बच्चों को सजाकर होली स्थल पर पहुंच रहे हैं। नदी किनारे स्थित होली दहन स्थल पर महिलाएं मंगल गीत गाते हुए बच्चों को लेकर पहुंच रही हैं। यहां बालक और होली की पूजा-अर्चना की जाती है। इसके बाद, बड़े युवक बच्चों को होली के चारों ओर सात फेरे लगवाते हैं। यह सदियों पुरानी परंपरा दोष निवारण के लिए निभाई जाती है। फेरे पूरे होने के बाद ग्रामीण टोल के साथ अपने घरों को लौट जाते हैं।1